
(1) जो कोई-
(क) किसी मदिरा का आयात, निर्यात, परिवहन, विनिर्माण, संग्रहण करेगा, उसे अपने कब्जे में रखेगा, उसे बोतलों में भरेगा या बेचेगा; या
(ख) किसी विकृत स्पिरिट या विकृत स्पिरिटयुक्त निर्मित्ति को इस आशय से परिवर्तित करेगा या परिवर्तित करने का प्रयत्न करेगा कि ऐसी स्पिरिट या विकृत स्पिरिटयुक्त निर्मिति का उपयोग, चाहे पेय रूप में, या औषधि के तौर पर आन्तरिक रूप से, या किसी अन्य रूप में या किसी अन्य तरीके से, मानवीय उपभोग के लिये किया जाय; या
(ग) अपने कब्जे में कोई स्पिरिट या विकृत स्पिरिटयुक्त निर्मिति रखते हुये, उसको बाबत वह, साशय या जानते हुये किसी अन्य व्यक्ति को कोई स्पिरिट विकृत स्पिरिट में या किसी विकृत स्पिरिटयुक्त निर्मिति में परिवर्तित करने या परिवर्तित करने का प्रयत्न करने के लिए, जो दोनों में से किसी भी दशा में खंड (ख) में विनिर्दिष्ट आशय से हो अनुज्ञात करेगा या जानते हुये उसे ऐसा करने देगा; या
(घ) विकृत स्पिरिट को या ऐसी परिवर्तित स्पिरिट को या विकृत स्पिरिटयुक्त निर्मिति को स्पिरिट के साथ मिश्रित करेगा, और यथास्थिति ऐसी मदिरा, विकृति स्पिरिट, विकृत स्पिरिटयुका निर्मिति, स्पिरिट या परिवर्तित विकृत स्पिरिट मानवीय उपभोग के लिए अनुपयुक्त पाई जाती है या वह मनुष्य को क्षति पहुंचाती है या उससे मनुष्य की मृत्यु हो जाती है, तो यह-
उस स्थिति में जब कि यथास्थिति ऐसी मदिरा, विकृत स्पिरिट, विकृत स्पिरिट युक्त निर्मिति, स्पिरिट, या परिवर्तित विकृत स्पिरिट-
(एक) मानवीय उपयोग के लिए कारावास, जो दो माह से कम का नहीं होगा किन्तु जो दो
अनुपयुक्त पाई जाती है वर्ष तक का हो सकेगा, और जुर्मान से भी दण्डनीय होगा;
(दो) मनुष्य को क्षति पहुंचाती है- कारावास, जो चार माह से कम का नहीं होगा किन्तु जो
चार वर्ष तक का हो सकेगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा:
(तीन) मनुष्य की मृत्यु कारित करती है कारावास, जो दो वर्ष से कम का नहीं होगा किन्तु जो दस वर्ष
तक का हो सकेगा, और जुमनि से भी दण्डनीय
(2) जब किसी व्यक्ति को इस धारा के अधीन द्रितीय या किसी पश्चात्वर्ती अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया जाता है तो वह परिस्थितियों के सापेक्ष्य में-
(क) उपधारा (1) के खंड (एक) के अधीन- कारावास, जो छः माह से कम का नहीं होगा किन्तु जो
चार वर्ष तक का हो सकेगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा;
(ख) उपधारा (1) के खंड (दो) के अधीन- कारावास, जो एक वर्ष से कम का नहीं होगा किन्तु जो. छः वर्ष तक का हो सकेगा, दण्डित किया जायेगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा;
(ग) उपधारा (1) के खंड (तीन) के अधीन- आजीवन कारावास या ऐसा कारावास जो पाँच वर्ष से कम का नहीं होगा किन्तु जो दस वर्ष तक का हो सकेगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।