
अध्याय 14
सम्पत्ति को अभिरक्षा और निस्तारण
165. निम्नलिखित नियम उस जंगम सम्पत्ति के निपटारे को शासित करते हैं जिसका पुलिस द्वारा आधिपत्य लिया जाता है :-
(1) सम्पत्ति की संक्षिप्त सूची जनरल डायरी में बनाई जावेगी।
ऐसी सम्पत्ति से सम्बन्धित हर प्रविष्टि का एक संक्षेप थाने में तैयार किया जावेगा और सम्बन्धित मजिस्ट्रेट को अग्रेषित कर दिया जावेगा।
(2) पुलिस एक्ट (1861 का पाँचवाँ) की धारा 25 कब्जे में ले ली गई या दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धाराएँ 83, 84, 85, 422 या 457 के अधीन कुर्क की गई, रोकी गई या विनिग्रहण की गयी, जीवधन के अतिरिक्त बड़े आकार की सम्पत्ति साधारणतया मजिस्ट्रेट के आदेश लम्बित होने तक किसी भूधारी या अन्य सम्मानीय व्यक्ति के प्रभार में जो उसको अभिरक्षा में लेने और न्यायालय द्वारा अपेक्षा किये जाने पर सम्पत्ति को प्रस्तुत करने का उत्तरदायित्व लेने को सहमत हो, उसी स्थान पर, जहाँ पर पाई गयी थी, छोड़ दी जावेगी।
(3) (क) : न्यायालय के आदेश के लम्बित रहने तक, जीवन साधारणतया कांजी हाउस के रखवाले को सौंप दिये जावेंगे और जब तक पशु उसके प्रभार में हों उनके स्वामित्व का दावा करने बाला या उसकी ओर से किसी अन्य व्यक्ति को उन्हें दाना डालने और पानी देने का प्रबन्ध करने की अनुज्ञा दी जा सकती है।
(ख) कांजी हाउस के रखवाले को पशुओं को सौंपने के बजाय थाने के भारसाधक अधिकारी यदि वह ऐसा करना ठीक समझे, एक या अधिक चरवाहों को देखभाल के लिये नियुक्त कर सकता है, किसी व्यक्ति द्वारा उसे किये गये आवेदन-पत्र पर, यदि ऐसा सुरक्षित रूप से किया जा सकता हो, ऐसे व्यक्ति को अपेक्षित किये जाने पर प्रस्तुत करने के लिए प्रतिभूति सहित या रहित बन्धफ निष्पादन करने पर सौंप सकता है।
(ग) जीवधन की अभिरक्षा, चराई और परिवहन का व्यय प्रायः सभी मामलों में, यदि पशु बेचे जावें तो उनकी बिक्री से और यदि न्यायालय के आदेश से किसी अन्य व्यक्ति को सौंपे जावें तो उस व्यक्ति से वसूली योग्य होगा और न्यायालय द्वारा पारित किसी आदेश के अध्याधीन रहते हुये वह इस प्रकार वसूल किया जाना चाहिये।
(घ) यदि जीवधन बेचे जावें, उस थाने का भारसाधक अधिकारी जहाँ वे अभिग्रहीत किये गये हों और उस न्यायालय से जिसने बिक्री का आदेश दिया हो, सम्बद्ध पुलिस मोहर्रिर बिक्री संचालित करने वाले अधिकारी के ध्यान में उन पर व्यय की गई धनराशि को लाने के लिए उत्तरदायी होने ताकि हिसाब का समायोजन हाँ सके। यदि व्यय बिक्री से प्राप्त धन से अधिक हो तो अन्तर अधीक्षा के ठेका अनुदान से भुगताया जावे।
(ङ) यदि न्यायालय द्वारा जीवधन को किसी अन्य व्यक्ति को दिये जाने का आदेश प्रदान किय जावे, न्यायालय से सम्बद्ध पुलिस मोहर्रिर को चाहिये कि वह न्यायालय से व्यय के भुगतान के लिये आदेश प्राप्त करे। यदि न्यायालय उस व्यक्ति द्वारा व्यय का भुगतान किये जाने का आदेश पारित को जिसे पशु दिये गये हों, वे उसे तब तक नहीं दिये जाने चाहिये जब तक वह भुगतान न कर दें। यार वह भुगतान करने में विफल रहे तो न्यायालय से आदेश परित करने के लिये कहा जाये।
(च) यदि न्यायालय व्यय को सरकार द्वारा भुगताए जाने का आदेश दे, भुगतान अधीक्षक के ठेका अनुदान से किया जावेगा।
(4) यदि पुलिस बिना इच्छा पत्र के भरने वाले किसी व्यक्ति की सम्पत्ति पर कब्जा करे, दो प्रतियों में ऐसी सभी सम्पत्ति की पूर्ण और सही सूची, पड़ोस के दो प्रतिष्ठित साक्षियों की उपस्थिति में उनके द्वारा हस्ताक्षरित कराई जाकर तैयार की जावेगी। निम्न मदों में आने वाली कोई सम्पत्ति मुख्यालय को अग्रेषित न की जावे, और आगरा प्रान्त में जिला मजिस्ट्रेट की मार्फत न्यायालय के न्यायाधीश और अवध प्राप्त में जिला मजिस्ट्रेट से हर विशेष मामले में मन्जूरी प्राप्त कर लेने के बाद धानेदार द्वारा स्थल पर ही नीलाम द्वारा बेच दी जानी चाहिये।
(क) द्रुतगामी और प्राकृतिक रूप से नाशवान सम्पत्ति।
(ख) प्रत्येक आठ आने से कम के मूल्य की वस्तुयें
(ग) वह सम्पत्ति जिसके रखने और न्यायालय तक ले जाने का व्यय उसके मूल्य से अधिक हो जायेगा।
(घ) वह सम्पत्ति जो पूर्वगामी शीर्षो में सम्मिलित नहीं हुई हो, किन्तु जिसका मूल्य 5 रुपये से कम न हो।
(5) मुख्यालय को अग्रेषित की जाने वाली सम्पत्ति सीधे लोक अभियोजक को भेजी जानी चाहिये, जिस पर चिह्न और लेबिल (जीवधन के अतिरिक्त) लगे हों और उसके साथ तीन प्रतियों में पूर्ण और ठीक-ठीक विवरण रहना चाहिए। लेबिल को यह दर्शाना चाहिए कि वह वस्तु किससे ली गई थी या कहाँ मिली थी और उसकी तारीख। यदि सम्पत्ति विवरण के अनुरूप हा, लोक अभियोजक कागज को मजिस्ट्रेट के पास भेजने के पहले मालखाना मोहर्रिर से निम्न प्रविष्टियाँ करवायेगा-
(1) अपने मालखाने के बेदावी और मामलों की सम्पत्ति के रजिस्टर में बेदावी सम्पत्ति और उस सम्पत्ति को जो दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 45 के अधीन अभिग्रहीत की गई है।
(2) मालखाने की अवरुद्ध सम्पत्ति के रजिस्टर में शस्त्र और दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 170 के अधीन भेजी गई वस्तुओं और समपहरण तथा अधिहरण के दायित्वाधीन जंगम सम्पत्ति।
(3) मालखाने के प्रकीर्ण सम्पत्ति के रजिस्टर में अभियुक्तों या दोषसिद्ध व्यक्ति के होने वाली जंगम सम्पत्ति या उस सम्पत्ति की संहिता की धारा 83, 84, 85 के अधीन कुर्क की गई हो या जुर्माने, शास्ति या फीस के भुगतान में विफल रहने पर रोक ली गई हो।
(4) उसके लावारिस सम्पत्ति के रजिस्टर में लावारिस सम्पत्ति। वह तब थाने से प्राप्त हुए विवरण की तीसरी प्रति पर वह उसकी प्राप्ति और मालखाना रजिस्टर का क्रमांक पृष्ठांकित करेगा और उसे थाने से सम्पत्ति लाने वाले अधिकारी को लौटा देगा। इस सूची की मूल प्रति सम्बन्धित न्यायालय द्वारा अन्य संगत कागजों के साथ रखी जावेगी। मालखाने की जांच करने वाले अधिकारी को मालखाने के भारसाधका अधिकारी द्वारा रखी गई सूची को निर्देशित करना चाहिए :
टीप- वह सम्पत्ति जिसे तत्पश्चात् पहचनवाया जाना हो, अन्वेषणकर्ता अधिकारी द्वारा तलाशी के साक्षियों की उपस्थिति में मुहरबन्द की जायेगी, जिन्हें उनके समक्ष मोहरबन्द करने के अभिप्रमाणन के स्वरूप वस्तु को अन्तर्विष्ट करने वाले आवरण पर हस्ताक्षर या अंगूठा चिह्न अंकित करना चाहिए। मोहर सम्पत्ति के अभिज्ञान (शिनाख्त) की संचालित करने वाले मजिस्ट्रेट द्वारा हो वेड़ी जाये। यदि ऐसी सम्पत्ति लोक अभियोजक को भेजी जावे, उसे अपने रजिस्टर में मोहर के यथावत् पाये जाने की प्रविष्टि करना चाहिये और जब तक अभिज्ञान की कार्यवाही समाप्त न हो जावे उसे मोहर नहीं तोड़ना चाहिये और न रजिस्टर में विवरण प्रविष्ट करना चाहिए।
(6) जब सम्पत्ति सोना, चाँदी, रत्नाभूषण या अन्य कीमती चीजों के रूप में हो, उसकी तौल करने के पश्चात्, एक मोहरबन्द लिफाफे में उसे भेजा जावेगा और उसका वजन सामान्य डायरी और लिफाफे में संलग्न सूची में अंकित किया जावे। मापों और नापों का एक समूह प्रत्येक थाने पर रखा जाना चाहिए।
(7) मालखाना मुहर्रिर, जो 15 वर्ष से कम न होने वाले सेवा काल का अधिकारी होगा, मालखाने में उसके द्वारा प्राप्त की गई सम्पत्ति की प्राप्ति के स्वरूप में हस्ताक्षर करेगा।
166. जब तक कि मजिस्ट्रेट अन्यथा निर्देशित न करे, किसी भी प्रकार की सम्पत्ति, 100 रु० से अधिक की नकदी राशि के सिवाय, और समान मूल्य की सम्पत्ति और महत्व के मामलों से सम्बन्धित सम्पत्ति, जो लोक अभियोजक द्वारा खजाने में ताले चाबी के अधीन पृथक सन्दूक में रखी जावेगी, लोक अभियोजक के सामान्य नियन्त्रण और उत्तरदायित्व के अधीन, मालखाना माहर्रिर की अभिरक्षा में तब तक रहेगी, जब तक कि अन्तिम रूप से उसका निपटारा न हो जावे।
167. मालखाना, मोहर्रिर का यह कर्तव्य होगा कि वह दिन के दौरान अपेक्षित सम्पत्ति न्यायालय से संलग्न पुलिस को सीप दे और वापस प्राप्त करे। वह यह देखने के लिये दायित्वाधीर होगों कि ऐसी सम्पत्ति पूर्णरूपेण वापस प्राप्त हुई है।
168. लोक अभियोजक उत्तररदायी होगा कि सम्पत्ति के निपटारे से सम्बन्धित न्यायालय के आदेशों का उचित रूप से पालन किया गया है, और जब यह समाधान हो जावे कि ऐसा किया जा चुका है, मालखाना रजिस्टर पर इस आशय का प्रमाण-पत्र देगा। ऐसा प्रमाण-पत्र देने के पहले लोक अभियोजक (क) निपटारे के लिए थाने को वापस की गई सभ्पत्ति की दशा में प्राप्ति के हस्ताक्षरों के अभिप्रमाणित करते हुए थाने के अधिकारी की रिपोर्ट का परीक्षण करेगा, (ख) न्यायालय के किसी पक्षकार को सौंपी गयी सम्पत्ति की दशा में, सम्पत्ति की सूची पर मजिस्ट्रेट के प्रमाण-पत्र को देखेग (ग) खजीने में निक्षेप के लिए भेजी गई सम्पत्ति की दशा में, सम्बन्धित न्यायालय को भेजने से पहले खजाना अधिकारी की रसीद देखेगा और (घ) मजिस्ट्रेट के समक्ष नष्ट किए जाने के लिए आदेशित सम्पत्ति की दशा में, सम्पत्ति की सूची पर, ऐसा किया जा चुकना प्रमाणित करने वाले, मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर देखेगा।
168-ए. पुलिस द्वारा बरामद किये अवैध आग्नेयास्त्र और शस्त्र जी अदालत के निर्णय के बाद नष्ट किए जाने हैं, वे एक समिति (कमेटी) के सदस्यों के मौजूदगी में, जिनमें निम्न सदस्य होंगे, नष्ट किये जाने चाहिये-
(अ) जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नामित एक कार्यपालक मजिस्ट्रेट।
(ब) पुलिस अधीक्षक द्वारा नामित एक पुलिस अधिकारी जो अधीक्षक के पद से कम न हो।
(स) जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नामित एक सम्मानित व्यक्ति जो राजसेवक न हो।
169. उन सभी मामलों में, जिनमें बेदावी सम्पत्ति छः मास से अधिक के लिये मालखाने में रखी जावे, उन सभी मामलों में जिनमें नश्वर सम्पत्ति आदेश होने में विलम्ब के कारण खराब हो रही हो और उन सभी मामलों में जिनमें प्रत्यक्षतः बच सकने योग्य देर हो रही हो, लोक अभियोजक का यह कर्तव्य होगा कि वह सम्बन्धित मजिस्ट्रेट के ध्यान में लाये।
170. लोक अभियोजक मालखाने का माहवारी निरीक्षण करेगा। राजपत्रित अधिकारी त्रैमासिक रूप से इसका निरीक्षण करेगा और इसके लिये रखे गये रजिस्टरों की जांच-पड़ताल और उन पर हस्ताक्षर करेगा।
171. किसी मजिस्ट्रेट के न्यायालय से संलग्न कोई पुलिस अधिकारी, जो शिविर में हो या जिला मुख्यालय से अन्यत्र स्थित हो, लोक अभियोजक के मामले के लिए अभिकथित नियमों को, जहाँ तक ऐसे नियम लागू किये जा सकें, अनुपालन करेगा। वह पैरा 36 में विहित रीति से आयुधों, गोला, बारूदों और सैनिक भण्डारों वाले के रजिस्टरों को बनाये रखेगा। ये रजिस्टर नियत कालिक रूप से दौरे के समय मन्डल निरीक्षक और राजपत्रित अधिकारी द्वारा जाँचे जावेंगे और मुख्यालय पर लोक अभियोजक द्वारा जांच-पड़ताल के लिए भेजे या लाये जा सकेंगे।
सम्पत्ति की अभिरक्षा और निपटारे से सम्बन्धित अतिरिक्त आदेशों के लिए, गवर्नमेंट आर्डर की पुस्तक को देखिये।
172. आगरा प्रान्त में लावारिस मरे व्यक्तियों की व्यक्तिगत सम्पत्ति, सन् 1861 के अधिनियम क्रमांक पांच की धारा 25 के अधीन दाबी सम्पत्ति की तरह व्यवहृत नहीं की जावेगी, परन्तु गवर्नमेन्ट आर्डर की पुस्तक के अधीन व्यवहृत की जानी चाहिए। दोनों स्थितियों में इस प्रक्रम तक जहाँ तक लोक अभियोजक सम्पत्ति को प्राप्त व पंजीयित करता है और जिला मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट करता है, समान प्रक्रिया होती है। इसके बाद आगरा प्रान्त में, लोक अभियोजक अपने स्वयं की रिपोर्ट की और जिला मजिस्ट्रेट के आदेश की प्रति जिला मजिस्ट्रेट के मार्फत जिला न्यायाधीश को आदेश के लिये अग्रेषित करेगा। लावारिस सम्पत्ति के रख-रखाव और जिला मजिस्ट्रेट के न्यायालय को भेजने में किये गये सभी व्यय उस न्यायालय के द्वारा वसूल योग्य होंगे।
173. आयुध अधिनियम (1878 का ग्यारहवां) की धारा 16 के अधीन थाने पर गोला-बारूद या सैनिक भण्डार निश्क्षेपित किये जावें थाने का भारसाधक अधिकारी प्रत्येक हथियार या वस्तु पर, निक्षेपकर्ता का नाम, निक्षेप का दिनांक और निश्क्षेपित हथियार या वस्तु का विवरण दर्शति हुये एक टिकट चिपकावेगा। वह अपने द्वारा हस्ताक्षरित इस टिकट की एक प्रति भी, प्राप्ति के रूप में, निक्षेपकर्ता का सौंपेगा और सूचित करेगा कि वस्तु की सुरक्षित अभिरक्षा के लिए ही सरकार उत्तरदायी होगी न कि उसके जंग लगने या क्षय होने से बचाव के लिए।
पन्द्रह दिन कि समाप्ति पर, यदि स्वानी को उसे उनको धारण करने के लिए प्राधिकृत करने बाली अनुज्ञप्ति प्राप्त न हुई हो, तो आयुध, गोला-बारूद और सैनिक भन्डारों को जिला मुख्यालय को अग्रेषित किया जायेगा और वहां जिला मजिस्ट्रेट के मालखाने में या जिला मजिस्ट्रेट के विवेक पर अधीक्षक के मालखाने में रखे जायेंगे। यदि वे जिला मजिस्ट्रेट के मालखाने में निक्षेपित किये जावें, नाजिर उनको अभिरक्षा के लिए उत्तरदायी होगा, यदि अधीक्षक के मालखाने में रखे जावें तो लोक अभियोजक उत्तरदायी होगा।
अतिरिक्त निर्देश आयुध नियम 1962 में पाये जायेंगे।