
1. जब सेशन न्यायालय मृत्यु दंडादेश देता है तब कार्यवाही उच्च न्यायालय को तुरंत प्रस्तुत की जाएगी और दंडादेश तब तक निष्पादित न किया जाएगा जब तक वह उच्च न्यायालय द्वारा पुष्ट न कर दिया जाए ।
2. दंडादेश पारित करने वाला न्यायालय वारंट के अधीन दोषसिद्ध व्यक्ति को जेल की अभिरक्षा के लिए सुपुर्द करेगा ।
1. यदि ऐसी कार्यवाही के प्रस्तुत किए जाने पर उच्च न्यायालय यह ठीक समझता है कि दोषसिद्ध व्यक्ति के दोषी या निर्दोष होने से संबंधित किसी प्रश्न पर अतिरिक्त जांच की जाए या अतिरिक्त साक्ष्य लिया जाए तो वह स्वयं ऐसी जांच कर सकता है या ऐसा साक्ष्य ले सकता है या सेशन न्यायालय द्वारा उसके किए जाने या लिए जाने का निदेश दे सकता है ।
2. जब तक उच्च न्यायालय अन्यथा निदेश न दे, दोषसिद्ध व्यक्ति को जांच किए जाने या साक्ष्य लिए जाने के समय उपस्थित होने से, अभिमुक्ति दी जा सकती है ।
3. जब जांच या साक्ष्य (यदि कोई हो) उच्च न्यायालय द्वारा नहीं की गई है या नहीं लिया गया है तब ऐसी जांच या साक्ष्य का परिणाम प्रमाणित करके उस न्यायालय को भेजा जाएगा ।
उच्च न्यायालय धारा 407 के अधीन प्रस्तुत किसी मामले में,
क. दंडादेश की पुष्टि कर सकता है या विधि द्वारा समर्थित कोई अन्य दंडादेश दे सकता है; या
ख. दोषसिद्धि को बातिल कर सकता है और अभियुक्त को किसी ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध कर सकता है जिसके लिए सेशन न्यायालय उसे दोषसिद्ध कर सकता था, या उसी या संशोधित आरोप पर नए विचारण का आदेश दे सकता है; या
ग. अभियुक्त व्यक्ति को दोषमुक्त कर सकता है :
परन्तु पुष्टि का कोई आदेश इस धारा के अधीन तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक अपील करने के लिए अनुज्ञात अवधि समाप्त न हो गई हो या यदि ऐसी अवधि के अन्दर अपील पेश कर दी गई है तो जब तक उस अपील का निपटारा न हो गया हो ।
410. दंडादेश की पुष्टि या नए दंडादेश का दो न्यायाधीशों द्वारा हस्ताक्षरित किया जाना
इस प्रकार प्रस्तुत प्रत्येक मामले में उच्च न्यायालय द्वारा दंडादेश का पुष्टिकरण या उसके द्वारा पारित कोई नया दंडादेश, या आदेश, यदि ऐसे न्यायालय में दो या अधिक न्यायाधीश हों तो, उनमें से कम से कम दो न्यायाधीशों द्वारा किया जाएगा, पारित और हस्ताक्षरित किया जाएगा ।
जहां कोई ऐसा मामला न्यायाधीशों की न्यायपीठ के समक्ष सुना जाता है और ऐसे न्यायाधीश राय के बारे में समान रूप से विभाजित हैं वहां मामला धारा 433 द्वारा उपबंधित रीति से विनिश्चित किया जाएगा ।
मृत्यु दंडादेश की पुष्टि के लिए उच्च न्यायालय को सेशन न्यायालय द्वारा प्रस्तुत मामलों में उच्च न्यायालय द्वारा पुष्टि के आदेश या अन्य आदेश के दिए जाने के पश्चात् उच्च न्यायालय का समुचित अधिकारी विलंब के बिना, आदेश की प्रतिलिपि या तो भौतिक रूप से या इलैक्ट्रानिक साधनों के माध्यम से उच्च न्यायालय की मुद्रा लगाकर और अपने पदीय हस्ताक्षरों से अनुप्रमाणित करके सेशन न्यायालय को भेजेगा।