धारा 27 से 43 अध्याय 4 छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959

धारा 27 से 43 अध्याय 4 छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959

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अध्याय 4

राजस्व अधिकारियों तथा राजस्व न्यायालयों की प्रक्रिया

27. जांच करने के लिये स्थान. –

उन कारणों के सिवाय जो कि लेखबद्ध किये जायेंगे, कोई भी राजस्व अधिकारी किसी मामले की जांच या सुनवाई अपनी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के बाहर किसी स्थान पर नहीं करेगा:

परन्तु उपखण्ड अधिकारी किसी मामले की जांच या सुनवाई उस जिले के, जिसमें कि उसे नियुक्त किया गया है, भीतर किसी स्थान पर कर करेगा।

28. भूमि पर प्रवेश करने तथा उसका सर्वेक्षण करने की शक्ति -

समस्त राजस्व अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, भू-मापक तथा पटवारी और उनके सेवक तथा कर्मकार जबकि वे उनके पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण के अधीन हों, उस स्थिति में जबकि उन्हें ऐसा निदेश दिया जाय भूमि पर प्रवेश कर सकेंगे तथा उसका सर्वेक्षण कर सकेंगे और सीमांकन कर सकेंगे एवं इस संहिता या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति के अधीन अपने कर्तव्यों से संबंधित अन्य कार्य कर सकेंगे और ऐसा करने में उस नुकसान से अधिक नुकसान करित नहीं करेंगे जो कि उनके कर्तव्यों के सम्यक् पालन के निमित्त आवश्यक हो:

परन्तु कोई भी व्यक्ति किसी भवन में या किसी निवास गृह से संलग्न किसी घेरा लगे हुए प्रांगण या उद्यान में उसके अधिभोगी की सम्मति के बिना तथा ऐसे अधिभोगी को कम से कम चौबीस घण्टे की सूचना दिये बिना प्रवेश नहीं करेगा और ऐसे प्रवेश के समय अधिभोगी की सामाजिक तथा धार्मिक भावनाओं का सम्यक् ध्यान रखा जायेगा।

29. मामलों को अन्तरित करने की शक्ति. -

(1) जब कभी मण्डल को यह प्रतीत हो कि न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इस धारा के अधीन आदेश देना समीचीन है तो वह यह निदेश दे सकेगा कि कोई विशिष्ट मामला एक राजस्व अधिकारी के पास से उसी जिले के या किसी अन्य जिले के समान या वरिष्ठ पद श्रेणी के किसी अन्य राजस्व अधिकारी को अन्तरित कर दिया जाय।

(2) आयुक्त इस सम्बन्ध में उसको किए गए आवेदन पर यदि उसकी यह राय हो कि न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए यह समीचीन है, यह आदेश दे सकेगा कि कोई विशिष्ट मामला एक राजस्व अधिकारी के पास से उसी जिले के या उसी संभाग के किसी अन्य जिले के समान या वरिष्ठ पद श्रेणी के किसी अन्य राजस्व अधिकारी को अन्तरित कर दिया जाए।

30. अधीनस्थों को तथा उनके पास से मामले अन्तरित करने की शक्ति. -

(1) कलेक्टर या उपखण्ड अधिकारी, इस संहिता के या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति के उपबन्धों के अधीन उद्भूत होने वाले किसी मामले को या किसी वर्ग के मामलों को अपनी फाइल से अपने अधीनस्थ किसी ऐसे राजस्व अधिकारी को, जो कि ऐसे मामले या ऐसे वर्ग के मामलों को विनिश्चित करने के लिए सक्षम है, विनिश्चिय के लिए सौंप सकेगा या किसी मामले या किसी वर्ग के मामलों को किसी ऐसे राजस्व अधिकारी के पास से वापस कर सकेगा और ऐसे मामले या ऐसे वर्ग के मामलों के सम्बन्ध में स्वयं कार्यवाही कर सकेगा या उन्हें निपटारे के लिये अपने अधीनस्थ किसी ऐसे अन्य राजस्व अधिकारी को, जो ऐसे मामले या ऐसे वर्ग के मामलों को विनिश्चिय करने के लिए सक्षम है, निदेशित कर सकेगा।

(2) आयुक्त, कलेक्टर, उपखण्ड अधिकारी या तहसीलदार, इस संहिता के या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति के उपबंधों के अधीन उद्भूत होने वाले किसी मामले को या किसी वर्ग के मामलों को अपनी फाइल से अपने अधीनस्थ किसी राजस्व अधिकारी को जांच तथा रिपोर्ट के लिये सौंप सकेगा।

31. मण्डल तथा राजस्व अधिकारियों को न्यायालयों की प्रास्थिति का प्रदान किया जाना. -

मण्डल या राजस्व अधिकारी जबकि वह राज्य सरकार तथा किसी व्यक्ति के बीच या किन्हीं कार्यवाहियों के पक्षकारों के बीच अवधारण के लिए उद्भूत होने वाले किसी प्रश्न की जांच करने या उसे विनिश्चित करने के लिये इस संहिता या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति के अधीन शक्ति का प्रयोग कर रहा हो, राजस्व न्यायालय होगा।

32. राजस्व न्यायालयों की अंतर्निहित शक्ति —

इस संहिता की किसी भी बात के संबंध में यह नहीं समझा जायगा कि वह ऐसे आदेश जो कि न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए या न्यायालय की प्रक्रिया के दुरुपयोग के निवारण के लिये आवश्यक हैं, देने की राजस्व न्यायालय की अन्तनिर्हित शक्ति को सीमित करती है या उसे अन्यथा प्रभावित करती है।

33. व्यक्तियों के हाजिर होने तथा दस्तावेजें पेश किये जाने की अपेक्षा करने तथा साक्ष्य लेने की राजस्व अधिकारियों की शक्तियां. -

(1) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 1908 का संख्यांक 5) की धारा 132 तथा 133 के उपबन्धों तथा धारा 258 के अधीन बनाये गये नियमों के अध्यधीन रहते हुए, राजस्व न्यायालय के रूप में कार्य करने वाले प्रत्येक राजस्व अधिकारी को यह शक्ति होगी कि वह इस संहिता या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति के अधीन उद्भूत होने वाली किसी जांच या मामले के प्रयोजनों के लिये साक्ष्य ले, किसी ऐसे व्यक्ति को समन करे जिसकी कि हाजिरी या तो पक्षकार के रूप में परीक्षा की जाने के लिये या साक्षी के रूप में साक्ष्य देने के लिए या कोई दस्तावेज पेश करने के लिए वह आवश्यक समझे।

(2) किसी व्यक्ति को स्वयं हाजिर होने के लिये तब तक आदिष्ट नहीं किया जायगा जब तक कि ऐसा व्यक्ति-

() उस दशा में जब कि राजस्व न्यायालय के रूप में कार्य करने वाला राजस्व अधिकारी नायब तहसीलदार है तहसील की सीमाओं के भीतर और उस दशा में जबकि राजस्व न्यायालय के रूप में कार्य करने वाला कोई अन्य राजस्व अधिकारी है, उसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर निवास नहीं करता है; या

(ख) ऐसी सीमाओं के बाहर किन्तु ऐसे स्थान में निवास नहीं करता है जिसके तथा उस स्थान के, जहां कि हाजिर होने के लिए उसे समन किया गया है, बीच की दूरी पचास मील से कम है या उस दशा में दो सौ मील से कम है जबकि उस स्थान के, जहां कि वह निवास करता है तथा उस स्थान के जहां कि हाजिर होने के लिए उसे समन किया गया है बीच की दूरी के पांच बटे छह : भाग के लिये रेल संचार या अन्य सुस्थापित लोक प्रवहण की व्यवस्था है।

(3) कोई भी ऐसा राजस्व अधिकारी उपस्थित किसी भी व्यक्ति से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह साक्ष्य दे अथवा अपने कब्जे या अधिकार में होने वाली किसी दस्तावेज को तत्काल वहीं पेश करे।

(4) प्रत्येक ऐसे राजस्व अधिकारी को यह शक्ति होगी कि वह किसी भी ऐसे व्यक्ति की, जिसे न्यायालय में हाजिर होने से छूट मिली हुई है या जिसे स्वयं हाजिर होने के लिए आदिष्ट नहीं किया जा सकता है या जो रुग्णता या अंगशैथिल्य के कारण हाजिर होने में असमर्थ है, परीक्षा करने के लिए कमीशन जारी करे।

34. साक्षी को हाजिर होने के लिए विवश करना. -

यदि कोई व्यक्ति, जिस पर साक्षी के रूप में हाजिर होने के लिए या कोई दस्तावेज पेश करने के लिए समन तामील किया गया है, समन का अनुपालन करने में चूक करेगा तो वह अधिकारी जिसके द्वारा धारा 33 के अधीन समन जारी किया गया है :-

(क) गिरफ्तारी या जमानतीय वारण्ट जारी कर सकेगा;

(ख) उक्त व्यक्ति को यह आदेश दे सकेगा कि वह उपसंजाति के लिए प्रतिभूति दे; या

(ग) उक्त व्यक्ति पर एक हजार रुपये से अनधिक जुर्माना अधिरोपित कर सकेगा।

35. पक्षकार की अनुपस्थिति में सुनवाई –

(1) यदि राजस्व अधिकारी किसी मामले या कार्यवाही की सुनवाई के लिए नियत की गई तारीख को यह पाये कि किसी पक्षकार पर समन या सूचना की तामील इसलिए नहीं हुई थी कि विरोधी पक्षकार ने ऐसी तामील के लिए अपेक्षित आदेशिका फीस का भुगतान नहीं किया था, तो उस मामले या कार्यवाही को ऐसी आदेशिका फीस का भुगतान न किया जाने के कारण खारिज किया जा सकेगा।

(2) यदि राजस्व अधिकारी के समक्ष के मामले या कार्यवाही का कोई पक्षकार उस पर सूचना या समन का सम्यक् तामील हो जाने के पश्चात् उस तारीख को, जो सुनवाई के लिए नियत की गई है, उपसंजात नहीं होता है तो वह मामला यथास्थिति उसकी अनुपस्थिति में सुना तथा अवधारित किया जा सकेगा या अनुपस्थिति के कारण खारिज किया जा सकेगा।

(3) वह पक्षकार, जिसके विरुद्ध उपधारा (1) या (2) के अधीन कोई आदेश पारित किया गया है, ऐसे शपथपत्र सहित आवेदन की तारीख से या उस दशा में जबकि सूचना या समन की सम्यक् रूप से तामील न की गई हो, उस आदेश के जानकारी में आने की तारीख से तीस दिन के भीतर उसे अपास्त कराने के लिये आवेदन इस आधार पर कर सकेगा कि वह विरोधी पक्षकार पर समन या सूचना की तामील के लिए अपेक्षित आदेशिका फीस का भुगतान करने से या सुनवाई में उपसंजात होने से किसी पर्याप्त हेतुक से निवारित रहा था और राजस्व अधिकारी, उस विरोधी पक्षकार को, जो उस तारीख को उपस्थित था जिसको कि ऐसा आदेश पारित किया गया था सूचना देने के पश्चात् तथा ऐसी जांच करने के पश्चात् जैसी कि वह आवश्यक समझे, पारित किये गये आदेश को अपास्त कर सकेगा।

(4) जहाँ उपधारा (3) के अधीन फाइल किया गया आवेदन नामंजूर कर दिया जाता है, वहां व्यथित पक्षकार उस प्राधिकारी को अपील फाइल कर सकेगा जिसको कि ऐसे अधिकारी द्वारा पारित किए गए मूल आदेश के विरुद्ध अपील होती है।

(5) उपधारा (4) में यथा उपबंधित के सिवाय या उस दशा में के सिवाय जब किसी राजस्व अधिकारी के समक्ष के किसी मामले या कार्यवाही का गुणागुण के आधार पर विनिश्चय किया गया है, इस धारा के अधीन पारित किये गये किसी आदेश के विरुद्ध, कोई अपील नहीं होगी।

36. सुनवाई का स्थगन -

राजस्व अधिकारी, समय-समय पर अपने समक्ष के किसी मामले या कार्यवाही की सुनवाई को, अभिलिखित किये जाने वाले कारणों से और खर्चे विषयक निबन्धनों पर, स्थगित कर सकेगा

परन्तु प्रत्येक पक्ष को, कार्यवाहियों के दौरान अधिकतम चार स्थगन दिये जा सकेंगे और प्रत्येक स्थगन केवल खर्चे के साथ प्रदान किया जायेगा।

(2) किसी मामले या कार्यवाही की स्थगित सुनवाई की तारीख तथा स्थान उपस्थित पक्षकारों तथा साक्षियों को ऐसे स्थगन के समय प्रज्ञापित कर दिया जायेगा।

37. खर्चा दिलवाने की शक्ति -

राजस्व अधिकारी इस संहिता या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति के अधीन उद्भूत होने वाले किसी मामले या कार्यवाही में उपगत किये गए खर्चे ऐसी रीति में तथा ऐसे परिमाण तक, जैसा कि वह ठीक समझे, दिलवा सकेगा:

परन्तु किसी विधि व्यवसायी की फीस किसी ऐसे मामले या कार्यवाही में खर्चे के रूप में तब तक नहीं दिलवाई जायगी जब तक कि ऐसा अधिकारी, उन कारणों से जो कि उसके द्वारा लेखबद्ध किए जाएंगे अन्यथा न समझता हो।

38. स्थावर संपत्ति का कब्जा परिदत्त करने विषयक आदेश को निष्पादित करने की रीति. -

जहां स्थावर संपत्ति का कब्जा परिदत्त करने का आदेश किसी व्यक्ति के विरुद्ध इस संहिता के अधीन पारित किया गया हो, वहां ऐसा आदेश निम्नलिखित रीति में निष्पादित किया जायगा, अर्थात् :-

(क) कब्जाधारी व्यक्ति या व्यक्तियों पर ऐसी सूचना तामील करके जिसमें उनसे यह अपेक्षा की जाएगी कि वे उक्त सूचना प्राप्त होने के पश्चात् ऐसे समय के भीतर, जो युक्तियुक्त प्रतीत हो, भूमि को खाली कर दें; और

(ख) यदि ऐसी सूचना का पालन नहीं किया जाता है तो किसी ऐसे व्यक्ति को, जो उस भूमि को खाली करने से इंकार करता है, हटाकर या उसे हटाने के लिए किसी अधीनस्थ को प्रतिनियुक्त करके; और

(ग) यदि किसी ऐसे व्यक्ति को हटाने वाले अधिकारी का किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिरोध किया जाता है या उसे किसी व्यक्ति द्वारा बाधा पहुंचाई जाती है तो राजस्व अधिकारी मामले के तथ्यों की संक्षिप्त जांच करेगा और यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि ऐसे प्रतिरोध या बाधा के लिए कोई न्यायसंगत हेतुक नहीं था, और यह कि ऐसा प्रतिरोध या बाधा अब भी चालू है तो वह ऐसे प्रतिरोध या ऐसी बाधा के लिए दण्डित किये जाने के संबंध में किन्हीं भी ऐसी कार्यवाहियों पर, जिनके लिए वह तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन दायी है, प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसी कार्यवाही कर सकेगा या करवा सकेगा या ऐसा बल प्रयोग कर सकेगा या करवा सकेगा जो कि ऐसे अधिकारी की राय में उस आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए युक्तियुक्त रूप से आवश्यक हो।

39. वे व्यक्ति जिनके द्वारा राजस्व अधिकारियों के समक्ष उपसंजातियां की जा सकेंगी और आवेदन किये जा सकेंगे. -

तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति में अन्यथा उपबंधित के सिवाय इस संहिता या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति के अधीन किसी राजस्व अधिकारी के समक्ष समस्त उपसंजातियां, उसको किए जाने वाले समस्त आवेदन तथा उनके समक्ष किए जाने वाले समस्त कार्य पक्षकारों द्वारा स्वयं या उनके मान्यता प्राप्त अभिकर्ताओं द्वारा या किसी विधि व्यवसायी द्वारा किए जा सकेंगे:

परन्तु सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 1908 का संख्यांक 5) की धारा 132 तथा 133 के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, कोई भी ऐसी उपसंजाति यदि राजस्व अधिकारी ऐसा निदेश दे, पक्षकार को स्वयं करनी होगी: 

परन्तु यह और भी धारा 2 की उपधारा (1) के खण्ड (द) की मद (दो) के अन्तर्गत आने वाले मान्यता प्राप्त अभिकर्ता द्वारा केवल उपसंजाति ही की जा सकेगी।

40. अनुसूची 1 में के नियमों का प्रभाव. -

अनुसूची 1 में के नियम, जब तक कि वे बातिल या परिवर्तित न कर दिये जायें, इस प्रकार प्रभावशील होंगे मानो कि वे इस संहिता के कलेवर में अधिनियमित किए गए हैं।

41. छत्तीसगढ़ अधिनियम क्रमांक 6 सन् 2022 द्वारा दिनांक 4-5-2022 से विलुप्त 

42. राजस्व अधिकारी के आदेश गलती या अनियमितता के कारण कब उलटने योग्य होंगे. -

राजस्व अधिकारी द्वारा पारित किये गये किसी भी आदेश को इस कारण कि समन, सूचना, उद्घोषणा, वारंट या उक्त आदेश में या किसी जांच के पूर्व की या उसके दौरान की अन्य कार्यवाहियों में या इस संहिता के अधीन की अन्य कार्यवाहियों में कोई गलती, लोप या अनियमितता है, किसी अपील या पुनरीक्षण में तब तक उलटा नहीं जायगा या परिवर्तित नहीं किया जायगा जब तक कि ऐसी गलती, लोप या अनियमितता के कारण वस्तुतः न्याय न हो पाया हो।

स्पष्टीकरण. -

इस बात का अवधारण करने में कि क्या संहिता के अधीन की किन्हीं कार्यवाहियों में किसी गलती, लोप या अनियमितता के कारण न्याय नहीं हो पाया है, इस तथ्य का ध्यान रखा जायगा कि क्या उन कार्यवाहियों में किसी पूर्वतर प्रक्रम पर आपत्ति उठाई जा सकती थी तथा उठाई जानी चाहिये थी।

43. इस संहिता में किसी अभिव्यक्त उपबन्ध के होने की दशा में सिविल प्रक्रिया संहिता का लागू होना. -

जब तक कि इस संहिता में अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबन्धित न हो, इस संहिता के अधीन की समस्त कार्यवाहियों में, यावतशक्य, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का संख्यांक 5) में अधिकथित की गई प्रक्रिया का अनुसरण किया जायगा।

 

 

 

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