धारा 61 से 65 ख अध्याय 7 राजस्थान न्यायालय फीस एवं वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 7

प्रतिदाय और परिहार

धारा 61. वादपत्र के नामंजूर किए जाने, इत्यादि के मामलों में प्रतिदाय -

(1) जहाँ सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का केंद्रीय अधिनियम 5) के आदेश 7 नियम 11 के अधीन वादपत्र नामंजूर किया जाता है या आदेश 41, नियम 3 या 11 के अधीन अपील का ज्ञापन नामंजूर किया जाता है, न्यायालय, स्वविवेकानुसार, वादी या अपीलार्थी को वादपत्र या अपील के ज्ञापन, जिसे नामंजूर किया गया है, पर संदत्त फीस के, या तो पूर्णताः या भागताः, प्रतिदाय का निदेश दे सकता है।

(2) जहाँ अपील का ज्ञापन इस आधार पर नामंजूर किया जाता है कि उसे परिसीमा विधि के द्वारा अनुज्ञात समय के भीतर उपस्थापित नहीं किया गया था, आधी फीस का प्रतिदाय किया जाएगा।

धारा 62. प्रतिप्रेषण के मामलो में प्रतिदाय -

जहाँ वादपत्र या अपील का ज्ञापन जिसे निचले न्यायलय द्वारा नामंजूर किया जा चुका है, ग्रहण किये जाने का आदेश दिया जाता है, या जहाँ वाद अपील में निचले न्यायालय द्वारा  नए सिरे से विनिश्चिय के लिए प्रतिप्रेषित किया जाता है, आदेश करने वाला या अपील को प्रतिप्रेषित करने वाला न्यायालय अपीलार्थी को अपील के ज्ञापन परः और यदि प्रतिप्रेषण द्वितीय अपील पर है, प्रथम अपील न्यायालय में अपील के ज्ञापन पर भी, और यदि प्रतिप्रेषण तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन राजस्थान उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश के निर्णय की अपील पर है, द्वितीय अपील के ज्ञापन पर और प्रथम अपील न्यायालय में अपील के ज्ञापन पर भी, संदत्त फीस की पूरी रकम के प्रतिदाय का निदेश दे सकता हैं।

(2) जहाँ कोई अपील द्वितीय अपील में या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन राजस्थान उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश के निर्णय की अपील में निचले अपील न्यायालय द्वारा नए सिरे से विनिश्चय के लिए प्रतिप्रेषित की जाती है, अपील को प्रतिप्रेषित करने वाला उच्च न्यायालय अपीलार्थी को वित्तीय अपील के ज्ञापन पर संदत्त फीस की पूरी रकम यदि प्रतिप्रेषण द्वितीय अपील में है, और द्वितीय अपील के ज्ञापन पर और तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन राजस्थान उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश के निर्णय की अपील के ज्ञापन पर, यदि प्रतिप्रेषण ऐसी पश्चात्वर्ती अपील पर है, संदत्त फीस की पूरी रकम के प्रतिदाय का निदेश दे सकता है:

परंतु कोई प्रतिदाय का आदेश नहीं किया जाएगा यदि प्रतिप्रेषण उस पक्षकार की त्रुटि के कारण हुआ जो अन्यथा प्रतिदाय का हकदार होता:

परन्तु यह और कि यदि वाद की संपूर्ण विषय वस्तु प्रतिप्रेषण के आदेश के अंतर्गत नहीं आती है: प्रतिदाय उतनी फीस से अधिक नहीं होगा जितनी मूलतः विषय वस्तु के उस भाग पर संदेय होती जिसके बारे में वाद प्रतिप्रेषित किया गया है।

धारा 63- भूल के आधारों पर प्रतिदाय-

(1) जहाँ निर्णय के पुनर्विलोकन के लिए आवेदन अभिलेख को देखने से ही प्रकट किसी भूल या गलती के आधार पर ग्रहण किया जाता है और पुनः सुनवाई पर न्यायालय उस आधार पर उसके पूर्ववर्ती विनिश्चय को उलट देता है या उपांतरित करता है, वह आवेदक को आवेदन पर संदत्त उतनी फीस जितनी अनुसूची II के अनुच्छेद 11 (छ) और (ज) के अधीन ऐसे न्यायालय में किसी अन्य आवेदन पर संदेय फीस से अधिक हैं, के प्रतिदाय का निदेश देगा।

(2) भूल या अनवधानता से संदत्त कोई भी फीस उसका संदाय करने वाले व्यक्ति को प्रतिदत्त किए जाने का आदेश दिया जाएगा।

धारा 64. कतिपय दस्तावेजों पर छूट -

इस अधिनियम में अंतर्विष्ट कोई भी बात निम्नलिखित दस्तावेजों को किसी फीस से प्रभार्य नहीं बनाएगी-

(i) मुख्तारनामा, वकालतनामा या वाद संस्थित करने या प्रतिवाद करने का कोई अन्य लिखित प्राधिकार जब संघ की किसी सशस्त्र सेना के सदस्य जो सिविल नियोजन में नहीं है, द्वारा निष्पादित है,

(ii) सिंचाई के लिए सरकारी जल के प्रदाय संबंधी आवेदन,

(iii) किसी साक्षी या अन्य व्यक्ति को या तो साक्ष्य देने या दस्तावेज पेश करने या किसी प्रदर्श, जो न्यायालय में पेश किए जाने के अव्यवहित प्रयोजन के लिए किया गया शपथ-पत्र नहीं है, के पेश किये जाने या फाइल किए जाने के बारे में हाजिर होने के लिए समन के लिए (आपराधिक आरोप या इत्तिला से युक्त अर्जी से भिन्न) प्रथम आवेदन;

(iv) दांडिक मामलों में जमानत पत्र, अभियोजन करने या साक्ष्य देने के लिए मुचलका और स्वीय उपसंजाति या अन्यथा के लिए मुचलका,

(v) किसी अपराध की बाबत अर्जी, आवेदन, आरोप या इत्तिला जब किसी पुलिस अधिकारी को या उसके समक्ष उपस्थापित की जाए, की जाए या रखी जाए;

(vi) किसी कैदी या विबाध्यता में या किसी न्यायालय या उसके अधिकारी के अवरोध के अधीन अन्य व्यक्ति द्वारा अर्जी;

(vii) भारतीय दंड संहिता, 1860, (1860 का केंद्रीय अधिनियम 45) के अधीन यथापरिभाषित लोक सेवक, या राज्य रेल के अधिकारी का, उसके पदीय कर्तव्य के निर्वहन से उद्भूत होने वाले, या उससे संबंधित विषयों संबंधी परिवाद,

(viii) व्यपगत जमा के प्रतिदाय के लिए आवेदन जो उस तारीख जिस पर रकम राज्य सरकार को व्यपगत हुई के छः मास पश्चात् किया गया है, से भिन्न राज्य सरकार द्वारा आवेदक को शोध्य धन के संदाय के लिए आवेदन;

(ix) किसी नगरपालिक कर के विरुद्ध अपील की अर्जी;

(x) लोक प्रयोजनों के लिए संपत्ति के अर्जन संबंधी तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन प्रतिकर के लिए आवेदन;

(xi) सरकारी सेवक या प्रतिपाल्य अधिकरण के कर्मचारी द्वारा अपील की अर्जी जब किसी वरिष्ठ अधिकारी या सरकार को पदच्युति. अवनति, या निलंबन के आदेशों के विरुद्ध उपस्थापित की जाए, ऐसी अपीलों के साथ फाइल की गई ऐसे आदेशों की प्रतिलिपियों, और ऐसी प्रतिलिपियों के अभिप्राप्त करने के लिए आवेदन।

धारा 65. फीस घटाने या परिहार करने की शक्ति -

राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस राज्य के राज्यक्षेत्र के संपूर्ण या किसी भाग में, इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य समस्त या किन्हीं फीस को घटा सकता है या परिहार कर सकता है, और वैसी ही रीति से ऐसी अधिसूचना को रद्द या फेरफारित कर सकता है।

धारा 65-फीस में छूट प्रदान करने की शक्ति-

राज्य सरकार राज-पत्र में अधिसूचना द्वारा लोकहित में व्यक्तियों के किसी वर्ग को इस अधिनियम के अधीन वादों को किसी श्रेणी के लिए प्रभारणीय फीस में से सभी या किसी  फीस से छूट प्रदान कर सकती है।

धारा 65-ख. फीस का प्रतिदाय -

जहाँ न्यायालय किसी वाद के पक्षकारों को सिविल  प्रक्रिया सहिता, 1908 (1908 का केन्द्रीय अधिनियम सं. 5) की धारा 89 में निर्दिष्ट विवाद के निपटारे की रीतियों में से किसी रीति के प्रति निर्देश दे और वह मामला सिविल प्रक्रिया संहिता को धारा 89 के अधीन उपबंधित रीतियों में से किसी रीति से निपट जाये तो वादी, न्यायालय से ऐसे वादपत्र के संबंध में संदत्त फीस की पूरी रकम कलक्टर से वापस प्राप्त करने के लिए उसे प्राधिकृत करने वाला प्रमाणपत्र प्राप्त करने का हकदार होगा।

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