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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

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संपत्ति अंतरण अधिनियम

(Transfer Of Property Act)

 

प्रारंभिक

(Preliminary)

वाद

निर्णीत तथ्य

1.       शांति बाई बनाम बॉम्बे राज्य, .आई.आर 1958 एस.सी 532

यदि वृक्ष का मालिक वृक्ष को जीवित रखना चाहता है तो यह एक वृक्ष है, परंतु यदि यह आशय है कि वृक्ष को लकड़ी के उपयोग के लिए काट दिया जाए तो उसे खड़ा काष्ठ (चल) कहा जा सकता है।

2.       म्युनिसिपल कॉरपोरेशन बाम्बे बनाम लाला पंचम, .आई.आर. 1965 एस. सी 1008

पट्टे या किरायेदारी के तहत अधिकार एक अचल संपत्ति (Immovable Property) है।

3.       संतोष जायसवाल बनाम मध्य प्रदेश राज्य, .आई.आर. 1996 एस. सी 207

 

मत्स्य पालन का अधिकार एक अचल संपत्ति है। (Right to fishery is an immovable property)

4.       महादेव बनाम बॉम्बे राज्य, .आई.आर. 1959 एस.सी.

वन उत्पाद लेने का अधिकार, उदाहरण के लिए तेंदू पत्ते आदि और ईंट बनाने के लिए मिट्टी, एक अचल संपत्ति है।

5.       जीवन अली बनाम बसु मल, 9 All. 108 (F.B)

एक बंधक पर किसी भी अचल संपत्ति के विक्रय के लिए डिक्री चल संपत्ति है।

6.       अल्ताफ बेगम बनाम ब्रिज नारायण, . आई. आर. 1929 All. 281

भरण-पोषण भत्ता पाने का अधिकार चल सम्पत्ति है।

 

7.       जुगल किशोर सराफ बनाम रॉ कॉटन कंपनी लिमिटेड, .आई.आर. 1955 एस. सी. आर 376

जहां डिक्री भावी डिक्री प्रदान करती है, यह भावी डिक्री एक अनुयोज्य योग्य दावा नहीं है।

8.       संत लाल बनाम कमला प्रसाद, (1952) SCR 116

निष्पादन पूर्ण होने के बाद प्रत्येक साक्षी को हस्ताक्षरित करना चाहिए अन्यथा यह एक वैध प्रमाणन नहीं होगा।

9.       राम निवास बनाम बानो, .आई.आर. 2000 एस. सी 2921

आन्वियक सूचना का सिद्धांत तब लागू होता है जब संपत्ति वादी के वास्तविक कब्जे में होती है। 'सूचना' (Notice) शब्द 'ज्ञान' (Knowledge) से अधिक व्यापक और महत्त्वपूर्ण है।

10.   दया देवी बनाम चपला देवी, .आई.आर. 1960 Cal. 378

बकाया किराया एक अनुयोज्य दावा है।

11.   सावित्री बनाम द्वारका, (1939) A.L.O. 71

कॉपीराइट एक अनुयोज्य दावा नहीं है।

 

पक्षकारों के कार्य द्वारा संपत्ति का अंतरण

(Transfer of Property by Act of Parties)

12.   जुगल किशोर बनाम रॉ कॉटन कंपनी लिमिटेड, .आई.आर. 1955 एस. सी 376

उच्चतम न्यायालय ने अवधारित किया कि संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 5 में शब्दों 'वर्तमान में अथवा भविष्य में शब्द अंतरित करना' होगा ना की शब्द 'संपत्ति'।

13.   जुगल किशोर बनाम रॉ कॉटन कंपनी लिमिटेड, .आई.आर. 1955 एस. सी 376

किसी भी अस्तित्ववान या भावी संपत्ति का अंतरण केवल एक संविदा के रूप में होता है जिसका अनुपालन भविष्य में किया जा सकता है और संपत्ति के अस्तित्व में आते ही इसे प्रवर्तित किया जा सकता है।

14.   वी. एन. सरीन बनाम अजीत कुमार, .आई.आर. 1966 एस. सी 432

विभाजन संपत्ति का अंतरण नहीं है।

 

15.   मोहम्मद रजा बनाम अब्बास बंदी बीबी, .आई.आर. 1932, P.C 158

जहां शर्त अजनबियों को संपत्ति अंतरित करने से अंतरिती को निवारित करती है अर्थात् अन्तरणकर्ता के परिवार के बाहर का हो, वहां शर्तें केवल आंशिक प्रतिरोध हैं जो वैध एवं प्रवर्तनीय है।

16.   गिरिजेश दत्त बनाम दाता दीन, .आई.आर. 1934, अवध 35

धारा 16 यह प्रावधान करती है कि किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के एक वर्ग के फायदे के लिए संपत्ति के अंतरण में यदि पूर्विक हित धारा 13 या 14 के तहत विफल हो जाता है, तो पश्चावर्ती हित (जो एक ही संव्यवहार में बनाया गया है) भी विफल हो जाता है। यदि दो अनुक्रमिक हितों का निर्माण होता है तो बाद के हितों का सृजन पूर्विक हित की वैधानिकता के अधीन होगा।

17.   टल्क बनाम मोक्से, (1848) 41 E.R 1143

संविदा संपत्ति के संदर्भ में लिखित करार या प्रसंविदा होती है।

18.   आर. राजगोपाल रेड्डी बनाम पी. चंद्रशेखरन, .आई.आर. 1996 एस. सी 238

बेनामी संव्यवहार अधिनियम, 1988 भूतलक्षी (Retrospective) प्रकृति का नहीं है।

19.   जया दयाल पोद्दार बनाम बीबी हजारा, .आई.आर. 1974 एस. सी 171

सुप्रीम कोर्ट ने धारित किया कि क्या कोई व्यक्ति एक दृश्यमान स्वामी (Ostensible Owner) है या नहीं, यह मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर निर्णित किया जाना चाहिए। क्योंकि यह एक व्यक्तिपरक (Subjective) प्रश्न है।

20.   जुम्मा मस्जिद बनाम कोडिमनेन्द्र, .आई.आर. 1962 एस.सी.

उच्चतम न्यायालय ने धारित किया कि धारा 6 (क) और 43 के बीच कोई अंतर्विरोध नहीं है और यह दोनों एक साथ काम कर सकते हैं। धारा 6 (क) मौलिक विधि का नियम है, और, धारा 43 विबंध पर आधारित है, जो साक्ष्य का नियम है।

21.   बेल्लामी बनाम सेबाइन, (1857)1 DG & J 566

आंग्ल न्यायालय ने धारित किया कि (वाद लंबन) [लिस्पेन्डेंस (Lispendens)] का सिद्धांत विधि और साम्य दोनों के लिए उभयनिष्ठ है। इस सिद्धांत की अनुपस्थति में वाद या कार्यवाही को सफल समाप्ति तक नहीं लाया जा सकता है।

22.   मुसाहुर साहू बनाम हाकिमलाल, (1950) 43 Cal. 521

यदि कई लेनदार हैं, तो उनमें से एक के पक्ष में स्थानांतरण एक कपटपूर्ण हस्तांतरण नहीं माना जाएगा।

23.   प्रबोध कुमार दास बनाम दंतामारा टी कंपनी लिमिटेड, .आई.आर. 1940 P.C.L

धारा 53(क) का प्रयोग ढाल के रूप में (बचाव के रूप में) किया जाना चाहिए, 'तलवार' या 'हमले के हथियार' के रूप में नहीं।

24.   पंडित चुनचुन झा बनाम शेख इबादत अली, .आई.आर. 1954 एस. सी 345

उच्चतम न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया कि यदि पुनःक्रय की शर्त बंधक वस्तावेज़ में सन्निहित नहीं है तो इस संव्यवहार को बंधक नहीं कहा जा सकता है।

25.   सोपान बनाम सैय्यद नबी, (2019)7 एस.सी.सी 635

उच्चतम न्यायालय ने दोहराया है एक बिक्री केवल पुनअंतरण के शर्त के साथ बंधक नहीं होती है। यदि पुनअंतरण के लिए विक्रय और करार अलग दस्तावेजों में सन्निहित हैं तो ऐसे संव्यवहारों को सशर्त विक्रय द्वारा बंधक नहीं किया जा सकता है, इस बात पर ध्यान दिए बिना कि क्या दस्तावेज उस समय निष्पादित हैं या नहीं।

26.   क्रेगलिंगर बनाम न्यू पेटागोनिया मीट एंड कोल्ड स्टोरेज कंपनी लिमिटेड, (1914) А.С. 25

एक संपार्श्विक फायदा एक लाभ है जो बंधक-धन ब्याज के अतिरिक्त है। बंधकदार को एक संपार्श्विक फायदे के लिए मोचन पररोक अनिवार्य नहीं है। यह 'रोक' तब होगा जब-

(A) वह अत्यंत अनुचित हो, एवं

(B) वह बंधक के संव्यवहार का एक भाग हो।

27.   तनु राम बोरा बनाम प्रमोद चन्द्र दास (मृत) द्वारा विधिक उत्तराधिकारी एवं अन्य, (2019)4 एस.सी.सी 173

सर्वोच्च न्यायालय ने धारित किया कि यदि संपत्ति के स्वामित्व को प्रवंचनापूर्ण कथनों द्वारा अंतरित किया जाता है, तो संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 43 के तहत 'विबन्ध द्वारा अनुदान पोषण' (Doctrine of feeding the grant by Estoppel) का सिद्धांत लागू होगा, अंतरणकर्ता बाद में स्वामित्व का अधिग्रहण करेगा।

28.   डॉ. एच.के. शर्मा बनाम श्री राम लाल, (2019) सुप्रीम (एस.सी.) 83

सर्वोच्च न्यायालय ने यह अवधारित किया कि मकान मालिक-किरायेदार के संबंध को केवल मकान मालिक की संपत्ति को विक्रय के एक करार से समाप्त नहीं किया जा सकता जब तक कि उस के प्रभाव के लिए करार में ही कोई शर्त न हो।

29.   आनंद बेहरा बनाम ओडिशा राज्य, .आई.आर. 1956 एस.सी 17

कई वर्षों से चिल्का झील से मछली पकड़ने का अधिकार भूमि से उत्पन्न होने वाला लाभ माना गया।

30.   इन्कन्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, (2000) 1 एस.सी.सी 633

भूमि में भूबद्ध मशीनरी को चल या अचल संपत्ति के रूप में माना जा सकता है, जो मशीनरी को भूबद्ध करने वाले पक्षकारों के आशय पर निर्भर करता है।

31.   शांताबाई बनाम बॉम्बे राज्य, .आई.आर. 1958 एस.सी. 532

खड़ा काष्ठ लकड़ी के पेड़ से भिन्न है। खड़ा काष्ठ ऐसी स्थिति में वृक्ष को निर्दिष्ट करता है कि इसे यदि काट दिया जाए तो इसे काष्ठ के रूप में प्रयोग किया जा सकता है, जबकि लकड़ी का पेड़ ऐसे पेड़ों को निर्दिष्ट करता है जो भूमि से पोषण ग्रहण करते हैं।

32.   केनेथ सोलोमन बनाम दान सिंह बावा, Second appeal no. 16/1977, 22.04.1985 (Delhi H.C)

वसीयत के तहत किरायेदार द्वारा अपने उत्तराधिकारियों को किराएदारी अधिकारों की वसीयत देना अधिनियम की धारा 5 के अर्थ के अंतर्गत अंतरण को इंगित नहीं करता है।

33.   मोहर सिंह बनाम देवी चरण, .आई.आर. 1988 एस. सी 1365

विभाजन का अर्थ अंतरण नहीं है लेकिन संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 109 के उपबंध न्याय, साम्या और सद्विवेक के आधार पर विभाजन के मामलों में लागू होंगे।

34.   राम भवन सिंह बनाम जगदीश, (1990)4 एस.सी.सी 309

उच्चतम न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया कि जब सीमित हित रखने वाला व्यक्ति अधिक हित अन्तरित करने की प्रवंजना करता है और बाद में वह अधिक हित अर्जित कर लेता है तो ऐसा हित अन्तरिती अपने विकल्प पर प्राप्त करेगा।

35.   करतार सिंह बनाम हरबंस कौर, (1994)4 एस.सी.सी 730

अंतरिती वैध स्वत्व तब प्राप्त नहीं कर सकता है जब उसे अंतरणकर्ता के स्वामित्व में दोष की वास्तविक या आन्वयिक जानकारी हो। धारा 43 अंतरिती पर सावधानी बरतने का कर्तव्य आरोपित करती है।

36.   रोशर बनाम रोशर, (1884) 26 Ch. D. 801

यह निर्धारित करने के लिए कि क्या परीक्षण अवरोध पूर्ण या आंशिक है, यह प्रभाव पर निर्भर करता है और शर्तों में निर्धारित शब्दों के रूप पर नहीं अर्थात् एक परीक्षण यह निर्धारित करने के लिए कि प्रतिबन्ध पूर्ण है या आंशिक, शर्त में लिखे हुए शब्दों पर नहीं, बल्कि प्रभाव पर निर्भर करता है।

37.   व्हाइटवी बनाम मिशेल, (1890)4 Ch.D. 85

दोहरी संभावनाओं के विरुद्ध नियम को मान्यता दी गई थी। इस नियम के तहत किसी अजन्मे व्यक्ति के लिए जीवन हित को पुष्ट करना अनुज्ञेय है, लेकिन यह संभव नहीं है कि किसी व्यक्ति को जीवन हित प्रदान किया जाए।

38.   जयराम मुदालियर बनाम अय्यास्वामी, .आई.आर. 1973 एस. सी 569

कर्ता द्वारा व्यक्तिगत संपत्ति का विक्रय, विभाजन के लिए लंबित वाद धारा 52 से प्रभावित होता है और परिवार पर बाध्यकारी नहीं है।

 

विविध

(Miscellaneous)

39.   श्रीधर एवं एक अन्य बनाम एन. रेवन्ना एवं अन्य, 11 फरवरी, 2020

जहां कि संपत्ति ऐसी शर्त या मर्यादा के अध्यधीन अंतरित की जाती है जो अंतरिती या उसके अधीन दान करने वाले व्यक्ति को संपत्ति में अपने हित को अलग करने या व्यनित करने से आत्यन्तिकतः अवरुद्ध करती है, वहां ऐसी शर्त और मर्यादा शून्य है।

40.   प्रहलाद प्रधान बनाम सोनू कुम्हार, (2019) 10 एस. सी. सी. 259

कोई व्यक्ति किसी ठोस संपत्ति का अधिकार, हक या हित केवल दूसरे व्यक्ति को ही हस्तांतरित कर सकता है, जो उसके पास है, उसे प्रतिफल हेतु या अन्यथा के लिए अंतरित कर सकता है। एक बार यह सिद्ध हो जाए कि अंतरण की तिथि पर विक्रेता का कोई सारवान अधिकार, हक या हित नहीं था, तो ऐसी संपत्ति के खरीददार का कोई अधिकार, हक या हित नहीं मिलेगा। ऐसा स्थानांतरण अवैध और शून्य होगा।

41.   गोपालकृष्ण बनाम नारायणगोला, (2019) 4 एस. सी. सी. 592

एक बार जब एक मालिक ने प्रतिकूल कब्जे के कानून के संचालन के तहत अपनी संपत्ति के अधिकार खो दिए हैं, तो उसके बाद बनाया गया कोई भी अंतरण कोई अधिकार प्रदान नहीं करेगा।

42.   बजरंग श्यामसुंदर अग्रवाल बनाम सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, (2019) 9 एस. सी. सी. 94

जब किसी अभिघृती (किरायेदारी) का निर्धारण किया गया हो तो उसके परिसर में रहने वाले लोगों को केवल टेनेंट-इन-सफरेंस ही माना जा सकता है। ऐसे किरायदारों के पास कोई कानूनी अधिकार नहीं है और वो अतिक्रमण करने वालों के समान हैं।

 

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