
(1) इस अध्याय के उपबन्ध उस भूमि को लागू होंगे जो-
(एक) भूमिस्वामी द्वारा,
(दो) नवीनीकरण का अधिकार प्रदान करने वाले पट्टे के अधीन सरकारी पट्टेदार द्वारा, और
(तीन) सेवा-भूमि के धारक द्वारा, नगरीय क्षेत्र में, चाहे कृषि प्रयोजनों के लिये या चाहे कृषि-भिन्न प्रयोजनों के लिये धारित हो।
(2) जब कभी किसी भू-खण्ड संख्यांक पर निर्धारित किया गया भू-राजस्व या लगान पुनरीक्षण योग्य हो जाए तो कलेक्टर इस भू-खण्ड पर निर्धारण इस अध्याय के उपबन्धों के अनुसार करेगा।
स्पष्टीकरण. – इस धारा के प्रयोजनों के लिये, किसी भू-खण्ड के लिये देय भू-राजस्व या लगान-
(एक) उस दशा में जबकि वह भू-खण्ड पट्टे पर धारित हो, उस समय पुनरीक्षण योग्य हो गया समझा जाएगा जबकि पट्टा नवीकरण योग्य हो जाता है; और
(दो) उस दशा में जबकि वह भू-खण्ड भूमि स्वामी द्वारा धारित हो, उस समय पुनरीक्षण योग्य हो गया समझा जाएगा जबकि भू-राजस्व निर्धारण की मूल अवधि का अवसान हो जाता है।
इस संहिता के अधीन बनाये गए नियमों के अध्यधीन रहते हुए, कलेक्टर-
(क) नगरीय क्षेत्र में की भूमियों को भू-खण्ड संख्यांक में विभाजित कर सकेगा; और
(ख) विद्यमान सर्वेक्षण-संख्यांकों को भू-खण्ड संख्यांकों के रूप में मान्य कर सकेगा, भू-खण्ड संख्यांकों को पुनर्गठित कर सकेगा या नवीन भू-खण्ड संख्यांक विरचित कर सकेगा।
(1) कलेक्टर भू-खण्ड संख्यांकों को या तो पुनर्क्रमांकित कर सकेगा या उन्हें इतने उपखण्डों में उपविभाजित कर सकेगा जितने कि भूमि में अधिकारों के अर्जन की दृष्टि से या किसी अन्य कारण से अपेक्षित हों।
(2) भू-खण्ड संख्यांकों का उपखण्डों में विभाजन तथा भू-खण्ड संख्यांक के निर्धारण का उप-खण्डों के बीच प्रभाजन इस संहिता के अधीन बनाये गए नियमों के अनुसार किया जाएगा और ऐसे नियमों द्वारा, किसी स्थानीय क्षेत्र में, यथास्थिति क्षेत्रफल की अथवा भू-राजस्व या लगान की या दोनों की ऐसी सीमाओं का उपबन्ध हो सकेगा जिनसे नीचे कोई उपखण्ड मान्य नहीं किया जाएगा:
परन्तु किसी भू-खण्ड संख्यांक के निर्धारण की कुल रकम में भू-राजस्व निर्धारण की अवधि के दौरान तब तक कोई वृद्धि नहीं की जाएगी जब तक कि ऐसा निर्धारण इस संहिता के उपबन्धों के अधीन परिवर्तनीय न हो।
भू-खण्ड संख्यांकों तथा भू-खण्ड संख्यांकों के उपखण्डों का क्षेत्रफल तथा निर्धारण ऐसे अभिलेखों में दर्ज किया जाएगा जो कि विहित किये जाएं।
निर्धारण के प्रयोजनों के लिये किसी नगर का क्षेत्र खण्डों (ब्लाक्स) में विरचित किया जाएगा और ऐसे खण्डों को विरचित करने में, औद्योगिक, वाणिज्यिक, निवास सम्बन्धी या ऐसे अन्य विशेष प्रयोजनों के लिये जो कि विहित किये जाएं, भूमि के उपयोग को ध्यान में रखा जाएगा।
(2. छत्तीसगढ़ अधिनियम क्रमांक 32 सन् 2013 द्वारा दिनांक 19-8-2013 से विलुप्त ।)
कृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग की जा रही भूमि का उचित निर्धारण, धारा 81 में दिये गये सिद्धान्तों और निर्बन्धनों के अनुसार, संगणित तथा नियत किया जायेगा और गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग की जा रही भूमि का उचित निर्धारण, धारा 59 के अधीन बनाये गये नियमों के अनुसार नियत किया जायेगा।
(2. छत्तीसगढ़ अधिनियम क्रमांक 32 सन् 2013 द्वारा दिनांक 19-8-2013 से विलुप्त ।)
उन भूमियों की दशा में, जिन पर निर्धारण किसी ऐसे प्रयोजन के लिए किया जा रहा है जिसके कि संबंध में उनका निर्धारण पुनरीक्षण के ठीक पूर्व किया जा चुका था, वह निर्धारण जो कि इस प्रकार संगणित किया गया हो, कृषि भूमि की दशा में, उस भू-राजस्व या लगान के जो पुनरीक्षण के ठीक पूर्व देय हो, डेढ़ गुने से अधिक होता हो; तथा अन्य भूमियों की दशा में, उस भू-राजस्व या लगान के जो पुनरीक्षण के ठीक पूर्व देय हो, छः गुने से अधिक होता हो, तो निर्धारण कृषि भूमि की दशा में ऐसे भू-राजस्व या लगान के ढेढ़ गुने के हिसाब से तथा अन्य भूमियों की दशा में, ऐसे भू-राजस्व या लगान के छः गुने के हिसाब से नियत किया जायेगा:
परन्तु जहां कृषि के प्रयोजन के लिए धारित किसी खाते में उसके धारक द्वारा या उसके धारक के व्यय पर किसी भी समय कोई सुधार किया गया हो, वहां ऐसे खाते का निर्धारण इस प्रकार नियत किया जायेगा मानो कि वह सुधार नहीं किया गया था।
धारा 100 के अधीन नियत किया गया निर्धारण, तीस वर्ष की कालावधि तक या ऐसी दीर्घतर कालावधि तक, जो कि उस कालावधि के पश्चात् पुनर्निर्धारण किये जाने के पूर्व बीत जाए, प्रवृत्त रहेगा और ऐसी कालावधि को, समस्त प्रयोजनों के लिए, भू-राजस्व निर्धारण की अवधि समझा जाएगा।
धारा 100 के अधीन नियत किया गया निर्धारण, तब तक ऐसे भूखण्ड संख्यांक पर प्रतिवर्ष देय भू-राजस्व या लगान होगा जब तक कि वह इस संहिता या किसी अन्य विधि के उपबन्धों के अनुसार उपान्तरित न कर दिया जाए।
इस संहिता के प्रवृत्त होने के पूर्व किये गए बन्दोबस्त या नवीकरण के अधिकारों सहित सरकार से प्राप्त किये गए पट्टे के अधीन नगरीय क्षेत्र में की किसी भूमि के लिये नियत किया गया भू-राजस्व या लगान ऐसे बन्दोबस्त या पट्टे की अवधि का अवसान हो जाने पर भी, तब तक प्रवृत्त बना रहेगा जब तक किसी ऐसी भूमि पर निर्धारण इस अध्याय के उपबन्धों के अनुसार नियत नहीं कर दिया जाए।