धारा 13 से 24 अध्याय 4 छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915

धारा 13 से 24 अध्याय 4 छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915

अध्याय 4

विनिर्माण, कब्जा तथा विक्रय

13. मादक द्रव्यों के विनिर्माण आदि के लिये अपेक्षित अनुज्ञप्ति

निम्न लिखित के सम्बन्ध में मंजूर की गई अनुज्ञप्ति के अधिकार के अधीन तथा उसके निबन्धनों एवं शर्तों के अध्यधीन रहते हुये भी-

() किसी भी मादक द्रव्य का विनिर्माण या संग्रहण किया जायेगा;

() किसी भी भांग के पौधे की खेती की जायेगी;

() किसी भी ताड़ी उत्पन्न करने वाले वृक्ष को छिद्रित किया जायेगा और किसी भी वृक्ष से ताड़ी निकाली जायेगी;

() कोई भी मदिरा विक्रय के लिए बोतल में भरी जायेगी;

() किसी भी डिस्टिलरी या ब्रूअरी का निर्माण किया जायेगा या चलाई जायेगी; और

() कोई भी व्यक्ति ताड़ी से भिन्न किसी भी मादक द्रव्य के विनिर्माण के प्रयोजन के लिये कोई भी सामग्री, भभका, पात्र, उपकरण या साधित्र उपयोग में लायेगा और अपने पास या अपने कब्जे में रखेगा; अन्यथा नहीं:

परन्तु राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, यह घोषित कर सकेगी कि इस धारा के उपबंध इस सम्बन्ध में विनिर्दिष्ट किये गये किसी भी क्षेत्र से, ऐसी शर्तों के अध्यधीन रहते हुये, जैसे कि वह विहित करे, ताड़ी उत्पन्न करने वाले वृक्षों को छिद्रित करने के सम्बन्ध में अथवा ताड़ी निकालने के सम्बन्ध में लागू नहीं होंगे:

परन्तु यह और भी कि राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, यह घोषित कर सकेगी कि धारा के उपबन्ध ऐसी शर्तों के अध्यधीन रहते हुये जैसी कि वह विहित करे, गृह उपभोग के लिए मदिरा के विनिर्माण को, ऐसे क्षेत्रों में जैसे कि इस सम्बन्ध में विनिर्दिष्ट किये जायें, लागू नहीं होंगे।

14. डिस्टलरियों और भाण्डागारों का स्थापन या अनुज्ञापन

आबकारी आयुक्त -

() ऐसी डिस्टिलरी स्थापित कर सकेगा जिसमें धारा 13 के अधीन मंजूर की गई अनुज्ञप्ति के अधीन ऐसी शर्तों पर, जिन्हें राज्य सरकार अधिरोपित करे, स्पिरिट का विनिर्माण किया जा सकेगा;

() किसी भी ऐसी डिस्टिलरी को बन्द कर सकेगा;

() ऐसी शर्तों पर, जिन्हें राज्य सरकार अधिरोपित करे, डिस्टिलरी या ब्रूअरी के विनिर्माण तथा उसके कार्यकरण के लिये अनुज्ञप्ति दे सकेगा;

() ऐसे भाण्डागार का स्थापन कर सकेगा या उसके सम्बन्ध में अनुज्ञप्ति दे सकेगा जिसमें किसी भी मादक द्रव्य का, शुल्क के संदाय के बिना, किन्तु ऐसी फीस के संदाय के अध्यधीन, जिसे कि राज्य सरकार निदेशित करे, निक्षेप किया जा सकेगा और उसे रखा जा सकेगा; और

() किसी भी ऐसे भाण्डागार को बन्द कर सकेगा।

15. डिस्टिलरी, ब्रूअरी या भण्डारकरण के स्थान से हटाये जाने पर शुल्क का संदाय.

कोई भी मादक द्रव्य, इस अधिनियम के अधीन स्थापित या अनुज्ञप्त किसी भी डिस्टिलरी, ब्रूअरी, भाण्डागार या भण्डारकरण के किसी भी अन्य स्थान से राज्य सरकार की मंजूरी के बिना उस समय तक नहीं हटाया जाएगा जब तक कि पांचवें अध्याय के अधीन देय शुल्क (यदि कोई हो) चुका दिया गया हो या उसके संदाय के लिये बन्धपत्र का निष्पादन कर दिया गया हो।

16. मादक द्रव्यों का साधारणतया कब्जा

(1) राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा, किसी भी मादक द्रव्य के कब्जे के लिये मात्रा की सीमा विहित कर सकेगी :

परन्तु उसी वस्तु को विभिन्न क्वालिटियों के लिये भिन्न- भिन्न सीमायें विहित की जा सकेंगी।

(2) कोई भी व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन विहित सीमाओं से अधिक किसी भी मादक द्रव्य की कोई भी मात्रा, -

() ऐसे मादक द्रव्य के विनिर्माण, खेती, संग्रहण, विक्रय या प्रदाय सम्बन्धी अनुज्ञप्ति के; या

() ऐसे मादक द्रव्य की आयात, निर्यात या परिवहन सम्बन्धी पास के; या

() इस अधिनियम के अधीन मंजूर किये गये अनुज्ञापत्र के, प्राधिकार के अधीन तथा उसके निबन्धनों एवं शर्तों के अनुसार ही अपने कब्जे में रख सकेगा अन्यथा नहीं।

(3) उपधारा (2) किसी भी ऐसी मदिरा को लागू नहीं होगी, -

() जो इस रूप में किसी भी सामान्य वाहक या भाण्डागारिक के कब्जे में हो;

() विलुप्त।

(4) पूर्वगामी उपधारा में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुये भी, राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, राज्य में या किसी विनिर्दिष्ट क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग द्वारा किसी भी मादक द्रव्य का कब्जा रखने का आत्यंतिकतः या ऐसी शर्तों के अध्यधीन रहते हुये, जिन्हें कि वह विहित करे, प्रतिषेध कर सकेगी।

(5) अनुसूचित क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों के धार्मिक उत्सवों के अवसर पर यथास्थिति "चावल" या "ज्वार" से निर्मित "लांदा" एवं "हंडिया" तथा "महुआ" से निर्मित "हाथ-भ‌ट्ठी शराब" के अधिकतम 5 लीटर की मात्रा तक उक्त अनुसूचित क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति के सदस्यों द्वारा अनुसूचित क्षेत्र के भीतर घरेलू उपभोग हेतु परिवहन के लिए अधिनियम की धारा 16 की उप-धारा (2) के खण्ड () के अधीन "पास" की आवश्यकता नहीं होगी।

17. मादक द्रव्यों के विक्रय के लिये अनुज्ञप्ति

(1) कोई भी मादक द्रव्य उस सम्बन्ध में मंजूर की गई अनुज्ञप्ति के प्राधिकार के अधीन तथा उसके निबन्धनों एवं शर्तों के अध्यधीन ही बेचा जायेगा अन्यथा नहीं:

परन्तु -

() किसी भी वृक्ष से निकाली गई ताड़ी पर अधिकार रखने वाला व्यक्ति, ऐसी ताड़ी किसी भी अनुज्ञप्ति के बिना, ऐसे व्यक्ति को बेच सकेगा जो इस अधिनियम के अधीन ताड़ी का विनिर्माण या विक्रय करने के लिये अनुज्ञप्त हो;

() भांग के पौधे की खेती करने के लिये धारा 13 के अधीन अनुज्ञप्त व्यक्ति, पौधों के उन भागों का, जिनसे मादक औषधि का विनिर्माण किया जाता हो, या उसका उत्पादन किया जाता हो, इस अधिनियम के अधीन उनका व्यापार करने के लिये अनुज्ञप्त व्यक्ति को, या किसी भी ऐसे अधिकारी को, जिसे आबकारी आयुक्त, विहित करे, अनुज्ञप्ति के बिना विक्रय कर सकेगा; और

() इस धारा की कोई भी बात किसी भी ऐसी विदेशी मदिरा के विक्रय को लागू नहीं होगी जो किसी भी व्यक्ति द्वारा अपने प्राइवेट उपयोग के लिये विधिपूर्वक प्राप्त की गई हो और उसके द्वारा बेची गई हो या उसके स्थान छोड़ने पर या उसकी मृत्यु के पश्चात् उसकी ओर से या उसके हित प्रतिनिधियों की ओर से बेची गई हो।

(2) ऐसी शर्तों पर, जिन्हें आबकारी आयुक्त अवधारित करे, अन्य राज्यों में या संघ राज्य क्षेत्रों में तत्समय प्रवृत्त आबकारी विधि के अधीन विक्रय सम्बन्धी अनुज्ञप्ति इस अधिनियम के अधीन उस सम्बन्ध में मंजूर की गई अनुज्ञप्ति समझी जा सकेगी।

(3) मदिरा का विक्रय अथवा आपूर्ति, -

() मदिरा के विक्रय की अनुमति केवल अनुज्ञप्ति प्राप्त ऐसे मदिरा दुकानों के माध्यम से दी जायेगी जो राष्ट्रीय अथवा राज्य राजमार्ग अथवा ऐसे राजमार्ग के सर्विस रोड के बाह्य रेंज से 500 मीटर की दूरी की परिधि के भीतर अवस्थित नहीं होगी तथा ऐसे मदिरा दुकान राष्ट्रीय अथवा राज्य राजमार्ग से प्रत्यक्ष दृश्यमान हो और ही सीधे पहुंच में हो

परन्तु यह कि उपरोक्त प्रावधान, उन राष्ट्रीय/राज्य राजमार्गों को लागू नहीं होंगे, जो किसी नगरीय क्षेत्र में से होकर गुजरते हैं;

() किसी न्यायालय, अधिकरण अथवा प्राधिकारी के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, होटल, जिसके पास अनुज्ञप्ति है, ऐसे होटल के परिसर के भीतर, ऐसी मदिरा के उपभोग हेतु सदस्यों, मेहमानों या अन्य व्यक्तियों को मदिरा की आपूर्ति करने हेतु पात्र होगा चाहे ऐसा होटल, किसी राष्ट्रीय अथवा राज्य राजमार्ग पर या उसके निकट अवस्थित हो;

() किसी न्यायालय, अधिकरण अथवा प्राधिकारी के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी होटल एवं सामान्य मद्यपान गृहों को मदिरा के विक्रय के लिये जारी की गई अनुज्ञप्ति को, सदैव मदिरा की आपूर्ति के लिए जारी किया गया समझा जायेगा तथा इस अधिनियम एवं इसके अधीन निर्मित नियमों के समस्त प्रावधान निरंतर लागू रहेंगे जैसे कि वे मदिरा के विक्रय पर थे।

स्पष्टीकरण

संदेह के निराकरण के लिये, एतद्वारा, यह स्पष्ट किया जाता है समस्त कर, ड्यूटी, उपकर अथवा अन्य करारोपण, जैसा कि मदिरा के विक्रय हेतु लागू है. जब तक कि इस अधिनियम में अथवा इसके अधीन निर्मित किसी अन्य अधिनियम, नियम अथवा अधिसूचना में अन्यथा विनिर्दिष्ट हो, मदिरा के विक्रय पर लागू होंगे।

18. विनिर्माण आदि के अधिकार का पट्टा मंजूर करने की शक्ति

(1) राज्य सरकार ऐसी शर्तों पर तथा ऐसी कालावधि के लिये, जिसे वह उचित समझे, किसी विनिर्दिष्ट क्षेत्र के भीतर किसी भी मदिरा या मादक औषधि का,-

() विनिर्माण करने का या थोक से प्रदाय करने का या दोनों का, या

() थोक या फुटकर विक्रय करने का, या

() विनिर्माण करने का या धोक से प्रदाय करने का, या दोनों का, तथा फुटकर विक्रय करने का; अधिकार किसी भी व्यक्ति को पट्टे पर दे सकेगी।       

(2) अनुज्ञापन प्राधिकारी उपधारा (1) के अधीन किसी पट्टेदार को उसके पट्टे के निबन्धनों के अनुसार अनुज्ञप्ति मंजूर कर सकेगा और जब पट्टे में कोई भी ऐसी शर्त हो जो उप-पट्टे पर देने का प्रतिषेध करें तो वह पट्टेदार द्वारा आवेदन-पत्र दिये जाने परः ऐसे प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित किसी भी उप-पट्टेदार की अनुज्ञप्ति मंजूर कर सकेगा।

18-. निर्माण, विक्रय आदि का अनन्याधिकार प्रदान करने की शक्ति.

(1) अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, राज्य शासन, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, किसी मादक द्रव्य, विकृत स्पिरिटयुक्त निर्मिति या भांग का विनिर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, भण्डारण, क्रय, थोक विक्रय, फुटकर विक्रय या संग्रहण का अनन्याधिकार राज्य शासन, के पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रण के किसी भी निगम को प्रदान कर सकेगा।

(2) पूर्वोक्त प्रयोजन हेतु आबकारी आयुक्त, शासन द्वारा बनाये गये नियमों के अध्यधीन रहते हुए, निगम को आवश्यक लायसेंस प्रदान कर सकेगा।

(3) ऐसे लायसेंस प्राप्त होने के पश्चात्, ऐसा निगम पूर्वोक्त प्रयोजनों हेतु अपनी इकाईयाँ, शाखाएं, गोदाम एवं दुकान को ऐसे स्थानों पर तथा ऐसी शर्तों के अध्यधीन, जैसा कि आबकारी आयुक्त विनिर्दिष्ट करे, स्थापित कर सकेगा।

19. ताड़ी निकालने के लिये पट्टेदार की अनुज्ञा

जब ताड़ी के विनिर्माण का अधिकार धारा 18 के अधीन पट्टे पर दे दिया गया हो तो राज्य सरकार यह घोषित कर सकेगी कि ताड़ी निकालने के लिये पट्टेदार की लिखित अनुज्ञा का वही बल तथा प्रभाव होगा जैसा कि उस प्रयोजन के लिये कलेक्टर से प्राप्त की गई अनुज्ञा का होता है।

20. सैनिक छावनियों में मदिरा का विनिर्माण और विक्रय

किसी भी सैनिक छावनी, की सीमाओं के भीतर तथा उन सीमाओं से ऐसी दूरी के भीतर जिसे केन्द्रीय सरकार, किसी मामले में विहित करे, मदिरा के फुटकर विक्रय के लिये कोई भी अनुज्ञप्ति समादेशक अधिकारी की जानकारी तथा सम्मति से मंजूर की जायेगी अन्यथा नहीं।

21. माप और परख के सम्बन्ध में अनुज्ञप्तिधारियों के कर्त्तव्य

प्रत्येक व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन मंजूर की गई अनुज्ञप्ति के अधीन किसी भी मादक द्रव्य का विनिर्माण करे या विक्रय करे, इस बात से आबद्ध होगा कि वह, -

() अपने पास ऐसे मापों, बाटों तथा उपकरणों का प्रदाय बनाये रखे जिन्हें आबकारी आयुक्त विहित करे और उन्हें अनुज्ञप्त परिसरों पर अच्छी दशा में रखे और

() उस सम्बन्ध में सम्यक्रूपेण सशक्त किये गये किसी आबकारी अधिकारी को अध्यपेक्षा पर, किसी भी समय अपने कब्जे में रहने वाले किन्हीं भी मादक द्रव्यों को ऐसी रीति में, जैसा कि उक्त आबकारी अधिकारी अपेक्षित करे, मापे, तौले या परखे।

22. इक्कीस वर्ष से कम आयु के पुरुषों के और स्त्रियों के नियोजन का प्रतिषेध

कोई भी व्यक्ति, जो मादक द्रव्यों का, अपने परिसर में उपयोग किये जाने के लिए, विक्रय किये जाने के लिए अनुज्ञप्त है, उन घन्टों के दौरान, जिनमें ऐसा परिसर कारबार के लिये खुला रहता है, किसी पुरुष को

जिसकी आयु 21 वर्ष से कम हो या किसी स्त्री को, या तो पारिश्रमिक पर या पारिश्रमिक के बिना, ऐसे परिसर के किसी ऐसे भाग में, जिसमें लोगों द्वारा ऐसे मादक द्रव्य का उपभोग किया जाता है, नियोजित नहीं करेगा, या नियोजित किये जाने की अनुज्ञा नहीं देगा।

23. इक्कीस वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को मदिरा या मादक औषधि के विक्रय का प्रतिषेध

कोई भी व्यक्ति, जो मादक द्रव्यों का विक्रय करने के लिये अनुज्ञप्त है, किसी भी ऐसे व्यक्ति को जिसकी आयु प्रकट रूप से इक्कीस वर्ष से कम हो, चाहे ऐसे व्यक्ति द्वारा या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उपभोग किए जाने के लिये, या चाहे ऐसे विक्रेता के परिसर में या उसके बाहर उपभोग के लिये, किसी मदिरा या मादक औषधि का विक्रय नहीं करेगा और उसका परिदान करेगा।

23-. मदिरा से संबंधित विज्ञापनों का प्रतिषेध

(1) इस धारा में "विज्ञापन" में सम्मिलित हैं :-

() कोई सूचना, परिपत्र, नामपत्र, आवेष्टन (रेपर) या कोई अन्य दस्तावेज;

() कोई ऐसा आख्यापन जो मौखिक रूप से किया गया हो, या प्रकाश, ध्वनि या धूम्र उत्पादित करने या पारेषित करने के किसी साधन द्वारा किया गया हो;

() कोई प्रदर्शन जो छत्तीसगढ़ सिनेमा रेग्यूलेशन एक्ट, 1952 (क्रमांक 17 सन् 1952) के अधीन अनुज्ञप्त किसी सिनेमा में या मनोरंजन के किसी अन्य स्थान में पर्दे पर प्रदर्शित स्लाइड या फिल्म के द्वारा किया गया हो।

(2) जो कोई किसी समाचार-पत्र, पुस्तिका, पर्णिका या किसी अन्य एकल या नियतकालिक प्रकाशन में कोई ऐसा विज्ञापन या कोई ऐसी अन्य सामग्री, जिनमें कि किसी मदिरा की प्रशंसा की गई हो, उसका उपयोग करने का आग्रह किया गया हो, या कोई मदिरा देने का प्रस्ताव किया गया हो, या जिससे कि किसी मदिरा की प्रशंसा की जाना, उसका उपयोग करने का आग्रह किया जाना या कोई मदिरा देने का प्रस्ताव किया जाना तात्पर्थित हो, मुद्रित या प्रकाशित करेगा अथवा मुद्रित या प्रकाशित करवाएगा या अन्यथा सम्प्रदर्शित या वितरित करेगा अथवा सम्प्रदर्शित या वितरित करवायेगा अथवा सम्प्रदर्शित या वितरित की जाने देगा, वह ऐसे प्रत्येक अपराध के लिये कारावास से, जो छः माह तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो दो हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों, से, दण्डित किया जायेगा।

(3) उपधारा (4) में अन्यथा उपबन्धित किये गये के सिवाय, उपधारा (2) में की गई कोई भी बात, -

() ऐसे सूची पत्रों या ऐसी मूल्य सूचियों को, जिन्हें कि छत्तीसगढ़ में के मदिरा विक्रय स्थानों में इस अधिनियम के या उसके अधीन बनाये गये नियमों के उपबन्धों के अनुसार सम्प्रदर्शित किया जाना हो;

() किसी ऐसे विज्ञापन या किसी ऐसी अन्य सामग्री को, जो कि छत्तीसगढ़ के बाहर मुद्रित तथा प्रकाशित किसी समाचार-पत्र, पुस्तक, पर्णिका, पुस्तिका या अन्य प्रकाशन में अन्तर्विष्ट है;

() किसी ऐसे विज्ञापन या किसी ऐसी अन्य सामग्री को, जो कि किसी समाचारपत्र में अन्तर्विष्ट है जिसे छत्तीसगढ़ में ऐसी तारीख के पूर्व, जिसे राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, मुद्रित तथा प्रकाशित किया गया हो; और

() किसी ऐसे अन्य विज्ञापन या किसी ऐसी अन्य सामग्री को, जिसे राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा इस धारा के प्रवर्तन से साधारणतः या विशेषतः छूट दे; लागू नहीं होगी।

(4) उपधारा (3) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुये भी, राज्य सरकार, किसी ऐसे विज्ञापन या किसी ऐसी सामग्री, जिसमें कि किसी मदिरा की प्रशंसा की गई हो, उसका उपयोग करने का आग्रह किया गया हो, या कोई मदिरा देने का प्रस्ताव किया गया हो, या जिससे कि किसी मदिरा की प्रशंसा की जाना, उसका उपयोग करने का आग्रह किया जाना या कोई मदिरा देने का प्रस्ताव किया जाना तात्पर्यित हो, से युक्त किसी ऐसे समाचार पत्र, पुस्तक, पर्णिका, पुस्तिका या अन्य प्रकाशन के, जिसे कि राज्य के बाहर मुद्रित तथा प्रकाशित किया गया हो, परिचालन, वितरण या विक्रय का, अधिसूचना द्वारा, राज्य के भीतर प्रतिषेध कर सकेगी; और जो कोई ऐसे समाचार-पत्र, पुस्तक पुस्तिका, पर्णिका, या अन्य प्रकाशन को ऐसी अधिसूचना के उल्लंघन में परिचालित करेगा, वितरित करेगा या बेचेगा, वह ऐसे प्रत्येक अपराध के लिये कारावास से जो छः माह तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, जो दो हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

(5) जब राज्य सरकार को किसी समाचार-पत्र, पुस्तक, पर्णिका, पुस्तिका या अन्य प्रकाशन जिसका मुद्रण प्रकाशन कहीं भी हुआ हो, के बारे में ऐसा प्रतीत हो कि उसमें कोई ऐसा विज्ञापन या कोई ऐसी सामग्री जिसमें कि किसी मदिरा की प्रशंसा की गई हो, उसका उपयोग करने का आग्रह किया गया हो, या कोई मदिरा देने का प्रस्ताव किया गया हो, अन्तर्विष्ट है, जो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, ऐसे समाचार पत्र के अंक की प्रत्येक प्रति तथा ऐसी पुस्तक, पर्णिका, पुस्तिका या ऐसे अन्य प्रकाशन की प्रत्येक प्रति के संबंध में यह घोषणा कर सकेगी कि वह सरकार को समपहत हो जायेगी, और तदुपरि कोई आबकारी अधिकारी पुलिस या राजस्व विभाग का कोई भी अधिकारी तथा राज्य सरकार द्वारा उस सम्बन्ध में प्राधिकृत किया गया कोई अन्य व्यक्ति, उसे चाहे वह छत्तीसगढ़ में कहीं भी पाई जाये, अभिगृहीत कर सकेगा तथा कोई कलेक्टर अथवा प्रथम वर्ग अथवा द्वितीय वर्ग का कोई न्यायिक मजिस्ट्रेट या राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत किया गया कोई अन्य अधिकारी उपनिरीक्षक की पद श्रेणी से अनिम्न पद श्रेणी के किसी पुलिस अधिकारी को वारन्ट द्वारा इस बात के लिये प्राधिकृत कर सकेगा कि वह किसी ऐसे परिसर में जहां ऐसे अंक की कोई प्रति या ऐसी कोई पुस्तक, पर्णिका, पुस्तिका या ऐसा कोई अन्य प्रकाशन मौजूद हो या उसके मौजूद होने का युक्तियुक्त सन्देह हो, प्रवेश करे और उसके लिये तलाशी ले।

24. लोक शान्ति के लिये दुकानों का बन्द किया जाना

(1) जिला मजिस्ट्रेट अनुज्ञप्तिधारी से, लिखित सूचना द्वारा, यह अपेक्षा कर सकेगा कि कोई भी ऐसी दुकानें जिनमें किसी भी मादक द्रव्य का विक्रय किया जाता हो, ऐसे समयों पर या ऐसी कालावधि के लिये, जिसे वह लोक शान्ति के परिरक्षण के लिए आवश्यक समझे, बन्द कर दी जाय।

(2) यदि किसी दुकान के सन्निकट में किसी भी बलवे या विधि विरुद्ध जमाव की आशंका हो, या कोई बलवा या विधि विरुद्ध जमाव हो जाये, तो किसी भी वर्ग का मजिस्ट्रेट, जो उपस्थित हो, अपेक्षा कर सकेगा कि ऐसी दुकान, ऐसी कालावधि के लिये जिसे कि वह आवश्यक समझे बन्द कर दी जाय:

परन्तु जब कोई ऐसा बलवा या विधि विरुद्ध जमाव हो जाय तो अनुज्ञप्तिधारी मजिस्ट्रेट की अनुपस्थिति में किसी आदेश के बिना, अपनी दुकान बन्द कर देगा।

(3) जब कोई मजिस्ट्रेट उपधारा (2) के अधीन कोई आदेश जारी करे तो वह अपनी इस कार्यवाही की तथा उसके लिये अपने कारणों की इत्तिला कलेक्टर को तत्क्षण देगा।

 

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