
(1) जो कोई, इस अधिनियम के किसी उपबंध के या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम, जारी की गई किसी अधिसूचना या किए गए किसी आदेश के, या इस अधिनियम के, अधीन मंजूर की गई किसी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या पास की किसी शर्त के उल्लंघन में,-
(क) किसी मादक द्रव्य का विनिर्माण, परिवहन, आयात, निर्यात, संग्रहण करेगा या उसे कब्जे में रखेगा; या
(ख) उन मामलों में के सिवाय जिनके कि लिए धारा 38 में उपबंध किया गया है, कोई मादक द्रव्य बेचेगा; या
(ग) भांग की खेती करेगा; या
(घ) ताड़ी उत्पन्न करने वाले किसी वृक्ष से ताड़ी का व्यावन करेगा या उससे ताड़ी निकालेगा; या
(ङ) किसी आसवनी, मद्य निर्माण शाला या शराब की दुकान का सत्रिर्माण करेगा या उसे चलाएगा; या
(च) ताड़ी से भित्र किसी मादक द्रव्य का विनिर्माण करने के प्रयोजन के लिए किसी सामग्री, भभका, पात्र, उपकरण या साधित्र को उपयोग में लाएगा, रखेगा या अपने कब्जे में रखेगा; या
(छ) इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्त की गई, स्थापित की गई या चलाई जा रही किसी आसवनी, मद्य निर्माण शाला, शराब की दुकान या भाण्डागार से किसी मादक द्रव्य को हटाएगा; या
(ज) किसी मदिरा को बोतलों में भरेगा;
वह उपधारा (2) के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए प्रत्येक ऐसे अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छः मास से कम नहीं होगी, किन्तु जो दो वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो दस हजार रुपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो पचास हजार रुपये तक हो सकेगा, दण्डनीय होगा :
परन्तु जब कोई व्यक्ति इस धारा के अधीन किसी अपराध के लिए दूसरी बार या पश्चात्वर्ती समय पर सिद्धदोष ठहराया जाए तो वह प्रत्येक ऐसे अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी तथा जुर्माने से, जो बीस हजार रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो दो लाख रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा।
(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी यदि कोई व्यक्ति उपधारा (1) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) के अन्तर्गत आने वाले किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया जाए तथा अपराध का पता लगाते समय या उसके दौरान पाये गए मादक द्रव्य मदिरा की मात्रा पांच बल्क लीटर से अधिक हो, तो यह कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी तथा जुर्माने से, जो पच्चीस हजार रुपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो एक लाख रुपये तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा:
परन्तु जब कोई व्यक्ति इस धारा के अधीन किसी अपराध के लिए दूसरी बार या पश्चात्वर्ती समय पर सिद्धदोष ठहाराया जाए तो वह प्रत्येक ऐसे अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो पचास हजार रुपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो दो लाख रुपये तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा।
(3) जब उपधारा (1) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) के अधीन कोई अपराध किया जाए और जहां ऐसे अपराध का पता लगाते समय या उसके दौरान पाई गई मदिरा की मात्रा पांच बल्क लीटर से अधिक हो, तो वे समस्त मादक द्रव्य, वस्तुएं, उपकरण, पात्र, सामग्री, प्रवहण आदि जिसके संबंध में या जिनके द्वारा अपराध किया गया हो अभिगृहीत किए जाने और अधिहरण किए जाने के दायित्वाधीन होंगे। यदि ऐसा कोई अपराध, किसी ऐसे व्यक्ति की ओर से या उसके द्वारा किया जाए जो इस अधिनियम के अधीन विक्रय के लिए उस मदिरा का विनिर्माण करने या संग्रहण करने या उसका भण्डारण करने के लिये अनुज्ञप्ति धारण करता है, जिस पर विहित दर पर शुल्क का संदाय नहीं किया गया है, तो धारा 31 में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते भी यथा पूर्वोक्त अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराए जाने की दशा में उसे मंजूर की गई अनुज्ञप्ति रद्द कर दी जाएगी।
(4) मादक द्रव्यों, वस्तुओं, उपकरणों, पात्रों, सामग्रियों तथा प्रवहणों का अभिग्रहण या अधिहरण और ऊपर उपधारा (2) में यथा उपबंधित अनुज्ञप्ति का रद्दकरण ऐसी किसी अन्य कार्रवाई के अतिरिक्त तथा उस पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के किन्हीं उपबन्धों के अधीन की जा सके।
जो कोई-
(क) किसी विकृत स्पिरिट या विकृत स्पिरिट युक्त निर्मिति को इस आशय से परिवर्तित करेगा या परिवर्तित करने का प्रयत्न करेगा कि ऐसी स्पिरिट का उपयोग, चाहे पेय के रूप में या आन्तरिक रूप से औषधि के रूप में या किसी भी पद्धति द्वारा किसी भी अन्य प्रकार से, मानवीय उपयोग के लिये किया जाय; या
(ख) अपने कब्जे में कोई ऐसी स्पिरिट रखेगा जिसके कि बारे में वह यह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि कोई भी ऐसा परिवर्तन या प्रयत्न खंड (क) में विनिर्दिष्ट किये गये आशय से किया गया है;
(ग) विकृत स्पिरिट को या ऐसी परिवर्तित विकृत स्पिरिट को या विकृत स्पिरिट युक्त निर्मिति को पेय स्पिरिट के साथ मिश्रित करेगा;
वह कारावास से जिसकी अवधि दो मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो दो वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से भी, जो पांच हजार रुपये से कम का नहीं होगा, किन्तु जो पच्चीस हजार रुपये तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा:
परन्तु जब किसी व्यक्ति को इस धारा के अधीन द्वितीय अपराध या किसी पश्चात्वर्ती अपराध के लिये दोषसिद्ध ठहराया जाता है तो वह ऐसे अपराध के लिये कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो छह वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो पांच हजार रुपये से कम का नहीं होगा किन्तु पचास हजार रुपये तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा
इस धारा में "विकृत स्पिरिटयुक्त निर्मिति" से अभिप्रेत है- कोई ऐसी निर्मिति जो विकृत स्पिरिट से बनाई गई हो और उसके अन्तर्गत ऐसी स्पिरिट युक्त निर्मिति से बनी मदिरा, फ्रेन्च पालिस, वार्निश और तरल द्रावक आती है।
जो कोई यह जानते हुये कि किसी मादक द्रव्य का विधि विरुद्धतया आयात, परिवहन, विनिर्माण, खेती या संग्रह किया गया है, या यह जानते हुये कि उस पर विहित शुल्क का संदाय नहीं किया गया है विधिपूर्ण प्राधिकार के बिना, किसी भी मादक द्रव्य को किसी भी मात्रा में अपने कब्जे में रखेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास से कम की नहीं होगी किन्तु हो पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक लाख रुपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो पांच लाख रुपये तक का हो सकेगा या दोनों से दण्डनीय होगा।
जो कोई, इस अधिनियम या उसके अधीन बनाये गये किसी नियम, जारी की गई किसी अधिसूचना या दिये गये किसी आदेश के या इस अधिनियम के अधीन मंजूर की गई किसी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या पास के उल्लंघन में,
(क) किसी स्थान को सामान्य मदिरापान-गृह के रूप में खोलेगा, रखेगा या उपयोग में लायेगा, या
(ख) सामान्य मदिरापान-गृह के रूप में खोले गये, में रखे गये या उपयोग में लाये गये किसी स्थान को देख-रेख, उसका प्रबन्ध या नियन्त्रण रखेगा या ऐसे स्थान के कारबार का संचालन करने में किसी रीति में सहायता करेगा, वह कारावास से जिसकी अवधिक एक वर्ष तक हो सकेगी या जुर्माने से जो पाँच हजार रुपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो पच्चीस हजार रुपये तक को हो सकेगा, या दोनों से दण्डनीय होगा और पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, वह कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से जो दस हजार रुपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो पचास हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डनीय होगा।
जो कोई, इस अधिनियम के या उसके अधीन बनाये गये किसी नियम, जारी की गई किसी अधिसूचना या दिये गये किसी आदेश के या इस अधिनियम के अधीन मंजूर को गई किसी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा-पत्र या पास के उल्लंघन में, किसी सामान्य मदिरापान-गृह में मत्त पाया जायगा या मदिरापान करता हुआ पाया जायगा या मदिरापान करने के प्रयोजन से वहां उपस्थित पाया जायेगा, वह जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा और किसी भी ऐसे व्यक्ति के संबंध में, जो किसी सामान्य
मदिरापान-गृह में उस समय पाया जायगा जब कि वहां मदिरापान चल रहा हो, जब तक कि तत्प्रतिकूल साबित न कर दिया जाय, यह उपधारणा की जायगी कि वह वहां मदिरापान करने के प्रयोजन से उपस्थित था।
जो कोई, किसी स्थान का स्वामी या अधिभोगी होते हुये या उसका उपयोग या देख-रेख या प्रबन्ध या नियन्त्रण रखते हुये या उस स्थान को किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कोई ऐसा अपराध जो कि धारा 34, धारा 35, धारा 36 या धारा 36 क के अधीन दण्डनीय है, किये जाने हेतु जानते हुये उपयोग में लाये जाने देगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दो सौ रुपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो दो हजार रुपये तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डनीय होगा।
(1) जब कभी कोई व्यक्ति धारा 34 या धारा 36 के अधीन दण्डनीय अपराध का सिद्धदोष ठहराया जाये और उसको सिद्धदोष ठहराने वाले मजिस्ट्रेट की यह राय हो कि उन धाराओं के अधीन दण्डनीय अपराध करने से प्रविरत रहने के लिए ऐसे व्यक्ति को बन्धपत्र निष्पादित करने के लिये अपेक्षित करना आवश्यक है, तो मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति को दण्डादेश देते समय, यह आदेश दे सकेगा कि वह तीन वर्ष से अनधिक ऐसी कालावधि के दौरान जैसी वह निर्दिष्ट करे, ऐसे अपराध करने से प्रविरत रहने के लिए, अपने साधनों से आनुपातिक राशि के लिए, प्रतिभुओं के सहित या प्रतिभुओं रहित बन्ध-पत्र का निष्पादन करे।
(2) बन्ध-पत्र का प्ररूप और ऐसे बन्धपत्र से संसक्त समस्त विषयों को दण्ड प्रक्रिया संहिता के उपबन्धों का लागू होना
बन्धपत्र द्वितीय अनुसूची में अन्तर्विष्ट प्ररूप में होगा और दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 (क्रमांक 5 सन् 1898) के उपबन्ध, जहां तक कि वे लागू होते हों ऐसे बन्धपत्र से संसक्त समस्त विषयों को उसी प्रकार लागू होंगे मानो कि वह परिशान्ति कायम रखने के लिये बन्धपत्र हों जिसके कि उस संहिता की धारा 106 के अधीन निष्पादन किये जाने के लिये आदेश दिया गया हो।
(3) वे परिस्थितियां जिनमें बंधपत्र शून्य होगा
यदि दोषसिद्धि, अपील में या अन्यथा अपास्त कर दी जाये, तो इस प्रकार निष्पादित किया गया बन्धपत्र शून्य हो जायेगा।
(4) अपील न्यायालय या उच्च न्यायालय की आदेश देने की शक्ति. –
इस धारा के अधीन आदेश अपील न्यायालय द्वारा या उच्च न्यायालय द्वारा भी, जबकि वह अपनी पुनरीक्षण की शक्तियों का प्रयोग कर रहा हो, दिया जा सकेगा।
(1) जब कभी राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में विशेष रूप से सशक्त किए गए प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट को यह इत्तिला प्राप्त हो, कि उसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर कोई व्यक्ति धारा 34 या धारा 36 के अधीन दण्डनीय अपराध अभ्यासतः करता है या करने का प्रयत्न करता है या उसके किये जाने का दुष्प्रेरण करता है, तो ऐसा मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति से यह हेतुक दर्शाने की अपेक्षा कर सकेगा कि उसको तीन वर्ष से अनधिक की ऐसी कालावधि के लिये, जैसी कि मजिस्ट्रेट निर्दिष्ट करे, उसके सदाचार के लिए प्रतिभुओं सहित बन्धपत्र निष्पादित करने के लिए आदेश क्यों न दिया जाय।
(2) उपधारा (1) के अधीन कार्यवाहियों को दण्ड प्रक्रिया संहिता के उपबन्धों का लागू होना. –
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 (क्रमांक 5 सन् 1898)* के उपबन्ध, जहां तक कि वे लागू होते हों, उपधारा (1) के अधीन किन्हीं भी कार्यवाहियों को उसी प्रकार लागू होंगे मानों कि उसमें निर्दिष्ट किया गया बन्धपत्र ऐसा बन्ध-पत्र हो जिसका उस संहिता की धारा 110 के अधीन निष्पादित किया जाना हो।
(1) जो कोई मद्यपान हेतु अनुज्ञप्त परिसर के अतिरिक्त, सार्वजनिक स्थानों जैसे शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, पूजा गृहों (पूजा स्थलों), बस स्टैण्ड, रेल्वे स्टेशन तथा आम रास्ता आदि में मदिरापान करते हुए या मत पाया जाता है तो उसे जुर्माने से, जो प्रथम अपराध के लिए एक हजार रुपये से कम का नहीं होगा किन्तु पांच हजार रुपये तक का हो सकेगा तथा अपराध के पुनरावृत्त किए जाने की दशा में, जुर्माने से जो पांच हजार रुपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो दस हजार रुपये तक का हो सकेगा तथा तीन मास के कारावास से दण्डित किया जायेगा।
जो कोई मद्यपान हेतु अनुज्ञप्त परिसर के अतिरिक्त, सार्वजनिक स्थानों जैसे शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, पूजा ग्रहों (पूजा स्थलों), बस स्टैण्ड, रेल्वे स्टेशन तथा आम रास्ता आदि में मदिरापान करने के पश्चात् उत्पाद करते हुए पाया जाता है तो उसे जुर्माने से, जो दस हजार रुपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो पच्चीस हजार रुपये तक का हो सकेगा तथा तीन मास के कारावास से दण्डित किया जायेगा।
जो कोई, किसी भी ऐसे कार्य या ऐसे साशय कार्यलोप का, जो कि इस अधिनियम के या उसके अधीन बनाए गए किसी भी नियम, जारी की गई किसी भी अधिसूचना या दिये गये किसी भी आदेश के उपबन्धों में से किसी भी उपबन्ध के उल्लंघन में किया गया हो, और जिसके कि लिए इस अधिनियम में अन्यथा उपबन्ध न हो, दोषी हो, वह कारावास से, जिसकी अवधि छः माह तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डनीय होगा।
(1) कोई अनुज्ञप्त विक्रेता या उसके नियोजन में का और उसकी ओर से कार्य करने वाला कोई भी व्यक्ति जो-
(क) कोई मादक द्रव्य किसी ऐसे व्यक्ति को, जो मत्त या मदोन्नत हो, बेचेगा; या
(ख) कोई मादक द्रव्य किसी व्यक्ति को धारा 23 के उल्लंघन में बेचेगा या देगा; या
(ग) धारा 22 के उल्लंघन में, उस धारा में निर्दिष्ट किये गये अपने अनुज्ञप्त परिसर के किसी भाग में किसी पुरुष या स्त्री को नियोजित करेगा या नियोजित किए जाने की अनुज्ञा देगा; या
(घ) ऐसे विक्रेता के अनुज्ञप्त परिसर में मत्त होना, मदोनमत्त होना, विच्छृंखलता का आचरण करना, नृत्य गायन, संगीत, वादन या द्यूत क्रीड़ा अनुज्ञात करेगा; या
(ङ) किन्हीं ऐसे व्यक्तियों को, जिनके बारे में यह जानता है या जिनके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वे किसी अजमानतीय अपराध के सिद्धदोष ठहराये गये हैं, या जो वेश्यायें हैं, ऐसे विक्रेता के अनुज्ञप्त परिसर में आश्रय लेने या जमा होने के लिये, चाहे ऐसा आश्रय लेना या जमा होना अपराध के या वेश्यावृत्ति के प्रयोजनों के लिए हो या न हो, अनुज्ञात करेगा, वह जुर्माने से जो एक सौ रुपये से कम का नहीं होगा किन्तु दो हजार रुपये तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा।
(2) जहां किसी अनुज्ञप्त विक्रेता या उसके नियोजन में के और उसकी ओर से कार्य करने वाले किसी व्यक्ति पर ऐसे विक्रेता के परिसर में मत्तता अनुज्ञात करने का आरोप है, और यह साबित हो जाता है कि कोई व्यक्ति ऐसे परिसर में मत्त था, तो यह साबित करने का कि ऐसे परिसर में मत्तता को रोकने के लिए अनुज्ञप्त विक्रेता ने और उसके द्वारा नियोजित व्यक्तियों ने समस्त युक्तियुक्त उपाय किये थे, भार उस व्यतु पर होगा जिस पर आरोप लगाया गया है।
यदि कोई अनुज्ञप्त विनिर्माता या अनुज्ञप्त विक्रेता या उसके नियोजन में का और उसकी ओर से कार्य करने वाला कोई व्यक्ति उसके द्वारा विनिर्मित किए गए, बेचे गए या विक्रय के लिए रखे गए या अभिदर्शित किए गए किसी मादक द्रव्य में, अनुज्ञप्ति में, यथाविहित के अलावा कोई अपायकर औषधि या कोई बाह्य संघटक अथवा कोई मंदक या रंजक मिश्रित करेगा या मिश्रित करने देगा अथवा जिसके कब्जे में कोई ऐसा मादक द्रव्य होगा जिसमें कि ऐसा अपमिश्रण किया गया हो, वह कारावास से जिसकी अवधि एक माह से कम की नहीं होगी किन्तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो पचास हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डनीय होगा
परन्तु राज्य शासन या राज्य शासन के पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रणाधीन निगम द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में, नियत क्रम में इनके द्वारा अधिकृत एजेंसी द्वारा नियुक्त कर्मचारी, विधिविरुद्ध कृत्य के लिये उत्तरदायी होंगे। उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा, जिस पर अपराध अधिरोपित किया गया है।
इस अधिनियम के अधीन मंजूर की गई अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा पत्र या पास का कोई धारक या ऐसे धारक के नियोजन में के और उसकी ओर से कार्य करने वाला कोई व्यक्ति, जो, -
(क) किसी आबकारी अधिकारी द्वारा मांग किये जाने पर या ऐसी मांग करने के लिये सम्यक् रूप से सशक्त किसी अन्य अधिकारी द्वारा मांग किये जाने पर ऐसी अंनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या पास साशय प्रस्तुत करने में विफल रहता है, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन माह तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पच्चीस हजार तक का हो सकेगा या दोनों से दण्डनीय होगा;
(ख) धारा 34 द्वारा उपबंधित किसी मामले में के सिवाय, धारा 62 के अधीन बनाये गये किसी नियम का उल्लंघन करता है, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन माह तक की हो सकेगा या जुर्माने से, जो एक लाख रुपये तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डनीय होगा;
(ग) अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या पास की शर्तों में से किसी भी शर्त को भंग करने का कोई भी कृत्य, जो कि इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित नहीं है, करता है, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन माह तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक लाख रुपये तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डनीय होगा :
परन्तु राज्य शासन या राज्य शासन के पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रणाधीन निगम द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में, नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी द्वारा नियुक्त कर्मचारी, विधिविरुद्ध कृत्य के लिये उत्तरदायी होंगे। उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा, जिस पर अपराध अधिरोपित किया गया है।
(1) कोई भी रसायनज्ञ (केमिस्ट) भैषजिक (ड्रगिस्ट), अतार (अपाथकारी) या औषधालय चलाने वाला जो कोई ऐसे मादक द्रव्य को औषधीय प्रयोजनों के लिये सद्भावपूर्वक औषधयुक्त न किया गया हो, किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो कि उसके कारबार में नियोजित न हो, अपने कारबार के परिसर में उपभोग किए जाने की अनुज्ञा देगा, यह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो चार हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डनीय होगा।
(2) पूर्वोक्त रूप में नियोजित न हुआ कोई भी व्यक्ति, जो ऐसे किसी मादक द्रव्य का उपभोग ऐसे परिसर पर करेगा, वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपये तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा।
जो कोई-
(क) किसी आबकारी, अधिकारी या इस अधिनियम के अधीन शक्तियों का प्रयोग करने वाले किसी व्यक्ति; या
(ख) इत्तिला देने वाले किसी व्यक्ति या किसी अधिकारी या व्यक्ति को, जबकि वह इस अधिनियम के अधीन शक्तियों का प्रयोग कर रहा हो, सहायता करने वाले किसी अन्य व्यक्ति पर, हमला करेगा या उसे बाधा पहुंचाएगा, वह कारावास से, जो दो वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो दो हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डनीय होगा।
(1) जहां किसी अन्य व्यक्ति की ओर से किसी भी व्यक्ति द्वारा कोई भी मादक द्रव्य विनिर्मित किया गया हो या बेचा गया हो या कब्जे में रखा जाता हो और ऐसा अन्य व्यक्ति यह जानता हो या उसके पास यह विश्वास करने का कारण हो कि ऐसा विनिर्माण या विक्रय उसकी ओर से था या ऐसा कब्जा उसकी ओर से है, वहां वह मादक द्रव्य इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये, ऐसे अन्य व्यक्ति द्वारा विनिर्मित किया गया था, बेचा गया या ऐसे अन्य व्यक्ति के कब्जे में समझा जायेगा।
(2) उपधारा (1) की कोई भी बात किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जो किसी अन्य व्यक्ति की ओर से किसी मादक द्रव्य का विनिर्माण करेगा, विक्रय करेगा या उसे अपने कब्जे में रखेगा, ऐसे मादक द्रव्य के विधिविरुद्ध विनिर्माण, विक्रय या कब्जे के लिए इस अधिनियम के अधीन किसी भी दण्ड के दायित्व से मुक्त नहीं करेगी।
जो कोई इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के करने का प्रयत्न करेगा या उसके लिए दुष्प्रेरण करेगा, और ऐसे अपराध के लिए उपबन्धित किए गए दण्ड से दण्डनीय होगा।
धारा 34, धारा 35 तथा धारा 36 के अधीन अभियोजन में जब तक कि प्रतिकूल साबित न किया जाय, यह उपधारित किया जायेगा कि अभियुक्त व्यक्ति ने-
(क) किसी भी मादक द्रव्य के, या
(ख) ताड़ों से भिन्न किसी भी मादक द्रव्य के विनिर्माण के लिए किसी भी भभके, पात्र, उपकरण या साधित्र के, या
(ग) किन्हीं भी सामग्रियों के, जिन पर मादक द्रव्य के विनिर्माण के लिए प्रक्रिया की गई हो या जिनसे किसी मादक द्रव्य का विनिर्माण किया गया हो, संबंध में, जिनके कब्जे के विषय में वह समाधानप्रद रूप से लेखा-जोखा देने में असमर्थ हो, उस धारा के अधीन दण्डनीय अपराध किया है।
जहां इस अधिनियम के अधीन मंजूर की गई अनुज्ञप्ति, मंजूर किय गये अनुज्ञा-पत्र या पास के धारक के नियोजन में रखे गये तथा उसकी ओर से कार्य करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा धारा 34, धारा 35, धारा 36, धारा 36-क, धारा 38, धारा 38-क या धारा 39 के अधीन कोई अपराध किया जाय, वहां ऐसा धारक भी उसी प्रकार दण्डनीय होगा मानों उसने स्वयं यह अपराध किया हो, जब तक वह यह साबित न कर दे कि उसने ऐसे अपराध के किए जाने की रोक करने के लिए समस्त सम्यक् एवं युक्तियुक्त पूर्वावधानियों का प्रयोग किया था :
परन्तु वास्तविक अपराधी से भिन्न कोई भी व्यक्ति, जुर्माने के संदाय में व्यतिक्रम होने की दशा में के सिवाय, कारावास से दण्डनीय नहीं होगा
परन्तु यह और कि राज्य शासन या राज्य शासन के पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रणाधीन निगम द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में, नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी द्वारा नियुक्त कर्मचारी, विधिविरुद्ध कृत्य के लिये उत्तरदायी होंगे। उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा, जिस पर अपराध अधिरोपित किया गया है।
यदि कोई व्यक्ति धारा 34, धारा 35, धारा 36, धारा 36-क, धारा 36-ख, धारा 36-ग या धारा 40 के अधीन या इस अधिनियम द्वारा निरसित किसी भी अधिनियमिति में के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का पूर्व में सिद्ध-दोष ठहराये जाने के पश्चात् उन धाराओं में से किसी के अधीन दण्डनीय कोई भी अपराध बाद में करेगा और उसका सिद्ध-दोष ठहराया जायेगा तो वह उस दण्ड से दुगने दण्ड से दण्डनीय होगा जो कि इस अधिनियम के अधीन प्रथम बार सिद्धदोष ठहराये जाने पर अधिरोपित किया जाताः
परन्तु इस धारा में की कोई बात किसी ऐसे अपराध का, जिसका कि दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (क्र० 2 सन् 1974) के अध्याय 21 के अधीन अन्यथा संक्षेपतः विचारण किया जा सकता हो इस प्रकार विचारण किए जाने का निवारण नहीं करेगी।
(1) जब कभी कोई अपराध जो इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय है किया जाता है तो वह मादक द्रव्य, सामग्री, भभका, पात्र, उपकरण, या साधित्र जिसकी बावत् या जिसके द्वारा ऐसा अपराध किया गया है तथा कोई भी पात्र, पैकेज और आवेष्टक जिसमें कोई भी ऐसा मादक द्रव्य, सामग्री, भभका, पात्र, उपकरण या साधित्र पाया जाए या पाए जाएं और पात्रों या पैकेजों की ऐसी अन्य अन्तर्वस्तुएं, यदि कोई हैं, जिनमें वह पाया जाए या वे पाए जाएं तथा उनको ले जाने में प्रयुक्त पशु, गाड़ी, जलयान, बेड़ा या अन्य प्रवहण भी अधिहरण के दायी होंगे।
(2) उपधारा (1) के अधीन अधिहरण के दायित्वाधीन किसी भी मादक द्रव्य के साथ या उसके अतिरिक्त विधिपूर्वक आयात किया गया, परिवहन किया गया, विनिर्माण किया गया, कब्जे में रखा गया या बेचा गया कोई भी मादक द्रव्य, और कोई भी पात्र, पैकेज और आवरण जिनमें पूर्वोक्तानुसार कोई भी मादक द्रव्य सामग्रियां भभका, पात्र, उपकरण या साधित्र पाया जाय या पाये जायें, और उन पात्रों या पैकेजों की अन्य अन्तर्वस्तुयें, यदि कोई हों, जिनमें वह पाया जाय या वे पाये जायें, और उनको लाने में उपयोग में लाये गये पशु, गाड़ी, जलयान, बेड़े या अन्य वाहन उसी प्रकार अधिहरण के दायित्वाधीन होंगे।
(1) जहां मजिस्ट्रेट अपने द्वारा विचारण किए गए किसी मामले में यह विनिश्चय करे कि कोई वस्तु धारा 46 के अधीन अधिहरण के दायी है तो वह उसके अधिहरण का आदेश देगा:
परन्तु जहां धारा 47-क की उपधारा (3) के खण्ड (क) के अधीन कोई सूचना मजिस्ट्रेट द्वारा प्राप्त की जाए तो वह अधिहरण के संबंध में यथापूर्वोक्त कोई आदेश तब तक पारित नहीं करेगा जब तक कि धारा 47-क के अधीन कलक्टर के समक्ष वस्तु की बाबत् लंबित कार्यवाहियां निपटा न दी जाएं, और यदि कलक्टर ने धारा 47-क की उपधारा (2) के अधीन उसके अधिहरण का आदेश दिया है, तो मजिस्ट्रेट इस संबंध में कोई आदेश पारित नहीं करेगा।
(2) जब कि इस अधिनियम के अधीन अपराध किया गया हो किन्तु अपराधी ज्ञात न हो या पाया न जा सके तो मामले की जांच तथा उसका अवधारण कलेक्टर द्वारा किया जायेगा जो अधिहरण का आदेश दे सकेगा:
परन्तु अधिहरण को जाने के लिए आशयित वस्तु का अभिग्रहण किए जाने की तारीख से एक मास का अवसान न हो जाने तक या किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जो की उसके संबंध में किसी अधिकार का दावा करे, और उस साक्ष्य को (यदि कोई हो), जिसे कि वह अपने दावे के समर्थन में प्रस्तुत करे, सुने बिना, कोई भी ऐसा आदेश नहीं दिया जायेगा:
परन्तु यह और भी यदि प्रश्नाधीन वस्तु शीघ्रतया और प्रकृत्या क्षयशील हो, या यदि कलेक्टर की यह राय हो कि विक्रय इसके स्वामी के फायदे के लिए होगा, तो कलेक्टर उसका विक्रय किये जाने का किसी भी समय निर्देश दे सकेगा, और इस उपधारा के उपबंध ऐसे विक्रय के शुद्ध आगम को यथा-साध्य निकटतम रूप से लागू होंगे।
(1) जब कभी धारा 34 की उपधारा (1) के खण्ड (क) या (ख) के अन्तर्गत आने वाला कोई अपराध किया जाए और अपराध का पता लगाते समय या उसके दौरान पाई गई मदिरा की मात्रा पांच बल्क लीटर से अधिक हो तो धारा 52 के अधीन सशक्त प्रत्येक अधिकारी, अधिनियम की धारा 34 की उपधारा (2) या धारा 52 के अधीन किन्हीं मादक-द्रव्यों, वस्तुओं, उपकरणों, पात्रों, सामग्रियों, प्रवहणों आदि का अभिग्रहण करते समय अभिगृहीत की गई सम्पत्ति पर एक चिन्ह यह उपदर्शित करते हुए कि वह इस प्रकार अभिगृहीत की गई है और बिना असम्यक विलंब के अधिग्रहित की गई संपत्ति को या तो राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त प्राधिकृत उस अधिकारी (जो इसमें इसके पश्चात् प्राधिकृत अधिकारी के नाम से निर्दिष्ट है) के समक्ष पेश करेगा जो जिला आबकारी अधिकारी के पद से निम्न पद का न हो या जहां इसकी मात्रा या बल्क या कोई अन्य वास्तविक कठिनाई को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार किया जाना समीचीन नहीं है, वहां वह अभिग्रहण के बारे में समस्त ब्योरे अन्तर्विष्ट करते हुए उसे एक विस्तृत रिपोर्ट देगा।
(2) जब कलक्टर का, यथास्थिति, मादक द्रव्यों, वस्तुओं, उपकरणों, पात्रों, सामग्रियों, प्रवहणों आदि के उसके समक्ष प्रस्तुत किए जाने पर या ऐसे अभिग्रहण के बारे में रिपोर्ट प्राप्त होने पर, यह समाधान हो जाए कि धारा 34 की उपधारा (1) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) के अन्तर्गत कोई अपराध किया गया है, और जहां ऐसे अपराध का पता लगाते समय या उसके दौरान पाई गई मदिरा की मात्रा पांच बल्क लीटर से अधिक है, तो वह लिखित रूप से अभिलिखित किए जाने वाले आधारों पर, इस प्रकार अभिगृहीत किए गए मादक द्रव्यों, वस्तुओं उपकरणों, पात्रों, सामग्रियों, प्रवहणों आदि का अधिहरण करने का आदेश कर सकेगा। वह कार्यवाहियों के लंबित रहने के दौरान अधिहरण किए गए मादक द्रव्यों, वस्तुओं, उपकरणों, पात्रों, सामग्रियों, प्रवहणों आदि की अभिरक्षा, व्ययन आदि के लिए अंतरिम प्रकृति का कोई ऐसा आदेश, जैसा कि उस मामले की परिस्थितियों में उसे आवश्यक प्रतीत हो, भी पारित कर सकेगा।
(3) उपधारा (2) के अधीन तब तक आदेश नहीं किया जाएगा जब तक कि कलेक्टर ने-
(क) अभिगृहीत किए गए मादक द्रव्यों, वस्तुओं, उपकरणों, पात्रों, सामग्रियों, प्रवहणों आदि के अधिहरण के लिए कार्यवाहियों को प्रारंभ करने के बारे में, आबकारी आयुक्त द्वारा विहित किए गए प्ररूप में कोई प्रज्ञापना, उस अपराध जिसके मद्दे अभिग्रहण किया गया है, पर विचारण की अधिकारिता रखने वाले न्यायालय को न भेज दी हो;
(ख) उस व्यक्ति को, जिससे ऐसे मादक द्रव्यों, वस्तुओं, उपकरणों, पात्रों, सामग्रियों, प्रवहणों आदि को अभिगृहीत किया गया है और इन्हें रखने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति को और ऐसे अधिकारी के समक्ष उपसंजात हो सकने वाले किसी अन्य व्यक्ति को जिसका उसमें हित है, लिखित सूचना जारी न कर दी हो;
(ग) ऊपर खण्ड (ख) में निर्दिष्ट व्यक्तियों को, प्रस्तावित अधिहरण के विरुद्ध अभ्यावेदन करने का अवसर प्रदान न किया हो;
(घ) उपधारा (1) के अधीन अधिग्रहण करने वाले अधिकारी की तथा उस व्यक्ति या व्यक्तियों, जिन्हें खण्ड (ख) के अधीन सूचना दी गई है, की सुनवाई न कर ली हो।
(1) धारा 47-क की उपधारा (2) के अधीन पारित अधिहरण के किसी आदेश से व्यधित कोई भी व्यक्ति, ऐसे आदेश के तीस दिन के भीतर संबंधित जिले के कलेक्टर को या राज्य सरकार द्वारा, अधिसूचना द्वारा, प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी (जो इसमें इसके पश्चात् अपील प्राधिकारी के नाम से निर्दिष्ट है) को अपील प्रस्तुत कर सकेगा। ऐसी अपील के ज्ञापन के साथ उस आदेश की जिसके विरुद्ध अपील की गई है की प्रमाणित प्रति संलग्न की जाएगी।
(2) अपील प्राधिकारी, अपील का ज्ञापन पेश किए जाने पर, अपीलार्थी को, तथा किसी भी अन्य व्यक्ति को, जिस पर अपील में पारित किए जा सकने वाले आदेश का प्रतिकूल प्रभाव होना संभाव्य है, एक सूचना जारी करेगा।
(3) अपील प्राधिकारी, अपील के पक्षकारों की सुनवाई करने के पश्चात् अधिहरण करने के उस आदेश की, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, पुष्टि करते हुए, उलटते हुए या उसे उपान्तरित करते हुए आदेश पारित करेगा:
परन्तु वह अपील के लंबित रहने के दौरान, अधिहरण की गई वस्तुओं की अभिरक्षा, व्ययन आदि के लिए अंतरिम प्रकृति का ऐसा आदेश पारित कर सकेगा जैसा कि उसे मामले की परिस्थितियों में न्यायसंगत या उचित प्रतीत हो किन्तु उसे अपील के लंबित रहने के दौरान अधिहरण के आदेश को, जिसके कि विरुद्ध अपील की गई है, स्थगित करने की शक्ति नहीं होगी।
(1) अपील प्राधिकारी द्वारा धारा 47-ख की उपधारा (3) के अधीन पारित किए गए अंतिम आदेश से व्यथित अपील का कोई भी पक्षकार ऐसे आदेश से तीस दिन के भीतर उस सेशन खंड के भीतर, सेशन न्यायालय में केवल ऐसे आदेश की अवैधता के आधार पर ही पुनरीक्षण के लिए याचिका प्रस्तुत कर सकेगा।
(2) सेशन न्यायालय, यदि अपील प्राधिकारी के आदेश में कोई अवैधता पाता है तो वह अपील प्राधिकारी द्वारा पारित आदेश की पुष्टि कर सकेगा, उसे उलट सकेगा या उसे उपांतरित कर सकेगा:
परन्तु सेशन न्यायालय को उसके समक्ष पुनरीक्षण के लिए प्रस्तुत की गई याचिका के लंबित रहने के दौरान, अपील प्राधिकारी द्वारा पारित अधिहरण के आदेश को स्थगित करने की शक्ति नहीं होगी।
इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी धारा 34 की उपधारा (1) के खंड (क) या (ख) के अंतर्गत आने वाले किसी अपराध के जिसके मद्दे ऐसा अभिग्रहण किया गया है, विचारण करने की अधिकारिता रखने वाला न्यायालय, अभिगृहीत सम्पत्ति का अधिहरण करने के लिए कार्यवाहियों को शुरू करने के बारे में धारा 47-क की उपधारा (3) के खंड (क) के अधीन कलेक्टर की ओर से उसे प्राप्त हुई किसी प्रज्ञापना के पश्चात् अभिगृहीत किए गए मादक द्रव्यों, वस्तुओं, उपकरणों, पात्रों, सामग्रियों, प्रवहणों आदि के व्ययन, अभिरक्षा आदि के बारे में कोई भी आदेश नहीं करेगा।
(1) आबकारी आयुक्त या कलक्टर-
(क) किसी भी ऐसे व्यक्ति से, जिसकी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या पास धारा 31 के खंड (क) या खण्ड (ख) के अधीन रद्द किये जाने या निलम्बित किये जाने के दायित्वाधीन हो, या जिसके बारे में युक्तियुक्त रूप से यह विश्वास है कि उसने धारा 37, धारा 38, धारा 38-क (उन मामलों के सिवाय जिनमें कि किसी मादक द्रव्य में किन्हीं अपायकर औषधियों का अपमिश्रण किया जाना अन्तर्वलित है) या धारा 39 के अधीन कोई अपराध किया है, यथास्थिति ऐसे रदकरण या निलम्बन के बदले में या ऐसे अपराध के शमन के रूप में दस हजार रुपये से अनधिक धनराशि प्रतिगृहीत कर सकेगा या शास्ति के रूप में दस हजार रुपये से अनधिक धनराशि अधिरोपित कर सकेगा, और दोनों में से किसी भी मामले में, उन वस्तुओं के, जो अभिगृहीत की गई हों, अधिग्रहण किये जाने का आदेश दे सकेगा;और
(ख) किसी भी ऐसे मामले में जिसमें कि कोई सम्पत्ति इस अधिनियम के अधीन अधिहरण के लिए दायी होने के कारण अभिगृहीत कर ली गई है, किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा अधिहरण का आदेश पारित किया जाने के पूर्व, किसी भी समय, उस सम्पति को, उसके ऐसे मूल्य का, जो कि आबकारी आयुक्त या कलेक्टर द्वारा प्राक्कलित किया गया है, संदाय कर दिया जाने पर निर्मुक्त कर सकेगा।
(2) आबकारी आयुक्त या कलक्टर को यथास्थिति ऐसी धनराशि या ऐसे मूल्य का या दोनों का संदाय कर दिया जाने पर अभियुक्त व्यक्ति, यदि वह अभिरक्षा में हो तो, उन्मोचित कर दिया जायेगा, अभिगृहीत सम्पत्ति (यदि कोई हो) निर्मुक्त कर दी जायेगी और ऐसे व्यक्ति या सम्पत्ति के विरुद्ध आगे कोई भी कार्यवाही नहीं की जायेगी।
धारा 48 की उपधारा (1) के अधीन विहित की गई दस हजार रुपए की शास्ति की सीमा के होते हुए भी, आबकारी आयुक्त या कलक्टर, नियमों या अनुज्ञप्ति को शर्तों के किसी भंग या उल्लंघन की दशा में इस अधिनियम के अधीन ऐसे नियमों में या अनुज्ञप्ति की शर्तों में उपबंधित सीमा तक शास्ति अधिरोपित कर सकेगा।
कोई भी आबकारी अधिकारी या पुलिस या भू-राजस्य विभाग का अधिकारी या धारा 52 के अधीन सम्यक्रूपेण सशक्त किया गया कोई भी अन्य व्यक्ति जो तंग करने के आशय से तथा अनावश्यक रूप से-
(क) इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त किसी भी शक्ति का प्रयोग करने का आभास करा कर किसी भी स्थान में प्रवेश करेगा या तलाशी ले लेगा या प्रवेश करायेगा या तलाशी लिवायेगा, या
(ख) इस अधिनियम के अधीन अधिहरण के दायित्वाधीन किसी भी वस्तु का अधिग्रहण करने या उसके लिए तलाशी लेने के बहाने किसी भी व्यक्ति की जंगम सम्पत्ति का अभिग्रहण करेगा, या
(ग) किसी भी व्यक्ति को निरुद्ध करेगा, उसकी तलाशी लेगा उसे गिरफ्तार करेगा, ऐसे कारावास से जिसकी अवधि तीन माह तक की हो सकेगी या जुर्माने से जो पांच सौ रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा।