
जब कभी भी इस अधिनियम के उल्लंघन में किसी भी भूमि पर, किसी भी मादक द्रव्य का विनिर्माण या संग्रहण किया जाय या भांग के पौधे की खेती की जाये तो-
(क) ऐसी भूमि का कोई भी स्वामी या अधिभोगी और किसी ऐसे स्वामी या अधिभोगी का कोई भी अभिकर्ता, और
(ख) समस्त ग्राम मुखिया, ग्राम-लेखापाल, ग्राम चौकीदार, और ग्राम में सरकार या प्रतिपाल्य अधिकरण की ओर से भूमि के राजस्व या लगान के संग्रहण में नियोजित किये गये समस्त अधिकारी, इस बात के लिये आबद्ध होंगे कि वे, युक्तियुक्त प्रतिहेतु न होने पर, इस तथ्य की सूचना, उस तथ्य की उसको जानकारी होते ही, मजिस्ट्रेट को या आबकारी, पुलिस या भू-राजस्व विभाग के किसी अधिकारी को दें।
आबकारी आयुक्त या कलेक्टर या कोई भी आबकारी अधिकारी, जो कि ऐसे पद से निम्न पद का न हो, जिसे कि राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा विहित करे, या उस संबंध में सम्यक्रूपेण सशक्त किया गया कोई भी पुलिस अधिकारी-
(क) दिन में या रात में किसी भी समय, किसी भी ऐसे स्थान में, जिसमें कि कोई भी अनुज्ञप्त विनिर्माता किसी भी मादक द्रव्य का विनिर्माण या उसे भण्डारित करता हो, प्रवेश कर सकेगा तथा निरीक्षण कर सकेगा; और
(ख) उन घन्टों में, जिनके दौरान विक्रय की अनुज्ञा हो, किसी समय और किसी भी ऐसे अन्य समय, जिसके कि दौरान वह खुला रहता हो, किसी ऐसे स्थान में, जहां कि इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति धारण करने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा कोई मादक द्रव्य विक्रय के लिये रखा जाता हो, प्रवेश कर सकेगा तथा निरीक्षण कर सकेगा, और
(ग) लेखाओं तथा रजिस्टरों की परीक्षा कर सकेगा और ऐसे स्थान में पाई जाने वाली किन्हीं सामग्रियों, भभकों, पात्रों, उपकरणों, साधित्र या मादक द्रव्य की परीक्षा, जांच, माप या तौल कर सकेगा।
(1) कोई भी आबकारी अधिकारी, या कोई भी पुलिस अधिकारी जो ऐसे पद से निम्न पद का न हो, जैसा कि राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, विहिंत करें, या इस निमित्त राज्य सरकार की अधिसूचना द्वारा, सम्यक् रूप से सशक्त किया गया राजस्व विभाग का कोई भी एक अधिकारी या अधिकारियों का वर्ग, ऐसे निर्बंधनों के अध्यधीन रहते हुए, जैसा कि राज्य सरकार विहित करे, तथा इस निमित्त राज्य सरकार की अधिसूचना द्वारा सम्यक रूप से सशक्त कोई भी अन्य व्यक्ति, -
(क) किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जो धारा 23-क, धारा 34, धारा 35, धारा 36, धारा 36-क, धारा 36-ख, धारा 36-7, धारा 37, धारा 38-क, धारा 40 या धारा 49-क के अधीन दण्डनीय अपराध करता हुआ पाया जाए, वारंट के बिना गिरफ्तार कर सकेगा; और
(ख) किसी मादक द्रव्य या अन्य वस्तु का, जिसके संबंध में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह इस अधिनियम के या आबकारी राजस्व से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन अधिहरण के लिए दायी है, अभिग्रहण करेगा तथा उन्हें निरुद्ध करेगा; और
(ग) किसी भी व्यक्ति को जिस पर तथा किसी भी जलयान, बेड़ा, यान, पशु पैकेज, पात्र या आवेष्टक जिसमें या जिस पर किसी ऐसी वस्तु होने के संदेह का उसके पास युक्तियुक्त कारण है, निरुद्ध कर सकेंगा तथा उसकी तलाशी ले सकेगा।
(2) जब किसी व्यक्ति पर यह अभियोग लगाया जाय कि उसके संबंध में युक्तियुक्तरूप से यह संदेह किया जाय कि उसने इस अधिनियम के अधीन अपराध किया है, और ऐसे अधिकारी द्वारा पूछे जाने पर अपना नाम और निवास स्थान बतलाने से इन्कार करे या ऐसा नाम या निवास स्थान बतलावे जिसके मिथ्या होने का विश्वास करने का ऐसे अधिकारी के पास कारण हो, तो वह ऐसे अधिकारी द्वारा गिरफ्तार किया जा सकेगा जिससे कि उसका नाम तथा निवासस्थान अभिनिश्चित किया जा सके।
यदि कोई मजिस्ट्रेट, इत्तिला मिलने पर ऐसी जांच यदि कोई हो के पश्चात्, जिसे वह आवश्यक समझे, यह विश्वास करने का कारण रखता हो कि धारा 34, धारा 35, धारा 36, धारा 36-क, धारा 36-ख, धारा 36-ग, धारा 37, धारा 38, धारा 38-क, धारा 39 या धारा 40 के अधीन अपराध किया गया है, किया जा रहा है, या उसके किये जाने की संभावना है, तो वह-
(क) किसी भी ऐसे स्थान की तलाशी के लिये जिसके सम्बन्ध में उसके पास यह विश्वास करने का कारण हो कि उसमें कोई भी मादक द्रव्य, भभका, पात्र उपकरण, साधित्र, या सामग्रियां, जो ऐसा अपराध करने के लिए उपयोग में लाई जाती हैं, या जिनके संबंध में ऐसा अपराध किया गया है, किया जा रहा है, या किये जाने की संभावना है रखी गई हैं या छिपाई गई हैं, और
(ख) किसी भी ऐसे व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए जिसके कि संबंध में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह किसी भी अपराध के करने में लगा रहा है, लगा हुआ है, या उसमें उसके लगे रहने की संभावना है, वारण्ट जारी कर सकेगा।
जब कभी किसी आबकारी अधिकारी के पास, जो ऐसे पद से निम्न पद का न हो जिसे कि राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा विहित, करे, यह विश्वास करने का कारण हो कि धारा 34, धारा 35, धारा 36 धारा 36-क, धारा 36-ख, धारा 36-ग. धारा 37, धारा 38, धारा 38-क, धारा 39 या धारा 40 के अधीन अपराध किया गया है, किया जा रहा है या उसके किये जाने की संभावना है, और यह कि ऐसी तलाशी वारण्ट, अपराधी के निकल भागने या अपराध का साक्ष्य छिपाने का अवसर दिये बिना, अभिप्राप्त नहीं किया जा सकता, तो वह अपने विश्वास के आधारों को अभिलिखित करने के पश्चात् -
(क) दिन या रात में किसी भी समय, किसी भी स्थान में प्रवेश कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा और उसमें प्राप्त किसी भी वस्तु का, जिसके संबंध में उसे यह विश्वास करने का कारण हो कि वह इस अधिनियम के अधीन अधिहरण के दायित्वाधीन है, अभिग्रहण कर सकेगा, और
(ख) ऐसे स्थान में पाये गये किसी भी व्यक्ति को जिसके कि संबंध में उसके पास यह विश्वास करने का कारण हो कि वह यथापूर्वोक्त ऐसे अपराध का दोषी है, निरुद्ध कर सकेगा तथा उसकी तलाशी ले सकेगा और यदि वह उचित समझे तो उसे गिरफ्तार कर सकेगा।
कोई भी आबकारी अधिकारी जो ऐसे पद से निम्न पद का न हो जिसे कि राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जो कि इस अधिनियम के अधीन उसके कर्तव्य के निष्पादन में बाधा डाले या उस पर हमला करे वारण्ट के बिना गिरफ्तार कर सकेगा:
परन्तु इस धारा के अधीन गिरफ्तार किये गये प्रत्येक व्यक्ति की जमानत, गिरफ्तार करने वाले व्यक्ति द्वारा मंजूर की जायेगी यदि यथास्थिति मजिस्ट्रेट के समक्ष अथवा पुलिस या आबकारी अधिकारी के समक्ष उपसंजाति के लिये पर्याप्त जमानत दे दी जाय।
(1) ऐसी पद श्रेणी से अनिम्न पदश्रेणी का तथा ऐसे विनिर्दिष्ट क्षेत्र के भीतर, जिसे राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा विहित करे, कोई भी आबकारी अधिकारी धारा 34, धारा 35, धारा 36, धारा 36-क, धारा 38-क, धारा 39, धारा 40, तथा धारा 40 क के अधीन अपराधों के संबंध में उन शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा जो कि दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (क्रमांक 2 सन् 1974) के अध्याय 12 के उपबन्धों द्वारा किसी पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को प्रदत्त की गई हैं:
परन्तु कोई भी ऐसी शक्ति ऐसे निर्बन्धनों तथा उपान्तरणों (यदि कोई हों) के अधीन होगी जैसे कि राज्य सरकार नियमों द्वारा विहित करे।
(2) उक्त संहिता की धारा 156 के प्रयोजनों के लिये वह क्षेत्र, जिसके कि संबंध में आबकारी अधिकारी को उपधारा (1) के अधीन सशक्त किया गया हो, पुलिस थाना समझा जायेगा, और ऐसा अधिकारी उस थाने का भारसाधक अधिकारी समझा जायेगा।
(3) उस संबंध में राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से सशक्त किया गया कोई भी ऐसा अधिकारी, मजिस्ट्रेट को निर्देश किये बिना और ऐसे कारणों से, जो उसके द्वारा अभिलिखित किये जायेंगे, इस अधिनियम के विरुद्ध किसी भी अपराध से, जिसका उसने अन्वेषण किया हो या जिसकी उसे रिपोर्ट की गई हो, संबंधित या संबंधित समझे गये किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध आगे की कार्यवाही रोक सकेगा।
यदि धारा 55 की उपधारा (1) के अधीन सशक्त किये गये किसी आबकारी अधिकारी द्वारा अन्वेषण किये जाने पर प्रतीत हो कि अभियुक्त के अभियोजन को न्यायोचित ठहराने लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं, तो अन्वेषण अधिकारी, जब तक कि वह धारा 55 की उपधारा (3) के अधीन कार्यवाही न करे, एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा जिसे दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (क्रमांक 2 सन् 1974) की धारा 190 के प्रयोजनों के लिए उस न्यायिक मजिस्ट्रेट को की गई पुलिस रिपोर्ट समझा जाएगा जो कि उस मामले की जांच करने या उसका विचारण करने की अधिकारिता रखता हो तथा पुलिस रिपोर्ट पर अपराधों का संज्ञान करने के लिए सशक्त हो।
जहां कलेक्टर की पदश्रेणी से निम्न पद श्रेणी का कोई आबकारी अधिकारी इस अधिनियम के अधीन कोई गिरफ्तारी, अभिग्रहण या तलाशी करता है वहां वह ऐसी गिरफ्तारी, अभिग्रहण या तलाशी के पश्चात् चौबीस घन्टे के भीतर ऐसी गिरफ्तारी, अभिग्रहण या तलाशी की समस्त विशिष्टियों की पूर्ण रिपोर्ट अपने निकटतम वरिष्ठ अधिकारी को करेगा, और, जब तक कि धारा 59 के अधीन जमानत प्रतिगृहीत न कर ली जाय, गिरफ्तार किये गये व्यक्ति को, या अभिगृहीतं की गई चीज को विचारण या न्याय निर्णयन के लिए, सुविधानुसार पूर्ण शीघ्रता से किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जायेगा या भेजेगा।
पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी, इस अधिनियम के अधीन अभिगृहीत समस्त वस्तुओं को, जो कि उसे परिदत्त की जायें, अपने भारसाधन में लेगा तथा उन्हें मजिस्ट्रेट या आबकारी अधिकारी के आदेश होने तक सुरक्षित अभिरक्षा में रखेगा, और किसी भी ऐसे आबकारी अधिकारी को जो कि पुलिस थाने तक ऐसी वस्तुओं के साथ जाये या जोकि उसके वरिष्ठ अधिकारी द्वारा उस प्रयोजन के लिये प्रतिनियुक्त किया जाय, इस बात की अनुज्ञा देगा कि वह ऐसी वस्तुओं पर अपनी मुद्रा लगाये और उनके या उनमें से नमूना ले ले। इस प्रकार लिये गये समस्त नमूने थाने के भार-साधक अधिकारी की मुद्रा से भी मुद्रांकित किये जायेंगे।
इस अधिनियम में अभिव्यक्तरूप से अन्यथा उपबन्धित के सिवाय दंड प्रक्रिया संहिता 1973 (क्रमांक 2 सन् 1974) के वे उपबन्ध, जो गिरफ्तारियों, अभिरक्षा में निरुद्ध किये जाने, तलाशियों, सम्मनों, गिरफ्तारियों के वारंटों, तलाशी वारंटों, गिरफ्तार किये गये व्यक्तियों को पेश करने, तथा अभिगृहीत की गई चीजों के व्ययन से संबंधित हैं, यथाशक्य, उन समस्त कार्यवाहियों को लागू होंगे जो कि इस अधिनियम के अधीन इस संबंध में की गई हों।
(1) धारा 59-क में विनिर्दिष्ट अपराधों के सिवाय, इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय समस्त अपराध, दण्ड प्रक्रिया प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का सं. 2) के अर्थ के अन्तर्गत जमानतीय होंगे।
(2) जब कोई व्यक्ति उस व्यक्ति या अधिकारी द्वारा जिसे कि गिरफ्तार किये गये व्यक्तियों को जमानत पर छोड़ने का प्राधिकार न हो, इस अधिनियम के अधीन वारण्ट पर गिरफ्तार न किया जाकर, अन्यथा गिरफ्तार किया गया हो, तो वह-
(क) ऐसे निकटतम आबकारी अधिकारी के, जिसे कि गिरफ्तार किये गये व्यक्तियों को जमानत पर छोड़ने का प्राधिकार हो; या
(ख) पुलिस थाने के निकटतम भारसाधक अधिकारी के, जो भी निकटतम हो समक्ष पेश किया जायेगा या भेजा जायेगा।
(3) जब कभी कोई भी ऐसा व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन वारण्ट पर गिरफ्तार न किया जाकर अन्यथा गिरफ्तार किया गया हो, जमानत देने के लिये तैयार हो, और ऐसे अधिकारी द्वारा, जिसे कि गिरफ्तार किये गये व्यक्तियों को जमानत पर छोड़ने का प्राधिकार हो, गिरफ्तार किया गया हो, या उपधारा (2) के अनुसार उसके समक्ष पेश किया गया हो, तो वह जमानत पर या उसको छोड़ने वाले अधिकारी के विवेक पर, उसके स्वयं के बन्धपत्र पर छोड़ दिया जायेगा।
(4) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (क्र० 2 सन् 1974) की धारा 441 से 444 तक के तथा धारा 446 एवं 449 के उपबन्ध, यथाशक्य, ऐसे मामले में लागू होंगे जिसमें इस धारा के अधीन जमानत प्रतिगृहीत कर ली जाये या बन्धपत्र ले लिया जाय।
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का सं. 2) या इस अधिनियम की धारा 59 में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, -
(एक) धारा 49-क के अधीन दण्डनीय किसी अपराध में अभियुक्त किसी व्यक्ति के संबंध में या ऐसे व्यक्ति के संबंध में जो ऐसा व्यक्ति नहीं है जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन अनुज्ञप्ति धारण कर रहा है और जो धारा 34 को उपधारा (1) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) के अन्तर्गत आने वाले किसी अपराध में अभियुक्त है, के संबंध में और जहां ऐसे अपराध का पता लगाते समय या उसके दौरान पाई गई मदिरा की मात्रा पांच बल्क लीटर से अधिक है, किसी भी न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत का कोई भी आवेदन ग्रहण नहीं किया जाएगा;
(दो) धारा 49-क के अधीन दंडनीय किसी अपराध में अभियुक्त किसी व्यक्ति को या ऐसे व्यक्ति, को जो ऐसा व्यक्ति नहीं है, जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन अनुज्ञप्ति धारण कर रहा है और जो धारा 34 की उपधारा (1) के खण्ड (क) या खंड (ख) के अन्तर्गत आने वाले किसी अपराध में अभियुक्त है, को जहां ऐसे अपराध का पता लगाते समय या उसके दौरान पाई गई मदिरा की मात्रा पांच बल्क लीटर से अधिक हो, जमानत पर या स्वयं उसके बंधपत्र पर, तब तक निर्मुक्त नहीं किया जायेगा जब तक कि लोक अभियोजक को ऐसी निर्मुक्ति के आवेदन का विरोध करने का अवसर न दे दिया गया हो और उस मामले में ऐसे आवेदन का लोक अभियोजक द्वारा विरोध किया जाए तथा जब तक कि न्यायालय का यह समाधान नहीं हो जाए कि यह विश्वास करने के युक्तियुक्त आधार हैं कि अभियुक्त ऐसे अपराध का दोषी नहीं है और यह कि जब वह जमानत पर हो तब यह संभावना नहीं है कि वह कोई अपराध करेगा:
परन्तु कोई भी न्यायालय ऐसे व्यक्ति को, जहां वह धारा 34 की उपधारा (1) के खंड (क) या खण्ड (ख) के अंतर्गत आने वाले किसी अपराध से संबंधित है जिसमें उस अपराध का पता लगाते समय या उसके दौरान पाई गई मदिरा की मात्रा पांच बल्क लीटर से अधिक है, 60 दिन से अधिक की कुल कालावधि के लिये तथा जहां वह धारा 49-क के अधीन किसी अपराध से संबंधित है, वहां 120 दिन से अधिक की कुल कालावधि के लिए अभिरक्षा में निरुद्ध रखने के लिए कोई आदेश पारित नहीं करेगा तथा यथास्थिति, 60 दिन या 120 दिन की ऐसी कालावधि का अवसान हो जाने पर और रिपोर्ट या शिकायत न किए जाने की दशा में अभियुक्त को जमानत प्रस्तुत करने पर निर्मुक्त कर दिया जाएगा;
(तीन) जमानत मंजूर करने के लिए खण्ड (दो) में विनिर्दिष्ट परिसीमा दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का सं. 2) या जमानत मंजूर करने से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन विहित परिसीमाओं के अतिरिक्त है:
परन्तु धारा 34 की उपधारा (1) के खण्ड (क) और (ख) के अधीन यथास्थिति "चावल" या "ज्वार" से निर्मित "लांदा" एवं " हंडिया", और "महुआ" से निर्मित "हाथ-भट्ठी शराब" से संबंधित अपराध जमानतीय होंगे, यदि ऐसा अपराध, अनुसूचित क्षेत्र के भीतर ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जो उक्त अनुसूचित क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति का सदस्य है।)
61. अभियोजनों का निर्बन्धन
(1) कोई भी न्यायालय-
(क) धारा 37, धारा 38, धारा 38-क, धारा 39 के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का संज्ञान, कलेक्टर के या जिला आबकारी अधिकारी से अनिम्न पदश्रेणी के किसी ऐसे आबकारी अधिकारी के, जिसे कलेक्टर द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाये, परिवाद या रिपोर्ट पर ही; और
(ख) इस अधिनियम की धारा 49 से भिन्न किसी धारा के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का संज्ञान किसी आबकारी अधिकारी या पुलिस अधिकारी के परिवाद या रिपोर्ट पर ही, करेगा अन्यथा नहीं।
(2) राज्य सरकार की विशेष मंजूरी के सिवाय, कोई भी न्यायिक मजिस्ट्रेट इस अधिनियम या उसके अधीन के किसी नियम या आदेश के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान तब तक नहीं करेगा जब तक कि अभियोजन उस तारीख से, जिसको कि तस अपराध का किया जाना अभिकथित है, छः मास के भीतर संस्थित न किया गया हो।
जब कभी दो या दो से अधिक व्यक्तियों को इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के लिए अभियोजित किया जाय, तब अपराध की जांच या विचारण करने वाला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या कोई प्रथम वर्ग का मजिस्ट्रेट, ऐसे कारणों से जो कि उसके द्वारा लेखबद्ध किये जायेंगे, किसी अभियुक्त व्यक्ति को इस शर्त पर क्षमादान कर सकेगा कि वह अपराध से संबंधित समस्त तथ्यों को पूर्ण और सत्य प्रकट कर दे।