धारा 20 से 47 अध्याय 4 राजस्थान न्यायालय फीस एवं वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961

धारा 20 से 47 अध्याय 4 राजस्थान न्यायालय फीस एवं वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961

अध्याय 4

फीस की संगणना

धारा 20. फीस की गणना किस प्रकार हो -

इस अधिनियम के अधीन संदेय फीस इस अध्याय, अध्याय 6, अध्याय 8 और अनुसूची I और II के उपबंधों के अनुसार अवधारित या संगणित की जाएगी।

धारा 21. धन या नुकसानी के लिए वाद -

धन के लिए किसी वाद में (नुकसानी या मुआवजे, या भरणपोषण या वार्षिकियों या नियतकाल पर संदेय अन्य राशियों की बकाया के लिए वाद को सम्मिलित करते हुए) फीस दावाकृत रकम पर संगणित की जाएगीः

परन्तु जहां वाद मानहानि की नुकसानी के लिए है, वहां फींस, पच्चीस हजार रुपये की अधिकतम फीस के अध्यधीन रहते हुए, दावाकृत रकम पर संगणित की जायेगीः

परंतु यह और घातक दुर्घटना अधिनियम, 1855 (1855 का केंद्रीय अधिनियम सं. 13) के अधीन नुकसानी को किसी कार्रवाई या वाद में, वादपत्र या अपील के ज्ञापन पर दस रुपये की नियत फीस संदेय होगी।

धारा 22. भरण-पोषण और वार्षिकियों के लिए वाद-

इसमें इसके पश्चात् उल्लिखित वादों में फीस की संगणना निम्नलिखित रूप में की जाएगी :-

(क) भरण-पोषण के लिए वाद में, एक वर्ष के लिए संदेय होने वाली दावाकृत रकम पर;

(ख) भरण-पोषण के बढाए जाने या घटाए जाने के लिए वाद में, उस रकम पर जिसके द्वारा वार्षिक भरण-पोषण का बढाया जाना या घटाया जाना ईप्सित है;

(ग) वार्षिकियों या कालिकतः संदेय अन्य राशियों के लिए वाद में, एक वर्ष के लिए संदेय होने वाली दावाकृत रकम के पाँच गुना पर

परंतु, जहाँ वार्षिकी पाँच वर्ष से कम के लिए संदेय है, फीस संदेय राशियों के योग पर संगणित की जाएगी:

परंतु यह और कि भरण-पोषण के बढाए जाने के लिए वाद उस न्यायालय में संस्थित किया जाएगा जिसे दावाकृत बढी हुई दर पर भरण-पोषण के वाद ग्रहण करने की अधिकारिता होगी और भरण-पोषण के घटाए जाने के लिए वाद उस न्यायालय में संस्थित किया जाएगा जिसे उस दर पर भरण-पोषण के लिए वाद ग्रहण करने की अधिकारिता होगी जिसका घटाया जाना ईप्सित है।

धारा 23. जंगम संपत्ति के लिए वाद -

(1) हक की दस्तावेजों से भिन्न जंगम संपत्ति के लिए वाद फीस की संगणना-

(क) जहाँ वाद की विषय वस्तु का कोई बाजारी मूल्य है, ऐसे मूल्य पर; या

(ख) जहाँ वाद की विषय वस्तु का कोई बाजारी मूल्य नहीं है, उस रकम पर जिस पर चाहे गए अनुतोष का वादपत्र में मूल्यांकन किया गया है, की जाएगी।

(2) (क) हक की दस्तावेजों के कब्जे के लिए वाद में, फीस की संगणना रकम के या दस्तावेज द्वारा प्रतिभूत संपत्ति के बाजारी मूल्य के एक चौथाई पर की जाएगी:

(i) जहाँ वादपत्र में दस्तावेजों द्वारा प्रतिभूत धन या संपत्ति पर वादी के हक का प्रत्याख्यान अभिकथित किया जाता है, या

(ii) जहाँ दस्तावेजों द्वारा प्रतिभूत धन पर या संपत्ति पर वादी के हक के बारे में कोई विवाद्यक विरचित किया जाता है।:

परंतु जहाँ वादपत्र में का अभिकथन या विरचित किया गया विवादद्यक रकम या संपत्ति के केवल किसी भाग से ही संबंधित है, फीस की संगणना रकम के ऐसे भाग के एक चौथाई पर या संपत्ति के ऐसे भाग के बाजारी मूल्य के एक चौथाई पर की जाएगी।(ख) हक की दस्तावेजों के कब्जे के लिए वाद में जहाँ दस्तावेज द्वारा प्रतिभूत धन या संपत्ति पर वादी का हक प्रत्याख्यान नहीं किया जाता है, फीस की संगणना उस रकम पर जिस पर चाहे गए अनुतोष का, मूल्यांकन वादपत्र में किया जाता है या जिस पर ऐसे अनुतोष का न्यायालय द्वारा मूल्यांकन किया जाता है, जो भी अधिक हो, की जाएगी।

स्पष्टीकरण -  

अभिव्यक्ति "हक की दस्तावेज" से ऐसी दस्तावेज अभिप्रेत है जिसके द्वारा किसी संपत्ति में किसी अधिकार, हक या हित, चाहे निहित या समाश्रित, का चाहे वर्तमान में या भविष्य में सृजित, घोषित, समनुदेशित, सीमित या निर्वापित किया जाना तात्पर्यिंत या प्रवर्तित होता है।

धारा 24. घोषणा के लिए वाद-

घोषणात्मक डिक्री या आदेश के लिए वाद, चाहे पारिणामिक अनुतोष के साथ या उसके बिना, जो धारा 25 के अधीन नहीं आता है, में-

(क) जहाँ प्रार्थना घोषणा के लिए और उस संपत्ति, जिससे घोषणा संबंधित है, के कब्जे के लिए है, फीस की संगणना बीस रुपये की न्यूनतम फीस के अध्यधीन, संपत्ति के बाजारी मूल्य पर की जाएगी;

(ख) जहाँ प्रार्थना घोषणा के लिए और पारिणामिक व्यादेश के लिए है और ईप्सित अनुतोष किसी स्थावर संपत्ति के बारे में है, फीस की संगणना बीस रुपये की न्यूनतम फीस के अध्यधीन, संपत्ति के बाजारी मूल्य के आधे पर की जाएगी;

(ग) जहाँ प्रार्थना किसी चिह्न, नाम, पुस्तक, चित्र, डिजाइन, या अन्य चीज के उपयोग विक्रय, मुद्रण या प्रदर्शन के वादी के अनन्य अधिकार से संबंधित है, और ऐसे अनन्य अधिकार के अतिलंघन पर आधारित है, फीस की संगणना, चालीस रुपये की न्यूनतम फीस के अध्यधीन उस रकम पर जिस पर चाहे गए अनुतोष का मूल्यांकन वादपत्र में किया गया है, की जाएगी,

(घ) जहाँ प्रार्थना किसी संपत्ति के बारे में घोषणा के लिए है और किसी पारिणामिक अनुतोष के लिए प्रार्थना नहीं की जाती है, फीस की संगणना, बीस रुपये की न्यूनतम फीस के अध्यधीन, संपत्ति के बाजारी मूल्य पर की जाएगी;

(ङ) अन्य मामलों में, चाहे वाद की विषय वस्तु मूल्यांकन के योग्य है या नहीं, फीस की संगणना, पच्चीस रुपये की न्यूनतम फीस के अध्यधीन उस रकम पर जिस पर ईप्सित अनुतोष का मूल्यांकन वादपत्र में किया गया है की जाएगी।

धारा 25. दत्तक ग्रहण वाद -

किसी दत्तक ग्रहण, की विधिमान्यता या अविधिमान्यता, या किसी दत्तक ग्रहण के तथ्य के विषय में घोषणा के लिए वाद में फीस निम्नलिखित दरों पर संदेय होगी :-

जहाँ अनुतोष में अंतर्ग्रस्त या उससे प्रभावित संपत्ति का बाजारी मूल्य -

(i) पाँच हजार रुपये या कम है, पचास रुपये;

(ii) पाँच हजार रुपये से अधिक है किंतु दस हजार रुपये से अनधिक है, एक सौ रुपये,

(iii) दस हजार रुपये से अधिक है, पाँच सौ रुपये।

धारा 26. व्यादेश के लिए वाद -

व्यादेश के लिए वाद में-

(क) जहाँ ईप्सित अनुतोष किसी स्थावर संपत्ति के बारे में है, और जहाँ वादी यह अभिकथित करता है कि संपत्ति में उसका हक प्रत्याख्यात किया जाता है, फीस की संगणना संपत्ति के बाजारी मूल्य के आधे पर या तीन सौ रुपये पर, जो भी अधिक हो, की जाएगी,

(ख) जहाँ प्रार्थना किसी चिह्न, नाम, पुस्तक, चित्र, डिजाइन या अन्य चीज के उपयोग, विक्रय, मुद्रण या प्रदर्शन के वादी के अनन्य अधिकार संबंधी है और ऐसे अनन्य अधिकार के अतिलंघन पर आधारित है, फीस की संगणना उस रकम पर जिस पर चाहे गए अनुतोष का मूल्यांकन वादपत्र में किया गया है, या पाँच सौ रुपये पर, जो भी अधिक हो, की जाएगी;

(ग) किसी अन्य मामले में, चाहे वाद की विषय वस्तु का कोई बाजारी मूल्य है या नहीं, फीस की संगणना उस रकम पर जिस पर चाहे गए अनुतोष का मूल्यांकन वादपत्र में किया गया है, या चार सौ रुपये पर, जो भी अधिक हो, की जाएगी।

धारा 27 न्यास संपत्ति संबंधी वाद -

न्यासियों या न्यासी के पद के परस्पर विरोधी दावेदारों के मध्य, या किसी न्यासी और किसी ऐसे व्यक्ति जो न्यासी न रहा हो, के मध्य न्यास संपत्ति के कब्जे या संयुक्त कब्जे के लिए या घोषणात्मक डिक्री के लिए, चाहे पारिणामिक अनुतोष सहित या उसके बिना, वाद में, फीस की संगणना, दो सो रुपये की अधिकतम फीस के अध्यधीन, संपत्ति के बाजारी मूल्य के 1/5 पर, या जहाँ संपत्ति का कोई बाजारी मूल्य नहीं है, एक हजार रुपये पर, की जाएगी: 

परंतु जहाँ संपत्ति का कोई बाजारी मूल्य नहीं हैं, न्यायालयों की अधिकारिता के प्रयोजन के लिए मूल्य ऐसी रकम होगी जो वादी वादपत्र में कथित करेगा।

स्पष्टीकरण-

इस धारा के प्रयोजन के लिए, किसी हिंदू मुस्लिम या अन्य धार्मिक या पूर्व विन्यास में समाविष्ट संपत्ति न्यास संपत्ति समझी जाएगी और ऐसी किसी संपत्ति का प्रबंधक उसका न्यासी समझा जाएगा।

धारा 28. विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1877] के अधीन कब्जे के लिए वाद. - 

विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1877 (1877 का केंद्रीय अधिनियम 1) की धारा 9) के अधीन स्थावर संपत्ति के कब्जे के लिए वाद में, फीस की संगणना संपत्ति के बाजारी मूल्य के आधे पर या दो सौ रुपये पर, जो भी अधिक हो, की जाएगी।

धारा 29. कब्जे के लिए वाद जिनके बारे में अन्यथा उपबंधित नहीं है-

स्थावर संपत्ति के कब्जे के लिए वाद में जिसके बारे में अन्यथा उपबंधित नहीं है, फीस की संगणना, बीस रुपये की न्यूनतम फीस के संपत्ति के अध्यधीन बाजारी मूल्य पर की जाएगी।

धारा 30. सुखाचार संबंधी वाद-

सुखाचार संबंधी वाद में, चाहे अधिष्ठायी स्वामी या अनुसेवी स्वामी द्वारा, फीस की संगणना उस रकम पर, जिस पर चाहे गए अनुतोष का मूल्यांकन वादपत्र में किया गया है, की जाएगी जो रकम किसी भी दशा में दो सौ रुपये से कम नहीं होगी:

परंतु जहाँ ऐसे सुखाचार संबंधी अन्य अनुतोष के अतिरिक्त प्रतिकर का दावा किया जाए, फीस ऐसे अन्य अनुतोष पर संदेय फीस के अतिरिक्त प्रतिकर के रूप में दावाकृत रकम पर भी संदत्त की जाएगी।

धारा 31. अग्र-क्रय के वाद-

अग्र-क्रयाधिकार के प्रवर्तन के लिए वाद में, फीस की संगणना विक्रय जिसको कि अग्र-क्रयाधिकारी शून्यीकृत कराना चाहता है, के प्रतिफल की रकम पर या - विक्रीत संपत्ति के बाजारी मूल्य पर जो भी कम हो, की जाएगी।

धारा 32. बंधक संबंधी वाद -

(1) बंधक पर शोध्य धन की वसूली के लिए वाद में, फीस की संगणना दावाकृत रकम पर की जाएगी।

(2) जहाँ ऐसे किसी वाद में, पूर्विक बंधक या भार का धारक पक्षकार बनाया जाता है और वह अपने लिखित कथन में प्रार्थना करता है कि उसके बंधक या भार पर शोध्य रकम का अवधारण कर दिया जाए और कि डिक्री में ऐसी रकम का उसको संदाय का निदेश है, लिखित कथन पर फीस जिसकी संगणना दावाकृत रकम पर की जाएगी, सदेय होगी

परंतु, जहाँ बंधक या भार के धारक ने दावा, जिससे उसका लिखित कथन संबंधित है, पर किसी अन्य कार्यवाही में फीस का संदाय कर दिया है, ऐसी अन्य कार्यवाही में उसके द्वारा संदत्त फीस के लिए मुजरा दिया जाएगा।

(3) जहाँ ऐसे किसी वाद में बंधकित संपत्ति का विक्रय कर दिया जाता है और पूर्विक या पाश्चिक बंधक या भार का धारक, विक्रय के आगमों में से उसके बंधक या भार पर शोध्य रकम का जसको संदाय किए जाने के लिए आवेदन करता है पविक या पाश्चिक बंधक या भार का ऐसा धारक अपने आवेदन पर फीस जिसकी संगणना उसके द्वारा दावाकृत रकम पर की जाएगी, का संदाय करेगा:

परतु जहाँ बंधक या भार का ऐसा धारक उस बाद में पक्षकार है, जिसमें कि विक्रय आयोजित किया गया था, और उसने वाद में उसके द्वारा फाइल किए गए लिखित कथन पर फीस का संदाय कर दिया है, विक्रय के आगमों में से संदाय के लिए आबदन पर उसके द्वारा कोई फीस संदेय नहीं होगी:

परंतु यह और कि, जहाँ बंधक या भार के धारक ने, जो उस वाद में पक्षकार नहीं है जिसमें कि विक्रय आयोजित किया जाता है, किसी अन्य कार्यवाही में उस दावा जिससे कि उसका आवेदन संबंधित है, पर फीस का संदाय कर दिया है, ऐसी अन्य कार्यवाही में उसके द्वारा संदत्त फीस के लिए मुजरा दिया जाएगा।

(4) किसी सह-बंधकदार द्वारा अपने स्वयं के और अन्य सह-बंधकदारों के फायदे के लिए वाद में, फीस की संगणना संपूर्ण बंधक पर दावाकृत रकम पर की जाएगी:

परंतु, जहाँ ऐसे वाद में प्रतिवादी के रूप में पक्षकार बनाया गया सह-बंधकदार संपूर्ण बंधक पर वादपत्र में दावाकृत राशि से अधिक के लिए दावा करता है, ऐसे प्रतिवादी के लिखित कथन में दावाकृत संपूर्ण राशि पर संगणित फीस और वादपत्र में दावाकृत संपूर्ण राशि पर संगणित फीस के मध्य का अंतर लिखित कथन पर संदेय होगा।

स्पष्टीकरण-

इस उप-धारा में किसी भी बात का अर्थ परिसीमा विधि को प्रभावित करने वाला नहीं लगाया जाएगा।

(5) (क) किसी अनु-बंधकदार द्वारा बंधकित संपत्ति में बंधकदार के हित के विक्रय द्वारा अनु-बंधक पर दावाकृत रकम की वसूली के लिए वाद में फीस की सगणना अनु-बंधक के अधीन दावाकृत रकम पर की जाएगी।

(ख) किसी अनु-बंधकदार द्वारा वाद में, यदि प्रार्थना मूल बंधकदार को बंधकित संपत्ति के विक्रय के लिए है और मूल बन्धकदार भी प्रतिवादी के रूप में पक्षकर बनाया जाता है, फीस की संगणना, मूल बंधक, जो उसे अनु-बंधकित किया जाता है, पर दावाकृत संपूर्ण रकम पर की जाएगी।

(6) जहाँ पूर्विक या पाश्चिक बंधक या भार के धारक को, सह बंधकदार द्वारा वाद में जिस उप-धारा (4) लागू होती है, या अनु-बंधकदार द्वारा वाद में जिस पर उप-धारा (5) लागू होती है, पक्षकार बनाया जाता है, उप-धारा (2) (3) के उपबंध यथावश्यक परिवर्तनों सहित बंधक या भार के ऐसे धारक द्वारा फाइल किए गए लिखित कथन या आवेदन पर लागू होंगे।

(7) जहाँ मूल बंधकदार, जिसे ऐसे वाद पक्षकार बनाया जाता है जिस पर उप-धारा (5) (ख) के उपबंध लागू होते हैं, उसके द्वारा अनु-बंधकित बंधक पर वादपत्र में दावाकृत रकम से अधिक का दावा करता है, उप-धारा (4) के उपबंध यथावश्यक परिवर्तनों सहित ऐसे बंधककर्ता के लिखित कथन पर लागू होंगे।

(8) किसी बंधकदार के विरुद्ध बंधक के मोचन के लिए वाद में, फीस की संगणना बंधक पर शोध्य रकम, जैसी कि वादपत्र में कथित की गई है, पर की जाएगी:

परंतु, जहाँ बंधक पर शोध्य रकम उस रकम से अधिक पाई जाती है जिस पर वादी के द्वारा फीस संदत्त की गई है, कोई डिक्री पारित नहीं की जाएगी जब तक कि कमी का संदाय नहीं कर दिया जाए:

परंतु यह और कि भोग बंधक या विलक्षण बंधक के मामले में यदि वादी मोचन और साथ ही साथ अधिशेष लाभों के लेखाओं के लिए प्रार्थना करता है, लेखाओं के लिए अनुतोष पर फीस पृथकृत उदगृहीत की जाएगी जैसे कि लेखाओं के वाद में की जाती है।

(9) बंधकदार द्वारा बंधक के पुरोबंध करने के लिए, या जहाँ बंधक सशर्त विक्रय के द्वारा किया जाता है, विक्रय को आत्यंतिक घोषित कराने के लिए वाद में, फीस की संगणना वादपत्र में मूलधन और ब्याज के तौर पर दावाकृत रकम पर की जाएगी।

धारा 33. लेखाओं के लिए वाद-

(1) लेखाओं के लिए वाद में, फीस की संगणना वादपत्र में यथा प्राक्कलित उस रकम पर की जाएगी जिसके लिए वाद लाया जाता है।

(2) जहाँ वादी को संदेय रकम जैसी कि वाद में अभिनिश्चत की गई है, ऐसी रकम से अधिक हैं. जैसी कि वादपत्र में प्राक्कलित की गई है. इस प्रकार यथाअभिनिनिश्चित रकम के संदाय का निदेश देते हुए कोई डिक्री पारित नहीं की जाएगी जब तक कि वास्तविक रूप से संदत्त फीस और ऐसी फीस जो यदि वाद में इस प्रकार अभिनिश्चित संपूर्ण रकम समाविष्ट होती तो संदेय होती, के अंतर का संदाय नहीं कर दिया जाता।

(3) यदि अतिरिक्त फीस ऐसे समय के भीतर जो न्यायालय नियत करे, संदत्त नहीं की जाती है, डिक्री ऐसी रकम तक सीमित होगी जिस तक संदत्त फीस का विस्तार है।

(4) जहाँ किसी ऐसे वाद में यह पाया जाता है कि कोई रकम प्रतिवादी को संदेय है, उसके पक्ष में कोई डिक्री पारित नहीं की जाएगी जब तक कि वह ऐसी रकम पर शोध्य फीस का संदाय नहीं कर देता।

धारा 34. भागीदारी के विघटन के लिए वाद-

(1) भागीदारी के विघटन और लेखाओं या विघटित भागीदारी के लेखाओं के लिए वाद में फीस की संगणना, वादी द्वारा यथाप्राक्कलित, भागीदारी में वादी के अंश के मूल्य पर की जाएगी।

(2) यदि वादी के अंश का मूल्य जैसा कि वाद में अभिनिश्चित किया जाए, वादपत्र में यथा प्राक्कलित मूल्य से अधिक है, वादी के पक्ष में कोई डिक्री, या जहाँ प्रारंभिक डिक्री हो गई है, कोई अंतिम डिक्री, पारित नहीं की जाएगी, भागीदारी की आस्तियों में से कोई संदाय नहीं किया जाएगा और वादी के अंश के लेखे कोई संपत्ति आवंटित नहीं की जाएगी जब तक कि वास्तविक रूप से संदत्त फीस और फीस जो संदेय होती यदि इस प्रकार अभिनिश्चित संपूर्ण मूल्य वादपत्र में समाविष्ट होता, के अतर का संदाय न कर दिया जाए।

(3) ऐसे किसी वाद में, प्रतिवादी के पक्ष में भागीदारी की आस्तियों में उसके अंश के लिए या उसके लेखे कोई अंतिम डिक्री पारित नहीं की जाएगी, कोई धन संदत्त नहीं किया जाएगा और कोई संपत्ति का आवंटन नहीं किया जाएगा जब तक कि भागीदारी की आस्तियों में उसके अंश की रकम या मूल्य पर संगणित फीस का संदाय न कर दिया जाए।

धारा 35. विभाजन के वाद -

(1) अविभक्त कुटुंब की संपत्ति अथवा संयुक्त या शामिलाती स्वामित्व की संपत्ति के विभाजन और अंश के पृथक कब्जे के लिए, किसी वादी, जिसे ऐसी संपत्ति के कब्जे से अपवर्जित कर दिया गया है, के द्वारा वाद में, फीस की संगणना संपत्ति के वादी के अंश के बाजारी मूल्य पर की जाएगी।

(2) अविभक्त कुटुंब की संपत्ति अथवा संयुक्त या शामिलाती संपत्ति के विभाजन और अंश के पृथक कब्जे के लिए किसी वादी, जो ऐसी संपत्ति के संयुक्त कब्जे में है, के द्वारा वाद में, फीस का संदाय निम्नलिखित दरों पर किया जाएगा, यथा:

(i) रुपये तीस यदि वादी के अंश का मूल्य 5,000/- रुपये या कम है,

(ii) रुपये एक सौ यदि मूल्य 5,000/- रुपये से अधिक किंतु 10,000/- रुपये से अनधिक है, और

(iii) रुपये दो सौ यदि ऐसा मूल्य 10.000/-रुपये से अधिक है।

(3) जहाँ उप-धारा (1) या उप-धारा (2) के अधीन आने वाले वाद में, कोई प्रतिवादी विभाजन और संपत्ति के उसके अंश के पृथक् कब्जे का दावा करता है, उसके लिखित कथन पर फीस, जिसकी संगणना उसके अंश के बाजारी मूल्य के आधे पर या उप-धारा (2) में विनिर्दिष्ट दरों के आधे पर, इसके अनुसार कि ऐसा प्रतिवादी कब्जे से अपवर्जित किया गया है या संयुक्त कब्जे में है की जाएगी, संदेय होगी।

(4) जहाँ उप-धारा (1) या उप-धारा (2) के अधीन आने वाले वाद में वादी या प्रतिवादी धारा 38 में विनिर्दिष्ट प्रकृति की डिक्री या अन्य दस्तावेज के रद्द किए जाने की ईप्सा करता है, रद्दकरण के अनुतोष पर उस धारा में विनिर्दिष्ट रीति से पृथक फीस संदेय होगी।

घारा 36. संयुक्त कब्जे के लिए वाद -

अविभक्त कुटुंब की संपत्ति अथवा संयुक्त या शामिलाती स्वामित्व की संपत्ति के संयुक्त कब्जे के लिए, वादी, जिसे कब्जे से अपवर्जित कर दिया गया है. के द्वारा वाद में, फीस की संगणना संपत्ति के वादी के अंश के बाजारी मूल्य पर की जाएगी।

धारा 37 प्रशासन वाद -

(1) संपदा के प्रशासन के लिए वाद में, वादपत्र पर, फीस धारा 45 में विनिर्दिष्ट दरों पर उद्‌गृहीत की जाएगी।

(2) जहाँ संपदा की आस्तियों की कोई रकम या अंश या भाग वादी को शोध्य पाया जाए और आस्तियों की रकम या ऐसे अंश या भाग के बाजारी मूल्य पर संगणित फीस वादपत्र पर सदत्त फीस से अधिक है, कोई संदाय नहीं किया जाएगा और धन के संदाय का निदेश देते हुए या आस्तियों के ऐसे अंश या भाग के हक की पुष्टि करते हुए कोई डिक्री पारित नहीं की जाएगी जब तक कि वास्तविक रूप से संदत्त फीस और रकम या संपत्ति के मूल्य पर संगणित फीस के मध्य के अंतर का संदाय न कर दिया जाए।

(3) प्रशासन के लिए वाद में कोई संदाय किया जाएगा, धन के संदाय का निदेश देते हुए या संपदा की आस्तियों के किसी अंश या भाग के हक की पुष्टि करते हुए प्रतिवादी के पक्ष में कोई डिक्री पारित नहीं की जाएगी, जब तक की ऐसे प्रतिवादी द्वारा ऐसी आस्तियों को रकम या ऐसे अंश या भाग के मूल्य पर संगणित फीस का संदाय न कर दिया जाए।

(4) उप-धारा (2) या उप-धारा (3) के अधीन किसी वादी के द्वारा या किसी प्रतिवादी के द्वारा संदेय फीस की संगणना करने में, ऐसे वादी द्वारा या ऐसे प्रतिवादी द्वारा दावा, जिसके आधार पर संपदा की आस्तियों की ऐसी रकम या अंश या भाग ऐसे वादी को या ऐसे प्रतिवादी को शोध्य होते हैं, के बारे में किसी अन्य कार्यवाही में, संदत्त फीस, यदि कोई हो, लिए मुजरा दिया जाएगा।

धारा 38. डिक्रियों इत्यादि के रद्दकरण के लिए वाद -

(1) धन या धन-मूल्य रखने वाली अन्य संपत्ति के लिए डिक्री या अन्य दस्तावेज, जिसके द्वारा धन, जंगम या स्थावर संपत्ति में, चाहे वर्तमान में या भविष्य में, किसी अधिकार, हक या हित का सृष्ट, घोषित, समनुदेशित, सीमित या निर्वापित किया जाना तात्पर्यित या प्रवर्तित है, के रद्द किए जाने के लिए वाद में, फीस की संगणना वाद की विषय वस्तु के मूल्य पर की जाएगी और ऐसा मूल्य -

(क) यदि संपूर्ण डिक्री या अन्य दस्तावेज का रद्द किया जाना ईप्सित है, रकम या संपत्ति जिसके लिए डिक्री पारित की गई थी या अन्य दस्तावेज निष्पादित को गई थी, का मूल्य; और

(ख) यदि डिक्री या अन्य दस्तावेज के भाग का रद्द किया जाना ईप्सित है, रकम या संपत्ति के मूल्य का ऐसा भाग; समझा जाएगा है

(2) यदि डिक्री या अन्य दस्तावेज ऐसी है कि उसके अधीन दायित्व का विभाजन नहीं किया जा सकता और दावाकृत अनुतोष केवल वादी की संपत्ति के किसी विशिष्ट मंद से या किसी ऐसी संपत्ति में वादी के अंश से संबंधित है, फीस की संगणना ऐसी संपत्ति या अंश के मूल्य पर, या डिकी की रकम पर, जो भी कम हो, की जाएगी।

स्पष्टीकरण -

किसी पंचाट के अपास्त किए जाने के लिए वाद इस धारा के अर्थ के अंतर्गत डिक्री के अपास्त किए जाने के लिए वाद समझा जाएगा।

घारा 39. कुर्की, इत्यादि के अपास्त किए जाने के लिए वाद -

(1) किसी संपत्ति, जंगम या स्थावर, या उसमें के किसी हित या राजस्व में किसी हित की किसी सिविल या राजस्व न्यायालय द्वारा कुर्की के अपास्त किए जाने, या कुर्की के अपास्त किए जाने के लिए आवेदन पर पारित आदेश के अपास्त किए जाने के लिए वाद में, फीस की संगणना उस रकम पर जिसके लिए संपत्ति कुर्क की गई थी या कुर्क की गई संपत्ति के बाजारी मूल्य के एक चौथाई पर, जो भी कम हो, की जाएगी।

(2) किसी सिविल या राजस्व न्यायालय के किसी अन्य संक्षिप्त विनिश्चय या आदेश के अपास्त किए जाने के लिए वाद में, यदि वाद की विषय वस्तु का कोई बाजारी मूल्य है, फीस की संगणना ऐसे मूल्य के एक चौथाई पर की जाएगी, और अन्य मामलों में फीस धारा 45 में विनिर्दिष्ट दरों पर संदेय होगी।

स्पष्टीकरण-

इस धारा के प्रयोजन के लिए सहकारी समितियों का रजिस्ट्रार सिविल न्यायालय समझा जाएगा।

धारा 40. विनिर्दिष्ट पालन के लिए वाद. -

विनिर्दिष्ट पालन के लिए वाद में, चाहे कब्जे सहित या उसके बिना फीस-

(क) विक्रय की संविदा के मामले में, प्रतिफल की रकम पर संगणित;

(ख) बंधक की संविदा के मामले में, बंधकदार द्वारा जिस रकम को प्रतिभूत करने का करार पाया जाए, पर संगणित;

(ग) पटटे की संविदा के मामले में, नजराना या प्रीमियम यदि कोई हो, और संदाय के लिए करार पाए गए वार्षिक भाटक के औसत की संकलित रकम पर संगणित,

(घ) विनिमय की संविदा के मामले में, प्रतिफल की रकम पर, या यथास्थिति, विनिमय में लिए जाने के लिए ईप्सित संपत्ति के बाजारी मूल्य पर संगणितः

(ड) अन्य मामलों में, जहाँ वचन जिसका प्रवर्तित कराया जाना ईप्सित है, के प्रतिफल का कोई बाजारी मूल्य है. ऐसे बाजारी मूल्य पर संगणित या यदि ऐसे प्रतिफल का कोई बाजारी मूल्य नहीं है, धारा 45 में विनिर्दिष्ट दरों परः संदेय होगी।

घारा 41. भू-स्वामी और अभिधारी के मध्य वाद-

(1) भू-स्वामी और अभिधारी के मध्य निम्नलिखित वादों में, यथा:-

(क) अभिधारी द्वारा पट्टे के प्रतिलेख के परिदान के लिए;

(ख) भाटक की वृद्धि के लिए;

(ग) भू-स्वामी द्वारा पट्टे के परिदान के लिए;

(घ) स्थावर संपत्ति, जिससे अभिधारी को भू-स्वामी द्वारा अवैध रूप से बेदखल कर दिया गया है, के कब्जे के प्रत्युदधरण के लिए, और

(ड) अधिभोग के अधिकार को स्थापित करने या नासाबित करने के लिए फीस उस स्थावर संपत्ति जिससे वाद संबंधित है, के लिए वादपत्र के उपस्थापित किए जाने की तारीख से ठीक पहले के वर्ष के लिए संदेय भाटक की रकम पर उद्‌गृहीत की जाएगी।

(2) किसी अभिघारी, जिसके अंतर्गत अभिधृति के पर्यवसान के पश्चात् अतिधारण रखने वाला अभिधारी भी आता है, से स्थावर संपत्ति के प्रत्युद्धरण के लिए वाद में, फीस की संगणना प्रीमियम, यदि कोई हो, और वादपत्र उपस्थापित किए जाने की तारीख से ठीक पहले के वर्ष के लिए संदेय भाटक पर, की जाएगी।

स्पष्टीकरण-

भाटक के अंतर्गत अतिधारण रखने वाले अभिघारी द्वारा संदेय प्रयोग और अधिभोग की नुकसानी भी आती है।

धारा 42. अंतःकालीन लाभों के लिए वाद-

(1) अंत कालीन लाभों के लिए या स्थावर संपत्ति और उससे होने वाले अंतःकालीन लाभों के लिए वाद में फीस की संगणना, अंतःकालीन लाभ के बारे में ऐसे लाभों के रूप में दावाकृत रकम पर की जाएगी। यदि वादी को शोध्य होने वाले अभिनिश्चित किए गए लाभ यथादावाकृत लाभों से अधिक है,कोई डिक्री पारित नहीं की जाएगी जब तक कि वास्तविकता रूप से संदत्त फीस और फीस जो संदेय होती यदि इस प्रकार अभिनिश्चित किए गए संपूर्ण लाभ वाद में समाविष्ट होते, के मध्य के अंतर का संदाय न कर दिया जाए।

(2) जहाँ डिक्री में, ऐसे अंतःकालीन लाभों, जो चाहे वाद संस्थित किए जाने के पूर्व या पश्चात्, संपत्ति पर प्रोद्भूत हो चुके हैं, के बारे में जाँच का निदेश दिया जाता है, कोई अंतिम डिक्री पारित नहीं की जाएगी जब तक कि वास्तविक रूप से सदत्त फीस और फीस जो संदेय होती यदि ऐसी डिक्री की तारीख तक शोध्य प्रोद्भूत होने वाले संपूर्ण लाभ वाद में समाविष्ट होते, के मध्य के अंतर का संदाय न कर दिया जाए।

(3) जहाँ डिक्री या अंतिम डिक्री की तारीख की पश्चात्वर्ती कालाविधि के लिए, ऐसी डिक्री या अंतिम डिक्री, विनिर्दिष्ट दर पर अंत कालीन लाभों के संदाय का निदेश दिया जाता है, ऐसी डिक्री या अंतिम डिकी का निष्पादन नहीं किया जाएगा जब तक कि निष्पादन में दावाकृत रकम पर संगणित फीस का संदाय न कर दिया गया हो।

धारा 43. लोक विषयों संबंधी वाद-

सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का केंद्रीय अधिनियम 5) की धारा 91 या 92 के अधीन अनुतोष के लिए वाद में संदेय फीस तीस रुपये होगी।

धारा 44. अंतराभिवाची वाद -

(1) अंतराभिवाची वाद में, वादपत्र पर फीस धारा 45 में विनिर्दिष्ट दरों पर संदेय होगी।

(2) जहाँ दावेदारों के मध्य विवादकों की विरचना की जाए, ऋण की रकम, या धन, या अन्य संपत्ति, जंगम या स्थावर, जो वाद की विषय वस्तु का गठन करती है, के बाजारी मूल्य पर संगणित फीस संदेय होगी। ऐसी फीस के उद्ग्रहण में, वादपत्र पर संदत्त फीस के लिए मुजरा दिया जाएगा, और पीस का अतिशेष दावेदारों दूसरा, जो ऋण या धनराशि या संपत्ति का एक दूसरे के प्रतिकूलतः दावा करते हैं, समान अंशों में संदत्त की जाएगी।

(3) न्यायालयों की अधिकारिता के अवधारण के प्रयोजन के लिए मूल्य ऋण की रकम, या धनराशि, या अन्य संपत्ति जिससे वाद संबंधित है का बाजारी मूल्य होगा।

धारा 45. वाद जिनके बारे में अन्यथा उपबंधित नहीं है-

वादों में, जिनके बारे में अन्यथा उपबंधित नहीं है, फीस निम्नलिखित दरों पर संदेय होगी, यथाः-

जहाँ विवादग्रस्त रकम या विषय वस्तु का मूल्य-

(i) रुपये 1,000/- से कम है                                                          दस रुपये

(ii) रुपये 1,000/- से अन्यून किंतु रुपये 3,000/- से अनधिक है           तीस रुपये                       

(iii) रुपये 3,000/- से अन्यून किंतु रुपये 5,000/- से अनधिक है          एक सौ रुपये

(iv) रुपये 5,000/- से अधिक किंतु रुपये 10,000/- से अनधिक है       दो सौ रुपये

(v) रुपये 10,000/- से अधिक है                                                    तीन सौ रुपये

धारा 46. - प्रतिकर संबंधी आदेश की अपील के ज्ञापन पर फीस -

सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए संपत्ति के अर्जन के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी अधिनियम के अधीन प्रतिकर संबंधी आदेश की अपील के ज्ञापन पर इस अधिनियम के अधीन संदेय फीस की संगणना अधिनिर्णीत रकम और अपीलार्थी द्वारा दावाकृत रकम के अंतर पर की जाएगी।

धारा 47. अपीलें -

अपील में संदेय फीस वही होगी जो फीस प्रथम बार के न्यायालय में अपील की विषय वस्तु पर संदेय होगी:

परंतु, किसी व्यक्ति, जिसकी प्रथम बार के न्यायालय द्वारा या अपील न्यायालय द्वारा पारित, प्रारंभिक डिक्री की अपील लंबित है, के द्वारा अंतिम डिक्री की अपील के ज्ञापन पर फीस के उग्रहण में, ऐसे व्यक्ति द्वारा प्रारंभिक डिक्री की अपील में संदत्त फीस के लिए मुजरा दिया जाएगा।

स्पष्टीकरण (1) -

चाहे अपील किसी अनुतोष से इंकार के विरुद्ध है, या किसी अनुतोष के प्रदान किए जाने के विरुद्ध है, अपील में संदेय फीस वही होगी जो फीस अनुतोष पर प्रथम बार के न्यायालय में संदेय होगी।

स्पष्टीकरण (2) -

खर्चे अपील की विषय वस्तु का भाग होना नहीं समझे जाएंगे, सिवाय वहाँ के जहाँ ऐसे खर्च स्वयं अपील की विषय वस्तु हो या खर्चों के बारे में अनुतोष का दावा वाद में की मुख्य विषय वस्तु के बारे में दावाकृत अनुतोष के अतिरिक्त या स्वतंत्र आधारों पर किया जाए।

स्पष्टीकरण (3) -

दावों जिनमें वाद संस्थित किए जाने के पश्चात्वर्ती ब्याज का प्रदान किया जाना सम्मिलित था, में वाद के लंबित रहने के दौरान डिक्री की तारीख तक प्रोद्भूत ब्याज अपील की विषय वस्तु का भाग समझा जाएगा, सिवाय वहाँ के जहाँ ऐसा ब्याज त्याग कर दिया जाता है।

स्पष्टीकरण (4) -

जहाँ अपील में प्रार्थित अनुतोष प्रथम बार के न्यायालय में प्रार्थित या इंकार किए गए अनुतोष से भिन्न है, अपील में संदेय फीस वह फीस होगी जो अपील में प्रार्थित्त अनुतोष पर प्रथम बार के न्यायालय में संदेय होगी।

स्पष्टीकरण (5) -

जहाँ संदेय फीस की संगणना या अवधारण के प्रयोजन के लिए अपील की विषय वस्तु का बाजारी मूल्य अभिनिश्चित किया जाना है, ऐसा बाजारी मूल्य वादपत्र के उपस्थापित किए जाने की तारीख पर जो होगा, अभिनिश्चित किया जाएगा।

 

 

 

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