धारा 413 से 435 अध्याय 31 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

धारा 413 से 435 अध्याय 31 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

अध्याय 31

अपीलें

413. जब तक अन्यथा उपबंधित हो किसी अपील का होना

दंड न्यायालय के किसी निर्णय या आदेश से कोई अपील इस संहिता द्वारा या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा जैसा उपबंधित हो उसके सिवाय होगी :

परंतु पीड़ित को न्यायालय द्वारा किसी अभियुक्त को दोषमुक्त करने वाले किसी आदेश या कम अपराध के लिए दोषसिद्ध करने वाले या अपर्याप्त प्रतिकर अधिरोपित करने वाले आदेश के विरुद्ध अपील करने का अधिकार होगा और ऐसी अपील उस न्यायालय में होगी जिसमें ऐसे न्यायालय की दोषसिद्धि के आदेश के विरुद्ध मामूली तौर पर अपील होती है

414. परिशान्ति कायम रखने या सदाचार के लिए प्रतिभूति अपेक्षित करने वाले या प्रतिभू स्वीकार करने से इंकार करने वाले या अस्वीकार करने वाले आदेश से अपील

कोई व्यक्ति,

i. जिसे परिशान्ति कायम रखने या सदाचार के लिए प्रतिभूति देने के लिए धारा 136 के अधीन आदेश दिया गया है, या

ii. जो धारा 140 के अधीन प्रतिभू स्वीकार करने से इंकार करने या उसे अस्वीकार करने वाले किसी आदेश से व्यथित है, सेशन न्यायालय में ऐसे आदेश के विरुद्ध अपील कर सकता है :

परन्तु इस धारा की कोई बात उन व्यक्तियों को लागू नहीं होगी जिनके विरुद्ध कार्यवाही सेशन न्यायाधीश के समक्ष धारा 141 की उपधारा (2) या उपधारा (4) के उपबंधों के अनुसार रखी गई है।

415. दोषसिद्धि से अपील

1. कोई व्यक्ति जो उच्च न्यायालय द्वारा असाधारण आरंभिक दांडिक अधिकारिता के प्रयोग में किए गए विचारण में दोषसिद्ध किया गया है, उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकता है।

2. कोई व्यक्ति जो सेशन न्यायाधीश या अपर सेशन न्यायाधीश द्वारा किए गए विचारण में या किसी अन्य न्यायालय द्वारा किए गए विचारण में दोषसिद्ध किया गया है, जिसमें सात वर्ष से अधिक के कारावास का दंडादेश उसके विरुद्ध या उसी विचारण में दोषसिद्ध किए गए किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध दिया गया है उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है

3. उपधारा (2) में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय कोई व्यक्ति, —

क. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट या द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा किए गए विचारण में दोषसिद्ध किया गया है ; या

ख. जो धारा 364 के अधीन दंडादिष्ट किया गया है, या

ग. जिसके बारे में किसी मजिस्ट्रेट द्वारा धारा 401 के अधीन आदेश दिया गया है या दंडादेश पारित किया गया है, सेशन न्यायालय में अपील कर सकता है

4. जब कोई अपील, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64, धारा 65, धारा 66, धारा 67, धारा 68, धारा 70 या धारा 71 के अधीन पारित किसी कारावास के विरुद्ध फाइल की गई है, तो अपील फाइल करने की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर ऐसी अपील का निपटान किया जाएगा

416. कुछ मामलों में जब अभियुक्त दोषी होने का अभिवचन करे अपील होना

धारा 415 में किसी बात के होते हुए भी, जहां अभियुक्त व्यक्ति ने दोषी होने का अभिवचन किया है, और ऐसे अभिवचन पर वह दोषसिद्ध किया गया है वहां-

i. यदि दोषसिद्धि उच्च न्यायालय द्वारा की गई है, तो कोई अपील नहीं होगी , ; या

ii. यदि दोषसिद्धि सेशन न्यायालय या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट या द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा की गई है तो अपील, दंड के परिमाण या उसकी वैधता के बारे में ही हो सकेगी, अन्यथा नहीं

417. छोटे मामलों में अपील   होना

धारा 415 में किसी बात के होते हुए भी, दोषसिद्ध व्यक्ति द्वारा कोई अपील निम्नलिखित में से किसी मामले में होगी, अर्थात् :-

क. जहां उच्च न्यायालय केवल तीन मास से अनधिक की अवधि के कारावास का या एक हजार रुपए से अनधिक जुर्माने का या ऐसे कारावास और जुर्माने दोनों का, दंडादेश पारित करता है ;

ख. जहां सेशन न्यायालय केवल तीन मास से अनधिक की अवधि के कारावास का या दो सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का या ऐसे कारावास और जुर्माने दोनों का, दंडादेश पारित करता है ;

ग. जहां प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट केवल एक सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का दंडादेश पारित करता है; या

घ. जहां संक्षेपत: विचारित किसी मामले में, धारा 283 के अधीन कार्य करने के लिए सशक्त मजिस्ट्रेट केवल दो सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का दंडादेश पारित करता है :

परन्तु यदि ऐसे किसी दंडादेश के साथ कोई अन्य दंड मिला दिया गया है तो ऐसे किसी दंडादेश के विरुद्ध अपील की जा सकती है किन्तु वह केवल इस आधार पर अपीलनीय हो जाएगा कि-

i. दोषसिद्ध व्यक्ति को परिशान्ति कायम रखने के लिए प्रतिभूति देने का आदेश दिया गया है; या

ii. जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास के निदेश को दंडादेश में सम्मिलित किया गया है; या

iii. उस मामले में जुर्माने का एक से अधिक दंडादेश पारित किया गया है, यदि अधिरोपित जुर्माने की कुल रकम उस मामले की बाबत इसमें इसके पूर्व विनिर्दिष्ट रकम से अधिक नहीं है

418. राज्य सरकार द्वारा दंडादेश के विरुद्ध अपील

1. उपधारा (2) में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, राज्य सरकार, उच्च न्यायालय से भिन्न किसी न्यायालय द्वारा किए गए विचारण में दोषसिद्धि के किसी मामले में लोक अभियोजक को दंडादेश की अपर्याप्तता के आधार पर उसके विरुद्ध-

क. सेशन न्यायालय में, यदि दंडादेश किसी मजिस्ट्रेट द्वारा पारित किया जाता है; और

ख. उच्च न्यायालय में, यदि दंडादेश किसी अन्य न्यायालय द्वारा पारित किया जाता है, अपील प्रस्तुत करने का निदेश दे सकती है।

 2. यदि ऐसी दोषसिद्धि किसी ऐसे मामले में है जिसमें अपराध का अन्वेषण इस संहिता से भिन्न किसी केन्द्रीय अधिनियम के अधीन अपराध का अन्वेषण करने के लिए सशक्त किसी अन्य अभिकरण द्वारा किया गया है तो केन्द्रीय सरकार भी लोक अभियोजक को दंडादेश की अपर्याप्तता के आधार पर उसके विरुद्ध-

क. सेशन न्यायालय में, यदि दंडादेश किसी मजिस्ट्रेट द्वारा पारित किया जाता है; और

ख. उच्च न्यायालय में, यदि दंडादेश किसी अन्य न्यायालय द्वारा पारित किया जाता है, अपील प्रस्तुत करने का निदेश दे सकती है।

3. जब दंडादेश के विरुद्ध अपर्याप्तता के आधार पर अपील की गई है तब यथास्थिति, सेशन न्यायालय या उच्च न्यायालय उस दंडादेश में वृद्धि तब तक नहीं करेगा जब तक कि अभियुक्त को ऐसी वृद्धि के विरुद्ध कारण दर्शित करने का युक्तियुक्त अवसर नहीं दे दिया गया है और कारण दर्शित करते समय अभियुक्त अपनी दोषमुक्ति के लिए या दंडादेश में कमी करने के लिए अभिवचन कर सकता है

4. जब कोई अपील, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64, धारा 65, धारा 66, धारा 67, धारा 68, धारा 70 या धारा 71 के अधीन पारित किसी कारावास के विरुद्ध फाइल की गई है, तो अपील फाइल करने की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर ऐसी अपील का निपटान किया जाएगा

419.दोषमुक्ति की दशा में अपील

1. उपधारा (2) में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय और उपधारा ( 3 ) और उपधारा (5) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, -

क. जिला मजिस्ट्रेट, किसी मामले में, लोक अभियोजक को किसी संज्ञेय और अजमानतीय अपराध की बाबत किसी मजिस्ट्रेट द्वारा पारित दोषमुक्ति के आदेश से सेशन न्यायालय में अपील प्रस्तुत करने का निदेश दे सकेगा ;

ख. राज्य सरकार, किसी मामले में लोक अभियोजक को उच्च न्यायालय से भिन्न किसी न्यायालय द्वारा पारित दोषमुक्ति के मूल या अपीली आदेश से जो खंड () के अधीन आदेश नहीं है या पुनरीक्षण में सेशन न्यायालय द्वारा पारित दोषमुक्ति के आदेश से उच्च न्यायालय में, अपील प्रस्तुत करने का निदेश दे सकेगी

2. यदि ऐसा दोषमुक्ति का आदेश किसी ऐसे मामले में पारित किया जाता है जिसमें अपराध का इस संहिता से भिन्न किसी केन्द्रीय अधिनियम के अधीन अपराध का अन्वेषण करने के लिए सशक्त किसी अन्य अभिकरण द्वारा किया गया है तो केन्द्रीय सरकार उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, लोक अभियोजक को-

क. दोषमुक्ति के ऐसे आदेश से, जो संज्ञेय और अजमानतीय अपराध की बाबत किसी मजिस्ट्रेट द्वारा पारित किया गया है सेशन न्यायालय में ;

ख. दोषमुक्ति के ऐसे मूल या अपीली आदेश से, जो किसी उच्च न्यायालय से भिन्न किसी न्यायालय द्वारा पारित किया गया है जो खंड () के अधीन आदेश नहीं है या दोषमुक्ति के ऐसे आदेश से, जो पुनरीक्षण में सेशन न्यायालय द्वारा पारित किया गया है, उच्च न्यायालय में, अपील प्रस्तुत करने का निदेश दे सकती है

3. उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन उच्च न्यायालय को कोई अपील उच्च न्यायालय की इजाजत के बिना ग्रहण नहीं की जाएगी।

4. यदि दोषमुक्ति का ऐसा आदेश परिवाद पर संस्थित किसी मामले में पारित किया गया है और उच्च न्यायालय, परिवादी द्वारा उससे इस निमित्त आवेदन किए जाने पर, दोषमुक्ति के आदेश की अपील करने की विशेष इजाजत देता है तो परिवादी ऐसी अपील उच्च न्यायालय में उपस्थित कर सकता है

5. दोषमुक्ति के आदेश से अपील करने की विशेष इजाजत दिए जाने के लिए उपधारा (4) के अधीन कोई आवेदन उच्च न्यायालय द्वारा उस दशा में जिसमें परिवादी लोक सेवक है उस दोषमुक्ति के आदेश की तारीख से संगणित, छह मास की समाप्ति के पश्चात् और प्रत्येक अन्य दशा में ऐसे संगणित साठ दिन की समाप्ति के पश्चात् ग्रहण नहीं किया जाएगा

6. यदि किसी मामले में दोषमुक्ति के आदेश से अपील करने की विशेष इजाजत दिए जाने के लिए उपधारा (4) के अधीन कोई आवेदन नामंजूर किया जाता है तो उस दोषमुक्ति के आदेश से उपधारा (1) के अधीन या उपधारा (2) के अधीन कोई अपील नहीं होगी

420. कुछ मामलों में उच्च न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध किए जाने के विरुद्ध अपील

यदि उच्च न्यायालय ने अभियुक्त व्यक्ति को दोषमुक्ति के आदेश को अपील में उलट दिया है और उसे दोषसिद्ध किया है तथा उसे मृत्यु या आजीवन कारावास या दस वर्ष या अधिक की अवधि के कारावास का दंड दिया है तो वह उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकता है

421.कुछ मामलों में अपील करने का विशेष अधिकार

इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी, जब एक से अधिक व्यक्ति एक ही विचारण में दोषसिद्ध किए जाते हैं, और ऐसे व्यक्तियों में से किसी के बारे में अपीलनीय निर्णय या आदेश पारित किया गया है तब ऐसे विचारण में दोषसिद्ध किए गए सब व्यक्तियों को या उनमें से किसी को भी अपील का अधिकार होगा

422. सेशन न्यायालय  की गई अपीलें कैसे सुनी जाएंगी

1उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, सेशन न्यायालय में या सेशन न्यायाधीश को की गई अपील सेशन न्यायाधीश या अपर सेशन न्यायाधीश द्वारा सुनी जाएगी :

परन्तु द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा किए गए विचारण में दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा सुनी जा सकेगी और निपटाई जा सकेगी

2. अपर सेशन न्यायाधीश या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट केवल ऐसी अपीलें सुनेगा जिन्हें खंड का सेशन न्यायाधीश, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, उसके हवाले करे या जिन्हें सुनने के लिए उच्च न्यायालय, विशेष आदेश द्वारा उसे निदेश दे

423.अपील की अर्जी

प्रत्येक अपील, अपीलार्थी या उसके अधिवक्ता द्वारा उपस्थित की गई लिखित अर्जी के रूप में की जाएगी, और प्रत्येक ऐसी अर्जी के साथ (जब तक वह न्यायालय जिसमें वह उपस्थित की जाए अन्यथा निदेश दे ) उस निर्णय या आदेश की प्रतिलिपि होगी जिसके विरुद्ध अपील की जा रही है

424.जब अपीलार्थी जेल में है तब प्रक्रिया

यदि अपीलार्थी जेल में है तो वह अपनी अपील की अर्जी और उसके साथ वाली प्रतिलिपियों को जेल के भारसाधक अधिकारी को दे सकता है, जो तब ऐसी अर्जी और प्रतिलिपियां समुचित अपील न्यायालय को भेजेगा

425. अपील का संक्षेपत: खारिज किया जाना

1. यदि धारा 423 या धारा 424 के अधीन प्राप्त अपील की अर्जी और निर्णय की प्रतिलिपि की परीक्षा करने पर अपील न्यायालय का यह विचार है कि हस्तक्षेप करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है तो वह अपील को संक्षेपतः खारिज कर सकता है :

परन्तु -

क. धारा 423 के अधीन उपस्थित की गई कोई अपील तब तक खारिज की जाएगी जब तक अपीलार्थी या उसके अधिवक्ता को उसके समर्थन में सुने जाने का उचित अवसर मिल चुका हो ;

ख. धारा 424 के अधीन कोई अपील उसके समर्थन में अपीलार्थी को सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना खारिज नहीं की जाएगी, जब तक अपील न्यायालय का यह विचार हो कि अपील तुच्छ है या न्यायालय के समक्ष अभियुक्त को अभिरक्षा में पेश करने से मामले की परिस्थितियों के अनुपात में कहीं अधिक असुविधा होगी;

ग. धारा 424 के अधीन उपस्थित की गई कोई अपील तब तक संक्षेपतः खारिज की जाएगी जब तक ऐसी अपील करने के लिए अनुज्ञात अवधि का अवसान हो चुका हो

2. किसी अपील को इस धारा के अधीन खारिज करने के पूर्व न्यायालय मामले के अभिलेख मंगा सकता है

3. जहां इस धारा के अधीन अपील खारिज करने वाला अपील न्यायालय, सेशन न्यायालय या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का न्यायालय है वहां वह ऐसा करने के अपने कारण अभिलिखित करेगा

4. जहां धारा 424 के अधीन उपस्थित की गई कोई अपील इस धारा के अधीन संक्षेपत: खारिज कर दी जाती है और अपील न्यायालय का यह निष्कर्ष है कि उसी अपीलार्थी की ओर से धारा 423 के अधीन सम्यक् रूप से उपस्थित की गई अपील की अन्य अर्जी पर उसके द्वारा विचार नहीं किया गया है वहां, धारा 434 में किसी बात के होते हुए भी, यदि उस न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि ऐसा करना न्याय के हित में आवश्यक है तो वह ऐसी अपील विधि के अनुसार सुन सकता है और उसका निपटारा कर सकता है

426 संक्षेपत: खारिज की गई अपीलों की सुनवाई के लिए प्रक्रिया

1. यदि अपील न्यायालय अपील को संक्षेपतः खारिज नहीं करता है तो वह उस समय और स्थान की, जब और जहां ऐसी अपील सुनी जाएगी, सूचना-

I. अपीलार्थी या उसके अधिवक्ता को ;

II. ऐसे अधिकारी को, जिसे राज्य सरकार इस निमित्त नियुक्त करे ;

III. यदि परिवाद पर संस्थित मामले में दोषसिद्धि के निर्णय के विरुद्ध अपील की गई है, तो परिवादी को;

IV. यदि अपील धारा 418 या धारा 419 के अधीन की गई है तो अभियुक्त को दिलवाएगा और ऐसे अधिकारी, परिवादी और अभियुक्त को अपील के आधारों की प्रतिलिपि भी देगा

2. यदि अपील न्यायालय में मामले का अभिलेख, पहले से ही उपलभ्य नहीं है तो वह न्यायालय ऐसा अभिलेख मंगाएगा और पक्षकारों को सुनेगा:

परन्तु यदि अपील केवल दंड के परिमाण या उसकी वैधता के बारे में है तो न्यायालय अभिलेख मंगाए बिना ही अपील का निपटारा कर सकता है

3. जहां दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील का आधार केवल दंडादेश की अभिकथित कठोरता है वहां अपीलार्थी न्यायालय की इजाजत के बिना अन्य किसी आधार के समर्थन में तो कहेगा और उसे उसके समर्थन में सुना ही जाएगा

427.अपील न्यायालय की  शक्तियां

ऐसे अभिलेख के परिशीलन और यदि अपीलार्थी या उसका अधिवक्ता हाजिर है तो उसे तथा यदि लोक अभियोजक हाजिर है तो उसे और धारा 418 या धारा 419 के अधीन अपील की दशा में यदि अभियुक्त हाजिर है तो उसे सुनने के पश्चात्, अपील न्यायालय उस दशा में जिसमें उसका यह विचार है कि हस्तक्षेप करने का पर्याप्त आधार नहीं है अपील को खारिज कर सकता है, या, -

क. दोषमुक्ति के आदेश से अपील में ऐसे आदेश को उलट सकता है और निदेश दे सकता है कि अतिरिक्त जांच की जाए या अभियुक्त, यथास्थिति, पुनः विचारित किया जाए या विचारार्थ सुपुर्द किया जाए, या उसे दोषी ठहरा सकता है। और उसे विधि के अनुसार दंडादेश दे सकता है;

ख. दोषसिद्धि से अपील में,--

I. निष्कर्ष और दंडादेश को उलट सकता है और अभियुक्त को दोषमुक्त या उन्मोचित कर सकता है या ऐसे अपील न्यायालय के अधीनस्थ सक्षम अधिकारिता वाले न्यायालय द्वारा उसके पुन: विचारित किए जाने का या विचारणार्थ सुपुर्द किए जाने का आदेश दे सकता है; या

II. दंडादेश को कायम रखते हुए निष्कर्ष में परिवर्तन कर सकता है; या

III. निष्कर्ष में परिवर्तन करके या किए बिना दंड के स्वरूप या परिमाण में या स्वरूप और परिमाण में परिवर्तन कर सकता है, किन्तु इस प्रकार नहीं कि उससे दंड में वृद्धि हो जाए ;

ग. दंडादेश की वृद्धि के लिए अपील में, -

I. निष्कर्ष और दंडादेश को उलट सकता है और अभियुक्त को दोषमुक्त या उन्मोचित कर सकता है या ऐसे अपराध का विचारण करने के लिए सक्षम न्यायालय द्वारा उसका पुनर्विचारण करने का आदेश दे सकता है; या

II. दंडादेश को कायम रखते हुए निष्कर्ष में परिवर्तन कर सकता है; या

III. निष्कर्ष में परिवर्तन करके या किए बिना, दंड के स्वरूप या परिमाण में या स्वरूप और परिमाण में परिवर्तन कर सकता है जिससे उसमें वृद्धि या कमी हो जाए ;

घ. किसी अन्य आदेश से अपील में ऐसे आदेश को परिवर्तित कर सकता है। या उलट सकता है ;

ङ. कोई संशोधन या कोई पारिणामिक या आनुषंगिक आदेश, जो न्यायसंगत या उचित हो, कर सकता है:

परन्तु दंड में तब तक वृद्धि नहीं की जाएगी जब तक अभियुक्त को ऐसी वृद्धि के विरुद्ध कारण दर्शित करने का अवसर मिल चुका हो :

परन्तु यह और कि अपील न्यायालय उस अपराध के लिए, जिसे उसकी राय में अभियुक्त ने किया है उससे अधिक दंड नहीं देगा, जो अपीलाधीन आदेश या दंडादेश पारित करने वाले न्यायालय द्वारा ऐसे अपराध के लिए दिया जा सकता था

428. अधीनस्थ अपील न्यायालय के निर्णय

आरंभिक अधिकारिता वाले दंड न्यायालय के निर्णय के बारे में अध्याय 29 में अन्तर्विष्ट नियम, जहां तक साध्य हो, सेशन न्यायालय या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय के अपील में दिए गए निर्णय को लागू होंगे :

परन्तु निर्णय दिया जाना सुनने के लिए अभियुक्त तो लाया जाएगा और उससे हाजिर होने की अपेक्षा की जाएगी जब तक कि अपील न्यायालय अन्यथा निदेश दे

429 अपील में उच्च न्यायालय के आदेश का प्रमाणित करके निचले न्यायालय को भेजा जाना

1. जब कभी अपील में कोई मामला उच्च न्यायालय द्वारा इस अध्याय के अधीन विनिश्चित किया जाता है तब वह अपना निर्णय या आदेश प्रमाणित करके उस न्यायालय को भेजेगा जिसके द्वारा वह निष्कर्ष, दंडादेश या आदेश, जिसके विरुद्ध अपील की गई थीं अभिलिखित किया गया या पारित किया गया था और यदि ऐसा न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से भिन्न न्यायिक मजिस्ट्रेट का है तो उच्च न्यायालय का  निर्णय या आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की मार्फत भेजा जाएगा; और यदि ऐसा न्यायालय कार्यपालक मजिस्ट्रेट का है तो उच्च न्यायालय का निर्णय या आदेश जिला मजिस्ट्रेट की मार्फत भेजा जाएगा

2. तब वह न्यायालय, जिसे उच्च न्यायालय अपना निर्णय या आदेश प्रमाणित करके भेजे ऐसे आदेश करेगा जो उच्च न्यायालय के निर्णय या आदेश के अनुरूप हों; और यदि आवश्यक हो तो अभिलेख में तद्रुसार संशोधन कर दिया जाएगा

430 अपील लंबित रहने तक दंडादेश का निलम्बन, अपीलार्थी का जमानत पर छोड़ा जाना

1अपील न्यायालय, ऐसे कारणों से, जो उसके द्वारा अभिलिखित किए जाएंगे, आदेश दे सकता है कि उस दंडादेश या आदेश का निष्पादन, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, दोषसिद्ध व्यक्ति द्वारा की गई अपील के लंबित रहने तक निलंबित किया जाए और यदि वह व्यक्ति परिरोध में है तो यह भी आदेश दे सकता है कि उसे जमानत पर या उसके अपने बंधपत्र या जमानतपत्र पर छोड़ दिया जाए :

परन्तु अपील न्यायालय ऐसे दोषसिद्ध व्यक्ति को, जो मृत्यु या आजीवन कारावास या दस वर्ष से अन्यून अवधि के कारावास से दंडनीय किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है, उसके अपने बंधपत्र या जमानतपत्र पर छोड़ने से पूर्व, लोक अभियोजक को ऐसे छोड़ने के विरुद्ध लिखित में कारण दर्शाने का अवसर देगा :

परन्तु यह और कि ऐसे मामलों में, जहां किसी दोषसिद्ध व्यक्ति को जमानत पर छोड़ा जाता है वहां लोक अभियोजक जमानत रद्द किए जाने के लिए आवेदन फाइल कर सकेगा

2. अपील न्यायालय को इस धारा द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग उच्च न्यायालय भी किसी ऐसी अपील के मामले में कर सकता है जो किसी दोषसिद्ध व्यक्ति द्वारा उसके अधीनस्थ न्यायालय में की गई है

3. जहां दोषसिद्ध व्यक्ति ऐसे न्यायालय का जिसके द्वारा वह दोषसिद्ध किया गया है यह समाधान कर देता है कि वह अपील प्रस्तुत करना चाहता है वहां वह न्यायालय, -

I. उस दशा में जब ऐसा व्यक्ति, जमानत पर होते हुए, तीन वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए कारावास से दंडादिष्ट किया गया है, या

II. उस दशा में जब वह अपराध, जिसके लिए ऐसा व्यक्ति दोषसिद्ध किया गया है, जमानतीय है और वह जमानत पर है, यह आदेश देगा कि दोषसिद्ध व्यक्ति को इतनी अवधि के लिए जितनी से अपील प्रस्तुत करने और उपधारा (1) के अधीन अपील न्यायालय के आदेश प्राप्त करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा जमानत पर छोड़ दिया जाए जब तक कि जमानत से इंकार करने के विशेष कारण हों और जब तक वह ऐसे जमानत पर छूटा रहता है तब तक कारावास का दंडादेश निलम्बित समझा जाएगा

4. जब अंततोगत्वा अपीलार्थी को किसी अवधि के कारावास या आजीवन कारावास का दंडादेश दिया जाता है, तब वह समय जिसके दौरान वह ऐसे छूटा रहता है, उस अवधि की संगणना करने में, जिसके लिए उसे ऐसा दंडादेश दिया गया है, हिसाब में नहीं लिया जाएगा

431 दोषमुक्त से अपील में अभियुक्त की गिरफ्तारी

जब धारा 419 के अधीन अपील उपस्थित की जाती है तब उच्च न्यायालय वारण्ट जारी कर सकता है जिसमें यह निदेश होगा कि अभियुक्त गिरफ्तार किया जाए और उसके या किसी अधीनस्थ न्यायालय के समक्ष लाया जाए, और वह न्यायालय जिसके समक्ष अभियुक्त लाया जाता है, अपील का निपटारा होने तक उसे कारागार को सुपुर्द कर सकता है या उसकी जमानत ले सकता है

432 अपील न्यायालय अतिरिक्त साक्ष्य ले सकेगा या उसके लिए जाने का निदेश दे सकेगा

1. इस अध्याय के अधीन किसी अपील पर विचार करने में, यदि अपील न्यायालय अतिरिक्त साक्ष्य आवश्यक समझता है तो वह अपने कारणों को अभिलिखित करेगा और ऐसा साक्ष्य या तो स्वयं ले सकता है या मजिस्ट्रेट द्वारा, या जब अपील न्यायालय उच्च न्यायालय है तब सेशन न्यायालय या मजिस्ट्रेट द्वारा लिए जाने का निदेश दे सकता है

2. जब अतिरिक्त साक्ष्य सेशन न्यायालय या मजिस्ट्रेट द्वारा ले लिया जाता है तब वह ऐसा साक्ष्य प्रमाणित करके अपील न्यायालय को भेजेगा और तब ऐसा न्यायालय अपील निपटाने के लिए अग्रसर होगा

3. अभियुक्त या उसके अधिवक्ता को उस समय उपस्थित होने का अधिकार होगा जब अतिरिक्त साक्ष्य लिया जाता है

4. इस धारा के अधीन साक्ष्य का लिया जाना अध्याय 25 के उपबंधों के अधीन होगा मानो वह कोई जांच हो

433.जहां अपील न्यायालय के न्यायाधीश राय के बारे में समान रूप में विभाजित हों, वहां प्रक्रिया

जब इस अध्याय के अधीन अपील उच्च न्यायालय द्वारा उसके न्यायाधीशों के न्यायपीठ के समक्ष सुनी जाती है और वे राय में समान रूप से विभाजित हैं तब अपील उनकी रायों के सहित उसी न्यायालय के किसी अन्य न्यायाधीश के समक्ष रखी जाएगी और ऐसा न्यायाधीश, ऐसी सुनवाई के पश्चात्, जैसी वह ठीक समझे, अपनी राय देगा और निर्णय या आदेश ऐसी राय के अनुसार होगा:

परन्तु यदि न्यायपीठ गठित करने वाले न्यायाधीशों में से कोई एक न्यायाधीश या जहां अपील इस धारा के अधीन किसी अन्य न्यायाधीश के समक्ष रखी जाती है वहां वह न्यायाधीश अपेक्षा करे तो अपील, न्यायाधीशों के वृहत्तर न्यायपीठ द्वारा पुनः सुनी जाएगी और विनिश्चित की जाएगी

434. अपील पर आदेश और निर्णयों का अंतिम होना

अपील में अपील न्यायालय द्वारा पारित निर्णय या आदेश धारा 418, धारा 419, धारा 425 की उपधारा ( 4 ) या अध्याय 32 में उपबंधित दशाओं के सिवाय अंतिम होंगे :

परन्तु किसी मामले में दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील का अंतिम निपटारा हो जाने पर भी अपील न्यायालय-

क. धारा 419 के अधीन दोषमुक्ति के विरुद्ध उसी मामले से पैदा होने वाली अपील को;या

ख. धारा 418 के अधीन दंडादेश में वृद्धि के लिए उसी मामले से पैदा होने वाली अपील को,सुन सकता है और गुणागुण के आधार पर उसका निपटारा कर सकता है

435. अपीलों का उपशमन

1. धारा 418 या धारा 419 के अधीन प्रत्येक अपील का अभियुक्त की मृत्यु पर अंतिम रूप से उपशमन हो जाएगा

2. इस अध्याय के अधीन (जुर्माने के दंडादेश की अपील के सिवाय) प्रत्येक अन्य अपील का अपीलार्थी की मृत्यु पर अंतिम रूप से उपशमन हो जाएगा :

परन्तु जहां अपील, दोषसिद्धि और मृत्यु के या कारावास के दंडादेश के विरुद्ध है और अपील के लंबित रहने के दौरान अपीलार्थी की मृत्यु हो जाती है वहां उसका कोई भी निकट नातेदार, अपीलार्थी की मृत्यु के तीस दिन के अन्दर अपील जारी रखने की इजाजत के लिए अपील न्यायालय में आवेदन कर सकता है; और यदि इजाजत दे दी जाती है तो अपील का उपशमन होगा

स्पष्टीकरण

इस धारा मेंनिकट नातेदार" से माता-पिता, पति या पत्नी, पारंपरिक वंशज, भाई या बहन अभिप्रेत है

 

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