
(1) समस्त ग्रामों एवं नगरीय क्षेत्रों की सीमाएं नियत की जायेंगी तथा स्थायी सीमा चिह्नों द्वारा उनका सीमांकन किया जायेगा।
(2) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा आदेश दे सकेगी कि समस्त सर्वेक्षण संख्यांकों या भू- खण्ड संख्यांकों की भी सीमायें नियत की जायें तथा सीमा चिह्नों द्वारा उनका सीमांकन किया जाये।
ग्रामों, नगरीय क्षेत्रों, सर्वेक्षण-संख्यांकों तथा भू-खण्ड संख्यांकों की सीमाओं के बारे में समस्त विवाद, जहां कि ऐसी सीमाएं धारा 124 के उपबन्धों के अधीन नियत की गई हों, तहसीलदार द्वारा ऐसी स्थानीय जांच जिसमें समस्त हितबद्ध व्यक्तियों को उपसंजात होने तथा साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त होगा, करने के पश्चात् विनिश्चित किए जाएंगे।
(1) जब धारा 124 के उपबन्धों के अधीन कोई सीमा नियत कर दी गई हो, तो तहसीलदार किसी भी ऐसे व्यक्ति को संक्षेपतः बेदखल कर सकेगा जो किसी ऐसी भूमि का, जिसके बारे में यह पाया गया हो कि वह उसके खाते से या किसी ऐसे व्यक्ति के, जिसकी कि मार्फत या जिसके कि अधीन वह दावा करता है, खाते में अनुलग्न नहीं है, सदोष कब्जा रखता है।
(2) जहां किसी व्यक्ति को उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन किसी भूमि से बेदखल कर दिया गया हो, वहां वह उस भूमि पर अपना हक स्थापित करने के लिए ऐसी बेदखली की तारीख से एक वर्ष की कालावधि के भीतर सिविल वाद संस्थित कर सकेगा :
परन्तु तहसीलदार या किसी राजस्व अधिकारी को उस हैसियत में ऐसे वाद का पक्षकार नहीं बनाया जाएगा।
(3) तहसीलदार, किसी भी समय, भू-राजस्व के ऐसे पुनर्वितरण के लिए आदेश कर सकेगा जैसा कि उनकी राय में, उपधारा (2) के अधीन संस्थित किए गए किसी सिविल वाद में दी गई डिक्री के परिणामस्वरूप किया जाना चाहिए, और ऐसा पुनर्वितरण उस आदेश की तारीख के आगामी राजस्व वर्ष के प्रारम्भ से प्रभावी होगा।
(1) ग्राम कीi सड़क, ग्राम की बंजर भूमि या सामुदायिक प्रयोजनों के लिए आरक्षित की गई भूमि से लगी हुई भूमि का प्रत्येक धारक, अपने स्वयं के खर्चों से तथा विहित रीति में-
(क) अपनी भूमि तथा उससे लगी हुई ग्राम की सड़क, ग्राम की बंजर भूमि या सामुदायिक प्रयोजनों के लिए आरक्षित की गई भूमि के बीच सीमांकन, सीमा- चिह्नों द्वारा करेगा; और
(ख) समय-समय पर ऐसे सीमा चिह्नों की मरम्मत तथा उनका नवीकरण करेगा।
(2) यदि धारक उपधारा (1) द्वारा अपेक्षित किये गए अनुसार सीमांकन नहीं करता है या सीमा-चिह्नों की मरम्मत या उनका नवीकरण नहीं करता है तो तहसीलदार, ऐसी सूचना के पश्चात् जैसी कि वह ठीक समझे, सीमांकन करवा सकेगा या सीमा चिह्नों की मरम्मत या उनका नवीकरण करवा सकेगा तथा उपगत किया गया खर्च भू-राजस्व की बकाया के तौर पर वसूल कर सकेगा।
(3) सीमांकन के बारे में या सीमा चिह्नों को मरम्मत करके समुचित अवस्था में बनाये रखने के बारे में कोई विवाद उठने की दशा में, वह मामला कलेक्टर द्वारा विनिश्चित किया जाएगा जिसका विनिश्चय अन्तिम होगा।
स्पष्टीकरण. - इस धारा के प्रयोजनों के लिये, "ग्राम की सड़क" से अभिप्रेत है कोई ऐसी सड़क जिस पर कोई उपदर्शक सर्वेक्षण संख्यांक या भू-खण्ड संख्यांक अंकित हो।
(1) प्रतिवर्ष नवम्बर मास की समाप्ति के पश्चात् ग्राम का पटेल ऐसे प्रत्येक धारक को, जिसकी भूमि पर सीमा - चिह्न या सर्वेक्षण चिह्न त्रुटिपूर्ण हैं, एक लिखित सूचना देगा जिसमें उससे यह अपेक्षा की जाएगी कि वह आगामी 1 मार्च के पूर्व उनकी उचित मरम्मत करवाये।
(2) किसी भी वर्ष में 1 मार्च के पश्चात्, तहसीलदार या कोई ऐसा अन्य राजस्व अधिकारी, जो कार्य करने के लिए सशक्त हो, किन्हीं भी त्रुटिपूर्ण सीमा-चिह्नों या सर्वेक्षण चिह्नों की उचित रूप से मरम्मत करवा सकेगा और ऐसी मरम्मत का खर्च ऐसे सीमा चिह्नों या सर्वेक्षण चिह्नों के अनुरक्षण के लिये उत्तरदायी धारक या धारकों से ऐसी शास्ति सहित वसूल कर सकेगा जो इस प्रकार मरम्मत किये गए प्रत्येक सीमा-चिह्न के लिये एक सौ रुपए तक की हो सकेगी। ऐसा खर्च तथा शास्ति भू-राजस्व की बकाया के तौर पर वसूल की जा सकेगी।
(1) तहसीलदार या कोई अन्य राजस्व अधिकारी जो कार्य करने के लिये सशक्त हो, किसी हितबद्ध पक्षकार के आवेदन पर किसी सर्वेक्षण- संख्यांक की या उपखण्ड या भू-खण्ड संख्यांक की सीमाओं का सीमांकन कर सकेगा और उस पर सीमा-चिह्न सन्निर्मित कर सकेगा।
(2) राज्य सरकार, सर्वेक्षण संख्यांक या उपखण्ड या भू-खण्ड संख्यांक का सीमांकन करने में तहसीलदार द्वारा या कार्य करने के लिए सशक्त किये गए किसी अन्य राजस्व अधिकारी द्वारा अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया का विनियमन करने के लिये नियम बना सकेगी जिनमें उन सीमा- चिह्नों का, जो उपयोग में लाये जाएँगे, प्रकार विहित किया जाएगा, और सीमांकित सर्वेक्षण संख्यांक या उपखण्ड या भू-खण्ड संख्यांक में की भूमि के धारकों से फीस का उद्ग्रहण प्राधिकृत किया जाएगा।
यदि कोई व्यक्ति, विधिपूर्वक सन्निर्मित किये गए सीमा - चिह्न या सर्वेक्षण चिह्न को जानबूझ कर विनष्ट करेगा या क्षति पहुँचाएगा या विधिपूर्ण प्राधिकार के बिना हटाएगा तो उसे तहसीलदार द्वारा या कार्य करने के लिये सशक्त किये गए किसी अन्य राजस्व अधिकारी द्वारा यह आदेश दिया जा सकेगा कि वह ऐसे प्रत्येक चिह्न के लिये, जिससे इस प्रकार विनष्ट किया गया हो, क्षति पहुँचाई गई हो यो हटाया गया हो, पांच हजार रुपये से अनधिक ऐसे जुर्माने का भुगतान करे जो तहसीलदार या कार्य करने के लिये सशक्त किये गए किसी अन्य राजस्व अधिकारी की राय में, उसी सीमा - चिह्न या सर्वेक्षण चिह्न को पुनः स्थापित करने के तथा इत्तिला देने वाले को, यदि कोई हो, इनाम देने के व्यय को चुकाने के लिये आवश्यक हो।
(1) इस बारे में कि कोई खेतिहर अपने खेतों पर या ग्राम की बंजर भूमि या चरागाहों पर मान्यता प्राप्त सड़कों, पथों या सार्वजनिक भूमि पर से, जिसके अन्तर्गत वे सड़कें तथा पथ हैं जो धारा 242 के अधीन तैयार किये गए ग्राम के वाजिब -उल-अर्ज में अभिलिखित हैं, न होकर अन्यथा किस मार्ग द्वारा पहुँचेगा, या इस बारे में कि वह किस स्रोत से या किस जलसरणी से अपने लिये जल प्राप्त कर सकेगा, कोई विवाद उद्भूत होने की दशा में, तहसीलदार स्थानीय जाँच करने के पश्चात् उस मामले को, प्रत्येक मामले विषयक पूर्व रूढ़ि के प्रति निर्देश करके तथा समस्त संबंधित पक्षकारों की सुविधा का सम्यक् ध्यान रखते हुए, विनिश्चित कर सकेगा।
(2) इस धारा के अधीन पारित किया गया कोई भी आदेश किसी व्यक्ति को सुखाचारों के ऐसे अधिकारों को स्थापित करने से विवर्जित नहीं करेगा जिनका कि दावा वह सिविल वाद द्वारा कर सकता हो।
कोई भी व्यक्ति, जो किसी ग्राम की किसी मान्यता प्राप्त सड़क तथा पथ, जिसके अन्तर्गत वे सड़कें तथा पथ हैं जो ग्राम के वाजिब - उल - अर्ज में अभिलिखित हैं, पर अथवा किसी सार्वजनिक भूमि पर अधिक्रमण करेगा या उसके उपयोग में कोई बाधा पहुँचायेगा या जो धारा 131 के अधीन पारित किये गए तहसीलदार के विनिश्चय की अवज्ञा करेगा, तहसीलदार के लिखित आदेश, जिसमें मामले के तथ्य तथा परिस्थितियाँ कथित की जाएँगी, के अधीन शास्ति का, जो दस हजार रुपये तक का हो सकेगा, दायी होगा।
यदि किसी तहसीलदार को यह प्रतीत हो कि कोई बाधा किसी ग्राम की किसी मान्यता प्राप्त सड़क, पथ या सार्वजनिक भूमि के अबाध उपयोग में अवरोध डालती है या जिससे किसी ऐसी सड़क या जल स्रोत में, जो धारा 131 के अधीन किसी विनिश्चय का विषय रहा हो, अवरोध होता है, तो वह ऐसी बाधा के उत्तरदायी व्यक्ति को उसे हटाने का आदेश दे सकेगा और यदि ऐसा व्यक्ति उस आदेश का अनुपालन करने में विफल रहता है, तो वह उस बाधा को हटवा सकेगा, और उसके हटाये जाने का खर्च ऐसे व्यक्ति से वसूल कर सकेगा तथा ऐसा व्यक्ति, तहसीलदार के ऐसे लिखित आदेश के अधीन, जिसमें मामले के तथ्यों और परिस्थितियों का कथन किया गया हो, ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो दस हजार रुपये तक का हो सकेगा।
किसी भी ऐसे व्यक्ति से, जो धारा 131, 132 या 133 के अधीन कोई अधिक्रमण करेगा या कोई बाधा पहुँचाएगा, तहसीलदार द्वारा यह अपेक्षा की जा सकेगी कि वह ऐसे कार्य की पुनरावृत्ति करने से विरत रहने के लिये पांच हजार रुपए से अनधिक ऐसी राशि का, जो कि तहसीलदार ठीक समझे, स्वीय बन्धपत्र निष्पादित करे ।
(1) यदि, ग्रामवासियों के आवेदन पर या अन्यथा, कलेक्टर का, जाँच के पश्चात्, यह समाधान हो जाता है कि ऐसे ग्राम में ग्राम समुदाय के उपयोग के लिये दस फीट से अनधिक चौड़ी सड़क की, बैलगाड़ी मार्ग या पथ की व्यवस्था करने के प्रयोजन के लिये कोई भूमि अर्जित करना समीचीन है, तो वह उस ग्राम के निवासियों से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वे ऐसी भूमि के संबंध में उपधारा (3) के अधीन देय प्रतिकर की रकम विनिर्दिष्ट की गई कालावधि के भीतर जमा करे। ऐसा निक्षेप कर दिया जाने पर, कलेक्टर, विहित रीति में प्रकाशित किये गए आदेश द्वारा ऐसी भूमि को अर्जित कर सकेगा और ऐसा आदेश पारित कर दिया जाने पर, ऐसी भूमि राज्य सरकार में पूर्णरूप में निहित हो जाएगी।
(2) किसी भी ऐसी भूमि में किसी हित का दावा करने वाला कोई व्यक्ति, उपधारा (1) के अधीन निहित होने की तारीख से एक वर्ष की कालावधि के भीतर, कलेक्टर को अपने हित के संबंध में प्रतिकर के लिये आवेदन कर सकेगा।
(3) ऐसी भूमि के संबंध में देय प्रतिकर भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (2013 का सं० 30) के अनुसार होगा।
राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा, यह घोषित कर सकेगी कि इस अध्याय के कोई उपबंध या समस्त उपबंध किसी ग्राम या ग्रामों के किसी वर्ग को लागू नहीं होंगे।