धारा 43 से 47 अध्याय 9 सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 9

2 [शास्तियां, प्रतिकर और अधिनिर्णय]

43. कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली आदि को नुकसान पहुंचाने के लिए 3[शास्ति और प्रतिकर

यदि कोई व्यक्ति, ऐसे स्वामी या किसी अन्य व्यक्ति की, जो किसी कंप्यूटर कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क प्रणाली का भारसाधक है, अनुज्ञा के बिना -

(क) ऐसे कंप्यूटर, कंप्यूटर  प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क 4[ या कंप्यूटर संसाधन] प्रणाली में पहुंचता है या पहुंच प्राप्त करता है;

(ख) ऐसे कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क से कोई डाटा, कंप्यूटर डाटा संचय या सूचना, जिसके अंतर्गत किसी स्थानांतरणीय भंडारण माध्यम में धृत या संचित कोई सूचना या डाटा भी हैं, डाउनलोड करता है, प्रतिलिपि करता है, या उसका उद्धरण लेता है;

(ग) किसी कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क में किसी कंप्यूटर संदूषक या कंप्यूटर वाइरस का प्रवेश करता है, या प्रवेश करवाता है;

(घ) ऐसे कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क में के किसी कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क, डाटा, कंप्यूटर डाटा संचय या किसी अन्य कार्यक्रम को नुकसान पहुंचाता है या पहुंचवाता है,

(ङ) किसी कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क को विच्छिन्न करता  या करवाता है,

(च) किसी कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क में पहुंच के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति की किसी भी साधन से पहुंच से इंकार करता है या करवाता है;

(छ) इस अधिनियम, इसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों के उल्लंघन में, किसी कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क में किसी व्यक्ति की पहुंच को सुकर बनाने के लिए कोई सहायता प्रदान करता है;

(ज) किसी कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क में छेड़छाड़ या छलसाधन करके, किसी व्यक्ति द्वारा उपभोग की गई सेवाओं के प्रभारों को किसी अन्य व्यक्ति के लेखे में डालता है,

4[(झ) किसी कंप्यूटर संसाधन में विद्यमान किसी सूचना को नष्ट करता है, हटाता है या उसमें परिवर्तन करता है। या उसके महत्व या उपयोगिता को कम करता है या उसे किन्हीं साधनों द्वारा हानिकर रूप से प्रभावित करता है,

(ञ) किसी कंप्यूटर संसाधन के लिए प्रयुक्त किसी कंप्यूटर स्रोत कोड को नुकसान पंहुचाने के आशय से चुराता है, छिपाता है, नष्ट या परिवर्तित करता है या किसी व्यक्ति से उसकी चोरी कराता है या उसे छिपवाता, नष्ट या परिवर्तित कराता है,]

3[तो वह इस प्रकार प्रभावित व्यक्ति को प्रतिकर के रूप में नुकसानी का संदाय करने का दायी होगा,]

स्पष्टीकरण

इस धारा के प्रयोजनों के लिए,

(i) कम्प्यूटर संदूषक" से अभिप्रेत है कम्प्यूटर अनुदेशों का कोई ऐसा सेट जो निम्नलिखित के लिए अभिकल्पित किया गया हो, -

(क) किसी कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क में के डाटा या कार्यक्रम को उपांतरित, नष्ट, अभिलिखित या पारेषित करने; या

(ख) कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क के सामान्य प्रवर्तन का किसी भी साधन से अनधिकार ग्रहण करने,

(ii) “कंप्यूटर डाटा संचय" से पाठ प्रतिबिंब, श्रव्य, दृश्य में सूचना, जानकारी, तथ्य, संकल्पना और अनुदेशों का व्यपदेशन अभिप्रेत है, जो प्रारूपित रीति में तैयार किया जा रहा है या तैयार किया गया है अथवा कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क द्वारा उत्पादित किया गया है और जो कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क में उपयोग के लिए आशयित है;

(iii) कंप्यूटर वाइरस से ऐसा कोई कंप्यूटर अनुदेश, सूचना, डाटा या कार्यक्रम अभिप्रेत है जो किसी कंप्यूटर साधन के निष्पादन को नष्ट करता है नुकसान पहुंचाता है, ह्रास करता है या प्रतिकूल प्रभाव डालता है अथवा स्वयं को किसी अन्य कंप्यूटर साधन से संलग्न कर लेता है और वह तब प्रवर्तित होता है जब कोई कार्यक्रम, डाटा या अनुदेश निष्पादित किया जाता है या उस कंप्यूटर साधन में कोई अन्य घटना घटती है,

(iv) “नुकसान" से किसी माध्यम द्वारा किसी कंप्यूटर साधन को नष्ट करना, परिवर्तित करना, हटाना, जोड़ना, उपान्तरित या पुनः व्यवस्थित करना अभिप्रेत है;

4[(v) “कंप्यूटर स्रोत कोड" से कंप्यूटर संसाधन के कार्यक्रमों, कंप्यूटरों समादेशों, डिजाइन और रेखांक तथा कार्यक्रम विश्लेषण को किसी रूप में सूचीबद्ध करना अभिप्रेत है ।]

1-4. ) 2009 के अधिनियम सं० 10 की धारा 21 द्वारा अंतःस्थापित )

[43. (2023 के अधिनियम संख्या 22 द्वारा विलुप्त)

44. जानकारी, विवरणी, आदि देने में असफल रहने के लिए शास्ति

यदि कोई ऐसा व्यक्ति, जिससे इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या विनियमों के अधीन -

(क) कोई दस्तावेज, विवरणी नियंत्रक अथवा प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को रिपोर्ट देना अपेक्षित है, उसे देने में असफल रहेगा, तो वह, ऐसी प्रत्येक असफलता के लिए 1 (पंद्रह लाख) रुपए से अनधिक की शास्ति का दायी होगा;

(ख) कोई विवरणी फाइल करने या विनियमों में उनके देने के लिए विनिर्दिष्ट समय के भीतर कोई जानकारी, पुस्तक या अन्य दस्तावेज देना अपेक्षित है, विवरणी फाइल करने या ऐसे दस्तावेज विनियमों में उनके देने के लिए विनिर्दिष्ट समय के भीतर देने में असफल रहेगा तो वह ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान ऐसी असफलता चालू रहती है, 2 [पचास हजार] रुपए से अनधिक की शास्ति का दायी होगी;

(ग) लेखा बहियाँ या अभिलेख बनाए रखना अपेक्षित है, उन्हें बनाए रखने में असफल रहता है तो वह ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान ऐसी असफलता चालू रहती है, 3(एक लाख )रुपए) से अनधिक की शास्ति का दायी होगा।

(1-3. 2023 के अधिनियम संख्या 18 द्वारा प्रतिस्थापित)

45. अवशिष्ट शास्ति

जो कोई इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किन्हीं । [नियमों विनियमों निर्देशों या आदेशों का उल्लंघन करेगा तो ऐसे उल्लंघन के लिए जिसके अलग से किसी शास्ति का उपबंध नहीं किया गया है, ऐसे उल्लंघन से प्रभावित व्यक्ति को ऐसे उल्लंघन से प्रभावित व्यक्ति को प्रतिकर के अतिरिक्त एक लाख रुपए से अनधिक शास्ति, जो कि निम्नलिखित से अधिक नहीं होगी-

(क) मध्यवर्ती, कंपनी या निगमित निकाय द्वारा दस लाख रुपए: या

(ख) किसी अन्य व्यक्ति की दशा में एक लाख रुपए]

का संदाय करने का दायी होगा

46. न्यायनिर्णयन करने की शक्ति-

(1)  1[इस अधिनियम के अधीन] न्यायनिर्णयन करने के प्रयोजन के लिए, जहाँ किसी व्यक्ति ने इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम, विनियम, [दिए गए निदेश या किए गए आदेश के उपबंधों में से किसी का उल्लंघन किया है. जां उसे शास्ति या प्रतिकर का संदाय करने का दायी बनाता है। वहाँ केन्द्रीय सरकार उपधारा (3) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए भारत सरकार में निदेशक की पंक्ति से अनिम्न किसी अधिकारी या राज्य सरकार के किसी समतुल्य अधिकारी को केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित रीति में जाँच करने के लिए न्यायनिर्णायक अधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकेगी।

2[(1क) उपधारा (1) के अधीन नियुक्त न्यायनिर्णायक अधिकारी उन मामलों का न्यायनिर्णयन करने की अधिकारिता का प्रयोग करेगा, जिनमें क्षति या 3[***]नुकसानी के लिए दावा पांच करोड़ रुपए से अधिक का नहीं है

परंतु 4[***]नुकसानी के लिए पांच करोड़ रुपए से अधिक के दावे की बाबत अधिकारिता सक्षम न्यायालय में निहित होगी।]

(2) न्यायनिर्णायक अधिकारी, उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति को उस मामले में अभ्यावेदन करने के लिए युक्तियुक्त अवसर देगा और यदि ऐसी जांच के पश्चात्, उसका यह समाधान हो जाता है कि उस व्यक्ति ने उल्लंघन किया है, तो वह उस धारा के उपबंधों के अनुसार ऐसी शास्ति अधिरोपित कर सकेगा या ऐसा प्रतिकर अधिनिर्णीत कर सकेगा, जिसे वह ठीक समझे।

(3) कोई व्यक्ति, न्यायनिर्णायक अधिकारी के रूप में तब तक नियुक्त नहीं किया जाएगा जब तक कि उसके पास सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ऐसा अनुभव और ऐसा विधिक या न्यायिक अनुभव न हो, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किया जाए।

(4) जहां एक से अधिक न्यायनिर्णायक अधिकारी नियुक्त किए गए हैं वहां केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, उन विषयों और स्थानों को विनिर्दिष्ट करेगी, जिनकी बाबत ऐसे अधिकारी अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगे।

(5) प्रत्येक न्यायनिर्णायक अधिकारी को सिविल न्यायालय की वे शक्तियां होंगी, जो धारा 58 की उपधारा (2) के अधीन 5[अपील अधिकरण] को प्रदान की गई है, और :-

(क) उसके समक्ष की सभी कार्यवाहियां भारतीय दंड संहिता (1860 का 45 ) की धारा 193 और धारा 228 के अर्थान्तर्गत न्यायिक कार्यवाहियां समझी जाएंगी;

(ख) उसे दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1974 ( 1974 का 2) की धारा 345 और धारा 346 के प्रयोजनार्थ सिविल न्यायालय समझा जाएगा।

6[(ग) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 ( 1908 का 5) के आदेश 21 के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा ।]

(1-3. 2023 के अधिनियम संख्या 18 द्वारा प्रतिस्थापित।)

(4-5. 2009 के अधिनियम संख्या 10 द्वारा प्रतिस्थापित (27-10-2009 से प्रभावी)

(6. 2023 के अधिनियम संख्या 18 द्वारा विलुप्त )

47. न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा विचार की जाने वाली बातें -

इस अध्याय के अधीन प्रतिकर को मात्रा का न्यायनिर्णयन करते समय, न्यायनिर्णायक अधिकारी निम्नलिखित बातों पर सम्यक् ध्यान देगा, अर्थात् -\

(क) व्यतिक्रम के परिणास्वरूप हुए अभिलाभ या नावाजिब फायदे की मात्रा, जहाँ वह परिमाण निर्धारित करने योग्य हो;

(ख) व्यतिक्रम के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति को हुए हानि की मात्रा;

(ग) व्यतिक्रम की आवृत्तीय प्रकृति।          

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