(1) इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य समस्त फीस का संग्रहण स्टांपों द्वारा किया जाएगा।
(2) इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य फीस का द्योतन करने के लिए प्रयुक्त स्टांप छापित या आसंजक या भागत: छापित और भागत आसंजक होंगे, जैसा कि राज्य सरकार राज-पत्र में अधिसूचना द्वारा समय-समय पर निदेश दे।
जहाँ कोई दस्तावेज जिस पर इस अधिनियम के अधीन स्टांप होना चाहिए, केवल किसी भूल को शुद्ध करने के लिए और उसे पक्षकारों के मूल आशय के अनुरूप बनाने के लिए संशोधित की जाती है, नए सिरे स्टांप अधिरोपित करना आवश्यक नहीं होगा।
(1) कोई भी दस्तावेज जिस पर इस अधिनियम के अधीन स्टांप अपेक्षित है किसी न्यायालय या कार्यालय में किसी भी कार्यवाही में फाइल नहीं की जाएगी या उस पर कार्रवाई नहीं की जाएगी जब तक कि स्टांप रद्द न कर दिया जाए।
(2) ऐसा अधिकारी, जिसे न्यायालय या कार्यालय का प्रधान समय समय पर नियुक्त करे, किसी ऐसी दस्तावेज को ग्रहण करने पर, तत्काल चित्रशीर्ष को इस प्रकार पंच करते हुए कि स्टाम्प पर अभिहित रकम अस्पर्शित छूट जाए ऐसा रद्दकरण करेगा और पंच करने के द्वारा हटाया गया भाग जला दिया जाएगा या अन्यथा नष्ट कर दिया जाएगा।
जहाँ क्षतिग्रस्त या खराब हुए स्टांपों के लिए इस अधिनियम के अधीन मोका दिया जाता है, या जहाँ न्यायालय के आदेश द्वारा पहले से संदत्त फीस का किसी व्यक्ति को प्रतिदाय किए जाने का निदेश दिया जाता है, कलक्टर संबंद्ध व्यक्ति के आवेदन पर उसे फीस की रकम का, संदाय कर सकता है, या, जहाँ क्षतिग्रस्त या खराब हुए स्टांप पेश किए जाएँ, वह उनके असली होने के बारे में उसका स्वयं का समाधान करने के पश्चात् उनके बदले में उसी या किसी अन्य वर्णन के स्टांपों में वही रकम या मूल्य, या यदि आवेदक ऐसी वांछा करे, धन के रूप वही रकम या मूल्य दे सकता है
परंतु सभी मामलों में, जहाँ धन का रोकड़ संदाय किया जाता है प्रत्येक एक रुपये या उसके भाग के लिए छः नए पैसे की कटौती की जाएगी। तथापि जहाँ प्रतिदाय का दावा न्यायालय के किसी आदेश, जो अपील में फेरफारित कर गया है या उलट दिया गया है, के अनुसरण में संदत्त फीस के बारे में किया जाता है, ऐसी कटौती नहीं की जाएगी।
स्टांपों का विक्रय करने के लिए नियुक्त कोई व्यक्ति जो इस अधिनियम के अधीन निर्मित किसी नियम की, अवज्ञा करता है, और कोई व्यक्ति जो इस प्रकार नियुक्त नहीं है, जो किन्हीं स्टांपों का विक्रय करता है या के लिए प्रस्थापना करता है ऐसी अवधि के कारावास जो छः मास तक हो सकता है या जुर्माना जो पाँच सौ रुपये तक हो सकता है, या दोनों, से दंडनीय होगा।
(1) उच्च न्यायालय निम्नलिखित समस्त या उनमें से किन्हीं बातों के बारे में उपबंध करने या उन्हें विनियमित करने के लिए नियम बना सकता है, यथाः-
(क) उच्च न्यायालय द्वारा उसकी अपीली अधिकारिता में या उसके अधीनस्थ सिविल या दांडिक न्यायालयों द्वारा जारी आदेशिकाओं की तामील और निष्पादन किए जाने के लिए संदेय फीस,
(ख) आदेशिकाओं की तामील और निष्पादन में खंड (क) में उल्लिखित न्यायालय द्वारा नियुक्त व्यक्तियों का पारिश्रमिक,
(ग) जिला एवं सेंशन न्यायधिशो और जिला मजिस्ट्रेटों द्वारा उनके अपने-अपने न्यायालयों और उनके अधीनस्थ न्यायालयों से जारी की गई आदेशिकाओं की तामील और निष्पादन के लिए नियुक्त किए जाने के लिए आवश्यक आदेशिका-तामीलकर्ताओं की संख्या का नियत किया जाना,
(घ) प्रत्येक न्यायालय में आदेशिकाओं की तामील और निष्पादन के लिए संदेय फीस को दर्शित करने वाली अंग्रेजी और हिन्दी में एक सारणी का संप्रदर्शन।
(2) उप-धारा (1) के अधीन बनाए गए समस्त नियम उपांतरण सहित या उसके बिना राज्य सरकार द्वारा पुष्टि के अध्यधीन होंगे और ऐसी पुष्टि पर उन्हें राज-पत्र में प्रकाशित किया जाएगा और तदुपरि उनका वह प्रभाव होगा जैसे कि उन्हें इस अधिनियम में अधिनियमित किया गया है।
राजस्व बोर्ड राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से, इस अधिनियम से संगत निम्नलिखित समस्त या उनमें से किन्हीं बातों के बारे में उपबंध करने या उन्हें विनियमित करने के लिए नियम बना सकता है, यथाः--
(क) राजस्व बोर्ड द्वारा और राजस्व न्यायालयों द्वारा जारी की गई आदेशिकाओं की तामील और निष्पादन किए जाने के लिए प्रभार्य फीस;
(ख) ऐसी आदेशिकाओ की तामील और निष्पादन के लिए नियुक्त किए जाने के लिए आवश्यक व्यक्तियों का पारिश्रमिक;
(ग) कलक्टरों द्वारा ऐसी आदेशिकाओं की तामील और निष्पादन के लिए नियुक्त किए जाने के लिए आवश्यक व्यक्तियों की संख्या का नियत किया जाना;
(घ) कलक्टरों को अध्याय VI के अधीन उनकी शक्तियों के प्रयोग में मार्गदर्शन।
(2) इस धारा के अधीन बनाए गए समस्त नियम राज-पत्र में प्रकाशित किए जाएंगे और ऐसे प्रकाशन पर उनका वह प्रभाव होगा जैसे कि उन्हें इस अधिनियम में अधिनियमित किया गया है।
(1) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निम्नलिखित बातों के बारे में उपबंध करने के लिए नियम बना सकती है, यथाः-
(क) इस अधिनियम के अधीन उपयोग में लिए जाने वाले स्टापों का प्रदाय;
(ख) इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य किसी फीस का द्योतन करने के लिए उपयोग में लिए जाने वाले स्टाम्पों की संख्या
(ग) इस अधिनियम के अधीन उपयोग में लिए गए सभी स्टांपों का हिसाब रखे जाने;
(घ) वे परिस्थितियाँ जिनमें स्टांपों को क्षतिग्रस्त या खराब हुए अभिनिर्धारित किया जा सकता है;
(ङ) वे परिस्थितियाँ और रीति जिसमें और वे प्राधिकारी जिनके द्वारा उपयोग में लिए गए क्षतिग्रस्त या खराब हुए स्टांपों के बारे में मोका दिया जा सकता है;
(च) इस अधिनियम के अधीन उपयोग में लिए जाने वाले स्टांपों के विक्रय का नियमन, वे व्यक्ति केवल जिनके द्वारा ही स्टांपों का विक्रय किया जा सकता है और ऐसे व्यक्तियों के कर्तव्य और पारिश्रमिक;,
(छ) साधारणत : इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्याविन्त किए जाने के लिए।
(2) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए सभी नियम, उनके इस प्रकार बनाए जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, राज्य विधान-मंडल के सदन, जब वह चौदह दिन से अन्यून कालावधि के लिए, जो एक सत्र में या दो क्रमवर्ती सत्रों में समाविष्ट हो सकती है, सत्र में हो, के समक्ष रखा जाएगा और यदि सत्र जिसमें उन्हें इस प्रकार रखा जाता है, के या उसके ठीक पश्चातवर्ती सत्र के अवसान से पूर्व राज्य विधान-मंडल का सदन ऐसे किन्हीं नियमों में उपांतरण करता है या संकल्प करता है कि ऐसा नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तत्पश्चात् ऐसा नियम, यथास्थिति, ऐसे उपांतरित रूप में ही प्रभावी होगा या उसका कोई प्रभाव नहीं होगा, किंतु इस प्रकार कि कोई ऐसा उपांतरण या बातिलीकरण उसके अधीन तत्पूर्व की गई किसी भी चीज की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा।
(1) राजस्थान न्यायालय फीस अधिनियम (अनुकूलन) अध्यादेश, 1950, का धारा (1950 राजस्थान अध्यादेश 9), राजस्थान वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1958 (1959 का राजस्थान अधिनियम 3) और उपर्युक्त अध्यादेश और अधिनियम को संशोधित करने वाली समस्त अधिनियमितियाँ एतद्वारा निरसित को जाती हैं और ऐसे निरसन पर राजस्थान साधारण खंड अधिनियम। 1955 (1955 का राजस्थान अधिनियम 8) के उपबंध लागू होंगे।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व संस्थित समस्त वाद और कार्य वाहियों और उनसे उदभूत अपील, पुनरीक्षण या अन्यथा, के रूप में समस्त कार्यवाहियाँ, चाहे ऐसे प्रारंभ से पूर्व या पश्चात् संस्थित की गई हो, उक्त अध्यादेश और अधिनियम उसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विनियमित होंगे।