
1. कोई पुलिस अधिकारी, मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना और वारंट के बिना किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा-
क. जो पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में संज्ञेय अपराध करता है ; या
ख. जिसके विरुद्ध इस बारे में उचित परिवाद किया जा चुका है या विश्वसनीय सूचना प्राप्त हो चुकी है या उचित संदेह विद्यमान है कि उसने कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से कम की हो सकेगी या जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, चाहे वह जुर्माने सहित हो या जुर्माने के बिना, दंडनीय संज्ञेय अपराध किया है, यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी कर दी जाती हैं, अर्थात् :-
i. पुलिस अधिकारी के पास ऐसे परिवाद, सूचना या संदेह के आधार पर यह विश्वास करने का कारण है कि उस व्यक्ति ने उक्त अपराध किया है ;
ii. पुलिस अधिकारी का यह समाधान हो गया है कि ऐसी गिरफ्तारी निम्नलिखित के लिए आवश्यक है-
क. ऐसे व्यक्ति को कोई और अपराध करने से रोकने के लिए ; या
ख. अपराध के समुचित अन्वेषण के लिए; या
ग. ऐसे व्यक्ति को ऐसे अपराध के साक्ष्य को गायब करने या ऐसे साक्ष्य के साथ किसी भी रीति में छेड़छाड़ करने से रोकने के लिए ; या
घ. उस व्यक्ति को, किसी ऐसे व्यक्ति को, जो मामले के तथ्यों से परिचित है, उत्प्रेरित करने, उसे धमकी देने या उससे वायदा करने से जिससे उसे न्यायालय या पुलिस अधिकारी को ऐसे तथ्यों को प्रकट न करने के लिए मनाया जा सके, रोकने के लिए; या
ङ. जब तक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता है, न्यायालय में उसकी उपस्थिति, जब भी अपेक्षित हो, सुनिश्चित नहीं की जा सकती, और पुलिस अधिकारी ऐसे गिरफ्तारी करते समय अपने कारणों को लेखबद्ध करेगा:
परंतु कोई पुलिस अधिकारी, ऐसे सभी मामलों में, जहां किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी इस उपधारा के उपबंधों के अधीन अपेक्षित नहीं है, गिरफ्तारी न करने के कारणों को लेखबद्ध करेगा ; या
च. जिसके विरुद्ध विश्वसनीय सूचना प्राप्त हो चुकी है कि उसने कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से अधिक की हो सकेगी, चाहे वह जुर्माने सहित हो या जुर्माने के बिना, या मृत्यु दंडादेश से दंडनीय संज्ञेय अपराध किया है और पुलिस अधिकारी के पास उस सूचना के आधार पर यह विश्वास करने का कारण है कि उस व्यक्ति ने उक्त अपराध किया है; या
छ. जो या तो इस संहिता के अधीन या राज्य सरकार के आदेश द्वारा अपराधी उद्घोषित किया जा चुका है ; या
ज. जिसके कब्जे में कोई ऐसी चीज पाई जाती है जिसके चुराई हुई संपत्ति होने का उचित रूप से संदेह किया जा सकता है और जिस पर ऐसी चीज के बारे में अपराध करने का उचित रूप से संदेह किया जा सकता है ; या
झ. जो पुलिस अधिकारी को उस समय बाधा पहुंचाता है जब वह अपन कर्तव्य कर रहा है, या जो विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागा है या निकल भागने का प्रयत्न करता है; या
ञ. जिस पर संघ के सशस्त्र बलों में से किसी से अभित्याजक होने का उचित संदेह है; या"
ट. जो भारत से बाहर किसी स्थान में किसी ऐसे कार्य किए जाने से, जो यदि भारत में किया गया होता तो अपराध के रूप में दंडनीय होता, और जिसके लिए वह प्रत्यर्पण संबंधी किसी विधि के अधीन या अन्यथा भारत में पकड़े जाने का या अभिरक्षा में निरुद्ध किए जाने का भागी है, संबद्ध रह चुका है या जिसके विरुद्ध इस बारे में उचित परिवाद किया जा चुका है या विश्वसनीय सूचना प्राप्त हो चुकी है या उचित संदेह विद्यमान है कि वह ऐसे संबद्ध रह चुका है; या
ठ. जो छोड़ा गया सिद्धदोष होते हुए धारा 394 की उपधारा (5) के अधीन बनाए गए किसी नियम को भंग करता है; या
ड. जिसकी गिरफ्तारी के लिए किसी अन्य पुलिस अधिकारी से लिखित या मौखिक अध्यपेक्षा प्राप्त हो चुकी है, परंतु यह तब जब अध्यपेक्षा में उस व्यक्ति का, जिसे गिरफ्तार किया जाना है, और उस अपराध का या अन्य कारण का, जिसके लिए गिरफ्तारी की जानी है, विनिर्देश है और उससे यह दर्शित होता है कि अध्यपेक्षा जारी करने वाले अधिकारी द्वारा वारंट के बिना वह व्यक्ति विधिपूर्वक गिरफ्तार किया जा सकता था ।
2. धारा 39 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, ऐसे किसी व्यक्ति को, जो किसी असंज्ञेय अपराध से संबद्ध है या जिसके विरुद्ध कोई परिवाद किया जा चुका है या विश्वसनीय सूचना प्राप्त हो चुकी है या उचित संदेह विद्यमान है कि वह ऐसे संबद्ध रह चुका है, मजिस्ट्रेट के वारंट या आदेश के सिवाय, गिरफ्तार नहीं किया जाएगा ।
3. पुलिस अधिकारी, ऐसे सभी मामलों में जिनमें उपधारा (1) के अधीन किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी अपेक्षित नहीं है उस व्यक्ति को जिसके विरुद्ध इस बारे में उचित परिवाद किया जा चुका है या विश्वसनीय सूचना प्राप्त हो चुकी है या उचित संदेह विद्यमान है कि उसने संज्ञेय अपराध किया है, उसके समक्ष या ऐसे अन्य स्थान पर, जो सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए उपसंजात होने के लिए निदेश देते हुए सूचना जारी करेगा ।
4. जहां ऐसी सूचना किसी व्यक्ति को जारी की जाती है, वहां उस व्यक्ति का यह कर्तव्य होगा कि वह सूचना के निबंधनों का अनुपालन करे ।
5. जहां ऐसा व्यक्ति सूचना का अनुपालन करता है और अनुपालन करता रहता है वहां उसे सूचना में निर्दिष्ट अपराध के संबंध में तब तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा जब तक लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से पुलिस अधिकारी की यह राय न हो कि उसे गिरफ्तार कर लेना चाहिए ।
6. जहां ऐसा व्यक्ति, किसी भी समय सूचना के निबंधनों का अनुपालन करने में असफल रहता है या अपनी पहचान कराने का अनिच्छुक है वहां पुलिस अधिकारी, ऐसे आदेशों के अधीन रहते हुए, जो इस निमित्त किसी सक्षम न्यायालय द्वारा पारित किए गए हों, सूचना में वर्णित अपराध के लिए उसे गिरफ्तार कर सकेगा ।
7. कोई भी गिरफ्तारी ऐसे अपराध के मामले में जो तीन वर्ष से कम के कारावास से दंडनीय है और ऐसा व्यक्ति जो गंभीर बीमारी से पीड़ित है या साठ वर्ष से अधिक की उम्र का है, ऐसे अधिकारी, जो पुलिस उपनिरीक्षक से नीचे की पंक्ति का न हो, की पूर्व अनुमति के बिना नहीं की जाएगी ।
प्रत्येक पुलिस अधिकारी, गिरफ्तारी करते समय,
क. अपने नाम की सही, दृश्यमान और स्पष्ट पहचान धारण करेगा, जिससे उसकी आसानी से पहचान हो सके;
ख. गिरफ्तारी का एक ज्ञापन तैयार करेगा, जो-
i. कम से कम एक साक्षी द्वारा अनुप्रमाणित किया जाएगा, जो गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के कुटुंब का सदस्य है या उस परिक्षेत्र का, जहां गिरफ्तारी की गई है, प्रतिष्ठित सदस्य है;
ii. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित किया जाएगा; और
ग. जब तक उसके कुटुंब के किसी सदस्य द्वारा ज्ञापन को अनुप्रमाणित न कर दिया गया हो, गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को यह सूचना देगा कि उसे यह अधिकार है कि उसके किसी नातेदार या मित्र को, जिसका वह नाम दे, उसकी गिरफ्तारी की सूचना दी जाए ।
राज्य सरकार,:-
क. प्रत्येक जिला तथा राज्य स्तर पर एक पुलिस नियंत्रण कक्ष की स्थापना करेगी :
ख. प्रत्येक जिले और प्रत्येक थाना में एक पुलिस अधिकारी पदाभिहित करेगी, जो सहायक पुलिस उपनिरीक्षक की पंक्ति से नीचे का नहीं होगा, वह गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों का नाम और पता के बारे में जानकरी रखने के लिए उत्तरदायी होगा, अपराध की प्रकृति, जिसके साथ वह आरोपित किया गया है, प्रत्येक थाना और जिला मुख्यालय पर प्रमुख रूप से जिसके अन्तर्गत डिजिटल मोड भी है, प्रदर्शित किया जाएगा
जब किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है और पुलिस द्वारा पूछताछ की जाती है, तब गिरफ्तार व्यक्ति पूछताछ के दौरान अपनी पसंद के अधिवक्ता से मिलने का हकदार होगा किंतु संपूर्ण पूछताछ के दौरान नहीं ।
1. जब कोई व्यक्ति जिसने पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में असंज्ञेय अपराध किया है या जिस पर पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में असंज्ञेय अपराध करने का अभियोग लगाया गया है, उस अधिकारी की मांग पर अपना नाम और निवास बताने से इंकार करता है या ऐसा नाम या निवास बताता है, जिसके बारे में उस अधिकारी को यह विश्वास करने का कारण है कि वह मिथ्या है, तब वह ऐसे अधिकारी द्वारा इसलिए गिरफ्तार किया जा सकता है कि उसका नाम और निवास अभिनिश्चित किया जा सके ।
2. जब ऐसे व्यक्ति का सही नाम और निवास अभिनिश्चित कर लिया जाता है, तब वह इस बंधपत्र या जमानतपत्र पर छोड़ दिया जाएगा कि यदि उससे मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर होने की अपेक्षा की गई तो वह उसके समक्ष हाजिर होगा :
परंतु यदि ऐसा व्यक्ति भारत में निवासी नहीं है तो वह जमानतपत्र भारत में निवासी प्रतिभू या प्रतिभुओं द्वारा प्रतिभूत किया जाएगा ।
3. यदि गिरफ्तारी के समय से चौबीस घंटों के अंदर ऐसे व्यक्ति का सही नाम और निवास अभिनिश्चित नहीं किया जा सकता है या वह बंधपत्र या जमानतपत्र निष्पादित करने में या अपेक्षित किए जाने पर पर्याप्त प्रतिभू देने में असफल रहता है तो वह अधिकारिता रखने वाले निकटतम मजिस्ट्रेट के पास तत्काल भेज दिया जाएगा ।
1. कोई प्राइवेट व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति को जो उसकी उपस्थिति में अजमानतीय और संज्ञेय अपराध करता है, या किसी उद्घोषित अपराधी को गिरफ्तार कर सकता है या गिरफ्तार करवा सकता है और ऐसे गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को अनावश्यक विलंब के बिना, छह घंटे के भीतर, पुलिस अधिकारी के हवाले कर देगा या हवाले करवा देगा या पुलिस अधिकारी की अनुपस्थिति में ऐसे व्यक्ति को अभिरक्षा में निकटतम पुलिस थाने ले जाएगा या भिजवाएगा ।
2. यदि यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसा व्यक्ति धारा 35 की उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन आता है तो पुलिस अधिकारी उसे अभिरक्षा में लेगा ।
3. यदि यह विश्वास करने का कारण है कि उसने असंज्ञेय अपराध किया है और वह पुलिस अधिकारी की मांग पर अपना नाम और निवास बताने से इंकार करता है, या ऐसा नाम या निवास बताता है, जिसके बारे में ऐसे अधिकारी को यह विश्वास करने का कारण है कि वह मिथ्या है, तो उसके विषय में धारा 39 के उपबंधों के अधीन कार्यवाही की जाएगी ; किंतु यदि यह विश्वास करने का कोई पर्याप्त कारण नहीं है कि उसने कोई अपराध किया है तो वह तुरंत छोड़ दिया जाएगा ।
1. जब कार्यपालक या न्यायिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में उसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर कोई अपराध किया जाता है तब वह अपराधी को स्वयं गिरफ्तार कर सकता है या गिरफ्तार करने के लिए किसी व्यक्ति को आदेश दे सकता है और तब जमानत के बारे में इसमें अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए, अपराधी को अभिरक्षा के लिए सुपुर्द कर सकता है
2. कोई कार्यपालक या न्यायिक मजिस्ट्रेट किसी भी समय अपनी स्थानीय अधिकारिता के भीतर किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है, या अपनी उपस्थिति में उसकी गिरफ्तारी का निदेश दे सकता है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए वह उस समय और उन परिस्थितियों में वारंट जारी करने के लिए सक्षम है ।
1. धारा 35 और धारा 39 से धारा 41 तक की धाराओं में (दोनों सहित ) किसी बात के होते हुए भी, संघ के सशस्त्र बलों का कोई भी सदस्य अपने पदीय कर्तव्यों का निर्वहन करने में अपने द्वारा की गई या की जाने के लिए तात्पर्यित किसी बात के लिए तब तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, जब तक केंद्रीय सरकार की सहमति नहीं ले ली जाती ।
2. राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा निदेश दे सकती है कि उसमें यथाविनिर्दिष्ट बल के ऐसे वर्ग या प्रवर्ग के सदस्यों को, जिन्हें लोक व्यवस्था बनाए रखने का कार्यभार सौंपा गया है, जहां कहीं वे सेवा कर रहे हों, उपधारा (1) के उपबंध लागू होंगे और तब उस उपधारा के उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानो उसमें आने वाले "केंद्रीय सरकार" पद के स्थान पर " राज्य सरकार" पद रख दिया गया हो ।
1. गिरफ्तारी करने में पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति, जो गिरफ्तारी कर रहा है, गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति के शरीर को वस्तुतः छुएगा या परिरुद्ध करेगा, जब तक उसने वचन या कर्म द्वारा अपने को अभिरक्षा में समर्पित न कर दिया हो ।
परंतु जहां किसी महिला को गिरफ्तार किया जाना है वहां जब तक कि परिस्थितियों से इसके विपरीत उपदर्शित न हो, गिरफ्तारी की मौखिक इत्तिला पर अभिरक्षा में उसके समर्पण कर देने की उपधारणा की जाएगी और जब तक कि परिस्थितियों में अन्यथा अपेक्षित न हो या जब तक पुलिस अधिकारी महिला न हो, तब तक पुलिस अधिकारी महिला को गिरफ्तार करने के लिए उसके शरीर को नहीं छुएगा ।
2. यदि ऐसा व्यक्ति अपने गिरफ्तार किए जाने के प्रयास का बलात् प्रतिरोध करता है या गिरफ्तारी से बचने का प्रयत्न करता है तो ऐसा पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति गिरफ्तारी करने के लिए आवश्यक सब साधनों को उपयोग में ला सकता है ।
3. पुलिस अधिकारी, अपराध की प्रकृति और गम्भीरता को ध्यान में रखते हुए, किसी ऐसे व्यक्ति की गिरफ्तारी करते समय या न्यायालय के समक्ष ऐसे व्यक्ति को पेश करते समय हथकड़ी का प्रयोग कर सकता है, जो अभ्यासिक या आदतन अपराधी है या अभिरक्षा से निकल भागा है, या जिसने संगठित अपराध, आतंकवादी कृत्य, औषध संबंधी अपराध, अस्त्र और शस्त्र पर अवैध कब्जे, हत्या, बलात्संग, अम्ल हमला, सिक्कों और करेंसी नोट का कूटकरण, मानव दुर्व्यापार, बच्चों के विरूद्ध लैंगिक अपराध या राज्य के विरुद्ध अपराध को कारित किया है।
4. इस धारा की कोई बात ऐसे व्यक्ति की, जिस पर मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध का अभियोग नहीं है, मृत्यु कारित करने का अधिकार नहीं देती है ।
5. असाधारण परिस्थितियों के सिवाय, कोई महिला सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं की जाएगी और जहां ऐसी असाधारण परिस्थितियां विद्यमान हैं, वहां महिला पुलिस अधिकारी, लिखित में रिपोर्ट करके, उस प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुज्ञा अभिप्राप्त करेगी, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर अपराध किया गया है या गिरफ्तारी की जानी है ।
1. यदि गिरफ्तारी के वारंट के अधीन कार्य करने वाले किसी व्यक्ति को, या गिरफ्तारी करने के लिए प्राधिकृत किसी पुलिस अधिकारी को, यह विश्वास करने का कारण है कि वह व्यक्ति जिसे गिरफ्तार किया जाना है, किसी स्थान में प्रविष्ट हुआ है, या उसके अंदर है तो ऐसे स्थान में निवास करने वाला, या उस स्थान का भारसाधक कोई भी व्यक्ति, पूर्वोक्त रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति द्वारा या ऐसे पुलिस अधिकारी द्वारा मांग की जाने पर उसमें उसे अबाध प्रवेश करने देगा और उसके अंदर तलाशी लेने के लिए सब उचित सुविधाएं देगा।
2. यदि ऐसे स्थान में प्रवेश उपधारा (1) के अधीन नहीं हो सकता तो किसी भी मामले में उस व्यक्ति के लिए, जो वारंट के अधीन कार्य कर रहा है, और किसी ऐसे मामले में, जिसमें वारंट निकाला जा सकता है किंतु गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति को भाग जाने का अवसर दिए बिना प्राप्त नहीं किया जा सकता, पुलिस अधिकारी के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह ऐसे स्थान में प्रवेश करे और वहां तलाशी ले और ऐसे स्थान में प्रवेश कर पाने के लिए किसी गृह या स्थान के, चाहे वह उस व्यक्ति का हो जिसे गिरफ्तार किया जाना है, या किसी अन्य व्यक्ति का हो, किसी बाहरी या भीतरी द्वार या खिड़की को तोड़कर खोल ले यदि अपने प्राधिकार और प्रयोजन की सूचना देने के तथा प्रवेश करने की सम्यक् रूप से मांग करने के पश्चात् वह अन्यथा प्रवेश प्राप्त नहीं कर सकता है :
परंतु यदि ऐसा कोई स्थान ऐसा कमरा है जो ( गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति से भिन्न) ऐसी महिला के वास्तविक अधिभोग में है जो रूढ़ि के अनुसार लोगों के सामने नहीं आती है तो ऐसा व्यक्ति या पुलिस अधिकारी उस कमरे में प्रवेश करने के पूर्व उस महिला को सूचना देगा कि वह वहां से हट जाने के लिए स्वतंत्र है और हट जाने के लिए उसे प्रत्येक उचित सुविधा देगा और तब कमरे को तोड़कर खोल सकता है और उसमें प्रवेश कर सकता है ।
3. कोई पुलिस अधिकारी या गिरफ्तार करने के लिए प्राधिकृत अन्य व्यक्ति किसी गृह या स्थान का कोई बाहरी या भीतरी द्वार या खिड़की अपने को या किसी अन्य व्यक्ति को जो गिरफ्तार करने के प्रयोजन से विधिपूर्वक प्रवेश करने के पश्चात् वहां निरुद्ध है, मुक्त करने के लिए तोड़कर खोल सकता है ।
पुलिस अधिकारी ऐसे किसी व्यक्ति को जिसे गिरफ्तार करने के लिए वह प्राधिकृत है, वारंट के बिना गिरफ्तार करने के प्रयोजन से भारत के किसी स्थान में उस व्यक्ति का पीछा कर सकता है ।
गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को उससे अधिक अवरुद्ध न किया जाएगा जितना उसको निकल भागने से रोकने के लिए आवश्यक है ।
1. किसी व्यक्ति को वारंट के बिना गिरफ्तार करने वाला प्रत्येक पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति उस व्यक्ति को उस अपराध की, जिसके लिए वह गिरफ्तार किया गया है, पूर्ण विशिष्टियां या ऐसी गिरफ्तारी के अन्य आधार तुरंत संसूचित करेगा।
2. जहां कोई पुलिस अधिकारी अजमानतीय अपराध के अभियुक्त व्यक्ति से भिन्न किसी व्यक्ति को वारंट के बिना गिरफ्तार करता है वहां वह गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को सूचना देगा कि वह जमानत पर छोड़े जाने का हकदार है और वह अपनी ओर से प्रतिभुओं का इंतजाम करे।
1. इस संहिता के अधीन कोई गिरफ्तारी करने वाला प्रत्येक पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति, ऐसी गिरफ्तारी और उस स्थान के बारे में, जहां गिरफ्तार किया गया व्यक्ति रखा जा रहा है, जानकारी, उसके मित्रों, नातेदारों या ऐसे अन्य व्यक्ति को जिसे गिरफ्तार किए गए व्यक्ति द्वारा ऐसी जानकारी देने के प्रयोजन के लिए प्रकट या नामनिर्दिष्ट किया जाए तथा जिले में पदाभिहित पुलिस अधिकारी को भी तुरंत देगा ।
2. पुलिस अधिकारी गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को, जैसे ही वह पुलिस थाने में लाया जाता है, उपधारा (1) के अधीन उसके अधिकारों के बारे में सूचित करेगा ।
3. इस तथ्य की प्रविष्टि कि ऐसे व्यक्ति की गिरफ्तारी की इत्तिला किसे दी गई है, पुलिस थाने में रखी जाने वाली पुस्तक में ऐसे प्ररूप में, जो राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त विहित किया जाए की जाएगी ।
4. उस मजिस्ट्रेट का, जिसके समक्ष ऐसे गिरफ्तार किया गया व्यक्ति, पेश किया जाता है, यह कर्तव्य होगा कि वह अपना समाधान करे कि उपधारा (2) और उपधारा (3) की अपेक्षाओं का ऐसे गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के संबंध में अनुपालन किया गया है ।
1. जब कभी, -
i. पुलिस अधिकारी द्वारा ऐसे वारंट के अधीन, जो जमानत लिए जाने का उपबंध नहीं करता है या ऐसे वारंट के अधीन, जो जमानत लिए जाने का उपबंध करता है किंतु गिरफ्तार किया गया व्यक्ति जमानत नहीं दे सकता है, कोई व्यक्ति गिरफ्तार किया जाता है तथा
ii. जब कभी कोई व्यक्ति वारंट के बिना या प्राइवेट व्यक्ति द्वारा वारंट के अधीन गिरफ्तार किया जाता है और वैध रूप से उसकी जमानत नहीं ली जा सकती है या वह जमानत देने में असमर्थ है, तब गिरफ्तारी करने वाला अधिकारी, या जब गिरफ्तारी प्राइवेट व्यक्ति द्वारा की जाती है। तब वह पुलिस अधिकारी, जिसे वह व्यक्ति गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को सौंपता है, उस व्यक्ति की तलाशी ले सकता है और पहनने के आवश्यक वस्त्रों को छोड़कर उसके पास पाई गई सब वस्तुओं को सुरक्षित अभिरक्षा में रख सकता है और जहां गिरफ्तार किए गए व्यक्ति से कोई वस्तु अभिगृहीत की जाती है वहां ऐसे व्यक्ति को एक रसीद दी जाएगी जिसमें पुलिस अधिकारी द्वारा कब्जे में की गई वस्तु दर्शित होंगी।
2. जब कभी किसी महिला की तलाशी करना आवश्यक हो तब ऐसी तलाशी शिष्टता का पूरा ध्यान रखते हुए अन्य महिला द्वारा की जाएगी ।
वह अधिकारी या अन्य व्यक्ति, जो इस संहिता के अधीन गिरफ्तारी करता है गिरफ्तार किए गए व्यक्ति से कोई आक्रामक आयुध, जो उसके शरीर पर हों, ले सकता है और ऐसे लिए गए सब आयुध उस न्यायालय या अधिकारी को परिदत्त करेगा, जिसके समक्ष वह अधिकारी या गिरफ्तार करने वाला व्यक्ति गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को पेश करने के लिए इस संहिता द्वारा अपेक्षित है ।
1. जब कोई व्यक्ति ऐसा अपराध करने के आरोप में गिरफ्तार किया जाता है जो ऐसी प्रकृति का है और जिसका ऐसी परिस्थितियों में किया जाना अभिकथित है कि यह विश्वास करने के उचित आधार हैं कि उसकी शारीरिक परीक्षा ऐसा अपराध किए जाने के बारे में साक्ष्य प्रदान करेगी, तो ऐसे पुलिस अधिकारी की, जो उप निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो, प्रार्थना पर कार्य करने में रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी के लिए और सद्भावपूर्वक उसकी सहायता करने में और उसके निदेशाधीन कार्य करने में किसी व्यक्ति के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की ऐसी परीक्षा करे जो उन तथ्यों को, जो ऐसा साक्ष्य प्रदान कर सकें, अभिनिश्चित करने के लिए उचित रूप से आवश्यक है और उतना बल प्रयोग करे जितना उस प्रयोजन के लिए उचित रूप से आवश्यक है ।
2. जब कभी इस धारा के अधीन किसी महिला की शारीरिक परीक्षा की जानी है तो ऐसी परीक्षा केवल किसी महिला द्वारा जो रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी है या उसके पर्यवेक्षण में की जाएगी ।
3. रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी देर किए बिना अन्वेषण अधिकारी को परीक्षा रिपोर्ट तुरंत भेजेगा ।
इस धारा में और धारा 52 तथा धारा 53 में-
क. परीक्षा' में खून, खून के धब्बों, सीमन, लैंगिक अपराधों की दशा में स्वाब, थूक और स्वेद, बाल के नमूनों और उंगली के नाखून की कतरनों की आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों के, जिनके अंतर्गत डी.एन.ए. प्रोफाइल करना भी है, प्रयोग द्वारा परीक्षा और ऐसे अन्य परीक्षण, जिन्हें रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा- व्यवसायी किसी विशिष्ट मामले में आवश्यक समझता है, सम्मिलित होंगे ;-
ख. “रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी" से वह चिकित्सा व्यवसायी अभिप्रेत है, जिसके पास राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019(2019 का 30) के अधीन मान्यताप्राप्त कोई चिकित्सीय अर्हता है और जिसका नाम राष्ट्रीय चिकित्सा रजिस्टर या राज्य चिकित्सा रजिस्टर में प्रविष्ट किया गया है ।
1. जब किसी व्यक्ति को बलात्संग या बलात्संग का प्रयत्न करने का अपराध करने के आरोप में गिरफ्तार किया जाता है और यह विश्वास करने के उचित आधार हैं कि उस व्यक्ति की परीक्षा से ऐसा अपराध करने के बारे में साक्ष्य प्राप्त होगा तो सरकार द्वारा या किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा चलाए जा रहे अस्पताल में नियोजित किसी रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी के लिए और उस स्थान से जहां अपराध किया गया है, सोलह किलोमीटर की परिधि के भीतर ऐसे चिकित्सा व्यवसायी की अनुपस्थिति में ऐसे पुलिस अधिकारी के निवेदन पर, जो उप निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो, किसी अन्य रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी के लिए, तथा सद्भावपूर्वक उसकी सहायता के लिए तथा उसके निदेश के अधीन कार्य कर रहे किसी व्यक्ति के लिए, ऐसे गिरफ्तार व्यक्ति की ऐसी परीक्षा करना और उस प्रयोजन के लिए उतनी शक्ति का प्रयोग करना जितनी युक्तियुक्त रूप से आवश्यक हो, विधिपूर्ण होगा ।
2. ऐसी परीक्षा करने वाला रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी ऐसे व्यक्ति की बिना किसी विलंब के परीक्षा करेगा और उसकी परीक्षा की एक रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसमें निम्नलिखित विशिष्टियां दी जाएंगी, अर्थात् :-
I. अभियुक्त और उस व्यक्ति का, जो उसे लाया है, नाम और पता ;
II. अभियुक्त की आयु ;
III. अभियुक्त के शरीर पर क्षति के निशान, यदि कोई हों ;
IV. डी.एन.ए. प्रोफाइल करने के लिए अभियुक्त के शरीर से ली गई सामग्री का वर्णन ; और
V. उचित ब्यौरे सहित अन्य तात्त्विक विशिष्टियां ।
3. रिपोर्ट में संक्षेप में वे कारण अधिकथित किए जाएंगे, जिनसे प्रत्येक निष्कर्ष निकाला गया है ।
4. परीक्षा प्रारंभ और समाप्ति करने का सही समय भी रिपोर्ट में अंकित किया जाएगा ।
5. रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी, बिना किसी विलंब के अन्वेषण अधिकारी को रिपोर्ट भेजेगा, जो उसे धारा 193 में निर्दिष्ट मजिस्ट्रेट को उस धारा की उपधारा (6) के खंड (क) में निर्दिष्ट दस्तावेजों के भागरूप में भेजेगा ।
1. जब कोई व्यक्ति गिरफ्तार किया जाता है, तब गिरफ्तार किए जाने के तुरंत पश्चात् उसकी केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार के सेवाधीन चिकित्सा अधिकारी द्वारा और जहां चिकित्सा अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं, वहां रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी द्वारा परीक्षा की जाएगी :
परंतु यदि चिकित्सा अधिकारी या रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी की यह राय है कि ऐसे व्यक्ति की एक और परीक्षा की जानी आवश्यक है, तो वह ऐसा कर सकेगा :
परंतु यह और कि जहां गिरफ्तार किया गया व्यक्ति महिला है, वहां उसके शरीर की परीक्षा केवल महिला चिकित्सा अधिकारी और जहां महिला चिकित्सा अधिकारी उपलब्ध नहीं है, वहां रजिस्ट्रीकृत महिला चिकित्सा व्यवसायी द्वारा या उसके पर्यवेक्षणाधीन की जाएगी ।
2. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की इस प्रकार परीक्षा करने वाला चिकित्सा अधिकारी या रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी ऐसी परीक्षा का अभिलेख तैयार करेगा जिसमें गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के शरीर पर किन्हीं क्षतियों या हिंसा के चिह्नों तथा अनुमानित समय का वर्णन करेगा जब ऐसी क्षति या चिह्न पहुंचाए गए होंगे ।
3. जहां उपधारा (1) के अधीन परीक्षा की जाती है वहां ऐसी परीक्षा की रिपोर्ट की एक प्रति, यथास्थिति, चिकित्सा अधिकारी या रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी द्वारा गिरफ्तार किए गए व्यक्ति या ऐसे गिरफ्तार किए गए व्यक्ति द्वारा नामनिर्दिष्ट व्यक्ति को दी जाएगी ।
जहां कोई व्यक्ति किसी अपराध को करने के आरोप पर गिरफ्तार किया जाता है और उसकी शिनाख्त किसी अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा ऐसे अपराधों के अन्वेषण के लिए आवश्यक समझी जाती है तो वहां वह न्यायालय, जिसकी अधिकारिता है, पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी के निवेदन पर, गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की, ऐसी रीति से जो न्यायालय ठीक समझता है, किसी अन्य व्यक्ति या किन्हीं अन्य व्यक्तियों द्वारा शिनाख्त कराने का आदेश दे सकेगा :
परंतु यदि गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की शनाख्त करने वाला व्यक्ति मानसिक या शारीरिक रूप से निःशक्त है, तो शनाख्त करने की ऐसी प्रक्रिया मजिस्ट्रेट के पर्यवेक्षण के अधीन होगी जो यह सुनिश्चित करने के लिए समुचित कदम उठाएगा कि उस व्यक्ति द्वारा गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की उन पद्धतियों का प्रयोग करते हुए शनाख्त की जाए, जो उस व्यक्ति के लिए सुविधापूर्ण हों और शनाख्त प्रक्रिया किसी श्रव्य-दृश्य इलैक्ट्रानिक साधनों द्वारा अभिलिखित की जाएगी ।
1. जब अध्याय 13 के अधीन अन्वेषण करता हुआ कोई पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी, या कोई पुलिस अधिकारी, अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी से किसी ऐसे व्यक्ति को जो वारंट के बिना विधिपूर्वक गिरफ्तार किया जा सकता है, वारंट के बिना (अपनी उपस्थिति में नहीं, अन्यथा) गिरफ्तार करने की अपेक्षा करता है, तब वह उस व्यक्ति का जिसे गिरफ्तार किया जाना है और उस अपराध का या अन्य कारण का, जिसके लिए गिरफ्तारी की जानी है, विनिर्देश करते हुए लिखित आदेश उस अधिकारी को परिदत्त करेगा जिससे यह अपेक्षा है कि वह गिरफ्तारी करे और इस प्रकार अपेक्षित अधिकारी उस व्यक्ति को, जिसे गिरफ्तार करना है, उस आदेश का सार गिरफ्तारी करने के पूर्व सूचित करेगा और यदि वह व्यक्ति अपेक्षा करे तो उसे वह आदेश दिखा देगा
2. उपधारा (1) की कोई बात किसी पुलिस अधिकारी की धारा 35 के अधीन किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की शक्ति पर प्रभाव नहीं डालेगी ।
अभियुक्त को अभिरक्षा में रखने वाले व्यक्ति का यह कर्तव्य होगा कि वह अभियुक्त के स्वास्थ्य और सुरक्षा की उचित देखभाल करे ।
वारंट के बिना गिरफ्तारी करने वाला पुलिस अधिकारी अनावश्यक विलंब के बिना और जमानत के संबंध में इसमें अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए, उस व्यक्ति को, जो गिरफ्तार किया गया है, उस मामले में अधिकारिता रखने वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष या किसी पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी के समक्ष ले जाएगा या भेजेगा ।
कोई पुलिस अधिकारी वारंट के बिना गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को उससे अधिक अवधि के लिए अभिरक्षा में निरुद्ध नहीं रखेगा जो उस मामले की सब परिस्थितियों में उचित है तथा ऐसी अवधि, मजिस्ट्रेट के धारा 187 के अधीन विशेष आदेश के अभाव में गिरफ्तारी के स्थान से मजिस्ट्रेट के न्यायालय तक यात्रा के लिए आवश्यक समय को छोड़कर, चौबीस घंटे से अधिक की नहीं होगी, चाहे उसकी अधिकारिता है या नहीं ।
पुलिस थानों के भारसाधक अधिकारी जिला मजिस्ट्रेट को या उसके ऐसा निदेश देने पर उपखंड मजिस्ट्रेट को अपने - अपने थानों की सीमाओं के अंदर वारंट के बिना गिरफ्तार किए गए सब व्यक्तियों के मामलों की रिपोर्ट करेंगे, चाहे उन व्यक्तियों की जमानत ले ली गई हो या नहीं ।
पुलिस अधिकारी द्वारा गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति का उन्मोचन उसी के बंधपत्र या जमानतपत्र पर या मजिस्ट्रेट के विशेष आदेश के अधीन ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।
1. यदि कोई व्यक्ति विधिपूर्ण अभिरक्षा में से निकल भागता है या छुड़ा लिया जाता है तो वह व्यक्ति, जिसकी अभिरक्षा से वह निकल भागा है, छुड़ाया गया है, उसका तुरंत पीछा कर सकता है और भारत के किसी स्थान में उसे गिरफ्तार कर सकता है ।
2. उपधारा (1) के अधीन गिरफ्तारियों को धारा 44 के उपबंध लागू होंगे भले ही ऐसी गिरफ्तारी करने वाला व्यक्ति वारंट के अधीन कार्य न कर रहा हो और गिरफ्तारी करने का प्राधिकार रखने वाला पुलिस अधिकारी न हो।
कोई गिरफ्तारी इस संहिता या गिरफ्तारी के लिए उपबंध करने वाली तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अनुसार ही की जाएगी ।