
यतः यह समीचीन है कि छत्तीसगढ़ में मादक मदिरा तथा मादक औषधि के आयात, निर्यात, परिवहन, विनिर्माण, विक्रय तथा कब्ज़े में रखने से सम्बन्धित विधि को समेकित और संशोधित किया जाय, और यतः गवर्नर जनरल की पूर्व मंजूरी, जो कि इण्डियन कौन्सिल एक्ट, 1892 (55 तथा 56 विक्ट, सी 14) की धाराओं द्वारा अपेक्षित है, इस अधिनियम को पारित करने के लिए अभिप्राप्त हो चुकी है।
छत्तीसगढ़ शासन ने अधिसूचना क्र. एफ-1-20-2000/आबकारी/पांच दिनांक 5-12-2000 द्वारा विधियों का अनुकूलन आदेश, 2000 बनाया है। जो पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में दिनांक 1 नवम्बर, 2000 से प्रवृत्त हुआ है। इस आदेश के अनुसार कुछ म० प्र० राज्य विधियों को छत्तीसगढ़ राज्य पर विस्तारित किया गया है। तदनुसार मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 (क्र० 2 संन् 1915) को पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में लागू किया गया है। इस अधिनियम में 31-10-2000 तक के संशोधनों को यथास्थान समाविष्ट किया गया है। इन संशोधनों को अलग से नहीं दर्शाया गया है। केवल उन्हीं संशोधनों को अलग से दर्शाया गया है, जो 1-11-2000 के बाद छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा किए गए हैं। अतः एतद्वारा यह निम्नलिखित रूप में अधिनियमित किया जाता है :-
(1) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915 कहा जा सकेगा।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ परे है और यह सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में प्रवृत्त होगा।
इस अधिनियम में जब तक कि कोई बात विषय या सन्दर्भ के विरुद्ध न हो-
(1) "एजेंसी" से अभिप्रेत है कम्पनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18), भागीदारी अधिनियम, 1932 (1932 का 9) के अंतर्गत पंजीकृत फर्म (संस्थायें) तथा प्रोप्राइटरशिप फर्म (संस्थायें);
(1-क) "बीयर" के अन्तर्गत एल०, स्टाउट, पोर्टर तथा समस्त अन्य किण्वित् मदिरायें आती हैं जो सामान्यतः धव्य (माल्ट) से बनी हों;
(2) "बोतलें भरना" से अभिप्रेत है विक्रय के प्रयोजन के लिए मदिरा को पीपे या पात्र में से बोतल, घड़े, कुप्पी या अन्य वैसे ही पात्र में अन्तरित करना, और बोतल भरने के अन्तर्गत बोतल का पुनः भरा जाना आता है;
(3) "मुख्य आगम प्राधिकारी" से अभिप्रेत है वह प्राधिकारी, जो राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मुख्य आगम प्राधिकारी घोषित किया जाय;
(4) "सामान्य मद्यपानगृह" से अभिप्रेत है वह स्थान, जहाँ मदिरा का पीना ऐसे स्थान का स्वामित्व रखने वाले या उस पर अधिभोग रखने वाले, उसका उपयोग करने वाले या उसे चलाने वाले अथवा उसकी देख-रेख या उसका प्रबन्ध या नियन्त्रण रखने वाले व्यक्ति के लाभ या उनके अभिलाभ के लिये अनुज्ञात किया गया हो, चाहे वह लाभ या अभिलाभ उस स्थान के उपयोग के लिए प्रभार (चार्ज) के रूप हो या दी गई मद्यपान की सुविधाओं के लिए प्रभार के रूप में हो या किसी भी तरह अन्यथा हो;
(5) "विप्रकृत" (डिनेचर्ड) से अभिप्रेत है मानवीय उपभोग के लिये ऐसी रीति से अनुपयुक्त बना देना जो इस सम्बन्ध में राज्य सरकार द्वारा विहित की जाय;
(6) "आबकारी कर योग्य वस्तु" से अभिप्रेत है
(क) मानवीय उपभोग के लिये कोई भी अल्कोहलीय मदिरा, या
(ख) कोई भी मादक औषधि, या
(ग) स्वापक ओषधि और मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1985 का सं० 61) की धारा 2 के खण्ड (xviii) में यथापरिभाषित पॉपी स्ट्रा,
(6-क) "आबकारी शुल्क" तथा "प्रतिशुल्क" से अभिप्रेत है यथास्थिति कोई भी ऐसा आबकारी शुल्क या प्रति शुल्क जो संविधान की सप्तम अनुसूची की सूची 2 की प्रविष्टि 51 में वर्णित है;
(7) "आबकारी अधिकारी" से अभिप्रेत है कलेक्टर या कोई भी ऐसा अधिकारी या अन्य व्यक्ति, जो धारा 7 के अधीन नियुक्त किया गया हो या शक्तियों से विनिहित किया गया हो;
(8) "आबकारी राजस्व" से अभिप्रेत है वह राजस्व जो इस अधिनियम के, या मदिरा अथवा मादक औषधियों के सम्बन्ध में तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबन्धों के अधीन अधिरोपित किये गये, आदेशित किये गये या तय पाये गये किसी शुल्क, कर, फीस, शास्ति, संदाय (किसी न्यायालय द्वारा अधिरोपित किये गये जुर्माने को छोड़कर) या अधिहरण से व्युत्पन्न होता या व्युत्पन्न होने योग्य हो;
(9) "निर्यात" से अभिप्रेत है, केन्द्रीय सरकार द्वारा यथापरिभाषित सीमाशुल्क सीमान्त के आर-पार न होकर अन्य प्रकार से राज्य के बाहर ले जाना;
(9-क) "होटल" से अभिप्रेत है ऐसा भवन या ऐसे भवन का भाग, जहां आवासीय सुविधा, वाणिज्यिक उद्देश्य से, मौद्रिक विमर्श हेतु प्रदान की जाती है;
(10) विलुप्त।
(11) "आयात" (वाक्यांश भारत में आयात में के सिवाय) से अभिप्रेत है केन्द्रीय सरकार द्वारा यथापरिभाषित सीमा शुल्क सीमान्त क आर-पार न होकर अन्य प्रकार राज्य के भीतर लाना;
(11-क) "मादक द्रव्य" से अभिप्रेत है कोई भी मदिरा या मादक औषधिः
(12) "मादक औषधि" से अभिप्रेत है-
(एक) भारतीय भांग के पौधे (कैनाबिस सेटीवाएल) की पत्तियों, छोटे डंठल और फूलने तथा फलने वाले सिरे और उसके अन्तर्गत "भांग", सिद्धि या "गाँजा" के नाम से ज्ञात सब रूप आते हैं,
(दो) विलुप्त।
(तीन) मादक औषधि के उपर्युक्त रूपों में से किसी भी रूप का मिश्रण, जो निष्प्रभाव सामग्रियों सहित या रहित हो, या उससे तैयार किया गया कोई भी पेय हो,
(चार) कोई ऐसी अन्य मादक या स्वापक वस्तु, जिसे राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा, मादक औषधि घोषित करे जो स्वापक औषधि और मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1985 का सं० 61) में यथापरिभाषित स्वापक / औषधि न हो,
(13) "मदिरा" से अभिप्रेत है मादक मदिरा और उसके अन्तर्गत द्राक्षिरा-सार (स्प्रिंट आफ वाइन), स्पिरिट, शराब, ताड़ी, बियर, ऐसे समस्त तरल पदार्थ जो अल्कोहल से बने हों, या जिसमें अल्कोहल हो, तथा कोई भी ऐसा पदार्थ, जिसे राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये मदिरा घोषित करे, आता है;
(13-क) "मदिरा दुकान" से अभिप्राय होगा फुटकर दुकान, जिन्हें मदिरा दुकान के विक्रय हेतु अनुज्ञप्ति प्रदान की गई है तथा इसमें होटल तथा सामान्य मद्यपान गृह सम्मिलित नहीं होगा:
(14) "विनिर्माण" के अन्तर्गत ऐसी प्रत्येक प्रक्रिया चाहे वह प्राकृतिक हो या कृत्रिम, आती है जिसके द्वारा कोई भी मादक द्रव्य उत्पन्न या तैयार किया जाता हो, और उसके अन्तर्गत पुनः आसवन करने तथा मदिरा का परिशोधन करने, सुस्वादु, बनाने, सम्मिश्रण करने या उसे रंग देने की प्रक्रिया भी आती है;
(15) "स्थान" के अन्तर्गत गृह, भवन, दुकान, अस्थायी कोष्ठ (बूध), डेरा, पैरास्थल जलयान, बेड़ा और चान आते हैं;
(16) "विक्रय" के प्रति निर्देश करने वाली अभिव्यक्तियों के अन्तर्गत दान के रूप में किये गये अन्तरण के अतिरिक्त कोई भी अन्य अन्तरण आता है:
(16-क) "मदिरा विक्रय" से अभिप्रेत है मदिर दुकान के परिसर से अन्यत्र स्थान पर क्रेता द्वारा उपभोग के लिये, मदिरा दुकान द्वारा प्रतिफल प्राप्त करने के पश्चात् मदिरा का प्रदायः
(17) "स्पिरिट" से अभिप्रेत है आसवन से अभिप्राप्त की गई कोई भी ऐसी मदिरा, जिसमें मद्यसार ही, चाहे वह विप्रकृत हो अथवा नहीं;
(17-क) "मदिरा को आपूर्ति" से अभिप्रेत है होटल तथा सामान्य मद्यपान गृह में अनुज्ञप्ति के आधार पर, प्रतिफल हेतु मंदिरा का प्रदाय इस शर्त पर करने हेतु जारी किया गया है कि ऐसे मदिरा का उपभोग, ऐसे होटल तथा सामान्य मद्यपान गृह के परिसर के भीतर ही किया जाएगा;
(18) "ताड़ी" से अभिप्रेत है किसी भी जाति के ताड़ वृक्ष से खिंचा गया रस, चाहे वह किण्वित् हो या अकिण्वित्; और
(19) "परिवहन" से अभिप्रेत है राज्य के भीतर एक स्थान से दूसरे स्थान को ले जाना।
राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, यह घोषित कर सकेगी कि कौन सी मदिरा, इस अधिनियम या उसके किसी भी भाग के प्रयोजनों के लिये, क्रमशः "देशी मदिरा" और "विदेशी मदिरा" समझी जायेगी।
(1) राज्य सरकार, या तो सम्पूर्ण राज्य के या किसी भी विनिर्दिष्ट स्थानीय क्षेत्र के सम्बन्ध में तथा साधारणतः क्रेताओं या क्रेताओं के किसी भी विनिर्दिष्ट वर्ग के सम्बन्ध में और या तो साधारणतः या किसी भी विनिर्दिष्ट अवसर के लिये, अधिसूचना द्वारा, यह घोषित कर सकेगी कि किसी मादक द्रव्य की कितनी मात्रा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये, फुटकर विक्रय की सीमा होगी।
(2) उपधारा (1) के अधीन उसके सम्बन्ध में घोषित मात्रा से अधिक किसी भी मात्रा में किसी भी मादकद्रव्य का विक्रय थोक विक्रय समझा जायेगा।
इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट कोई भी बात, सी कस्टम्स एक्ट, 1878 (क्रमांक 8 सन् 1878) या इण्डियन टैरिफ एक्ट, 1894 (क्रमांक 8 सन् 1894) उसकी धारा 6 के सिवाय, या केण्टोनमेन्ट्स एक्ट, 1910 (क्रमांक 15 सन् 1910)* के उपबन्धों को या उनके अधीन बनाये गये किसी भी नियम या दिये गये आदेश को प्रभावित नहीं करेगी।