
क. नागालैंड राज्य को ;
ख. जनजाति क्षेत्रों को, लागू नहीं होंगे, किंतु संबद्ध राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा ऐसे उपबंधों या उनमें से किसी को, यथास्थिति, संपूर्ण नागालैंड राज्य या ऐसे जनजाति क्षेत्र या उनके किसी भाग पर ऐसे अनुपूरक, आनुषंगिक या पारिणामिक उपान्तरों सहित लागू कर सकेगी, जैसा अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए।
इस धारा में, “जनजाति क्षेत्र" से वे राज्यक्षेत्र अभिप्रेत हैं, जो 21 जनवरी, 1972 के ठीक पहले, संविधान की छठी अनुसूची के पैरा 20 में यथानिर्दिष्ट असम के जनजाति क्षेत्रों में सम्मिलित थे और जो शिलांग नगरपालिका की स्थानीय सीमाओं के भीतर के क्षेत्रों से भिन्न हैं ।
यह ऐसी तारीख से प्रवृत्त होगा, जिसे भारत सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे
इस संहिता में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,
“श्रव्य दृश्य इलैक्ट्रानिक" से अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत वीडियो कांफ्रेंसिंग के प्रयोजनों के लिए, पहचान की आदेशिकाओं को अभिलिखित करना, तलाशी और अभिग्रहण या साक्ष्य, इलैक्ट्रानिक संसूचना का पारेषण और ऐसे अन्य प्रयोजनों के लिए किसी संसूचना युक्ति का प्रयोग और ऐसे अन्य साधन भी हैं, जिसे राज्य सरकार नियमों द्वारा उपबंधित करे;
" जमानत " से किसी अधिकारी या न्यायालय द्वारा अधिरोपित कतिपय शर्तों पर किसी अपराध के कारित किए जाने के अभियुक्त या संदिग्ध व्यक्ति द्वारा किसी बंधपत्र या जमानतपत्र के निष्पादन पर विधि की अभिरक्षा से ऐसे व्यक्ति का छोड़ा जाना अभिप्रेत है;
"जमानतीय अपराध" से ऐसा अपराध अभिप्रेत है जो प्रथम अनुसूची में जमानतीय के रूप में दिखाया गया है या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा जमानतीय बनाया गया है और “अजमानतीय अपराध” से कोई अन्य अपराध अभिप्रेत है;
“जमानतपत्र" से प्रतिभूति के साथ छोड़े जाने के लिए कोई वचनबंध अभिप्रेत है;
" बंधपत्र" से प्रतिभूति के बिना छोड़े जाने के लिए कोई वैयक्तिक बंधपत्र या वचनबंध अभिप्रेत है
“आरोप" के अंतर्गत, जब आरोप में एक से अधिक शीर्ष हों, आरोप का कोई भी शीर्ष है;
“संज्ञेय अपराध " से ऐसा अपराध अभिप्रेत है जिसके लिए और " संज्ञेय मामला " से ऐसा मामला अभिप्रेत है जिसमें, कोई पुलिस अधिकारी प्रथम अनुसूची के या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अनुसार वारण्ट के बिना गिरफ्तार कर सकता है;
“परिवाद" से इस संहिता के अधीन मजिस्ट्रेट द्वारा कार्रवाई किए जाने की दृष्टि से मौखिक या लिखित रूप में उससे किया गया यह अभिकथन अभिप्रेत है कि किसी व्यक्ति ने, चाहे वह ज्ञात हो या अज्ञात, अपराध किया है, किंतु इसमें पुलिस रिपोर्ट सम्मिलित नहीं है ।
ऐसे किसी मामले में, जो अन्वेषण के पश्चात् किसी असंज्ञेय अपराध का किया जाना प्रकट करता है, पुलिस अधिकारी द्वारा की गई रिपोर्ट परिवाद समझी जाएगी और वह पुलिस अधिकारी जिसके द्वारा ऐसी रिपोर्ट की गई है, परिवादी समझा जाएगा;
“इलैक्ट्रानिक संसूचना" से किसी इलैक्ट्रानिक युक्ति, जिसके अंतर्गत टेलीफोन, मोबाइल फोन या अन्य बेतार दूरसंचार युक्ति या कंप्यूटर या श्रव्य-दृश्य प्लेयर या कैमरा या कोई अन्य इलैक्ट्रानिक युक्ति या इलैक्ट्रानिक प्ररूप, जो केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, सम्मिलित है, द्वारा किसी लिखित, मौखिक, सचित्र सूचना या वीडियो अंतर्वस्तु की संसूचना अभिप्रेत है, जिसे (चाहे किसी एक व्यक्ति से अन्य व्यक्ति को या एक युक्ति से किसी अन्य युक्ति को या किसी व्यक्ति से किसी युक्ति को या किसी युक्ति से किसी व्यक्ति को) पारेषित या अंतरित किया जाता है ;
"उच्च न्यायालय" से अभिप्रेत है,
I. किसी राज्य के संबंध में, उस राज्य का उच्च न्यायालय;
II. किसी ऐसे संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में, जिस पर किसी राज्य के उच्च न्यायालय की अधिकारिता का विस्तार विधि द्वारा किया गया है, वह उच्च न्यायालय;
III. किसी अन्य संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में, भारत के उच्चतम न्यायालय से भिन्न, उस संघ राज्यक्षेत्र के लिए दाण्डिक अपील का सर्वोच्च न्यायालय;
“जांच" से, विचारण से भिन्न, ऐसी प्रत्येक जांच अभिप्रेत है जो इस संहिता के अधीन किसी मजिस्ट्रेट या न्यायालय द्वारा की जाए;
“अन्वेषण" के अंतर्गत वे सब कार्यवाहियां हैं जो इस संहिता के अधीन किसी पुलिस अधिकारी द्वारा या किसी भी ऐसे व्यक्ति (मजिस्ट्रेट से भिन्न) द्वारा जो मजिस्ट्रेट द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया गया है, साक्ष्य एकत्र करने के लिए की जाएं;
जहां किसी विशेष अधिनियम के उपबंधों में से कोई भी इस संहिता के उपबंधों से असंगत है, वहां विशेष अधिनियम के उपबंध अभिभावी होंगे;
“न्यायिक कार्यवाही" के अंतर्गत कोई ऐसी कार्यवाही आती है जिसके अनुक्रम में साक्ष्य, वैध रूप से शपथ पर लिया जाता है या लिया जा सकेगा;
किसी न्यायालय या मजिस्ट्रेट के संबंध में “स्थानीय अधिकारिता” से वह स्थानीय क्षेत्र अभिप्रेत है जिसके भीतर ऐसा न्यायालय या मजिस्ट्रेट इस संहिता के अधीन अपनी सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा और ऐसे स्थानीय क्षेत्र में संपूर्ण राज्य या राज्य का कोई भाग समाविष्ट हो सकेगा जो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे;
“असंज्ञेय अपराध " से ऐसा अपराध अभिप्रेत है जिसके लिए और “ असंज्ञेय मामला " से ऐसा मामला अभिप्रेत है जिसमें किसी पुलिस अधिकारी को वारण्ट के बिना गिरफ्तारी करने का प्राधिकार नहीं होता है;
“अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित कोई अधिसूचना अभिप्रेत है;
"अपराध” से कोई ऐसा कार्य या लोप अभिप्रेत है जो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा दण्डनीय बनाया गया है और इसके अंतर्गत कोई ऐसा कार्य भी है जिसके संबंध में पशु अतिचार अधिनियम, 1871(1871 की धारा ) की धारा 20 के अधीन कोई परिवाद किया जा सकेगा;
" पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी” के अंतर्गत, जब पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी थाने से अनुपस्थित है या बीमारी या अन्य कारण से अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है, तब थाने में उपस्थित ऐसा पुलिस अधिकारी है, जो ऐसे अधिकारी से पंक्ति में ठीक नीचे है और कान्स्टेबल की पंक्ति से ऊपर है, या जब राज्य सरकार ऐसा निदेश दे तब, इस प्रकार उपस्थित कोई अन्य पुलिस अधिकारी भी है;
"स्थान" के अंतर्गत गृह, भवन, तम्बू, यान और जलयान भी हैं;
"पुलिस रिपोर्ट" से किसी पुलिस अधिकारी द्वारा धारा 193 की उपधारा (3) के अधीन मजिस्ट्रेट को भेजी गई रिपोर्ट अभिप्रेत है;
“पुलिस थाना” से कोई भी चौकी या स्थान अभिप्रेत है जिसे राज्य सरकार द्वारा साधारणतया या विशेषतया पुलिस थाना घोषित किया गया है और इसके अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट कोई स्थानीय क्षेत्र भी हैं;
"लोक अभियोजक " से धारा 18 के अधीन नियुक्त कोई व्यक्ति अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत लोक अभियोजक के निदेशों के अधीन कार्य करने वाला कोई व्यक्ति भी है ;
"उपखण्ड" से किसी जिले का कोई उपखण्ड अभिप्रेत है;
"समन-मामला " से ऐसा मामला अभिप्रेत है जो किसी अपराध से संबंधित है और जो वारण्ट मामला नहीं है;
"पीड़ित " से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे अभियुक्त के कार्य या लोप के कारण कोई हानि या क्षति कारित हुई है और इसके अंतर्गत ऐसे पीड़ित का संरक्षक या विधिक वारिस भी है;
परन्तु इस संहिता में भारतीय न्याय संहिता, 2023 या भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के प्रतिनिर्देश का अर्थान्वयन क्रमशः भारतीय न्याय (दूसरी) संहिता, 2023 या भारतीय साक्ष्य (दूसरा) अधिनियम, 2023 से लिया जाएगा ।
क. जिनमें साक्ष्य का मूल्यांकन या छानबीन या कोई ऐसा विनिश्चय करना अंतर्वलित है जिससे किसी व्यक्ति को किसी दंड या शास्ति की या अन्वेषण, जांच या विचारण लंबित रहने तक अभिरक्षा में निरोध की आशंका में डालता हो या जिसका प्रभाव उसे किसी न्यायालय के समक्ष विचारण के लिए भेजना होगा, वहां वे कृत्य इस संहिता के उपबंधों के अधीन रहते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा किए जाएंगे; या
ख. जो प्रशासनिक या कार्यपालक प्रकार के हैं जैसे अनुज्ञप्ति का अनुदान, अनुज्ञप्ति का निलंबन या रद्द किया जाना, अभियोजन की मंजूरी या अभियोजन वापस लेना, वहां वे खंड (क) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा किए जाएंगे।
प्रतिकूल किसी विनिर्दिष्ट उपबंध के अभाव में, इस संहिता की कोई बात, तत्समय प्रवृत्त किसी विशेष या स्थानीय विधि पर, या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा प्रदत्त किसी विशेष अधिकारिता या शक्ति या विहित प्रक्रिया के किसी विशेष प्ररूप पर प्रभाव नहीं डालेगी ।