
(1) प्रोबेट या प्रशासन-पत्रों के अनुदान के लिए प्रत्येक आवेदन के साथ अनुसूची III के भाग । में उपवर्णित प्ररूप में दो प्रतियों में संपदा का मूल्यांकन होगा।
(2) ऐसे आवेदन के प्राप्त होने पर, न्यायालय उसकी और मूल्यांकन की एक प्रति उस जिले, जिसमें संपदा स्थित है, के कलक्टर को, या यदि संपदा एक जिले से अधिक में स्थित है, उस जिले, जिसमें सम्पदा में सम्मिलित स्थावर संपत्ति का सर्वाधिक मूल्यवान भाग स्थित है, के कलक्टर को भेजेगा।
(1) प्रोबेट या प्रशासन-पत्रों के अनुदान के लिए उद्यणीय फीस का परिकलन अनुसूची I के अनुच्छेद 6 में विहित दर या दरों पर किया जाएगा-
(क) जहाँ आवेदन मृतक की मृत्यु की तारीख के एक वर्ष के भीतर किया जाए, ऐसी तारीख के संपदा के बाजारी मूल्य पर, या
(ख) जहाँ आवेदन ऐसी तारीख से एक वर्ष के अवसान के पश्चात् किया जाए. आवेदन की तारीख को संपदा के बाजारी मूल्य परः
परंतु न्यास में धारित संपत्ति जो फायदाप्रद रूप से या फायदाप्रद हित प्रदान करने, की साधारण शक्ति सहित नहीं है. इस अध्याय के अधीन किसी फीस के दायित्वाधीन नहीं होगी।
मिताक्षर विधि से शासित अविभक्त हिंदू कुटुंब का कोई सदस्य, जो अविभक्त कुटुंब के मृत सदस्य की संपदा के बारे में प्रोबेट या प्रशासन-पत्रों के लिए आवेदन करता है, अविभक्त संपत्ति में उस अंश के मूल्य पर फीस देगा, जो मृतक प्राप्त करता यदि उसको मूल्य के तत्काल पूर्व संपत्ति का विभाजन हो जाता।
(2) फीस की संगणना के प्रयोजन के लिए-
(क) अनुसूची III के भाग I के उपाबंध ख में उल्लिखत मदों का मूल्य संपदा के मूल्य से कटौती किया जाएगा:
परंतु जब सम्पदा के केवल भाग के बारे में प्रोबेट या प्रशासन-पत्रों के लिए आवेदन किया जाता है, उससे भिन्न जिसके बारे में आवेदन किया जाता है, संपदा के किसी भी भाग पर कोई ऋण, कोई अंत्येष्टि किया या संस्कार संबंधी व्यय और कोई बंधक विल्लंगम की कटौती नहीं की जाएगी
परंतु यह और कि जब संपदा में सम्मिलित किसी संपत्ति के बारे में भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 (1925 का केंद्रीय अधिनियम 39) के भाग X के अधीन प्रमाणपत्र के अनुदान के पश्चात् उसी संपदा के बारे में प्रोबेट या प्रशासन-पत्रों का अनुदान किया जाता है, पश्चात्वर्ती अनुदान के बारे में संदेय फीस से पूर्ववर्ती अनुदान के बारे में संदेय फीस की रकम घटा दी जाएगी:
(ख) नियोजन की शक्ति जो संपत्ति पर मृतक के पास थी या जो किसी विल के अधीन सृष्ट की गई थी, का मूल्य वह मानते हुए जो शक्ति की विषय वस्तु का गठन करने वाली संपत्ति का मूल्य है, हिसाब में ली जाएगी।
प्रोबेट या प्रशासन पत्रों के अनुदान में धारा 50, उप-धारा (2) के अधीन कलक्टर को निर्देश या धारा 54, उप-धारा (5) के अधीन कलक्टर द्वारा समावेदन, के कारण से विलम्भ नहीं किया जाएगा, किंतु न्यायालय कोई प्रोबेट या प्रशासन-पत्रों काः अनुदान नहीं करेगा जब तक कि उसका समाधान न हो जाए कि आवेदन के साथ के, मूल्यांकन, या धारा 54 उप-धारा (3) के अधीन फाइल किए संशोधित मूल्यांकन में दिए गए संपदा के शुद्ध मूल्य के आधार पर इस अधिनियम द्वारा विहित से न्यून फीस का संदाय कर दिया गया है:
परतु न्यायालय, इस बात के होते हुए भी कि विहित फीस का संदाय नहीं किया गया है, महाप्रशासक को उसकी पदीय हैसियत में उसके द्वारा न्यायालय के समाधानप्रद परिवचन (undertaking) दिए जाने पर कि उक्त फीस का, ऐसे समय के भीतर जो न्यायलय द्वारा नियत किया जाए, संदाय कर दिया जाएगा, प्रोबेट या प्रशासन-पत्र अनुदत्त कर सकता है।
(1) जब कभी किसी संपदा की संपूर्ण संपत्ति के बारे में प्रोबेट या प्रशासन-पत्रों का अनुदान कर दिया गया है और उस पर ऐसे अनुदान के लिए लिए आवेदन के बारे में इस अधिनियम के अधीन संदेय पूरी फीस का संदाय कर दिया गया है, जब उसी संपदा की उसी संपत्ति के संपूर्ण या किसी भाग के बारे में वैसा ही अनुदान किया जाता है, कोई फीस संदेय नहीं होगी।
(2) जब कभी ऐसा अनुदान किसी संपदा के भाग का गठन करने वाली किसी संपत्ति के बारे में कर दिया गया है, जब वैसा ही अनुदान उसी संपदा को तदरूप संपत्ति जिससे पूर्ववर्ती अनुदान संबंधित हैं, को सम्मिलित करते हुए संपत्ति के बारे में किया जाता है, उसके बारे में इस अधिनियम के अधीन वास्तविक रूप से संदत्त फीस की रकम की कटौती की जाएगी।
(1) कलक्टर जिसे धारा 50 की उप-धारा (2) के अधीन आवेदन की और मूल्यांकन की प्रति भेजी गई है, उसकी परीक्षा करेगा और मूल्यांकन, या जहाँ सपत्ति का केवल एक भाग उसके जिले में स्थित है, उस भाग के मूल्यांकन, की शुद्धता के बारे में ऐसी जाँच, यदि कोई, जैसी वह ठीक समझे, कर सकता है या उसके अधीनस्थ अधिकारी द्वारा करा सकता है और किसी अन्य जिले, जिसमें संपत्ति का कोई भाग स्थित है, के कलक्टर से उसे उसका शुद्ध मूल्यांकन देने को अपेक्षा कर सकता है।
(2) कोई कलक्टर जिससे किसी संपत्ति का शुद्ध मूल्यांकन देने को अपेक्षा की गई है, ऐसी जाँच, यदि कोई, जो वह ठीक समझे, करने या उसके अधीनस्थ किसी अधिकारी द्वारा कराने के पश्चात् अध्यपेक्षा का अनुपालन करेगा।
(3) यदि कलक्टर की यह राय है कि आवेदक ने मृतक की संपत्ति के मूल्य को अवप्राक्कलित मूल्य किया है, वह, यदि वह ठीक समझे, आवेदक से, वैयक्तिक रूप से या उसके अभिकर्ता द्वारा हाजिरी की अपेक्षा कर सकता है और साक्ष्य ले सकता है और मामले में ऐसी रीति से जाँच कर सकता है जैसी यह ठीक समझे, और यदि तब भी उसकी यह राय है कि संपत्ति के मूल्य को अवप्राक्कलित किया गया है, आवेदक से मूल्यांकन को संशोधित करने और यदि प्रोबेट या प्रशासन-पत्रों के लिए आवेदन न्यायालय में लंबित है, ऐसे न्यायालय में संशोधित मूल्यांकन की प्रति फाइल करने की अपेक्षा कर सकता है।
(4) यदि किसी ऐसे मामले में, प्रोबेट या प्रशासन-पत्र जारी कर दिया गया है या कर दिए गए हैं, और आवेदक कलक्टर के समाधानप्रद मूल्यांकन का संशोधन कर देता है, और कलक्टर का निष्कर्ष यह है कि संपदा के वास्तविक मूल्य के अनुसार संदेय पूरी फीस का संदाय नहीं किया गया है, वह धारा 56 की उप-धारा (4) के अधीन अग्रसर होगा, किंतु यदि संदत्त फीस संपदा के वास्तविक मूल्य के अनुसार संदेय फीस से अधिक है, अधिक फीस आवेदक को प्रतिदान कर दी जाएगी।
(5) यदि आवेदक कलक्टर के समाधानप्रद मूल्यांकन का संशोधन नहीं करता है, कलक्टर उस न्यायालय को, जिसके समक्ष प्रोबेट या प्रशासन-पत्रों के लिए आवेदन किया गया था, संपत्ति के वास्तविक मूल्य की जाँच करने के लिए समावेदन कर सकता है:
परंतु ऐसा कोई समावेदन भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 (1925 का केंद्रीय अधिनियम, 39) की धारा 317 द्वारा अपेक्षित तालिका के प्रदर्शन की तारीख छः मास के अवसान के पश्चात् नहीं किया जाएगा।
(1) न्यायालय, जब धारा 54 को उप-धारा (5) के अधीन कलक्टर द्वारा समावेदन किया जाए, वास्तविक मूल्य, जिस पर मृतक को संपदा का प्राक्कलन किया जाना चाहिए था, के बारे में जाँच करेगा या उसके अधीनस्थ किसी न्यायालय या अधिकारी द्वारा कराएगा। जाँच में कलक्टर एक पक्षकार समझा जाएगा।
(2) किसी ऐसी जाँच के प्रयोजनों के लिए, न्यायालय, या न्यायालय द्वारा जाँच करने के लिए प्राधिकृत अधीनस्थ न्यायालय या अधिकारी, आवेदक की वैयक्तिक रूप से या कमीशन द्वारा शपथ पर परीक्षा कर सकता है, और ऐसा अतिरिक्त साक्ष्य ले सकता है जो संपदा के वास्तविक मूल्य को साबित करने के लिए पेश किया जाए, और जहाँ जाँच किसी अधीनस्थ न्यायालय या अधिकारी को सौंपी गई है, ऐसा न्यायालय या अधिकारी न्यायालय को लिया गया साक्ष्य लौटाएगा और जाँच का परिणाम रिपोर्ट करेगा, और ऐसी रिपोर्ट और इस प्रकार लिया गया साक्ष्य कार्यवाही में साक्ष्य होगा।
(3) न्यायालय, यथास्थिति, जाँच के पूर्ण होने पर या उप-धारा (2) में निर्दिष्ट रिपोर्ट के प्राप्त होने पर, वास्तविक मूल्य, जिस पर संपदा का प्राक्कलन किया जाना चाहिए था, के बारे में निष्कर्ष अभिलिखित करेगा और ऐसा निष्कर्ष अंतिम होगा।
(4) न्यायालय, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का केंद्रीय अधिनियम 5) के उपबंधों के अनुसार जाँच के खर्चों के बारे में ऐसा आदेश दे सकता है जैसा वह ठीक समझे।
(1) जहाँ किसी प्रोबेट या प्रशासन-पत्रों पर किसी भूल या उस समय यह ज्ञात न होने के परिणामस्वरूप कि संपदा का कुछ विशिष्ट भाग मृतक का था, अति निम्न फीस का संदाय किया गया है, यदि ऐसे प्रोबेट या पत्रों के अधीन कार्य करते हुए कोई निष्पादक या प्रशासक अनुसूची-III के भाग II में उपवर्णित प्ररूप में कलक्टर को आवेदन करता है और भूल या किन्हीं चीजबस्त (effects) जो उस समय मृतक को होना ज्ञात नहीं था, के पता चलने के पश्चात् छः मास के भीतर फीस जिसका ऐसे प्रोबेट या पत्रों पर प्रथम बार संदाय किया जाना चाहिए था और वास्तविक रूप से संदत्त फीस के अंतर का संदाय कर देता है, कलक्टर, यदि उसका समाधान हो जाता है कि प्रथम बार अप्रर्याप्त फीस का संदाय किसी भूल के परिणामस्वरूप और कपट-वंचित करने या समुचित फीस के संदाय में विलंब करने के किसी आशय के बिना किया गया था, प्रोबेट या पत्रों को सम्यक रूप से स्टांपित कराएगा।
(2) यदि, उप-धारा (1) के अधीन आने वाले मामले में, निष्पादक या प्रशासक उस उप-धारा में निर्दिष्ट छः मास के भीतर, फीस की कमी का संदाय नहीं करता है, वह फीस की कमी के पाँच गुना के बराबर राशि समपहृत करा देगा।
(3) यदि, उप-धारा (1) के अधीन आवेदन किए जाने पर कलक्टर का समाधान हो जाता है कि आवेदन भूल या मूल मूल्यांकन में सम्मिलित न की गई अतिरिक्त चीजबस्त के पता चलने के छ: भास के भीतर नहीं किया गया था, या कि प्रथम बार अप्रर्याप्त फीस का संदाय सद्भाविक मूल के कारण नहीं था, वह प्रोबेट या पत्रों को फीस की कमी का ऐसी फीस के पाँच गुना से अनधिक शास्ति के साथ संदाय किए जाने पर सम्यक रूप से स्टांपित कराएगा।
(4) यदि किसी संपदा के प्रोबेट या प्रशासन पत्रों के अनुदान के पश्चात् धारा 54 या धारा 55 के अधीन कार्यवाही के परिणामस्वरूप या अन्यथा, कलक्टर का यह निष्कर्ष है कि संपदा के वास्तविक मूल्य के अनुसार संदेय फीस से कम फीस का संदाय किया गया है, वह फीस की कमी के संदाय पर प्रोबेट या पत्रों को समुचित रूप से स्टांपित कराएगा, और यदि उसका समाधान हो जाता है कि मूल न्यून मूल्यांकन सद्भाविक नहीं था, फीस की कमी के पाँच गुना से अनधिक शास्ति अतिरिक्त उदगृहीत करेगा।
(5) राजस्व बोर्ड उप-धारा (2) के अधीन समपहृत रकम या उप-धारा (3) या उप-धारा (4) के अधीन किसी शास्ति के संपूर्ण या किसी भाग का परिहार कर सकता है।
प्रशासन -पत्रों जिन पर प्रथम बार अति निम्न फीस का संदाय किया गया है, की दशा में, कलक्टर उनको पूर्वोक्त रीति से सम्यक रूप से स्टांपित नहीं कराएगा जब तक कि प्रशासक ने उस न्यायालय जिसके द्वारा प्रशासन-पत्र जारी किए गए हैं, में ऐसी प्रतिभूति जैसी कि विधि द्वारा उनके अनुदत्त किए जाने पर उस दशा में दी जानी चाहिए थी जबकि मृतक की संपदा का पूरा मूल्य तब अभिनिश्चित कर लिया जाता, न दे दी हो।
(1) यदि किसी संपदा के प्रोबेट या प्रशासन-पत्रों के अनुदान के पश्चात् किसी समय यह पता चले कि उससे उच्चतर फीस का संदाय कर दिया गया है जो कि संपदा के वास्तविक मूल्य के अनुसार संदेय थी, निष्पादक या प्रशासक, यथास्थिति, कलक्टर जिसे धारा 50 की उप-धारा (2) के अधीन संपदा के मूल्यांकन को प्रति भेजी गई थी, को प्रतिदाय के लिए आवेदन कर सकता है। आवेदन, अनुसूची-III के भाग II में उपवर्णित प्ररूप में संशोधित मूल्यांकन के साथ प्रोबेट या प्रशासन-पत्रों, जिन पर प्रतिदाय की ईप्सा की गई है, सहित होगा।
(2) यदि कलक्टर का समाधान हो जाता है कि संशोधित मूल्यांकन शुद्ध है, वह-
(i) स्टांपित प्रोबेट या प्रशासन-पत्रों पर इस प्रभाव का प्रमाणपत्र कि प्रयुक्त स्टांप या स्टांपों द्वारा व्यपदिष्ट उतनी रकम का प्रतिदाय कर दिया गया है, पृष्ठांकित करेगा; और
(ii) मूलत: संदत्त फीस और फीस जिसका संदाय किया जाना चाहिए था के मध्य के अंतर का प्रतिदाय कर देगा;
परंतु इस धारा के अधीन कोई प्रतिदाय अनुदत्त नहीं किया जाएगा जब तक कि प्रोबेट या प्रशासन-पत्रों के अनुदान की तारीख के तीन वर्षों के भीतर या ऐसी अतिरिक्त कालावधि के भीतर जैसी कलक्टर अनुज्ञात करे, प्रतिदाय के लिए आवेदन न किया जाए।
(3) यदि, किसी विधिक कार्यवाही के कारण से, मृतक से शोध्य ऋणों का अभिनिश्चय और संदाय नहीं किया गया है, या उसकी चीजबस्त को प्रत्युद्धृत् और उपलब्ध नहीं किया गया है और उसके परिणामस्वरूप निष्पादक या प्रशासक उक्त तीन वर्ष की कालावधि के भीतर ऐसे अंतर के लौटाए जाने का दावा करने से निवारित हो जाता है, कलेक्टर दावा करने के लिए ऐसा अतिरिक्त समय अनुज्ञात कर सकता है, जैसा कि परिस्थितियों के अधीन उसे युक्तियुक्त प्रतीत हो।
(4) यदि कलक्टर प्रतिदाय अनुदत्त नहीं करता है, यथास्थिति, निषादक या प्रशासक राजस्व बोर्ड को प्रतिदाय के आदेश के लिए आवेदन कर सकता है। ऐसे प्रतिदाय के लिए आवेदन के साथ अनुसूची III के भाग II में उपवर्णित प्ररूप में संशोधित मूल्यांकन होगा।
प्रोबेट या प्रशासन-पत्रों के आवेदक द्वारा या निष्पादक या प्रशासक द्वारा संदेय पाई जाने वाली अतिरिक्त फीस, या धारा 55 की उप-धारा (4) के अधीन कोई खर्च या किसी ऐसे निष्पादक या प्रशासक द्वारा संदेय कोई शास्ति या समपहरण राजस्व बोर्ड के प्रमाणपत्र पर निष्पादक या प्रशासक से इस प्रकार वसूल किए जा सकते है जैसे कि वह भू-राजस्व की बकाया हो।
इस अध्याय के अधीन कलक्टर की शक्तियाँ और कर्तव्य राजस्व बोर्ड के नियंत्रण के अध्यधीन होगी।