धारा 1 से 3 अध्याय 1 (प्रारंभिक) राजस्थान न्यायालय फीस एवं वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

राजस्थान न्यायालय फीस एवं वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961

(1961 का राजस्थान अधिनियम 23)

 

राजस्थान राज्य में न्यायालय फीस और वादों के मूल्यांकन संबंधी विधि को संशोधित और समेकित करने के लिए अधिनियम ।

यह भारतीय गणराज्य के बारहवें वर्ष में राजस्थान राज्य विधान-मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारंभिक

धारा 1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ -

(1) इस अधिनियम को राजस्थान न्यायालय फीस एवं वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961 कहा जाए।

(2) इसका विस्तार संपूर्ण राजस्थान राज्य में है।

(3) यह ऐसी तारीख से प्रवृत्त होगा जो राज्य सरकार राजपत्र या अधिसूचना द्वारा नियत करे।

राजस्थान राज-पत्र-असाधारण अक्टूबर 25, 1961 भाग 4 (ग) पृष्ठ 1

आबकारी और कराधायन विभाग

अधिसूचना

जयपुर, अक्टूबर 25, 1961

संख्यांक एफ 5 (108) ई. एंड.टी./58.-

राजस्थान न्यायालय फीस एवं वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961 (1961 का 23) की धारा 1 की उप-धारा (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार इसके द्वारा वह तारीख जिसको कि उक्त अधिनियम प्रवृत्त होगा, 1 नवंबर, 1961 नियुक्त करती है।

धारा 2. अधिनियम का लागू होना -

(1) इस अधिनियम के उपबंध केंद्रीय सरकार के अधीन सेवारत किसी अधिकारी के समक्ष उपस्थापित की गई या उपस्थापित की जाने दस्तावेजों पर लागू नहीं होंगे।

(2) जहां किसी अन्य विधि में ऐसी अन्य विधि के अधीन कार्यवाहियों की बाबत फीस के उद्ग्रहण संबंधी उपबंध अंतर्विष्ट हैं, ऐसी कार्यवाहियों की बाबत फीस के उद्ग्रहण संबंधी इस अधिनियम के उपबंध ऐसी अन्य विधि के उक्त उपबंधों के अध्यधीन लागू होंगे।

धारा 3. परिभाषाएँ -

इस अधिनियम में जब तक कि विषय या सन्दर्भ द्वारा अन्यथा अपेक्षित न हो.-

(i) "अपील" के अंतर्गत प्रत्याक्षेप आता है;

(ii) "न्यायालय" से कोई भी सिविल राजस्व या दांडिक न्यायालय अभिप्रेत है और उसके अंतर्गत पक्षकारों के अधिकारों को प्रभावित करने वाले प्रश्नों का विनिश्चय करने के लिए किसी विशेष या स्थानीय विधि के अधीन अधिकारिता रखने वाला अधिकरण या अन्य प्राधिकारी भी आता है,

(iii) "विहित" से इस अधिनियम के अधीन निर्मित नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है, और

(iv) अभिव्यक्तियों, जिन्हें प्रयुक्त किया गया है और इस अधिनियम या राजस्थान साधारण खंड अधिनियम, 1955 (1955 का राजस्थान अधिनियम 8) में परिभाषित नहीं किया गया है, किंतु सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 (1908 का केंद्रीय अधिनियम 5) में परिभाषित किया गया है उनके अर्थ क्रमशः वे होंगे जो उक्त संहिता में, नियत किए गए हैं।

 

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