
(1) यदि राज्य सरकार ऐसा निदेश दे तो यथास्थिति आबकारी शुल्क या कोई प्रतिशुल्क औषधीय और प्रसाधन निर्मितियां (उत्पाद शुल्क) अधिनियम, 1955 (क्रमांक 16 सन् 1955) की अनुसूची में तत्समय विनिर्दिष्ट औषधीय तथा प्रसाधन निर्मितियों से भिन्न आबकारी शुल्क योग्य समस्त ऐसी वस्तुओं पर उद्ग्रहीत किया जायेगा -
(क) जिनका आयात किया गया हो; या
(ख) जिनका निर्यात किया गया हो; या
(ग) जिनका परिवहन किया गया हो; या
(घ) जो धारा 13 के अधीन मंजूर की गई किसी अनुज्ञप्ति के अधीन विनिर्मित की गई हो, खेती में उपजाई गई हों अथवा संग्रहीत की गई हों; या
(ङ) जो इस अधिनियम के अधीन स्थापित की गई किसी आसवनी में या इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्त की गई किसी आसवनी या मध-निर्माणशाला में विनिर्मित की गई हो :
परन्तु राज्य सरकार के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह आबकारी शुल्क योग्य किसी भी वस्तु को किसी ऐसे शुल्क से, जिसके लिये कि वह इस अधिनियम के अधीन दायित्वाधीन हो, छूट दे।
(2) उपधारा (1) के अधीन शुल्क का अधिरोपण-
(एक) उस स्थान के, जहां किसी आबकारी शुल्क योग्य वस्तु को ले जाया जाना है; या
(दो) आबकारी शुल्क योग्य वस्तु की शक्ति (स्ट्रेन्थ) और उसकी क्वालिटी के अनुसार; या
(तीन) आबकारी शुल्क योग्य वस्तु का विभिन्न प्रयोजनों के लिए उपयोग के अनुसार, या
(चार) ऐसे सिद्धान्तों पर, जो कि विहित किए जाएं, आधारित आबकारी शुल्क योग्य वस्तुओं के मूल्य के अनुसार; या
(पांच) आबकारी शुल्क योग्य वस्तुओं के लिए, विहित शुल्क (ड्यूटी) पर 10% अधिभार देय होगा, जिसका अंतरण ग्रामीण तथा नगरीय निकायों को जनसंख्या के आधार पर किया जायेगा, विभिन्न दरों से किया जा सकेगा।
(3) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुये भी, -
(एक) कोई भी शुल्क किसी भी वस्तु पर उपधारा (1) के अधीन अधिरोपित नहीं किया जाएगा जिसका भारत में आयात किए गया हो और जो ऐसा आयात किया जाने पर सी कस्टम्स एक्ट, 1878 (क्रमांक 8 सन् 1878) या इण्डियन टैरिफ एक्ट, 1894 (क्रमांक 8 सन् 1894) के अधीन शुल्क के दायित्वाधीन थी;
(दो) विलुप्त।
(4) इस धारा में अन्तर्विष्ट किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जायेगा कि वह किसी वित्तीय वर्ष के दौरान शुल्क की दरों में वृद्धि करने या उसमें कमी करने से राज्य सरकार को प्रवरित करती है और शुल्क की दर में वृद्धि करने या उसमें कमी करने की शक्ति के अंतर्गत ऐसी वृद्धि या कमी को किसी ऐसे दिनांक से, जो उस वित्तीय वर्ष के प्रारंभ से पूर्व की न हो, भूतलक्षी प्रभाव देने की शक्ति आयेगी।
समय, स्थान तथा रीति को विनियमित करने वाले ऐसे नियमों के अध्यधीन रहते हुये, जिन्हें कि राज्य सरकार विहित करे, ऐसा शुल्क आबकारी कर-योग्य वस्तु की ऐसी मात्रा पर आनुपातिक रूप में में उद्ग्रहीत किया जायेगा जो कि आयात की गई हो, निर्यात की गई हो, परिवहन की गई हो, संग्रहित की गई हो या किसी डिस्टिलरी, ब्रुअरी या भाण्डागार में जिसका विनिर्माण किया गया हो जो उसमें से दी गई हो
परन्तु –
(1) शुल्क-
(क) मादक औषधियों पर, भाँग के पौधे की खेती पर उद्ग्रहीत की गई एकड़ वार दर से या संग्रहीत मात्रा पर प्रभारित की गई दर से,
(ख) इस अधिनियम के अधीन स्थापित किसी डिस्टिलरी या अनुज्ञप्त किसी डिस्टिलरी या ब्रुअरी में विर्निमित स्पिरिट या बीयर-
(एक) उपयोग में लाई गई सामग्रियों की मात्रा संगणित किये गये तुल्यांकों के ऐसे मान के अनुसार, या यथास्थिति वाश या वर्ट की क्षीणता की मात्रा के अनुसार, जैसा कि राज्य सरकार विहित करे, या
(दो) उपयोग में लाई गई सामग्रियों पर, प्रत्यक्षतः प्रभारित की गई दर से,
(ग) ताड़ी पर प्रत्येक ऐसे वृक्ष पर, जिससे ताड़ी निकाली जाय, कर द्वारा उद्ग्रहीत किया जा सकेगा।
(2) जबकि किसी भाण्डागार से विक्रय के लिये किसी आबकारी कर योग्य वस्तु के लिए जाने पर संदाय किया जाय, तो वह भाण्डागार से ऐसी वस्तु के लिए जाने की तारीख को प्रवृत्त शुल्क दर से होगा।
(3) जहां भाण्डागार से आबकारी शुल्क योग्य (एक्साइजेबल) वस्तु के निर्गमन पर शुल्क का संदाय कर दिया जाने के पश्चात् शुल्क की दर में वृद्धि या कमी की जाती है, और आबकारी शुल्क योग्य वस्तु किसी अनुज्ञप्ति धारक के पास स्टाक में है, वहां स्टाक में आबकारी शुल्क योग्य वस्तु, इस प्रकार बढ़ाई गई या कम की गई दर से शुल्क के उग्रहण के अध्यधीन होगी और शुल्क के अन्तर की रकम उस अनुज्ञप्ति धारक, जिसके पास ऐसी आबकारी शुल्क योग्य वस्तु तात्विक समय पर स्टाक में है, द्वारा या उसको संदेय या प्रतिदेय होगी जैसी भी कि दशा हो।
(1) राज्य सरकार, इस अध्याय के अधीन उदग्रहणीय किसी शुल्क के बजाय या उसके अतिरिक्त धारा 18 के अधीन किसी पट्टे की मंजूरी के प्रतिस्वरूप किसी राशि के संदाय को प्रतिग्रहीत कर सकेगी।
(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जायेगा कि वह राज्य सरकार को धारा 18 के अधीन किसी पट्टा अनुदान के प्रतिफलस्वरूप प्राप्त किसी राशि में किसी वित्तीय वर्ष के दौरान या किसी अनुज्ञप्ति के चालू रहने के दौरान वृद्धि या कमी करने से प्रवारित करती है और राशि में वृद्धि या कमी करने की शक्ति के अन्तर्गत ऐसी वृद्धि या कमी को ऐसी तारीख से, जो वित्तीय वर्ष के प्रारम्भ से पूर्व की न हो, भूतलक्षी प्रभाव देने की शक्ति भी है।
(1) जब तक कि संसद द्वारा प्रतिकूल उपबन्ध न किया जाये तब तक राज्य सरकार किसी भी ऐसे शुल्क का उद्ग्रहण करना चालू रख सकेगी जिसको कि यह धारा लागू होती हो और जिसे वह संविधान के प्रारम्भ होने के अव्यवहित पूर्व उस समय प्रवृत्त इस अध्याय के अधीन विधिपूर्वक उद्ग्रहीत कर रही हो।
(2) वे शुल्क जिनको यह धारा लागू होती है, निम्नलिखित हैं-
(क) उन मादक द्रव्यों पर, जो इस अधिनियम, के अर्थ के अन्तर्गत आबकारी-कर योग्य वस्तुयें नहीं हैं, कोई भी शुल्कः
(ख) उस आबकारी-कर योग्य वस्तु पर कोई भी शुल्क जो कि भारत के बाहर उत्पादित की गई हो और जिसका कि आयात राज्य में किया गया हो चाहे यह आयात केन्द्रीय सरकार द्वारा यथा-परिभाषित सीमा शुल्क सीमान्त के आर-पार हो अथवा नहीं।
(3) इस धारा की कोई भी बात, राज्य सरकार द्वारा, किसी भी शुल्क के ऐसे उद्ग्रहण को प्राधिकृव नहीं करेगी, जो (राज्य) में विनिर्मित या उत्पादित न किये गये माल के तथा इस प्रकार विनिर्मित या उत्त्पादित न किये गये वैसे ही माल के बीच पूर्ववर्ती माल के पक्ष में विभेद करता हो, या जो राज्य के बाहर विनिर्मित या उत्पादित किये गये माल के मामले में, एक स्थान में विनिर्मित या उत्पादित किये गये माल के तथा किसी अन्य स्थान में विनिर्मित या उत्पादित किये गये वैसे ही माल के बीच विभेद करता हो।