धारा 137 से 156 अध्याय 11 छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959

धारा 137 से 156 अध्याय 11 छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959

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 अध्याय 11

भू-राजस्व की उगाही

137. भू-राजस्व भूमि पर प्रथम भार होगा. –

किसी भूमि पर निर्धारित किया गया भू-राजस्व उस भूमि पर तथा उसके लगानों एवं लाभों पर प्रथम भार होगा।

138. भू-राजस्व के भुगतान के लिये उत्तरदायित्व -

(1) किसी खाते पर निर्धारित किये गए भू-राजस्व के भुगतान के लिये निम्नलिखित व्यक्ति मुख्यतः दायी होंगे :-

() भूमिस्वामी के खाते के मामले में, भूमिस्वामी,

() किसी ऐसे खाते के मामले में, जो राज्य सरकार द्वारा पट्टे पर दी गई भूमि से मिलकर बनता हो, उसका पट्टेदार।

(2) जब किसी खाते में एक से अधिक भूमिस्वामी या पट्टेदार हों तो ऐसे खाते पर निर्धारित किये गए भू-राजस्व के भुगतान के लिये यथास्थिति ऐसे समस्त भूमिस्वामी या पट्टेदार, संयुक्ततः और पृथक्त दायी होंगे।

139. भू-राजस्व कब्जा रखने वाले किसी भी व्यक्ति से वसूल किया जाएगा. -

किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो धारा 138 के अधीन मुख्यतः दायी है, व्यतिक्रम किया जाने की दशा में, भू- राजस्व, जिसके अन्तर्गत बकाया भी है, कब्जा रखने वाले किसी भी व्यक्ति से वसूल किया जा सकेगा :

परन्तु ऐसा व्यक्ति उससे वसूल की गई रकम को मुख्यतः दायी व्यक्ति से मुजरा कराने का हकदार होगा।

140. तारीख जिसको भू-राजस्व शोध्य होगा तथा देय होगा. -

(1) किसी राजस्व वर्ष के मद्दे देय भू-राजस्व उस वर्ष के प्रथम दिन शोध्य हो जाएगा।

(2) राज्य सरकार, भू-राजस्व का भुगतान किश्तों में तथा राजस्व वर्ष के प्रथम दिन की पश्चात्वर्ती तारीखों को (जो इसमें इसके पश्चात् विहित तारीखों के नाम से निर्दिष्ट हैं) किए जाने हेतु उपबन्ध करते हुए नियम बना सकेगी, और ऐसे नियमों में वे व्यक्ति जिनको तथा वे स्थान जहाँ ऐसी किश्तों का भुगतान किया जाएगा, विहित किए जा सकेंगे।

(3) उपधारा (2) के अधीन विहित किए गए व्यक्ति को भू-राजस्व का भुगतान नकदी में किया जा सकेगा या विप्रेषक के खर्चे पर मनीआर्डर द्वारा विप्रेषित किया जा सकेगा।

(4) राजस्व वर्ष के प्रथम दिन तथा ऐसे नियमों द्वारा भू-राजस्व के भुगतान के लिये नियत की गई किसी तारीख के बीच बीतने वाली कोई कालावधि अनुग्रह की कालावधि समझी जाएगी, और वह उपधारा (1) के उपबन्धों पर प्रभाव नहीं डालेगी।

141. 'बकाया' तथा 'बकायादार' की परिभाषाएँ. -

कोई भी भू-राजस्व, जो शोध्य हो और जिसका भुगतान विहित तारीख को या उसके पूर्व किया गया हो, उस तारीख से बकाया हो जाता है, और उसके लिये उत्तरदायी व्यक्ति, चाहे वे धारा 138 के उपबन्धों के अधीन उत्तरदायी हों या धारा 139 के उपबन्धों के अधीन, बकायादार हो जाते हैं।

142. पटेल, पटवारी, ग्रामसभा या ग्राम पंचायत रसीद देने के लिये आबद्ध होगी. -

(1) जहाँ कोई पटेल, पटवारी, ग्रामसभा या ग्राम पंचायत किसी व्यक्ति से भू-राजस्व के मद्दे या भू- राजस्व के बकाया के तौर पर वसूली योग्य किसी धनराशि के मद्दे कोई भुगतान प्राप्त करे, वहाँ वह ऐसी राशि के लिए रसीद विहित प्ररूप में देगी।

(2) यदि कोई पटेल, पटवारी, ग्रामसभा या ग्राम पंचायत उपधारा (1) द्वारा अपेक्षित किए गए अनुसार रसीद नहीं देती है तो यथास्थिति ऐसा पटेल, पटवारी या ग्राम सभा या ग्राम पंचायत की दशा में, वह व्यक्ति जो ऐसी ग्राम सभा या ग्राम पंचायत की ओर से ऐसी रसीद देने के लिए उत्तरदायी है, भुगतानकर्ता के आवेदन पर तहसीलदार के आदेश से ऐसी शास्ति का भुगतान करने का दायी होगा जो भुगतान की गई रकम के दुगुने से अधिक नहीं होगी।

143. भू-राजस्व के भुगतान में व्यतिक्रम के लिये शास्ति. -

यदि भू-राजस्व की किसी किश्त का या उसके किसी भाग का भुगतान विहित तारीख के पश्चात् एक मास के भीतर किया जाए तो उपखण्ड अधिकारी, जानबूझ कर व्यतिक्रम करने वाले व्यक्ति के मामले में ऐसी शास्ति अधिरोपित कर सकेगा जो उस रकम से, जिसका कि इस प्रकार भुगतान किया गया हो,अधिक नहीं होगी:

परन्तु कोई भी ऐसी शास्ति, किसी भी ऐसी किस्त का, जिसका कि भुगतान सरकार के आदेश से निलम्बित कर दिया गया हो, भुगतान किया जाने के कारण उस कालावधि की बाबत अधिरोपित नहीं की जाएगी जिसके कि दौरान वह भुगतान निलम्बित रहा हो।

144. फसलों के मारे जाने पर भू-राजस्व की माफी या उसका निलम्बन. -

(1) राज्य सरकार, उन वर्षों में, जिनमें किसी क्षेत्र में फसलें मारी गई हों या जिन वर्षों में किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा किसी विधि के अधीन किए गए किसी आदेश के परिणामस्वरूप, किसी क्षेत्र में फसलें नहीं उगाई जा सकी हों, भू-राजस्व की माफी या उसका निलम्बन कर सकेंगी, और ऐसी माफी या निलम्बन का अवधारण इस संहिता के अधीन बनाये गए नियमों के अनुसार किया जाएगा।

(2) किसी राजस्व अधिकारी द्वारा ऐसे नियमों के अधीनं पारित किए गए किसी आदेश के विरुद्ध कोई अपील या पुनरीक्षण नहीं होगा और किसी ऐसे आदेश का प्रतिवाद करने के लिये किसी सिविल न्यायालय में कोई वाद नहीं होगा।

145. प्रमाणित लेखा बकाया तथा बकायादार के बारे में साक्ष्य होगा. -

(1) कलेक्टर या तहसीलदार द्वारा प्रमाणित किए गए लेखा विवरण के बारे में, जब तक कि तत्प्रतिकूल साबित कर दिया जाए, इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए यह उपधारित किया जाएगा कि वह सरकार को देय बकाया या उसकी रकम का तथा उस व्यक्ति का, जो बकायादार है, सही विवरण है।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट किया गया विवरण तैयार करने के पूर्व बकायादार को कोई सूचना देना आवश्यक नहीं होगा।

146. माँग की सूचना -

तहसीलदार या नायब तहसीलदार, बकाया की वसूली के लिये धारा 147 के अधीन कोई आदेशिका जारी होने के पूर्व किसी बकायादार पर माँग की सूचना तामील करवा सकेगा।

147. बकाया की वसूली के लिए आदेशिका. -

सरकार को देय भू-राजस्व का बकाया तहसीलदार द्वारा निम्नलिखित आदेशिकाओं में से किसी एक या अधिक आदेशिकाओं द्वारा वसूल किया जा सकेगा-

() जंगम सम्पत्ति की कुर्की तथा विक्रय द्वारा;

() उस खाते की, जिस पर बकाया शोध्य है, कुर्की तथा विक्रय द्वारा और जहाँ ऐसा खाता एक से अधिक सर्वेक्षण-संख्यांकों या भू-खण्ड संख्यांकों से मिलकर बना हो, वहाँ ऐसे सर्वेक्षण- संख्यांकों या भू-खण्ड संख्यांकों में से एक या अधिक सर्वेक्षण-संख्यांकों या भू-खण्ड संख्यांकों के, जैसा भी कि उस बकाया को वसूल करने के लिये आवश्यक समझा जाए, विक्रय द्वारा:

परन्तु किसी सहकारी सोसाइटी के किन्हीं शोध्यों की वसूली के लिए किसी भी खाते का विक्रय, धारा 154 में विहित प्रक्रिया को पहले निःशेष किए बिना नहीं किया जाएगा।

(खख) उस खाते की, जिस पर कि बकाया शोध्य हो, कुर्की द्वारा तथा उसे धारा 154 के अधीन पट्टे पर देकर;

(खखख) बकायादार के किसी अन्य खाते की, जो कृषि के प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाया जाता हो, कुर्की द्वारा तथा उसे धारा 154 - के अधीन पट्टे पर देकर;

() बकायादार की किसी अन्य स्थावर सम्पत्ति की कुर्की तथा विक्रय द्वारा: परन्तु खण्ड () तथा () में विनिर्दिष्ट की गई आदेशिकाओं से निम्नलिखित की कुर्की तथा विक्रय नहीं हो सकेगा, अर्थात् :-

(एक) बकायादार, उसकी पत्नी और उसके बच्चों के पहनने के आवश्यक वस्त्र, भोजन बनाने के बर्तन, चारपाइयाँ तथा बिछौने और ऐसे निजी आभूषण जिन्हें कोई स्त्री धार्मिक प्रथा के अनुसार अपने से पृथक् नहीं कर सकती;

(दो) शिल्पियों के औजार, और यदि बकायादार कृषक है तो यांत्रिक शक्ति द्वारा चालित उपकरण के अतिरिक्त उसके खेती के उपकरण और ऐसे मवेशी तथा बीज जो तहसीलदार की राय में, उसे उस हैसियत में अपनी जीविका उपार्जित करने में समर्थ बनाने के लिए आवश्यक हों;

(तीन) वे वस्तुयें जो केवल धार्मिक विन्यासों के उपयोग के लिये पृथक् रख दी गई हों;

(चार) किसी कृषक के तथा उसके अधिभोग में के गृह तथा अन्य भवन (उनकी सामग्रियों तथा उनके स्थलों सहित एवं उस भूमि सहित जो कि उनसे बिल्कुल लगी हुई हो तथा उनके उपयोग के लिए आवश्यक हो):

परन्तु यह और भी कि खण्ड () में विनिर्दिष्ट की गई आदेशिका खाते की कुर्की तथा विक्रय की अनुज्ञा उस दशा में नहीं देगी जहाँ कि बकायादार-

(एक) अनुसूचित क्षेत्रों में छः हेक्टर या : हेक्टर से कम भूमि; या

(दो) अन्य क्षेत्रों में, चार हेक्टर या चार हेक्टर से कम भूमि, धारण करता हो।

स्पष्टीकरण. - इस परन्तुक के प्रयोजन के लिये 'अनुसूचित क्षेत्र' से अभिप्रेत है कोई ऐसा क्षेत्र जो भारत के संविधान की पंचम अनुसूची की कंडिका 6 के अधीन छत्तीसगढ़ राज्य के भीतर अनुसूचित क्षेत्र घोषित किया गया हो।

148. खर्चे बकाया के भाग के रूप में वसूल किये जा सकेंगे. -

धारा 146 के अधीन माँग की सूचना तामील करने का या धारा 147 में की कोई आदेशिका जारी करने तथा प्रवर्तित करने का खर्च उस बकाया के, जिसकी कि बाबत उस सूचना की तामील की गई थी या वह आदेशिका जारी की गई थी, भाग के रूप में वसूल किया जा सकेगा।

149. अन्य जिलों में आदेशिकाओं का प्रवर्तन. -

धारा 147 के खण्ड () तथा () में विनिर्दिष्ट की गई आदेशिकाएँ या तो उस जिले में, जिसमें कि व्यतिक्रम किया गया है या किसी अन्य जिले में प्रवर्तित कराई जा सकेंगी।

150. अभ्यापत्ति के साथ भुगतान तथा वसूली के लिये वाद. -

(1) यदि भू-राजस्व की बकाया की वसूली के लिए किसी व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाहियाँ इस अध्याय के अधीन की जाती हैं, तो वह व्यक्ति, सम्पत्ति के विक्रय की बोली ख़त्म होने के पूर्व किसी भी समय, उस रकम का, जिसका कि दावा किया गया है, भुगतान कर सकेगा और उसी समय, स्वयं द्वारा या अपने प्राधिकृत अभिकर्ता द्वारा हस्ताक्षरित अभ्यापत्ति ऐसी कार्यवाहियाँ करने वाले राजस्व अधिकारी को परिदत्त कर सकेगा, और तदुपरि वे कार्यवाहियाँ रोक दी जाएँगी।

(2) उपधारा (1) के उपबन्धों का अनुपालन करने वाला कोई भी व्यक्ति, धारा 145 में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, उपखण्ड अधिकारी को इस आशय का आवेदन कर सकेगा कि कुछ भी शोध्य नहीं था या यह कि शोध्य रकम उस रकम से कम थी जिसकी कि वसूली के लिए कार्यवाहियाँ की गई थीं और उपखण्ड अधिकारी इस प्रकार उठाई गई आपत्ति को विनिश्चित करेगा।

(3) उपखण्ड अधिकारी के उस आदेश के विरुद्ध कोई अपील नहीं होगी जो कि उपधारा (2) के अधीन पारित किया गया हो, किन्तु सम्बन्धित व्यक्ति अभ्यापत्ति के साथ भुगतान की गई राशि या, उसके भाग की वसूली के लिए सिविल वाद संस्थित कर सकेगा।

151. विक्रय आगमों का उपयोजन. -

(1) इस अध्याय के अधीन के प्रत्येक विक्रय के आगम, प्रथमतः, उस बकाया की, जिसके कि कारण विक्रय किया गया था तथा ऐसे विक्रय के व्ययों की तुष्टि के लिए, द्वितीयतः, संबंधित क्षेत्र में तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन बकायादार से शोध्य उपकरों की किसी बकाया के भुगतान के लिए, तृतीयतः बकायादार द्वारा राज्य सरकार को देय किसी अन्य बकाया के भुगतान के लिए, और चतुर्थतः बकायादार से किसी सहकारी सोसाइटी को शोध्य किसी बकाया के भुगतान के लिए उपयोजित किये जाएँगे, और इसके बाद यदि कोई अधिशेष हो, तो वह उसको, या जहां एक से अधिक बकायादार हों, वहां ऐसे बकायादारों को उनके अपने-अपने उन अंशों के अनुसार देय होगा जो कि वे बेची गई सम्पत्ति में रखते हों:

परन्तु ऐसे अधिशेष का बकायादार या बकायादारों को भुगतान तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि जंगम संपत्ति के मामले में विक्रय की तारीख से, या स्थावर सम्पत्ति के मामले में विक्रय के पुष्टिकरण की तारीख से दो मास का अवसान हो गया हो।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, धारा 147 के खण्ड () के अधीन विक्रय के आगम, प्रथमतः, बेची गई स्थावर सम्पत्ति की बाबत विक्रय की तारीख तक के लिये बकायादार द्वारा देय भू-राजस्व की बकाया के भुगतान के लिए उपयोजित किए जाएँगे और अधिशेष, यदि कोई हो, उपधारा (1) के अनुसार उपयोजित किया जाएगा।

152. बकाया के लिये बेची गई भूमि विल्लंगमों ( एन्कंब्रेसेज ) से मुक्त होगी. -

(1) जब तक उपखण्ड अधिकारी विक्रय का आदेश देते समय अन्यथा निदेश दे, उस भूमि का जो उसके संबंध में शोध्य भू-राजस्व के बकाया के लिए बेची गई हो, क्रेता, उस भूमि को उन समस्त विल्लंगमों से, जो क्रेता से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा उस भूमि पर अधिरोपित किए गए हों, तथा उन समस्त अनुदानों एवं संविदाओं से, जो क्रेता से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा उस भूमि की बाबत की गई हों, मुक्त रूप से अर्जित करेगा।

(2) किन्हीं ऐसे वृक्षों के या किन्हीं ऐसे वृक्षों की उपज के, जो उस भूमि के, जिसमें कि वे खड़े हैं, भूमिस्वामी की सम्पत्ति हों या किसी समय सम्पत्ति रहे हों, संबंध में किए गए किसी अन्तरण, अनुदान या संविदा के संबंध में यह समझा जाएगा कि वह ऐसा अनुदान या संविदा है जो ऐसी भूमि के संबंध में उपधारा (1) के तात्पर्य के अन्तर्गत की गई है।

153. क्रेता का हक -

जहाँ स्थावर सम्पत्ति का विक्रय इस अध्याय के उपबन्धों के अधीन किया जाता है और ऐसा विक्रय पूर्ण हो गया है, वहाँ वह सम्पत्ति क्रेता में उस समय से निहित हो गई समझी जाएगी जबकि सम्पत्ति का विक्रय किया गया हो कि उस समय से जब कि विक्रय पूर्ण हो जाता है।

154. क्रेता विक्रय से पूर्व शोध्य भू-राजस्व के लिये दायी नहीं होगा. –

धारा 138 या धारा 139 में किसी बात के होते हुए भी क्रय के प्रमाणपत्र में नामित व्यक्ति उस भू-राजस्व के लिये दायी नहीं होगा जो विक्रय की तारीख से पूर्व की किसी कालावधि के लिए उस भूमि के संबंध में देय है।

154 - . उस खाते को, जिसके संबंध में बकाया शोध्य हो, या बकायादार के किसी अन्य खाते को पट्टे पर देने की तहसीलदार की शक्तियाँ. -

(1) जहाँ किसी खाते के संबंध में भू-राजस्व का बकाया शोध्य हो या जहाँ कोई धन उसी रीति में वसूली योग्य हो जिसमें धारा 155 के अधीन भू-राजस्व का बकाया वसूल किया जाता है, वहाँ तहसीलदार, इस संहिता में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुई भी, किसी सहकारी सोसाइटी के शोध्यों को वसूली के लिए धारा 147 के खण्ड () के अधीन या खण्ड (बीबी) या खण्ड (बीबीबी) के अधीन, जैसी भी कि दशा हो, खाते को कुर्क करने के पश्चात्, उस खाते को, जिस पर बकाया शोध्य है, या बकायादार के किसी ऐसे अन्य खाते को, जो कृषि के प्रयोजन के लिए उपयोग में लाया जाता है, बकायादार से भिन्न किसी व्यक्ति को ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर जो कलेक्टर नियत करे, दस वर्ष से अनधिक ऐसी कालावधि के लिए पट्टे पर दे सकेगा जो ठीक आगामी कृषि वर्ष के प्रथम दिन से प्रारम्भ होती हो

परन्तु किसी सहकारी सोसाइटी के शोध्यों की वसूली के लिये कुर्क किया गया खाता दस वर्ष से अधिक कालावधि के लिए पट्टे पर दिया जाएगा:

परन्तु यह और भी कि किसी ऐसे भूमिस्वामी के, जो ऐसी जनजाति का सदस्य है जो धारा 165 की उपधारा (6) के अधीन आदिम जनजाति घोषित की गई है, खाते की कोई भूमि, ऐसी जनजाति के सदस्य से भिन्न किसी व्यक्ति को पट्टे पर नहीं दी जाएगी।

(2) इस धारा की कोई भी बात किसी ऐसे व्यक्ति के दायित्व पर प्रभाव नहीं डालेगी जो भू- राजस्व के बकाया के भुगतान के लिए या किसी ऐसे धन के जो उसी रीति में वसूली योग्य हो जिसमें कि धारा 155 के अधीन भू-राजस्व का बकाया वसूल किया जाता है, बकाया के भुगतान के लिए इस कोड के अधीन दायी हो।

(3) पट्टे की कालावधि का अवसान होने पर, वह खाता संबंधित व्यक्ति को, ऐसे खाते के संबंध में बकाया के लिए राज्य सरकार के किसी भी दावे से मुक्त रूप में या ऐसे धनों के लिए, जो उसी रीति में वसूली योग्य हों जिसमें कि धारा 155 के अधीन भू-राजस्व बकाया वसूल किया जाता है, राज्य सरकार के या किसी भी अन्य प्राधिकारी के किसी भी दावे से मुक्त रूप में वापस दिला दिया जाएगा जिन दावों की तुष्टि के लिए कि वह खाता उपधारा (1) के अधीन पट्टे पर दिया गया थाः

परन्तु इस उपधारा में की कोई भी बात किसी सहकारी सोसाइटी के शोध्यों की वसूली के लिए कुर्क किए गए और पट्टे पर दिए गए खाते को उस स्थिति में लागू नहीं होगी, जहाँ उन शोध्यों की, जिनकी तुष्टि के लिये वह उपधारा (1) के अधीन पट्टे पर दिया गया था, पूर्णत: तुष्टि पट्टे की कालावधि का अवसान होने पर, नहीं होती है।

155. भू-राजस्व के बकाया के तौर पर वसूली योग्य धन. -

निम्नलिखित धन, यथाशक्य, इस अध्याय के उपबन्धों के अधीन उसी रीति में वसूल किया जा सकेगा जिस रीति में कि भू- राजस्व का बकाया वसूल किया जाता है-

() ऐसे प्रभारों के सिवाय जो धारा 58 की उपधारा (2) के अधीन भू-राजस्व में सम्मिलित किए गए हैं, इस संहिता या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति के अधीन देय या उद्ग्रहणीय समस्त लगान, स्वामित्व, जल की दरें, उपकर, फीस, प्रभार, प्रीमियम, शास्तियां, जुर्माने तथा खर्च;

() ऐसे समस्त धन जो किसी ऐसे अनुदान, पट्टे या संविदा के, जिसमें यह उपबन्ध हो कि वे उसी रीति में वसूल किए जा सकेंगे जिस रीति में कि भू-राजस्व का बकाया वसूल किया जाता है, अधीन राज्य सरकार को शोध्य होते हैं;

(खख) किसी प्रत्याभूति संविदा के अधीन प्रत्याभूत की गई रकम की सीमा तक राज्य सरकार द्वारा प्रत्याभूत किए गए समस्त धन जिनके संबंध में उस प्रत्याभूति - संविदा में यह उपबन्ध हो कि वे उसी रीति में वसूली योग्य होंगे जिसमें कि भू-राजस्व का बकाया वसूल किया जाता है;

() ऐसी समस्त राशियाँ जिनके बारे में इस संहिता या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति द्वारा यह घोषित किया गया हो कि वे उसी रीति में वसूली योग्य होंगी जिस रीति में कि भू-राजस्व का बकाया वसूल किया जाता है; और

() कोई ऐसी राशि जिसके बारे में राज्य के किसी क्षेत्र में तत्समय प्रवृत्त सहकारी सोसाइटियों से संबंधित किसी विधि के अधीन नियुक्त किए गए समापकं द्वारा यह आदेश दिया गया है कि वह राशि किसी सोसाइटी की आस्तियों के प्रति अभिदाय के रूप में या समापन के खर्च के रूप में वसूल की जाए:

परन्तु खण्ड () में विनिर्दिष्ट राशि की वसूली के लिए प्रस्तुत किए गए आवेदन पर तब तक कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी जब तक कि ऐसे आवेदन के साथ, ऐसी विधि के अधीन नियुक्त किए गए रजिस्ट्रार द्वारा हस्ताक्षरित इस आशय का प्रमाण-पत्र संलग्न कर दिया गया हो कि उक्त राशि भू-राजस्व के बकाया के तौर पर वसूल की जानी चाहिए;

() समस्त धन-

(एक) जो छत्तीसगढ़ स्टेट एग्रो इण्डस्ट्रीज डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा कृषकों को कृषि के या भूमि सुधार के प्रयोजनार्थ बेचे गए कृषिक उपकरणों या अन्य सामग्री के विक्रय संबंधी किसी करार के, जो कि उक्त निगम द्वारा किया गया हो, अधीन शास्ति के कारण, उक्त उपकरणों या सामग्री के दामों के कारण या अन्यथा उक्त निगम को देय होते हों;

(दो) जो उक्त निगम द्वारा दिए गए किसी उधार का या उक्त निगम के साथ किए गए किसी पट्टे, संविदा या करार के अधीन या उस निगम के किसी अन्य व्यवहार के अधीन उक्त निगम को शोध्य किसी रकम का प्रतिसंदाय करने में उक्त निगम को देय होते हों :

परन्तु इस खण्ड में विनिर्दिष्ट की गई धनराशि की वसूली के लिए प्रस्तुत किए गए आवेदन पत्र पर तब तक कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी जब तक कि ऐसे आवेदन- पत्र के साथ उक्त निगम के प्रबन्ध निदेशक द्वारा हस्ताक्षरित किया गया इस आशय का प्रमाण पत्र कि उक्त धनराशि की वसूली भू-राजस्व के बकाया की भांति की जानी चाहिए, संलग्न कर दिया गया हो;

() समस्त धन जो-

(एक) छत्तीसगढ़ लघु उद्योग निगम मर्यादित तथा छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास निगम मर्यादित द्वारा उद्यमियों को किसी उद्योग की स्थापना करने, उसका विस्तार करने या उसे चलाने के प्रयोजन के लिये या किसी उद्योग से आनुषंगिक किसी अन्य प्रयोजन के लिए बेची गई मशीनरी या अन्य सामग्रियों का भाड़ा क्रय पर या अन्यथा विक्रय किया जाने संबंधी किसी करार के, जो कि उक्त निगमों द्वारा किया गया हो, अधीन सेवा प्रभार के कारण, शास्ति के कारण, ब्याज के कारण, उक्त मशीनरी या अन्य सामग्रियों के मूल्य के कारण उक्त निगमों को देय होते हों;

(दो) छत्तीसगढ़ लघु उद्योग निगम मर्यादित तथा छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास निगम मर्यादित द्वारा किसी पट्टे, संविदा या करार के अधीन यथास्थिति भाड़े पर दिए गए या बेचे गए किसी भवन के किराये या मूल्य के कारण उक्त निगमों को देय होते हों;

(तीन) छत्तीसगढ़ लघु उद्योग निगम मर्यादित तथा छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास निगम मर्यादित द्वारा दिए गए किसी उधार का या उक्त निगमों के साथ किए गए पट्टे, संविदा या करार के अधीन या उक्त निगमों के किसी अन्य व्यवहार के अधीन उक्त निगमों को शोध्य किसी रकम का प्रतिसंदाय करने में उक्त निगमों को देय होते हों :

परन्तु इस खण्ड में विनिर्दिष्ट की गई धनराशि की वसूली के लिए प्रस्तुत किए गए आवेदन पत्र पर तब तक कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी जब तक कि ऐसे आवेदन-पत्र के साथ उक्त निगम के प्रबन्ध निदेशक द्वारा हस्ताक्षरित किया गया इस आशय का प्रमाण-पत्र कि उक्त धनराशि की वसूली भू-राजस्व के बकाया की भाँति की जानी चाहिए, संलग्न कर दिया गया हो;

() समस्त धन जो-

(एक) नलकूपों के सन्निर्माण संबंधी प्रभारों के कारण छत्तीसगढ़ लिफ्ट इरीगेशन कार्पोरेशन लिमिटेड को देय होते हों;

(दो) किन्हीं उत्सिंचन स्कीमों से सिंचाई के प्रयोजन से प्रदाय किए गए जल के मद्दे लगने वाले जल कर के कारण छत्तीसगढ़ लिफ्ट इरीगेशन कार्पोरेशन लिमिटेड को देय होते हों;

(तीन) छत्तीसगढ़ लिफ्ट इरीगेशन कार्पोरेशन लिमिटेड के साथ निष्पादित किए गए किसी पट्टे, करार या संविदा के अधीन उक्त कार्पोरेशन को शोध्य किसी धनराशि के कारण देय होते हों :

परन्तु इस खण्ड में विनिर्दिष्ट की गई धनराशि की वसूली के लिए प्रस्तुत किए गए आवेदन पत्र पर तब तक कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी जब तक कि ऐसे आवेदन-पत्र के साथ उक्त कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक द्वारा हस्ताक्षरित किया गया इस आशय का प्रमाणपत्र कि उक्त धनराशि की वसूली भू-राजस्व के बकाया की भाँति की जानी चाहिए, संलग्न कर दिया गया हो

156. प्रतिभूत से धनों की वसूली.-

प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो इस संहिता के किसी भी उपबन्ध के अधीन या किसी अन्य अधिनियमिति के या किसी अनुदान, पट्टे या संविदा के, जिसके कि अधीन वह राशि, जो कि प्रतिभूत की गई है, मूल ऋणी से भू-राजस्व के बकाया के तौर पर वसूली योग्य है, अधीन प्रतिभूत बन गया हो, उस रकम का या उसके किसी भाग का, जिसका कि भुगतान करने के लिए वह अपने प्रतिभूति - पत्र के निबन्धनों के अधीन दायी हो गया हो, भुगतान करने की दशा में इस बात के दायित्वाधीन होगा कि उसके विरुद्ध इस संहिता के उपबन्धों के अधीन उसी रीति में कार्यवाही की जाए जिसमें कि भू-राजस्व के बकाया के लिए कार्यवाही की जाती है।

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