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अपकृत्य विधि (Law of Torts) |
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सामान्य सिद्धांत (General Principles) |
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वाद |
निर्णीत तथ्य |
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1. जयलक्ष्मी साल्ट वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम गुजरात राज्य, (1994)4 एससीसी 1 |
उच्चतम न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया कि अपकृत्य' का अर्थ किसी के द्वारा 'कर्तव्य भंग' जो किसी अन्य के लिए क्षतिकारक हो। अपकृत्य के मूल तत्व 'हानि' और 'क्षति' हैं। |
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2. राजकोट म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन बनाम मंजुल बेन जयन्तीलाल नकुम, (1997)9 एससीसी 522 |
अपकृत्य विधि 'अंग्रेजी सामान्य विधि' (English Common Law) पर आधारित है। यह मूलतः न्यायिक निर्णयों से उत्पन्न होता है। उच्चतम न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया है कि अपकृत्य के संबंध में सांविधिक विधियों के अभाव में इंग्लैंड में विकसित हुए सामान्य विधिक सिद्धांतों को भारत में लागू किया जा सकता है |
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3. ऐशबी बनाम व्हाइट, (1703) 2 एलडी रायम 938 |
वादी एक योग्य मतदाता था लेकिन उसे प्रतिवादी (निर्वाचन अधिकारी) द्वारा अवैध तरीके से चुनाव में मतदान करने से निरुद्ध किया गया था। यद्यपि वादी का उम्मीदवार विजयी था फिर भी वादी को क्षतिपूर्ति की प्राप्ति के लिए अधिकृत किया गया क्योंकि उसके विधिक अधिकार का उल्लंघन किया गया था।
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4. भीम सिंह बनाम जम्मू एवं कश्मीर राज्य, एआईआर 1986 एससी 494 |
याचिकाकर्ता जो कि एक विधायक था उसे अधिकारियों द्वारा अवैध तरीके से निरुद्धि में लिया गया था जिसके परिणामस्वरूप वह विधानसभा सत्र में भाग नहीं ले सका। सर्वोच्च न्यायालय ने उनके विधिक अधिकार को मान्यता दी और उन्हें प्रतिकर दिया।
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5. ग्रांट बनाम ऑस्ट्रेलियाई बुनाई मिलें (1936) ए.सी. 85 |
न्यायालय ने यह स्थापित किया की केवल यह तथ्य कि एक आदमी को क्षति हुई है, उसे कोई विधिक दावा प्रदान नहीं करता है, जब तक कि दूसरा पक्ष अपने विधिक अधिकारों के अंतर्गत कार्य कर रहा है।
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6. ग्लॉसेस्टर ग्रामर स्कूल मामला, (1410) वाई.बी. हिल 11 |
प्रतिवादी ने प्रतिद्वंद्वी विद्यालय की स्थापना की और परिणामस्वरूप प्रतिस्पर्धा के कारण वादी को शुल्क कम करना पड़ा। न्यायालय ने वादी को कोई अनुतोष नहीं दिया क्योंकि प्रतिवादी ने वादी के किसी भी विधिक अधिकार का उल्लंघन नहीं किया था। प्रतिवादी एक प्रतिद्वंदी स्कूल खोलने के अपने अधिकार क्षेत्र में कार्य कर रहा था। वादी को हुई हानि उसके किसी विधिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं थी। |
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7. मोगुल स्टीमशिप कंपनी बनाम मैकग्रेगर गोव एण्ड कंपनी, 1892 ए सी 25 |
कई स्टीमशिप कंपनियों ने कम माल ढुलाई के संयोजन और पेशकश के द्वारा वादी को व्यवसाय से बाहर कर दिया। न्यायालय ने माना कि बादी के पास वाद हेतुक नहीं था क्योंकि प्रतिवादियों ने माल ढुलाई को कम करने के लिए वैध तरीके से काम किया।
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8. चेसमोर बनाम रिचर्ड्स, (1859) 7 एच.सी.एल. 349 |
वादी अपनी मिल के लिए जल धारा का उपयोग कर रहा था। यह पानी एक भूमिगत श्रोत पर आधारित था। प्रतिवादियों ने अपनी भूमि पर एक कुआ का निर्माण कराया और उसी भूमिगत श्रोत की धारा से पानी उस कुएं में पंप किया। न्यायालय ने माना कि प्रतिवादी उत्तरदायी नहीं था।
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9. मेयर ऑफ ब्रेडफोर्ड कॉरपोरेशन बनाम पिकल्स, (1895) ए सी 587 |
न्यायालय ने माना कि भले ही दुर्भावनापूर्ण तरीके (maliciously) से हानि पहुँचाई गयी हो; जब तक वादी यह साबित नहीं कर सकता कि उसे क्षति हुई है, तब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकती। |
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10. श्रीमती एस. आर. वेंकटरमन बनाम भारत संघ, ए.आई.आर. 1979 एस.सी. 49 |
कानून में द्वेष : इसका मतलब है कि, किसी उचित विधिक क्षम्यता के बिना किया गया एक कार्य। ऐच्छिक आशय से बिना किसी हेतु के कार्य किए जाने की स्थिति में गलत आशय आधारित होता है। |
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सामान्य प्रतिरक्षा (General Defences) |
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11. हॉल बनाम बुकलैंड ऑटो रेसिंग क्लब, (1932) आल. ई.आर 221 |
एक मोटर रेसिंग चल रही थी और दो कारें टकरा गईं। टक्कर के परिणामस्वरूप कार में से एक कार दर्शकों के बीच जा गिरी। एक दर्शक घायल हो गया। यह माना गया कि वादी ने विवक्षित रूप से क्षति का जोखिम उठाया। |
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12. पद्मावती बनाम दुग्गनाईका, (1975) एसीजे 222 |
एक जीप में दो. अजनबियों ने लिफ्ट ली। अचानक, जीप के पहिये को संतुलित करने वाला एक बोल्ट निकल जाता है और जीप दुर्घटनाग्रस्त हो गई। यह अभिनिर्धारित किया गया था कि चालक या स्वामी को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता था क्योंकि अजनबी स्वेच्छा से जीप में बैठे थे और इसलिए बॉलेन्टी नॉन फिट इन्जूरिया (Volentinon fit injuria) का सिद्धांत लागू होगा और दूसरा यह बहुत बड़ी दुर्घटना थी। |
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13. स्मिथ बनाम चार्ल्स बेकर एंड संस, (स्टोन क्वैरी केस) (1891) एसी. 325 |
वादी को प्रतिवादी ने एक पत्थर की खदान में नियुक्त किया था। क्रेन की मदद से चट्टानों के बड़े हिस्से को एक तरफ से दूसरी तरफ पहुंचाया जा रहा था। एक पत्थर गिर गया जिससे वादी घायल हो गया। न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया था कि जोखिम का केवल ज्ञान था और कोई सहमति नहीं थी। इसलिए, उक्ति 'वोलेंटी नॉन फिट इन्जूरिया' लागू नहीं की गई। |
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14. हेन्स बनाम हारवुड, (1935) 1 कबा 146 |
प्रतिवादी ने दो घोड़ों को छोड़ दिया। घोड़ों ने निडर होकर सड़कों पर दौड़ना शुरू कर दिया। वादी, जो एक पुलिस कांस्टेबल था, ने सड़कों पर महिलाओं और बच्चों के लिए आसन्न संकट देखा। उसने जोखिम उठाया और घोड़ों को रोकने में कामयाब रहा। इस प्रक्रिया में उन्हें चोट लगी। न्यायालय ने माना कि प्रतिवादी को 'वोलेंटी नॉन फिट इंजुरिया' की प्रतिरक्षा लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। |
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15. निकोलस बनाम मार्शलैंड, (1876) 2 एक्स.डी 1 |
प्रतिवादी ने अपनी जमीन पर कुछ कृत्रिम झीलों का निर्माण करवाया। असाधारण वर्षा हुई (मानव स्मृति में सबसे भारी) और इसके परिणामस्वरूप पानी ओवर फ्लो हो गया और वादी का पुल बह गया। प्रतिवादी को उत्तरदायी नहीं ठहराया गया क्योंकि क्षति दैवीय कृत्य के कारण हुई। |
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16. बर्ड बनाम हॉलबूक, (1828) 4 बिंग 628 |
प्रतिवादी ने बिना किसी सूचना को चस्पा किए बगीचे में कुछ स्प्रिंग बंदूकें रख दी थीं। स्वचालित निर्वहन से अतिचारक घायल हो गया था। यह माना गया था कि वादी क्षतिपूर्ति प्राप्त करने का हकदार था क्योंकि प्रयोग किया गया बल उस स्थिति में आवश्यकता से अधिक थी। |
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17. वॉघन बनाम टैफ़ वेल रेल कं., (1860) 5 एच & एन 679 |
रेल कंपनी के इंजन से निकली चिंगारियों के कारण बगल की जमीन पर अपीलकर्ता की लकड़ी में आग लग गई। यह माना गया कि चिंगारी के उत्सर्जन को रोकने के लिए प्रतिवादी ने ध्यान रखा था, इसलिए उसे उत्तरदायी नहीं ठहराया गया। |
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18. निट्रो ग्लिसरीन केस, (1872) 15 वैलेस 524 |
अग्रिम संचरण (Further transmission) के लिए प्रतिवादियों को एक लकड़ी का डिब्बा प्राप्त हुआ। उन्हें इसमें रखी गई चीजों की जानकारी नहीं दी गई थी। बॉक्स की सामग्री को लीक पाया गया और प्रतिवादी उन्हें परीक्षण के लिए ले गए। सामग्री की जांच करते समय नाइट्रो ग्लिसरीन में विस्फोट हो गया। प्रतिवादियों को उत्तरदायी नहीं ठहराया गया क्योंकि यह सरासर एक दुर्घटना का मामला था। |
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क्षति की दूरवर्तिता (Remoteness of Damage) |
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19. ग्लासगो कॉरपोरेशन बनाम म्योर, (1943) A.C. 488 |
प्रतिवादी निगम ने एक पिकनिक पार्टी की अनुमति दी। पिकनिक पार्टी के सदस्य एक मार्ग से चाय के बड़े गैलन लेकर जा रहे थे जहाँ बच्चे भी खेल रहे थे। एक सदस्य की पकड़ गैलन पर ढीली पड़ गई और कुछ बच्चे घायल हो गए। यह धारित किया गया कि प्रतिवादी उत्तरदायी नहीं था क्योंकि क्षति प्रत्याशित नहीं थी। |
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20. बोल्टन बनाम स्टोन, (1951) ए.सी. 850 |
सड़क से गुजरता एक व्यक्ति क्रिकेट के मैदान पर खेलते हुए एक खिलाड़ी की गेंद से घायल हो गया। न्यायालय ने माना कि प्रतिवादी असावधान नहीं था क्योंकि क्षति प्रत्याशित नहीं थी। |
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21. लाटीमर बनाम ए.ई.सी. लि०, (1953) ए. सी. 643 |
भारी बारिश के कारण फैक्ट्री पानी से भर गई थी और बारिश के पानी में तेल मिल गया और इससे फर्श में फिसलन पैदा हो गई थी। प्रतिवादियों ने सभी संभव देखभाल की और चूरा फैलाया। फिर भी ऑयली पैच बने रहे और वादी को क्षति हुई। न्यायालय ने माना कि प्रतिवादी उत्तरदायी नहीं था क्योंकि उसने किसी भी दुर्घटना से बचने के लिए हर संभव कोशिश की। |
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22. रूरल ट्रांसपोर्ट सर्विस बनाम बेज़लम बीबी, एआईआर 1980 Cal. 165 |
यात्रियों की भीड़ से भरी बस के चालक ने यात्रियों को बस की छत पर यात्रा करने की अनुमति दी। बस चलाते समय उन्होंने इस तथ्य को नजरअंदाज किया और उपेक्षा से बस चलाता रहा। परिणामस्वरूप छत पर बैठा एक यात्री नीचे गिर गया और उसकी मौत हो गई। चालक और कंडक्टर को उपेक्षा के लिए दायी ठहराया गया था, हालांकि यात्रियों की ओर से भी इसमें योगदायी उपेक्षा की गई थी। |
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23. डॉ. राम राज सिंह बनाम बाबू लाल, एआईआर 1982 All. 285 |
प्रतिवादी ने वादी के पड़ोस के परिसर में एक ईंट ढालने की मशीन (brick grinding machine) चालू कर दी। वादी एक चिकित्सक (मेडिकल प्रैक्टिशनर) था और मशीन से उत्पन्न धूल से उसे और उसके मरीजों को असुविधा होती थी। न्यायालय ने उसे विशेष क्षतिपूर्ति प्रदान करवाई। |
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24. सैडलेघ बनाम ओ' कैलेगेहम, (1940) ए.सी. 880 |
उपताप का गठन करने के लिए हस्तक्षेप अनुचित होना चाहिए। इसलिए, प्रत्येक तरह का हस्तक्षेप उपताप या अपदूषण नहीं है। न्यायालय ने यह माना कि तर्कसंगतता का परीक्षण समाज में रहने वाली मानव जाति के सामान्य प्रथा के अनुसार है। |
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25. राधे श्याम बनाम गुर प्रसाद, एआईआर 1978 All. 86 |
यह माना गया कि आवासीय क्षेत्र में आटा चक्की चलाना एक उपताप था। |
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26. मेयर ऑफ बैडफोर्ड कॉर्पोरेशन बनाम पिकल्स (1895) एसी 587 |
यदि कोई कार्य या कृत्य अन्यथा विधिसम्मत है, तो केवल इस कारण उपताप नहीं बन जाता क्योंकि यह एक बुरे आशय के साथ किया गया है। |
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मानहानि (Defamation) |
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27. डिक्सन बनाम होल्डन, (1869) 7 ईक्यू 488 |
एक आदमी की ख्याति को उसकी संपत्ति माना जाता है और कुछ मामलों में उसे संपत्ति से अधिक महत्त्वपूर्ण माना जाता है। |
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28. एस.एन.एम. आब्दी बनाम प्रफुल्ल के. मोहन्ता, एआईआर 2002 Gan 75 |
न्यायालय ने धारित किया कि यदि कोई प्रकाशित सामग्री सारवान समूह की दृष्टि में किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को गिराने की प्रवृत्ति रखती है तो यह दायित्व (liability) हेतु पर्याप्त है। |
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29. डी.पी. चौधरी बनाम मंजूलता, एआईआर 1997 राज0 170 |
एक समाचार प्रकाशित हुआ कि 'मंजूलता रात में एक लड़के के साथ भाग गई।' खबर झूठी थी तथा इसका कोई औचित्य नहीं था। समाचार ने उसकी शादी की संभावनाओं को प्रभावित किया और समाज में उसका उपहास किया गया। प्रतिवादियों को तथाकथित कथनों हेतु मानहानि के लिये दायी ठहराया गया। |
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30. कैसीडी बनाम डेली मिरर न्यूज़ पेपर लि., (1929) 2 के. बी. 331 |
श्री कैसिडी अपनी वैध पत्नी के साथ नहीं रहते थे और कभी-कभार उनसे मिलने जाते थे। अखबार ने श्रीमान कैसिडी की एक तस्वीर प्रकाशित की और लिखा कि श्रीमान कैसिडी की सगाई मिस 'एक्स' के साथ तय हो गई है। श्रीमती कैसिडी ने अखबार पर वाद दायर करते हुए आरोप लगाया समाचार पत्र में प्रकाशित तस्वीर तथा लिखे हुए लेख से यह आशय निकलता है की श्री कैसिडी उसके पति नहीं हैं और वह उसके साथ अवैध रूप से सहवास में रहती है। न्यायालय में यह अभिनिर्धारित किया गया कि की गयी वक्रोक्ति स्थापित की गई और प्रतिवादी की निर्दोषिता का बचाव क्षम्य नहीं है। |
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31. हलटन एंड कं. बनाम जोंस, (1910) ए.सी. 20 |
अखबार ने आर्टमस जोंस नाम के एक व्यक्ति के बारे में एक काल्पनिक लेख प्रकाशित किया। समाचार के लेख ने काल्पनिक व्यक्ति के नैतिकता पर सवाल उठाये थे। उसी नाम के एक वास्तविक व्यक्ति ने मानहानि के लिए एक कार्रवाई की। प्रतिवादी को दायी माना गया था। |
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32. एडम बनाम वार्ड, (1917) ए.सी. 309 |
यह अभिनिर्धारित किया गया कि विशिष्ट अवसर (Privileged Occasion) ऐसा अवसर होता है जहां एक व्यक्ति जो संसूचना करता है, उसके पास निहत कर्त्तव्य होता है एवं जिस व्यक्ति जिसके पास इसे भेजा जाता है उसका भी पारस्परिक हित इसमें निहित होता है। पारस्परिकता आवश्यक है। (It was held that a privileged Occasion is an occasion where the person who makes a communication has an interest or duty to make such statement and the person to whom it is made has a corresponding interest to recieve. The reciprocity is essential.) |
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विद्वेषपूर्ण अभियोजन (Malicious Prosecution) |
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33. डब्ल्यू.बी.एस.ई.बी. बनाम डी. के. राय, एआईआर 2007 एससी 976 |
विद्वेषपूर्ण अभियोजन का अर्थ है एक गलत या अनुचित उद्देश्य से और एक संभावित कारण के बिना दूसरे के विरुद्ध एक न्यायिक कार्यवाही करना। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि विद्वेषपूर्ण अभियोजन के गठन के लिए दो आवश्यक तत्व हैं: 1. परिवादी अभियोजन की स्थापना के लिए कोई संभावित कारण नहीं है। 2. इस तरह की कार्यवाही वादी के पक्ष में समाप्त हो गई। |
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34. नागेन्द्र नाथ रे बनाम बसंता दास बैराग्य, आईएलआर (1929) 47 Cal. 25 |
यह अभिनिर्धारित किया गया कि पुलिस अधिकारियों के समक्ष कार्यवाही कोई अभियोजन नहीं है। |
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35. हिक्स बनाम फॉल्कर, (1878) 8 क्यूबीडी 167 |
न्यायालय ने माना कि यह एक उचित और संभावित कारण है कि प्रतिवादी के पास यह सोचने के लिए पर्याप्त आधार हैं कि वादी अध्यारोपित अपराध के लिए शायद दोषी था। |
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राज्य का दायित्व (Liability of State) |
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36. पेनिंसुलर एंड ओरिएंटल स्टीम नेविगेशन कं. बनाम सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंडिया, (1861) 5 बॉम्बे एचसीआर 1 |
यह अभिनिर्धारित हआ कि यदि किया गया कृत्य राज्य की संप्रभुत्ता के अधिकार क्षेत्र में है. तो राज्य पर वाद नहीं चलाया जा सकता है, लेकिन यदि किया गया कृत्य एक गैर-संप्रभु कार्य है तो राज्य पर वाद दायर किया जा सकता है। |
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37. नोबिन चंद्र डे बनाम सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंडिया, आईएलआर 1 Cal. 11 |
राज्य को दायित्व से मुक्त किया गया था जब वह (राज्य) अपनी संप्रभुता के दायरे में कार्य कर रहा था। |
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38. राजस्थान राज्य बनाम विद्यावती, एआईआर 1962 एससी 933 |
सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्थापित किया कि संविधान ने एक लोक हितकारी राज्य की स्थापना की है, जिसमें राज्य को कल्याणकारी कृत्यों को करने की आवश्यकता होती है। इस तरह के परिदृश्य में राज्य अपने कर्मचारियों के अपकृत्यों के प्रति प्रतिरक्षित (immune) नहीं होगा। |
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39. कस्तूरी लाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, एआइआर 1965 एस.सी. 1039 |
सर्वोच्च न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया कि राज्य संप्रभु शक्तियों के प्रयोग में उत्तरदायी नहीं होगा। |
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मिथ्या बन्दीकरण एवं अतिचार (False Imprisonment & Trespass) |
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40. बर्ड बनाम जोंस, (1845) 7 क्यूबी 742 |
यह अभिनिर्धारित किया गया कि यदि किसी व्यक्ति को किसी विशेष दिशा में जाने से रोका जाता है लेकिन उसे वापस जाने की अनुमति है तो यह कोई मिथ्या कारावास नहीं है। |
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41. पेरेरा बनाम वंदियार, (1935) 1 डब्ल्यूएलआर 672 |
न्यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया कि जिस उद्देश्य के लिए व्यक्ति ने प्रवेश किया है, उससे आगे बढ़कर कार्य करना भी अतिचार हो सकता है। |
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