धारा 197 से 209 अध्याय 14 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

धारा 197 से 209 अध्याय 14 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

अध्याय 14

जांचों और विचारणों में दंड न्यायालयों की अधिकारिता

197. जांच और विचारण का मामूली स्थान

प्रत्येक अपराध की जांच और विचारण मामूली तौर पर ऐसे न्यायालय द्वारा किया जाएगा जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर वह अपराध किया गया है

198. जांच या  विचारण का स्थान

क. जहां यह अनिश्चित है कि कई स्थानीय क्षेत्रों में से किसमें अपराध किया गया है; या

ख. जहां अपराध अंशतः एक स्थानीय क्षेत्र में और अंशतः किसी दूसरे में किया गया है ; या

ग. जहां अपराध चालू रहने वाला है और उसका किया जाना एक से अधिक स्थानीय क्षेत्रों में चालू रहता है; या

घ. जहां वह विभिन्न स्थानीय क्षेत्रों में किए गए कई कार्यों से मिलकर बनता है, वहां उसकी जांच या विचारण ऐसे स्थानीय क्षेत्रों में से किसी पर अधिकारिता रखने वाले न्यायालय द्वारा किया जा सकता है

199. अपराध वहां विचारणीय होगा जहां कार्य किया गया या जहां परिणाम निकला

जब कोई कार्य किसी की गई बात के और किसी निकले हुए परिणाम के कारण अपराध है तब ऐसे अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर ऐसी बात की गई या ऐसा परिणाम निकला

200.  जहां कार्य अन्य अपराध से संबंधित होने के कारण अपराध है। वहां विचारण का स्थान

जब कोई कार्य किसी ऐसे अन्य कार्य से संबंधित होने के कारण अपराध है, जो स्वयं भी अपराध है या अपराध होता यदि कर्ता अपराध करने के लिए समर्थ होता, तब प्रथम वर्णित अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है। जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर उन दोनों में से कोई भी कार्य किया गया है

201.  कुछ अपराधों की दशा में विचारण का स्थान

1डकैती के, हत्या सहित डकैती के, डकैतों की टोली का होने के, या अभिरक्षा से निकल भागने के किसी अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर अपराध किया गया है या अभियुक्त व्यक्ति मिला है

2. किसी व्यक्ति के व्यपहरण या अपहरण के किसी अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर वह व्यक्ति व्यपहृत या अपहृत किया गया या ले जाया गया या छिपाया गया या निरुद्ध किया गया है

3. चोरी, उद्यापन या लूट के किसी अपराध की जांच या विचारण, ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर ऐसा अपराध किया गया है या चुराई हुई संपत्ति को, जो कि अपराध का विषय है, उसे करने वाले व्यक्ति द्वारा या किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा कब्जे में रखी गई है, जिसने उस संपत्ति को चुराई हुई संपत्ति जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए प्राप्त किया या रखे रखा

4. आपराधिक दुर्विनियोग या आपराधिक न्यास भंग के किसी अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर अपराध किया गया है या उस संपत्ति का, जो अपराध का विषय है, कोई भाग अभियुक्त व्यक्ति द्वारा प्राप्त किया गया या रखा गया है या उसका लौटाया जाना या लेखा दिया जाना अपेक्षित है

5. किसी ऐसे अपराध की, जिसमें चुराई हुई संपत्ति का कब्जा भी है, जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर ऐसा अपराध किया गया है या चुराई हुई संपत्ति किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा कब्जे में रखी गई है, जिसने उसे चुराई हुई जानते हुए या विश्वास करने का कारण होते हुए प्राप्त किया या रखे रखा

202 इलैक्ट्रानिक संसूचना के  साधनों, पत्रों, आदि द्वारा किए गए  अपराध

1. किसी ऐसे अपराध की, जिसमें छल करना भी है, जांच या उनका विचारण, उस दशा में, जिसमें ऐसी प्रवंचना, इलैक्ट्रानिक संसूचना या पत्रों या दूरसंचार संदेशों के माध्यम से की गई है, ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर ऐसी इलैक्ट्रानिक संसूचना ऐसे पत्र या संदेश भेजे गए हैं या प्राप्त किए गए हैं तथा छल करने और बेईमानी से संपत्ति का परिदान उत्प्रेरित करने वाले किसी अपराध की जांच या उनका विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर संपत्ति, प्रवंचित व्यक्ति द्वारा परिदत्त की गई है या अभियुक्त व्यक्ति द्वारा प्राप्त की गई है

2. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 82 के अधीन दंडनीय किसी अपराध की जांच या उनका विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर अपराध किया गया है या अपराधी ने प्रथम विवाह की अपनी पत्नी या पति के साथ अंतिम बार निवास किया है या प्रथम विवाह की पत्नी अपराध के किए जाने के पश्चात् स्थायी रूप से निवास करती है

203. यात्रा या जलयात्रा में  किया गया अपराध

यदि कोई अपराध उस समय किया गया है जब वह व्यक्ति, जिसके द्वारा, या वह व्यक्ति जिसके विरुद्ध, या वह चीज जिसके बारे में वह अपराध किया गया, किसी यात्रा या जलयात्रा पर है, तो उसकी जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है, जिसकी स्थानीय अधिकारिता में होकर या उसके भीतर वह व्यक्ति या चीज उस यात्रा या जलयात्रा के दौरान गई है

204.एक साथ विचारणीय अपराधों के लिए विचारण का स्थान

जहां,

क. किसी व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध ऐसे हैं कि प्रत्येक ऐसे अपराध के लिए धारा 242, धारा 243 या धारा 244 के उपबंधों के आधार पर एक ही विचारण में उस पर आरोप लगाया जा सकता है और उसका विचारण किया जा सकता है; या

ख. कई व्यक्तियों द्वारा किया गया अपराध या किए गए अपराध ऐसे हैं कि उनके लिए उन पर धारा 246 के उपबंधों के आधार पर एक साथ आरोप लगाया जा सकता है और विचारण किया जा सकता हैवहां अपराध की जांच या विचारण ऐसे न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जो उन अपराधों में से किसी की जांच या विचारण करने के लिए सक्षम है

205. विभिन्न सेशन खंडों में मामलों के विचारण का आदेश देने की शक्ति

इस अध्याय के पूर्ववर्ती उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, राज्य सरकार निदेश दे सकती है कि ऐसे किन्हीं मामलों का या किसी वर्ग के मामलों का विचारण, जो किसी जिले में विचारणार्थ सुपुर्द हो चुके हैं, किसी भी सेशन खंड में किया जा सकता है :

परंतु यह तब जब कि ऐसा निदेश उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय द्वारा संविधान के अधीन या इस संहिता के या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन पहले ही जारी किए गए किसी निदेश के विरुद्ध नहीं है

206. संदेह की दशा में उच्च न्यायालय का वह जिला विनिश्चित करना, जिसमें जांच या विचारण होगा

जहां दो या अधिक न्यायालय एक ही अपराध का संज्ञान कर लेते हैं और यह प्रश्न उठता है कि उनमें से किसे उस अपराध की जांच या विचारण करना चाहिए, वहां वह प्रश्न-

क. यदि वे न्यायालय एक ही उच्च न्यायालय के अधीनस्थ हैं तो उस उच्च न्यायालय द्वारा

ख. यदि वे न्यायालय एक ही उच्च न्यायालय के अधीनस्थ नहीं हैं, तो उस उच्च न्यायालय द्वारा जिसकी अपीली दांडिक अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के अंदर कार्यवाही पहले प्रारंभ की गई हैविनिश्चित किया जाएगा, और तब उस अपराध के संबंध में अन्य सब कार्यवाहियां बंद कर दी जाएंगी

207. स्थानीय अधिकारिता के परे किए गए अपराध के लिए समन या वारंट जारी करने की शक्ति

1. जब किसी प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट को यह विश्वास करने का कारण दिखाई देता है कि उसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर के किसी व्यक्ति ने ऐसी अधिकारिता के बाहर, (चाहे भारत के भीतर या बाहर ) ऐसा अपराध किया है, जिसकी जांच या विचारण धारा 197 से धारा 205 (जिनके अंतर्गत ये दोनों धाराएं भी हैं), के उपबंधों के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन ऐसी अधिकारिता के भीतर नहीं किया जा सकता है किंतु जो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन भारत में विचारणीय है तब ऐसा मजिस्ट्रेट उस अपराध की जांच ऐसे कर सकता है, मानो वह ऐसी स्थानीय अधिकारिता के भीतर किया गया है और ऐसे व्यक्ति को अपने समक्ष हाजिर होने के लिए इसमें इसके पूर्व उपबंधित प्रकार से विवश कर सकता है और ऐसे व्यक्ति को ऐसे अपराध की जांच या विचारण करने की अधिकारिता वाले मजिस्ट्रेट के पास भेज सकता है या यदि ऐसा अपराध मृत्यु से या आजीवन कारावास से दंडनीय नहीं है और ऐसा व्यक्ति इस धारा के अधीन कार्रवाई करने वाले मजिस्ट्रेट को समाधानप्रद रूप में जमानत देने के लिए तैयार और इच्छुक है तो ऐसी अधिकारिता वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष उसकी हाजिरी के लिए बंधपत्र या जमानतपत्र ले सकता है

2. जब ऐसी अधिकारिता वाले मजिस्ट्रेट एक से अधिक हैं और इस धारा के अधीन कार्य करने वाला मजिस्ट्रेट अपना समाधान नहीं कर पाता है कि किस मजिस्ट्रेट के पास या समक्ष ऐसा व्यक्ति भेजा जाए या हाजिर होने के लिए आबद्ध किया जाए, तो मामले की रिपोर्ट उच्च न्यायालय के आदेश के लिए की जाएगी

208.भारत से बाहर किया गया अपराध

जब कोई अपराध भारत से बाहर-

क. भारत के किसी नागरिक द्वारा चाहे खुले समुद्र पर या अन्यत्र या

ख. किसी व्यक्ति द्वारा, जो भारत का नागरिक नहीं है, भारत में रजिस्ट्रीकृत किसी पोत या विमान पर, किया जाता है, तब उस अपराध के बारे में उसके विरुद्ध ऐसी कार्यवाही की जा सकती है मानो वह अपराध भारत के भीतर उस स्थान में किया गया है, जहां वह पाया गया है या जहां अपराध भारत में रजिस्ट्रीकृत है :

परंतु इस अध्याय की पूर्ववर्ती धाराओं में से किसी बात के होते हुए भी, ऐसे किसी अपराध की भारत में जांच या उसका विचारण केंद्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना नहीं किया जाएगा

209. भारत से बाहर किए गए अपराधों के बारे मैं साक्ष्य लेना

जब किसी ऐसे अपराध की, जिसका भारत से बाहर किसी क्षेत्र में किया जाना अभिकथित है, जांच या विचारण धारा 208 के उपबंधों के अधीन किया जा रहा है तब, यदि केंद्रीय सरकार उचित समझे तो यह निदेश दे सकती है कि उस क्षेत्र में या उस क्षेत्र के लिए या तो वास्तविक प्ररूप में या इलैक्ट्रानिक प्ररूप में न्यायिक अधिकारी के समक्ष या उस क्षेत्र में या उस क्षेत्र के लिए भारत के राजनयिक या कौंसलीय प्रतिनिधि के समक्ष दिए गए अभिसाक्ष्यों की या पेश किए गए प्रदर्शों की प्रतियों को ऐसी जांच या विचारण करने वाले न्यायालय द्वारा किसी ऐसे मामले में साक्ष्य के रूप में लिया जाएगा जिसमें ऐसा न्यायालय ऐसी किन्हीं बातों के बारे में, जिनसे ऐसे अभिसाक्ष्य या प्रदर्श संबंधित हैं साक्ष्य लेने के लिए कमीशन जारी कर सकता है

 

 

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