धारा  21 से  29 अध्याय 3 (न्यायालयों की शक्ति) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

धारा 21 से 29 अध्याय 3 (न्यायालयों की शक्ति) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

अध्याय 3

न्यायालयों की शक्ति

21.  न्यायालय, जिनके द्वारा अपराध विचारणीय हैं

इस संहिता के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए;-

क. भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अधीन किसी अपराध का विचारण निम्नलिखित के द्वारा किया जा सकेगा

I. उच्च न्यायालय; या

II. सेशन न्यायालय ; या

III. किसी अन्य न्यायालय, जिसके द्वारा ऐसे अपराध का विचारणीय होना प्रथम अनुसूची में दर्शाया गया है :

परंतु भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64, धारा 65, धारा 66, धारा 67, धारा 68, धारा 69, धारा 70 या धारा 71 के अधीन किसी अपराध का विचारण यथासाध्य ऐसे न्यायालय द्वारा किया जाएगा, जिसमें महिला पीठासीन हो;

ख. किसी अन्य विधि के अधीन किसी अपराध का विचारण, जब ऐसी विधि में इस निमित्त कोई न्यायालय उल्लिखित है, तब ऐसे न्यायालय द्वारा किया जाएगा और जब कोई न्यायालय इस प्रकार उल्लिखित नहीं है तब उसका विचारण निम्नलिखित द्वारा किया जा सकेगा-

i. उच्च न्यायालय ; या

ii. कोई अन्य न्यायालय, जिसके द्वारा ऐसे अपराध का विचारणीय होना प्रथम अनुसूची में दर्शाया गया है

22.  दंडादेश, जो उच्च न्यायालय और सेशन न्यायाधीश दे सकेंगे;-

1. उच्च न्यायालय, विधि द्वारा प्राधिकृत कोई दंडादेश दे सकेगा

2. सेशन न्यायाधीश या अपर सेशन न्यायाधीश, विधि द्वारा प्राधिकृत कोई भी दंडादेश दे सकेगा ; किंतु ऐसे किसी न्यायाधीश द्वारा दिया गया मृत्यु दंडादेश, उच्च न्यायालय द्वारा पुष्ट किए जाने के अध्यधीन होगा

23. दंडादेश, जो मजिस्ट्रेट दे सकेंगे

1. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का न्यायालय, मृत्यु या आजीवन कारावास या सात वर्ष से अधिक की अवधि के लिए कारावास के दंडादेश के सिवाय विधि द्वारा प्राधिकृत कोई ऐसा दंडादेश दे सकेगा

2. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट का न्यायालय, तीन वर्ष से अनधिक अवधि के लिए कारावास का या पचास हजार रुपए से अनधिक जुर्माने का, या दोनों का, या सामुदायिक सेवा का, दंडादेश दे सकेगा

3. द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट का न्यायालय, एक वर्ष से अनधिक अवधि के लिए कारावास का या दस हजार रुपए से अनधिक जुर्माने का, या दोनों का, या सामुदायिक सेवा का, दंडादेश दे सकेगा

स्पष्टीकरण

सामुदायिक सेवासे ऐसा कार्य अभिप्रेत है, जिसको किसी दोषसिद्ध व्यक्ति को दंड के ऐसे रूप में, जो समुदाय के लाभ के लिए हो, करने के लिए न्यायालय आदेश करे, जिसके लिए वह किसी पारिश्रमिक का हकदार नहीं होगा

24. जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास का दंडादेश

1. किसी मजिस्ट्रेट का न्यायालय जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर इतनी अवधि का कारावास अधिनिर्णीत कर सकेगा, जो विधि द्वारा प्राधिकृत है :

परंतु वह अवधि-

क. धारा 23 के अधीन मजिस्ट्रेट की शक्ति से अधिक की हो ;

ख. जहां कारावास मुख्य दंडादेश के भाग के रूप में अधिनिर्णीत किया गया है, वहां वह उस कारावास की अवधि के चौथाई से अधिक की नहीं होगी जिसको मजिस्ट्रेट, जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर दंडादेश के रूप में से अन्यथा उस अपराध के लिए अधिरोपित करने के लिए सक्षम है

2. इस धारा के अधीन अधिनिर्णीत कारावास, धारा 23 के अधीन मजिस्ट्रेट द्वारा अधिनिर्णीत की जा सकने वाली अधिकतम अवधि के कारावास के मुख्य दंडादेश के अतिरिक्त हो सकेगा

25.एक ही विचारण में कई अपराधों के लिए दोषसिद्ध होने के मामलों में दंडादेश

1. जब कोई व्यक्ति एक ही विचारण में दो या अधिक अपराधों के लिए दोषसिद्ध किया जाता है तब, न्यायालय भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 9 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उसे ऐसे अपराधों के लिए विहित विभिन्न दंडों में से उन दंडों के लिए, जिन्हें देने के लिए ऐसा न्यायालय सक्षम है, दंडादेश दे सकेगा; और न्यायालय, अपराधों की गंभीरता पर विचार करते हुए, ऐसे दंडादेश साथ-साथ या क्रमवर्ती रूप से जंगमने का आदेश देगा

2. दंडादेशों के क्रमवर्ती होने की दशा में, केवल इस कारण से कि कई अपराधों के लिए संकलित दंड उस दंड से अधिक है जो वह न्यायालय एक अपराध के लिए दोषसिद्धि पर देने के लिए सक्षम है, न्यायालय के लिए यह आवश्यक नहीं होगा कि अपराधी को उच्चतर न्यायालय के समक्ष विचारण के लिए भेजे :

परंतु

क. किसी भी दशा में, ऐसा व्यक्ति बीस वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास के लिए दंडादिष्ट नहीं किया जाएगा ;

ख. संकलित दंड, उस दंड की मात्रा के दुगने से अधिक नहीं होगा जिसे एक अपराध में देने के लिए वह न्यायालय सक्षम है

3. किसी सिद्धदोष व्यक्ति द्वारा अपील के प्रयोजन के लिए, उन क्रमवर्ती दंडादेशों का योग, जो इस धारा के अधीन उसके विरुद्ध दिए गए हैं, एक दंडादेश समझा जाएगा

26. शक्तियां प्रदान करने का ढंग

1. इस संहिता के अधीन शक्तियां प्रदान करने में, यथास्थिति, उच्च न्यायालय या राज्य सरकार आदेश द्वारा, व्यक्तियों को विशेषतया नाम से या उनके पद के आधार पर या पदधारियों के वर्गों को साधारणतया उनके पदीय अभिधानों से, सशक्त कर सकेगी

2. ऐसा प्रत्येक आदेश उस तारीख से प्रभावी होगा जबसे वह ऐसे सशक्त किए गए व्यक्ति को संसूचित किया जाता है

27. नियुक्त अधिकारियों की शक्तियां

सरकार की सेवा में पद धारण करने वाला कोई व्यक्ति, जो उच्च न्यायालय या राज्य सरकार द्वारा, इस संहिता के अधीन कोई शक्ति किसी समग्र स्थानीय क्षेत्र के लिए विनिहित की गई हैं, जब कभी उसी प्रकार के समान या उच्चतर पद पर उसी राज्य सरकार के अधीन वैसे ही स्थानीय क्षेत्र के भीतर नियुक्त किया जाता है, तब वह जब तक, यथास्थिति, उच्च न्यायालय या राज्य सरकार अन्यथा निदेश दे या दे चुकी हो, उस स्थानीय क्षेत्र में, जिसमें वह ऐसे नियुक्त किया गया है, उन्हीं शक्तियों का प्रयोग करेगा |

28.शक्तियों को वापस लेना

1. यथास्थिति, उच्च न्यायालय या राज्य सरकार, उन सब शक्तियों को या उनमें से किसी को वापस ले सकेगी जो उसने या उसके अधीनस्थ किसी अधिकारी ने किसी व्यक्ति को इस संहिता के अधीन प्रदान की हैं

2. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रदत्त किन्हीं शक्तियों को संबंधित मजिस्ट्रेट द्वारा वापस लिया जा सकेगा जिसके द्वारा वे शक्तियां प्रदान की गई थी

29.न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों की शक्तियों का उनके पद- उत्तरवर्तियों द्वारा प्रयोग किया जा सकना |

1. इस संहिता के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट की शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का पालन उसके पद उत्तरवर्ती द्वारा किया जा सकेगा

2. जब इस बारे में कोई शंका है कि पद उत्तरवर्ती कौन है तब सेशन न्यायाधीश लिखित आदेश द्वारा यह अवधारित करेगा कि कौन सा न्यायाधीश, इस संहिता के या इसके अधीन किन्हीं कार्यवाहियों या आदेशों के प्रयोजनों के लिए पद उत्तरवर्ती समझा जाएगा।

3. जब इस बारे में कोई शंका है कि किसी मजिस्ट्रेट का पद- उत्तरवर्ती कौन है तब, यथास्थिति, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट लिखित आदेश द्वारा यह अवधारित करेगा कि कौन सा मजिस्ट्रेट इस संहिता के, या इसके अधीन किन्हीं कार्यवाहियों या आदेशों के प्रयोजनों के लिए ऐसे मजिस्ट्रेट का पद- उत्तरवर्ती समझा जाएगा

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