धारा 3 से 3-क अध्याय 2 (अंकीय चिह्नक और इलैक्ट्रानिक चिह्नक) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 2

1[अंकीय चिह्नक और इलैक्ट्रानिक चिह्नक]

3. इलैक्ट्रानिक अभिलेख का अधिप्रमाणीकरण -

( 1 ) इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कोई हस्ताक्षरकर्त, किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख को अपने अंकीय चिह्नक लगाकर अधिप्रमाणित कर सकेगा।

(2) इलैक्ट्रानिक अभिलेख का अधिप्रमाणन असममित गूढ़ प्रणाली और मिश्रित फलन का उपयोग करके किया जाएगा जो प्रारंभिक इलैक्ट्रानिक अभिलेख को किसी अन्य इलैक्ट्रानिक अभिलेख में आवृत्त और आंतरित करता है ।

स्पष्टीकरण  -

इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "मिश्रित फलन" से ऐल्गोरिथ्म विधि द्वारा प्रतिचत्रिण या द्वयंकों की एक श्रृंखला का अन्य श्रृंखला में जो सामान्यतः "मिश्रित फलन" के रूप में ज्ञात सेट से छोटी है, इस प्रकार स्थानांतरण अभिप्रेत है जो इलैक्ट्रानिक अभिलेख प्रत्येक समय वही मिश्रित परिणाम पैदा करता है जब उसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख के साथ ऐल्गोरिथ्म विधि को निष्पादित किया जाता है जैसा कि उसका निवेश उसे अभिकलनीयत :-

(क) ऐल्गोरिथ्म विधि द्वारा उत्पादित मिश्रित परिणाम से व्युत्पन्न या पुनः संरचित करने के लिए असंगत बना देता है:

(ख) दो इलैक्ट्रानिक अभिलेख ऐल्गोरिथ्म विधि का उपयोग करके वैसा ही मिश्रित परिणाम उत्पादित किया जा सकता है।

(3) कोई भी व्यक्ति हस्ताक्षरकर्ता की लोक कुंजी का उपयोग करके इलैक्ट्रानिक अभिलेख को सत्यापित कर सकता है।

(4) प्राइवेट कुंजी और लोक कुंजी हस्ताक्षरकर्ता के लिए अद्वितीय हैं और वे फलनकारी कुंजी युग्म हैं।

(1.2009 के अधिनियम संख्या 10 द्वारा प्रतिस्थापित (27-10-2009 से प्रभावी)।

 1 [3. इलैक्ट्रानिक चिह्नक-  

(1) धारा 3 में किसी बात के होते हुए भी, किंतु उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कोई उपयोगकर्ता किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख को ऐसे इलैक्ट्रानिक चिह्नक या इलैक्ट्रानिक अधिप्रमाणन तकनीक द्वारा अधिप्रमाणित कर सकेगा, जो —

(क) विश्वसनीय समझी जाती है; और

(ख) दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट की जाए ।

(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए कोई इलैक्ट्रानिक चिह्नक या इलैक्ट्रानिक अधिप्रमाणन तकनीक विश्वसनीय समझी जाएगी, यदि

(क) चिह्नक सृजन डाटा या अधिप्रमाणन डाटा, उस संदर्भ में, जिसमें उनका उपयोग किया जाता है, यथास्थिति, हस्ताक्षरकर्ता या अधिप्रमाणनकर्ता के साथ जोड़े जाते हैं और न कि किसी अन्य व्यक्ति के साथ;

(ख) चिह्नक सृजन डाटा या अधिप्रमाणन डाटा, चिह्नांकन के समय यथास्थिति, हस्ताक्षरकर्ता या अधिप्रमाणनकर्ता के नियंत्रणाधीन थे और न कि किसी अन्य व्यक्ति के;

(ग) ऐसा चिह्नक लगाने के पश्चात्, इलैक्ट्रानिक चिह्नक में किया गया कोई परिवर्तन पता लगाए जाने योग्य है;

(घ) इलैक्ट्रानिक चिह्नक द्वारा अधिप्रमाणन के पश्चात् सूचना में किया गया कोई परिवर्तन पता लगाए जाने योग्य है, और

(ङ) यह ऐसी अन्य शर्तों को पूरी करता हो, जो विहित की जाएं।

(3) केन्द्रीय सरकार, इस बात का अभिनिश्चय करने के प्रयोजन के लिए प्रक्रिया विहित कर सकेगी, कि क्या इलैक्ट्रानिक चिह्नक उसी व्यक्ति का है जिसके द्वारा उसका चिह्नांकन किया जाना या अधिप्रमाणित किया जाना तात्पर्यित है ।

(4) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, दूसरी अनुसूची में ऐसे चिह्नक को लगाने के लिए कोई इलैक्ट्रानिक चिह्नक या इलैक्ट्रानिक अधिप्रमाणन तकनीक या प्रक्रिया जोड़ सकेगी या उससे हटा सकेगी :

परंतु कोई इलैक्ट्रानिक चिह्नक या अधिप्रमाणन तकनीक दूसरी अनुसूची में तभी विनिर्दिष्ट नहीं की जाएगी, जब ऐसा चिह्नक या तकनीक विश्वसनीय हो ।

(5) उपधारा (4) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी ।]

(2009 के अधिनियम संख्या 10 द्वारा प्रतिस्थापित (27-10-2009 से प्रभावी)

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