अनुसूचियाँ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

                                                                                                                                             1[पहली अनुसूची]

                                                                                       धारा 1 की उपधारा (4) देखिए]

                                                       दस्तावेज या संव्यवहार, जिसको अधिनियम लागू नहीं होगा

                                                                                     दस्तावेजों या संव्यवहारों का वर्णन

2[1. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (1881 का 26) की धारा 13 में यथापरिभाषित परक्राम्य लिखत (चेक, डिमाण्ड वचन पत्र या विनिमय पत्र से भिन्न जो भारतीय रिजर्व बैंक, राष्ट्रीय आवास बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण और पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा विनियमित एक अस्तित्व के पक्ष में जारी या समर्थित है)।]

 

2. मुख्तारनामा अधिनियम, 1882 (1882 का 7) 3 [लेकिन उन मुख्तारनामा को छोड़कर जो भारतीय रिज़र्व बैंक, राष्ट्रीय आवास बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण और पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा विनियमति एक अस्तित्व को उनकी ओर से और उन्हें निष्पादित करने वाले व्यक्ति के नाम पर कार्य करने के लिए सशक्त बनाते हैं] की धारा 1क में यथापरिभाषित कोई मुख्तारनामा ।

3. भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का 2) की धारा 3 में यथापरिभाषित कोई न्यास।

4. भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 (1925 का 39) की धारा 2 के खंड (ज) में यथापरिभाषित कोई विल, जिसके अंतर्गत कोई अन्य वसीयती व्ययन, चाहे जिस नाम से हो, भी है।

 

5. 4[*]

[1. 2009 के अधिनियम संख्या 10 द्वारा प्रतिस्थापित (27-10-2009 से प्रभावी)

2. का०आ० 4720 (), दिनाँक 26 सितम्बर, 2022 द्वारा प्रतिस्थापित।

3. का०आ० 4720 (), दिनाँक 26 सितम्बर, 2022 द्वारा अन्तःस्थापित

4. का०आ० 4720 (), दिनाँक 26 सितम्बर, 2022 द्वारा विलुप्त।]

                                                                                                                                             दूसरी अनुसूची

                                                                                                                                [धारा उक की उपधारा (1) देखिए]

                                                                                        इलैक्ट्रानिक चिह्नक या इलैक्ट्रानिक अधिप्रमाणन तकनीक और प्रक्रिया

 

                                                             क्रम सं०                                 वर्णन                                                                                प्रक्रिया

                                                                              (1)                                          (2)                                                                                     (3)

 

[1. आधार या अन्य] के ई-के बाई सी (अपने ग्राहक को जाने)   

ई-प्राधिकरण तकनीक द्वारा किसी इलैक्ट्रॉनिक अभिलेखों का प्राधिकरण, जो निम्नलिखित द्वारा होगा, -

(क) प्रमाणकर्ता प्राधिकारी द्वारा अंकीय चिह्नांक प्रमाणपत्र जारी करने को ई-प्राधिकरण, दुतान्वेषण और असमति गूढ़ प्रणाली तकनीक का उपयोग लागू होगा।

(ख) ग्राहक कुंजी युग्म उत्पादन, [*] कुंजी युग्मित का भंडारण और अंकीय चिहांक का सृजन किसी विश्वसनीय तृतीय पक्षकार सेवा द्वारा उपलब्ध होगी और प्रमाणकर्ता प्राधिकारी द्वारा विश्वसनीय तृतीय पक्षकार प्रस्तावित होगा। विश्वसनीय तृतीय पक्षकार आवेदन प्ररूप और ग्राहक को अंकीय चिह्नांक प्रमाणपत्र जारी करने के लिए प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को प्रमाणपत्र हस्ताक्षर करने का अनुरोध भेजेगा।

(ग) प्रमाणकर्ता प्राधिकारी द्वारा जारी अंकीय चिह्नांक प्रमाणपत्र ई-प्राधिकरण, सूचना प्रौद्योगिकी (प्रमाणकर्ता प्राधिकारी) नियम, 2000 की अनुसूची 4 के प्ररूप ग में विनिर्दिष्ट विशिष्टियों, आधार या अन्य] ई-के वाई सी (अपने ग्राहक को जाने) सेवाओं और अंकीय चिह्नांक प्रमाणपत्र आवेदक की इलैक्ट्रॉनिक सहमति के आधार पर होगा।

(घ) ई-प्राधिकरण के लिए रीति और अपेक्षाएं समय-समय पर नियंत्रक द्वारा जारी होंगी।

(ङ) ग्राहक कुंजी युग्मित [ और अन्य ई-केवाईसी सेवाओं के] सृजन के लिए सुरक्षा प्रक्रिया नियंत्रक द्वारा ई-प्राधिकरण मार्गनिर्देश के अनुसरण में होंगी

(च) सूचना प्रौद्योगिकी (प्रमाणकर्ता प्राधिकारी) नियम, 2000 के नियम 6 में निर्दिष्ट मानक, जहां तक उनका सम्बन्ध अंकीय चिह्नाक प्रमाणपत्र आवेदक की जन कुंजी के सत्यापन कृत्य से सम्बन्धित है, का अनुपालन करेगा।

(छ) वह रीति, जिसमें सूचना अंकीय चिह्नांक के माध्यम से अधिप्रमाणित की जाएगी, सूचना प्रौद्योगिकी (प्रमाणकर्ता प्राधिकारी) नियम, 2000 के नियम 6 में विनिर्दिष्ट मानकों का अनुपालन, जहाँ तक उनका सम्बन्ध अंकीय चिह्नांक प्रमाणपत्र के सृजन, भण्डारण और पारेषण से है, का अनुपालन करेगी।]

1. सा०का०नि० 61 () द्वारा अन्तःस्थापित (28-1-2015 से प्रभावी)

2. का०आ० 1119 (), दिनाँक 1 मार्च, 2019 द्वारा अन्तःस्थापित।

3. सा०का०नि० 539 () द्वारा विलुप्त (6-7-2015 से प्रभावी)

4. का०आ० 1119 (), दिनाँक 1 मार्च, 2019 द्वारा अन्तः स्थापित।

5. का०आ० 1119 (), दिनाँक 1 मार्च, 2019 द्वारा अन्तःस्थापित

1[2. - तकनीक और विश्वसनीय तीसरे पक्षकार द्वारा सुकर की गई उपयोगकर्ता चिह्नक पूंजी सृजन और अभिगम के लिए प्रक्रिया

ई-अधिप्रमाणन ई-अधिप्रमाणन तकनीक द्वारा किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख के अधिप्रमाणन जो -

() अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्रों को देने वाले प्रमाणकर्ता प्राधिकारी द्वारा ई-अधिप्रमाणन, द्रुतान्वेषण और असममित गूढ़ प्रणाली तकनीक के उपयुक्त उपयोग द्वारा किया जाएगा परन्तु प्रमाणकर्ता प्राधिकारी उपयोगकर्ता पहचान सत्यापन विश्वसनीय तीसरे पक्षकार द्वारा पूंजी का सुनिश्चित भण्डारकरण और चिह्नक पूंजी से उपयोगकर्ता का एकमात्र अधिप्रमाणन नियंत्रण सुनिश्चित करेगा।

() अंकीय चिह्नक प्रमाण-पत्र आवेदक का पहचान सत्यापन समय-समय पर नियंत्रक द्वारा जारी पहचान सत्यापन मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसार होगा।

() विश्वसनीय तीसरे पक्षकार के रूप में क्रियाशील रहने के लिए अपेक्षा नियंत्रक द्वारा जारी किये गये ई-अधिप्रमाणन मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अधीन विनिर्दिष्ट होगी।

() विश्वसनीय तीसरा पक्षकार

(i) अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र आवेदक के पहचान सत्यापन को सुकर बनाएगा।

(ii) उपयोगकर्ता के एक मात्र अधिप्रमाणन द्वारा चिह्नक पूंजी के उपयोगकर्ता के सृजन और पश्चात्वर्ती उपयोग के लिए एक मात्र नियंत्रण रखने हेतु उपयोगकर्ता के लिए सुनिश्चित भण्डारकरण स्थापित करेगा।

(iii) पूंजी युग्म सृजन उपयोगकर्ता की चिह्नक पूंजी के सुनिश्चित भण्डारकरण को सुकर करेगा और चिह्नक सृजन क्रियाकलापों को सुकर बनाएगा।

(iv) डीएससी आवेदक को डीएससी प्ररूप को प्रस्तुत करने और अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र जारी करने के लिये प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को प्रमाणपत्र हस्ताक्षर करने के अनुरोध को सुकर करेगा और

(v) अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र को प्रतिसंहरण करने और उपयोगकर्ता की चिह्नक पूंजी के नष्ट करने को सुकर बनाएगा।

() प्रमाणकर्ता प्राधिकारी द्वारा अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र का जारी किया जाना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और उसके अधीन बनाये गये नियमों के उपबन्धों के अनुसार अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र आवेदक के प्रत्यय पत्र के सत्यापन पर आधारित होगा।

 

() अधिप्रमाणन और पूंजी के भंडारकरण के लिए रीति और अपेक्षा समय-समय पर ई-अधिप्रमाणन मार्ग दर्शक सिद्धान्तों के अधीन नियंत्रक द्वारा जारी की जाएगी।

(1. का०आ० 3472(), दिनांक 29 सितम्बर, 2020 द्वारा अन्तः स्थापित )

() उपयोगकर्ता को पूँजीयुग्म को सृजन करने के लिए सुरक्षा प्रक्रिया नियंत्रक द्वारा जारी किए गए ई-अधिप्रमाणन मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसरण में होगी।

() सूचना प्रौद्योगिकी (प्रमाणकर्ता प्राधिकारी) नियम, 2000 के नियम 6 में निर्दिष्ट मानकों का, जहाँ तक वे अंकीय चिह्नक प्रमाणपत्र आवेदक की लोक पूंजी के प्रमाणीकरण क्रियाकपाल से सम्बन्धित हैं, अनुपालन किया जायेगा।

() रीति जिसमें सूचना अंकीय चिह्नक के साधन द्वारा अधिप्रमाणित की गई है अंकीय चिह्नक (अंतः इकाई) नियम, 2015 के नियम 3 से 12 तक में निर्दिष्ट रीति और मानकों का अनुपालन किया जाएगा जहाँ तक वे अंकीय चिह्नक के सृजन, भण्डारण और सत्यापन से सम्बन्धित हैं।]

[*] 2009 के अधिनियम संख्या 10 द्वारा विलुप्त

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