धारा 40 से 42 अध्याय 8 सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 8

हस्ताक्षरकर्ताओं के कर्तव्य

40. कुंजी-युग्म का उत्पादित किया जाना-

जहां कोई अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र, जिसकी लोक कुंजी उस हस्ताक्षरकर्ता की प्राइवेट कुंजी के अनुरूप है जो अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में सूचीबद्ध की जानी है, हस्ताक्षरकर्ता द्वारा स्वीकार कर लिया गया है 1[वहां] ऐसा हस्ताक्षरकर्ता सुरक्षा प्रक्रिया अपनाकर 2 [ उस कुंजी-युग्म को तैयार करेगा ।]

(1. सूचना प्रौद्योगिकी (कठिनाइयों का निवारण) आदेश, 2002 द्वारा विलुप्त (दिनांक 19-9-2002 से प्रभावी)

2. सूचना प्रौद्योगिकी (कठिनाइयों का निवारण) आदेश, 2002 द्वारा प्रतिस्थापित, (दिनांक 19-9-2002 से  प्रभावी)

 3 [40. इलैक्ट्रानिक चिह्नक प्रमाणपत्र के उपयोगकर्ता के कर्तव्य

इलैक्ट्रानिक चिह्नक प्रमाणपत्र के संबंध में उपयोगकर्ता ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा, जो विहित किए जाएं ।]

(3. 2009 के अधिनियम सं० 10 की धारा 19 द्वारा अंतःस्थापित )

41. अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र की स्वीकृति

( 1 ) किसी हस्ताक्षरकर्ता के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र स्वीकार कर लिया है यदि वह अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र को—

(क) एक या अधिक व्यक्तियों को,

(ख) किसी निधान में,

किसी रीति में प्रकाशित करता है या उसका प्रकाशन प्राधिकृत करता है, या अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र के लिए अपना अनुमोदन अन्यथा प्रदर्शित करता है ।

(2) अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र को स्वीकार करके हस्ताक्षरकर्ता उन सभी को, जो अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में अंतर्विष्ट सूचना पर युक्तियुक्त रूप से विश्वास करते हैं, प्रमाणित करता है कि

(क) हस्ताक्षरकर्ता के पास अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में सूचीबद्ध लोक कुंजी के अनुरूप प्राइवेट कुंजी है और वह उसे रखने का हकदार है;

(ख) प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को हस्ताक्षरकर्ता द्वारा किए गए सभी व्यपदेशन और अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में अंतर्विष्ट सूचना से सुसंगत सभी तात्त्विक तथ्य सही हैं,

(ग) अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में की ऐसी सभी सूचनाएं, जो उपयोगकर्ता की जानकारी में हैं, सही हैं ।

42. प्राइवेट कुंजी का नियंत्रण -

(1) प्रत्येक हस्ताक्षरकर्ता अपने अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में सूचीबद्ध लोक कुंजी के अनुरूप प्राइवेट कुंजी का नियंत्रण रखने में युक्तियुक्त सावधानी बरतेगा और ऐसे व्यक्ति को उसे प्रकट न होने देने के लिए सभी उपाय करेगा जो हस्ताक्षकर्ता के अंकीय चिह्नक लगाने के लिए प्राधिकृत नहीं हैं ]*[ו

(2) यदि अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र में सूचीबद्ध लोक कुंजी के अनुरूप प्राइवेट कुंजी जोखिम में पड़ गई है, तो हस्ताक्षरकर्ता इसकी संसूचना प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को ऐसी रीति में अविलम्ब देगा, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए।

स्पष्टीकरण-

शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि हस्ताक्षकर्ता तब तक दायी होगा जब तक कि उसने प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को सूचित न कर दिया हो कि प्राइवेट कुंजी गोपनीय नहीं रह गई है।

(सूचना प्रौद्योगिकी (कठिनाइयों का निवारण) आदेश, 2002 द्वारा विलुप्त (दिनांक 19-9-2002 से प्रभावी।)

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