धारा 4 से 9 अध्याय 2 राजस्थान न्यायालय फीस एवं वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 2

फीस के संदाय का दायित्व

धारा 4. न्यायालयों और लोक कार्यालयों में फीस का उद्‌ग्रहण -

किसी भी दस्तावेज को, जिस पर इस अधिनियम के अधीन फीस प्रभार्य है-

(i) किसी भी न्यायालय, जिसके अंतर्गत उच्च न्यायालय भी आता है, में फाइल, प्रदर्शित या अभिलिखित नहीं किया जाएगा या उसके द्वारा उस पर कार्रवाई नहीं की जाएगी या दिया नहीं जाएगा, या

(ii) किसी भी लोक कार्यालय में फाइल प्रदर्शित या अभिलिखित नहीं किया जाएगा या किसी लोक अधिकारी द्वारा उस पर कार्रवाई नहीं की जाएगी या दिया नहीं जाएगा,

जब तक कि ऐसी दस्तावेज की बाबत इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य उपदर्शित की गई फीस से अन्यून रकम की फीस का संदाय न कर दिया जाए:

परंतु, जब कभी किसी दांडिक न्यायालय किसी दस्तावेज जिसकी बाबत समुचित फीस संदाय नहीं किया गया है, का फाईल किया जाना या प्रदर्शित किया जाना, न्यायालय राय में न्याय की विफलता के निवारण के लिए आवश्यक है, इस धारा में अंतर्विष्ट कोई भी बात ऐसे फाइल किए जाने या प्रदर्शित किए जाने को प्रतिषिद्ध करने वाली नहीं समझी जाएगी।

धारा 5. अनवधानता से ग्रहण की गई दस्तावेजों पर फीस -

जब कोई दस्तावेज जिस पर इस अधिनियम द्वारा विहित संपूर्ण फीस या उसके किसी भाग का संदाय नहीं किया गया है, किसी न्यायालय या लोक कार्यालय में पेश की जाती है या भूल या अनवधानता से ग्रहण कर ली गई है, न्यायालय या कार्यालय का प्रधान स्वविवेकानुसार, किसी भी समय उस व्यक्ति को जिसके द्वारा ऐसी फीस संदेय है, यथास्थिति फीस या उसके भाग का, ऐसे समय के भीतर जो नियत किया जाए, संदाय करने के लिए अनुज्ञात कर सकता है, और ऐसे संदाय पर उस दस्तावेज का वही बल और प्रभाव होगा जैसे कि प्रथमतः पूरी फीस का संदाय कर दिया गया था।

धारा 6. बाहुल्यपूर्ण वाद -

(1) किसी वाद में, जिसमें एक ही वाद-हेतुक पर आधारित पृथक और सुभिन्न अनुतोष चाहे गए हैं, वादपत्र अनुतोषों के संकलित मूल्य पर फीस से प्रभार्य होगा:

परंतु यदि कोई अनुतोष केवल मुख्य अनुतोष के अनुगत के रूप में चाहा गया है, वादपत्र केवल मुख्य अनुतोष के मूल्य पर प्रभार्य होगा।

(2) जहाँ किसी वाद में एक ही वाद-हेतुक पर आधारित एक से अधिक अनुतोष अनुकल्पतः चाहे गए हैं, वादपत्र अनुतोषों पर उदग्रहणीय अधिकतम फीस से प्रभार्य होगा।

(3) जहाँ वाद में दो या अधिक सुभिन्न और विभिन्न वाद-हेतुक समाविष्ट हैं और उन पर आधारित पृथक् पृथक् अनुतोष चाहे गए हैं चाहे अनुकल्पतः या संचयी रूप से, वादपत्र उतनी संकलित फीस की रकम से प्रभार्य होगा जिससे वादपत्र इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य होते यदि पृथक-पृथक् वाद-हेतुको के बारे में पृथक् पृथक् वाद संस्थित किए जाते परंतु जहाँ एक ही व्यक्ति के विरुद्ध अनुकल्पतः दावाकृत अनुतोष एक ही संव्यवहार से उद्भूत होते है, वादपत्र उन पर प्रभार्य केवल अधिकतम फीस से प्रभार्य होगा।

(4) उप-धारा (3) में कोई भी बात सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का केंद्रीय अधिनियम 5) के आदेश 2 नियम 6 के अधीन प्रदत्त किसी शक्ति को प्रभावित करने वाली नहीं समझी जाएगी।

(5) इस धारा के उपबंध यथावश्यक परिवर्तन सहित अपीलों के ज्ञापनों, आवेदनों, अर्जियों और लिखित कथनों पर लागू होंगे।

स्पष्टीकरण -

इस धारा के प्रयोजन के लिए, स्थावर सपत्ति के कब्जे के लिए और अंतः कालीन लाभ के लिए वाद एक ही वाद-हेतुक पर आधारित समझा जाएगा।

धारा 7. बाजारी मूल्य का अवधारण-

(1) अन्यथा उपबंधित के सिवाय, जहाँ इस अधिनियम के अधीन संदेय फीस किसी संपत्ति के बाजारी मूल्य पर निर्भर है, ऐसा मूल्य वादपत्र के उपस्थापित किए जाने की तारीख को जो हो, अवधारित किया जाएगा।

(2) धारा 24 के खंड (क) और (ख) के अधीन या धारा 26 के खंड (क) के अधीन या धारा 28 के अधीन या धारा 29 के अधीन या, धारा 35 की उप-धारा (1) या उप-धारा (3) के अधीन या धारा 36 के अधीन या धारा 44 के अधीन आने वाले वादों में भूमि का बाजारी मूल्य निम्नलिखित समझा जाएगा-

(क) जहाँ ऐसी भूमि के बारे में लगान का बंदोबस्त हो चुका है, अंतिम बन्दोबस्त के दौरान उसके लिए मंजूर लगान की दर का पच्चीस गुना, और

(ख) जहाँ ऐसी भूमि के बारे में लगान का बंदोबस्त नहीं हुआ है, अंतिम बंदोबस्त के दौरान आसपास में में वैसी ही भूमि के लिए मंजूर लगान का पच्चीस गुना।

घारा 8. मुजरा या प्रतिदावा-

लिखित कथन, जिसमें मुजरा या प्रतिदावा का अभिवचन किया जाए, उसी रीति से फीस से प्रभार्य होगा जैसे कि वादपत्र।

धारा 9. दो या अधिक वर्णनों के अधीन आने वाली दस्तावेजें

इस अधिनियम में दो या अधिक वर्णनों के भीतर आने वाली दस्तावेज, जहाँ उसके अधीन प्रभार्य फीस भिन्न-भिन्न हैं, केवल ऐसी फीस के अधिकतम से प्रभार्य होगी

परतु जहाँ ऐसे वर्णनों में से एक विशेष है और दूसरा साधारण, प्रभार्य फीस वह होगी जो फीस विशेष वर्णन के प्रति समुचित होगी।

 

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