
(1) माता-पिता को सम्मिलित करके वरिष्ठ नागरिक, जो अपने अर्जन या अपने स्वामित्वाधीन सम्पत्ति से स्वयं का भरण-पोषण करने में असमर्थ हैं, 一
(i) माता-पिता या पितामही-पितामह के मामले में अपने सन्तानों में से एक या अधिक के विरुद्ध, जो अवयस्क नहीं हैं,
(ii) सन्तानहीन वरिष्ठ नागरिक के मामले में, धारा 2 के खण्ड (छ) में निर्दिष्ट अपने ऐसे सम्बन्धी के विरुद्ध धारा 5 के अधीन आवेदन करने का हकदार होगा।
(2) वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण करने के लिए सन्तानों या सम्बन्धी, यथास्थिति, की आबद्धता का विस्तार ऐसे नागरिकों की आवश्यकता तक है, जिससे वरिष्ठ नागरिक सामान्य जीवन व्यतीत कर सकें।
(3) सन्तानों की उसके माता-पिता का भरण-पोषण करने की आबद्धता का विस्तार ऐसे माता-पिता या तो पिता या माता या दोनों यथास्थिति, की आवश्यकता तक है, जिससे ऐसे माता- पिता सामान्य जीवन व्यतीत कर सकें।
(4) कोई व्यक्ति, जो वरिष्ठ नागरिक का सम्बन्धी है और जिसके पास पर्याप्त साधन है, ऐसे वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण करेगा, यदि वह ऐसे वरिष्ठ नागरिक की सम्पत्ति का कब्जाधारी है या वह ऐसे वरिष्ठ नागरिक की सम्पत्ति उत्तराधिकार में प्राप्त करेगा:
परन्तु जहाँ एक से अधिक सम्बन्धी वरिष्ठ नागरिक की सम्पत्ति के उत्तराधिकार में प्राप्त करने का हकदार है, वहाँ भरण पोषण ऐसे सम्बन्धी द्वारा उस अनुपात में सन्देय होगा, जिसमें वे उसकी सम्पत्ति को उत्तराधिकार में प्राप्त करेंगे।
(1) धारा 4 के अधीन भरण-पोषण के लिए आवेदन-
(क) वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता, यथास्थिति, द्वारा, या
(ख) यदि वह असमर्थ है, तो उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति या संगठन द्वारा किया जा सकेगा, या
(ग) अधिकरण स्वप्रेरणा से संज्ञान ले सकेगा।
स्पष्टीकरण-
इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "संगठन" का तात्पर्य सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1860 (1860 का 21) या तत्समय प्रवर्तित किसी अन्य विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई स्वैच्छिक संगठन से है।
(2) अधिकरण, इस धारा के अधीन भरण-पोषण के लिए मासिक भत्ता से सम्बन्धित कार्यवाही लम्बित रहने के दौरान, ऐसी सन्तानों या सम्बन्धी को माता-पिता को शामिल करके ऐसे वरिष्ठ नागरिकों के अन्तरिम भरण-पोषण के लिए मासिक भत्ता देने और माता-पिता को शामिल करके ऐसे वरिष्ठ नागरिक को उसका भुगतान करने के लिए आदेश दे सकेगा, जैसा कि अधिकरण समय समय से निदेश दे।
(3) उपधारा (1) के अधीन भरण पोषण के लिए आवेदन को प्राप्त करने पर, सन्तानों या सम्बन्धी को आवेदन की नोटिस प्रदान करने के पश्चात और पक्षकारों को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के पश्चात भरण-पोषण की धनराशि के अवधारण के लिए जाँच कर सकेगा,
(4) भरण-पोषण के लिए मासिक भत्ता और कार्यवाही के लिए व्यय के लिए उपधारा (2) के अधीन दाखिल किये गये आवेदन का निस्तारण ऐसे व्यक्ति पर आवेदन की नोटिस की तामीली की तारीख से नब्बे दिनों के भीतर किया जायेगा:
परन्तु अधिकरण उक्त अवधि में लेखबद्ध किये जाने वाले कारणों से असाधारण परिस्थितियों में तीस दिनों की अधिकतम अवधि तक एक बार विस्तार कर सकेगी
(5) उपधारा (1) के अधीन भरण-पोषण के लिए आवेदन एक या अधिक व्यक्तियों के विरुद्ध दाखिल किया जा सकेगा:
परन्तु ऐसे सन्तानों या सम्बन्धी भरण-पोषण के आवेदन में माता-पिता का भरण पोषण करने के लिए दायी अन्य व्यक्ति को भी पक्षकार बना सकेगा।
(6) जहाँ भरण-पोषण का आदेश एक से अधिक व्यक्तियों के विरुद्ध किया गया था, वहाँ उनमें से एक की मृत्यु भरण पोषण का भुगतान जारी रखने के लिए अन्य के दायित्व को प्रभावित नहीं करता।
(7) भरण-पोषण के लिए कोई ऐसा भत्ता और कार्यवाही के लिए व्यय आदेश की तारीख से, या, यदि ऐसा आदेश दिया जाता है तो, भरण पोषण या कार्यवाही के व्यय के लिए यथास्थिति, आवेदन की तारीख से सन्देय होगा।
(8) यदि, सन्तान या सम्बन्धी, जिन्हें इस प्रकार आदेश दिया गया है, पर्याप्त कारण के बिना आदेश का अनुपालन करने में असफल रहते हैं, तो कोई ऐसा अधिकरण आदेश के प्रत्येक भंग के लिए जुर्माने को उद्ग्रहीत करने के लिए उपबन्धित ढंग में बकाया धनराशि का उद्ग्रहण करने के लिए वारण्ट जारी कर सकेगा और ऐसे व्यक्ति को भरण-पोषण और कार्यवाही के व्यय, यथास्थिति के लिए प्रत्येक मासिक भत्ता के सम्पूर्ण या किसी भाग के लिए, जो वारण्ट के निष्पादन के पश्चात असंदत्त रहता है, ऐसी अवधि के, जो एक मास तक हो सकता है या उस समय तक के लिए, यदि भुगतान पहले नहीं किया जाता, जो भी पहले हो, कारावास से दण्डित कर सकेगा:
परन्तु कोई वारण्ट इस धारा के अधीन बकाया किसी धनराशि की वसूली के लिए जारी नहीं किया जायेगा, जब तक आवेदन उस तारीख से, जिसका वह बकाया होता है, तीन मास की अवधि के भीतर ऐसी धनराशि का उद्ग्रहण करने के लिए अधिकरण के समक्ष नहीं किया जाता।
(1) धारा 5 के अधीन कार्यवाही किसी सन्तान या सम्बन्धी के विरुद्ध किसी जिले में की जा सकेगी-
(क) जहाँ वह निवास करता है या अन्तिम रूप से निवास किया है, या
(ख) जहाँ सन्तान या सम्बन्धी निवास करता है।
(2) धारा 5 के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर, अधिकरण सन्तान या सम्बन्धी की, जिसके विरुद्ध आवेदन दाखिल किया जाता है, उपस्थिति को उपाप्त करने के लिए आदेशिका जारी करेगा।
(3) सन्तान या सम्बन्धी की उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिए अधिकरण को प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्ति होगी, जैसा कि दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2)/भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के अधीन उपबन्धित है।
(4) ऐसे कार्यवाही का सभी साक्ष्य सन्तान या सम्बन्धी की उपस्थिति में लिया जायेगा जिसके विरुद्ध भरण-पोषण के भुगतान के लिए आदेश किये जाने के लिए प्रस्तावित है और समन मामलों के लिए विहित ढंग से अभिलिखित किया जायेगा:
परन्तु यदि अधिकरण को समाधान है कि सन्तान या सम्बन्धी, जिसके विरुद्ध भरण-पोषण के भुगतान के लिए आदेश किये जाने के लिए प्रस्तावित है, जानबूझकर तामीली को निवारित कर रहा है या जानबूझकर अधिकरण में उपस्थित होने की उपेक्षा कर रहा है, तो अधिकरण सुनवाई करने की कार्यवाही कर सकेगा और एकपक्षीय मामले का अवधारण कर सकेगा।
(5) जहाँ सन्तान या सम्बन्धी भारत के बाहर निवास कर रहा है, वहाँ समन की तामीली अधिकरण द्वारा ऐसे प्राधिकारी के माध्यम से की जायेगी, जैसा कि केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे।
(6) अधिकरण धारा 5 के अधीन आवेदन की सुनवाई करने के पूर्व सुलह अधिकारी के समक्ष उसे निर्दिष्ट कर सकेगा और ऐसा सुलह अधिकारी एक मास के भीतर अपने निष्कर्ष पर पैश करेगा और यदि मैत्रीपूर्ण निपटारा किया गया है, तो अधिकरण इस प्रभाव का आदेश पारित करेगा।
इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "सुलह अधिकारी" का तात्पर्य धारा 5 की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण में निर्दिष्ट कोई व्यक्ति या संगठन का प्रतिनिधि या धारा 18 की उपधारा (1) के अधीन राज्य सरकार द्वारा अभिहित भरण-पोषण अधिकारी या इस प्रयोजन के लिए अधिकरण द्वारा नामनिर्देशित कोई अन्य व्यक्ति से है।
(1) राज्य सरकार इस अधिनियम की प्रारम्भ की तारीख से 6 मास की अवधि के भीतर शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा धारा 5 के अधीन भरण-पोषण के आवेदन का न्यायनिर्णयन और विनिश्चय करने के प्रयोजन के लिए प्रत्येक उपखण्ड के लिए एक या अधिक अधिकरणों का गठन करेगा, जैसा कि अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाय।
(2) अधिकरण की अध्यक्षता राज्य के उपखण्डीय अधिकारी की श्रेणी से अन्यून अधिकारी द्वारा की जायेगी।
(3) जहां दो या अधिक अधिकरणों का गठन किसी क्षेत्र के लिए किया जाता है, वहाँ राज्य सरकार सामान्य या विशेष आदेश द्वारा उनके बीच कारबार के वितरण को विनियमित कर सकेगी।
(1) धारा 5 के अधीन कोई जाँच करने में, अधिकरण किसी नियमावली के अध्यधीन, जो इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा विहित की जा सकेगी, ऐसी संक्षिप्त प्रक्रिया का अनुसरण कर सकेगा, जिसे वह ठीक समझे।
(2) अधिकरण को शपथ पर साक्ष्य लेने और साक्षियों की उपस्थिति को प्रवर्तित करने और दस्तावेजों के प्रकटन तथा पेशकरण को विवश करने के प्रयोजन के लिए तथा ऐसे अन्य प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय की सभी शक्तियाँ होगी और अधिकरण को दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973/भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 195 और अध्याय 26 के सभी प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय होना माना जायेगा।
(3) किसी नियम के अध्यधीन, जो इस निमित्त निर्मित किये जायें, अधिकरण, भरण-पोषण के लिए किसी दावा का न्यायनिर्णयन और विनिश्चय करने के प्रयोजन के लिए, जाँच करने में उसकी सहायता करने के लिए जाँच से सुसंगत किसी मामले का विशेष ज्ञान रखने वाले एक या अधिक व्यक्तियों का चुनाव कर सकेगा।
(1) यदि सन्तान या सम्बन्धी, जैसी स्थिति हो, वरिष्ठ नागरिक का, जो स्वयं का भरण पोषण करने में असमर्थ है भरण-पोषण करने से उपेक्षा करता है या नामंजूर करता है, तो अधिकरण, ऐसी उपेक्षा या नामंजूरी से समाधान होने पर, ऐसी सन्तानों या सम्बंधियों को ऐसे वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण के लिए ऐसी मासिक दर पर मासिक भत्ता, जैसा कि अधिकरण ठीक समझे और ऐसे वरिष्ठ नागरिकों को उसका भुगतान करने के लिए आदेश दे सकेगा, जैसा कि अधिकरण समय समय से निर्देश दे।
(2) अधिकतम भरण-पोषण भत्ता, जिसका ऐसे अधिकरण द्वारा आदेश दिया जा सकेगा, ऐसा होगा, जैसा कि राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाय, जो प्रतिमास दस हजार रुपये से अधिक नहीं होगा।
(1) दुर्व्यपदेशन या तथ्य की त्रुटि या भरण पोषण के लिए मासिक भत्ता का भुगतान करने के लिए धारा 9 के अधीन आदेश दिये गये भरण-पोषण के लिए उस धारा के अधीन मासिक भत्ता प्राप्त करने वाले किसी व्यक्ति की परिस्थितियों में परिवर्तन के सबूत पर, अधिकरण भरण-पोषण के लिए भत्ता में ऐसा परिवर्तन कर सकेगा, जिसे वह ठीक समझे।
(2) जहां अधिकरण को यह प्रतीत होता है कि सक्षम सिविल न्यायालय को किसी विनिश्चय के परिणामस्वरूप धारा 9 के अधीन किया गया कोई आदेश रद्द किया जायेगा या परिवर्तन किया जायेगा वहाँ वह तदनुसार आदेश को रद्द करेगा या, यथास्थिति उसमें तदनुसार फेरफार करेगा।
(1) भरण-पोषण और का र्यवाही के व्यय से सम्बन्धित आदेशों को सम्मिलित करके आदेश की प्रति, यथास्थिति, वरिष्ठ नागरिक को या माता-पिता को, यथास्थिति, किसी फीस के भुगतान के बिना दी जायेगी, जिनके पक्ष में उसे किया जाता है और ऐसा आदेश किसी अधिकरण द्वारा किसी स्थान में, जहाँ व्यक्ति, जिसके विरुद्ध उसे किया जाता है, निवास करता है, ऐसे अधिकरण के पक्षकारों की शिनाख्त और भत्ता, या यथास्थिति, व्यय, बकाये के अभुगतान के सम्बन्ध में समाधान होने पर किया जा सकेगा।
(2) इस अधिनियम के अधीन किये गये भरण-पोषण आदेश का वही बल और प्रभाव होगा, जैसा कि दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973/भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के अध्याय 10 के अधीन पारित आदेश का है और उस संहिता द्वारा ऐसे आदेश के निष्पादन के लिए विहित ढंग में निष्पादित किया जायेगा।
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973/भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 को अध्याय 9 में अन्तर्विष्ट किसी चीज के होते हुए भी, जहाँ वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता उक्त अध्याय के अधीन भरण-पोषण के हकदार हैं और इस अधिनियम के अधीन भी भरण-पोषण के हकदार हैं, वहाँ वे उक्त संहिता के अध्याय 9 के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना उन अधिनियमों में से किसी के अधीन ऐस भरण-पोषण का दावा कर सकेंगे, किन्तु दोनों के अधीन नहीं।
जब इस अध्याय के अधीन आदेश किया जाता है, तब सन्तान या सम्बन्धी, जिससे ऐसे आदेश के निबन्धनों में किसी धनराशि का भुगतान करने की अपेक्षा की जाती है, अधिकरण द्वारा आदेश घोषित करने की तारीख से तीस दिनों के भीतर ऐसे ढंग में आदेशित सम्पूर्ण धनराशि का निक्षेप करेगा, जैसा कि अधिकरण निर्देश दे।
जहाँ कोई अधिकरण इस अधिनियम के अधीन किये गये भरण पोषण के लिए आदेश करता है, वहाँ ऐसा अधिकरण निर्देश दे सकेगा कि भरण-पोषण की धनराशि के अतिरिक्त, साधारण ब्याज का भुगतान भी ऐसे दर पर और ऐसी तारीख से, जो आवेदन करने की तारीख से पूर्व नहीं, किया जायेगा, जैसा कि अधिकरण द्वारा अवधारित किया जाये, जो पाँच प्रतिशत से अन्यून और अठारह प्रतिशत से अनधिक होगा
परन्तु यह कि जहाँ दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अध्याय 9/भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के अध्याय 10 के अधीन भरण पोषण के लिए कोई आवेदन इस अधिनियम के प्रारम्भ पर न्यायालय के समक्ष लम्बित है, वहाँ न्यायालय माता-पिता के अनुरोध पर ऐसे आवेदन को वापस लेने की अनुज्ञा देगा और ऐसे माता-पिता अधिकरण के समक्ष भरण-पोषण के लिए आवेदन दाखिल करने के लिए हकदार होंगे।
(1) राज्य सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अधिकरण के आदेश के विरुद्ध अपील की सुनवाई करने के लिए प्रत्येक जिला के लिए एक अपील अधिकरण का गठन कर सकेगा।
(2) अपील अधिकरण की अध्यक्षता जिला मजिस्ट्रेट की श्रेणी से अन्यून अधिकारी द्वारा की जायेगीI
(1) अधिकरण के आदेश से व्यथित कोई वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता, आदेश की तारीख से साठ दिनों के भीतर, अपील अधिकरण के समक्ष अपील दाखिल कर सकेगा:
परन्तु अपील पर, सन्तान या सम्बन्धी, जिससे ऐसे भरण-पोषण आदेश के निबन्धनों में किसी धनराशि का भुगतान करने की अपेक्षा की जाती है, ऐसे माता-पिता को अपील अधिकरण द्वारा निर्देशित ढंग में इस प्रकार आदेशित धनराशि का लगातार भुगतान करता रहेगा:
परन्तु यह और कि अपील अधिकरण साठ दिनों की उक्त अवधि के अवसान के पश्चात अपील को स्वीकार कर सकेगा यदि उसे समाधान है कि अपीलार्थी समय के अन्तर्गत अपील दाखिल करने के पर्याप्त कारण द्वारा निवारित किया गया था।
(2) अपील अधिकरण अपील प्राप्त करने पर प्रत्युत्तरदाता पर नोटिस तामील करायेगा।
(3) अपील अधिकरण उस अधिकरण से, जिसके आदेश के विरुद्ध अपील दाखिल की जाती है, कार्यवाही का अभिलेख मंगा सकेगा।
(4) अपील अधिकरण अपील और मंगाये गये अभिलेखों की परीक्षा करने के पश्चात अपील को या तो अनुज्ञात कर सकेगा या नामंजूर कर सकेगा।
(5) अपील अधिकरण, अधिकरण के आदेश के विरुद्ध दाखिल अपील का न्यायनिर्णयन और विनिश्चय करेगा और अपील अधिकरण का आदेश अन्तिम होगा:
परन्तु कोई अपील नामंजूर नहीं की जायेगी, जब तक दोनों पक्षकारों को व्यक्तिगत रूप से या सम्यक रूप से प्राधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से सुने जाने का अवसर प्रदान नहीं किया गया है।
(6) अपील अधिकरण अपील की प्राप्ति की एक मास के भीतर लिखित में अपने आदेश को घोषणा करने का प्रयास करेगा।
(7) उपधारा (5) के अधीन किये गये प्रत्येक आदेश की प्रति दोनों पक्षकारों को निःशुल्क भेजी जायेगी।
किसी विधि में अन्तर्विष्ट किसी चीज के होते हुए भी अधिकरण या अपील अधिकरण के समक्ष कार्यवाही के किसी पक्षकार का प्रतिनिधित्व विधि व्यवसायी द्वारा नहीं किया जायेगा।
(1) राज्य सरकार जिला समाज कल्याण अधिकारी या जिला समाज कल्याण अधिकारी की श्रेणी से अन्यून अधिकरी को, चाहे जिस नाम से बुलाया जाय, भरण-पोषण अधिकारी के रूप में अभिहित करेगी।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट भरण पोषण अधिकारी अधिकरण या अपील अधिकरण, यथास्थिति की कार्यवाही के दौरान माता-पिता का प्रतिनिधित्व करेगा, यदि वह ऐसी वांछा करता है।