धारा 26 से 32 अध्याय 7 प्रकीर्ण

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 7

प्रकीर्ण

26. अधिकारी लोक सेवक होंगे -

इस अधिनियम के अधीन कृत्यों का प्रयोग करने के लिए नियुक्त किया गया प्रत्येक अधिकारी या कर्मचारी भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का 45) की धारा 21/भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 2(28)  के अन्तर्गत लोक सेवक होना माना जायेगा।

27. सिविल न्यायालयों का अधिकारिता वर्जित-

किसी सिविल न्यायालय को किसी मामले के सम्बन्ध में, जिसको इस अधिनियम का कोई प्रावधान लागू होता है, अधिकारिता नहीं होगी और कोई व्यादेश किसी सिविल न्यायालय द्वारा किसी चीज के सम्बन्ध में प्रदान नहीं किया जायेगा जो इस अधिनियम द्वारा या के अधीन किया जाता है या किये जाने के लिए आशयित है।

28. सद्भाव में किये गये कार्यवाही का संरक्षण-

कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकारों या स्थानीय प्राधिकरण या सरकार के किसी अधिकारी के विरुद्ध किसी चीज़ के सम्बन्ध में संस्थित नहीं की जायेगी, जो इस अधिनियम या इसके अधीन निर्मित किसी नियमावली या किये गये आदेश के अनुसरण में सद्भाव में किया जाता है या किये जाने के लिए आशयित है।

29. कठिनाइयों का निवारण करने की शक्ति-

यदि इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो राज्य सरकार, शासकीय राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा इस अधिनियम के प्रावधानों से असंगत ऐसा प्रावधान निर्मित कर सकेगी, जिसे वह कठिनाई का निवारण के लिए आवश्यक या समीचीन होना प्रतीत होता है:

परन्तु कोई ऐसा आदेश इस अधिनियम के प्रारम्भ की तारीख से दो वर्ष की अवधि के अवसान के पश्चात नहीं किया जायेगा।

30. निर्देश देने के लिए केन्द्रीय सरकार की शक्ति -

केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रावधानों की क्रियान्वित करने के सम्बन्ध में राज्य सरकारो को निर्देश दे सकेगी।

31. केन्द्रीय सरकार की पुनर्विलोकन करने की शक्ति-

केन्द्रीय सरकार राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के प्रावधानों के क्रियान्वयन की प्रगति का आवधिक पुनर्विलोकन कर सकेगी और अनुविक्षण कर सकेगी।

32. राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति -

(1) राज्य सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को क्रियान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी।

(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम -

(क) धारा 5 के अधीन ऐसे नियमों के अध्यधीन, जैसा कि धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन विहित किया जाय, जाँच करने के ढंग,

(ख) धारा 8 की उपधारा (2) के अधीन अन्य प्रयोजनों के लिए अधिकरण की शक्ति और प्रक्रिया,

(ग) अधिकतम भरण-पोषण भत्ता, जिसका आदेश धारा 9 की उपधारा (2) के अधीन अधिकरण द्वारा दिया जा सकेगा,

(घ) वृद्धावस्था गृह के प्रबन्ध के लिए योजना, जिसमें उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं का मानदण्ड और विभिन्न प्रकार सम्मिलित है, जो धारा 19 की उपधारा (2) के अधीन ऐसे गृहों के निवासियों के चिकित्सीय देखरेख और मनोरंजन के साधन के लिए आवश्यक है,

(ड) धारा 22 की उपधारा (1) के अधीन इस अधिनियम के प्रावधानों के क्रियान्वयन के लिए प्राधिकारियों की शक्तियों और कर्तव्यों,

(च) धारा 22 की उपधारा (2) के अधीन वरिष्ठ नागरिकों के जीवन और सम्पत्ति का संरक्षण प्रदान करने के लिए व्यापक कार्य योजना,

(छ) कोई अन्य मामला, जिसे विहित किया जाना है या किया जा सकता है के लिए प्रावधान कर सकेंगे।

(3) इस अधिनियम के अधीन निर्मित प्रत्येक नियम, उसे निर्मित किये जाने के पश्चात यथाशीघ्र राज्य विधानमण्डल के, जहाँ इसमें दो सदन सम्मिलित है, प्रत्येक सदन के समक्ष या जहाँ विधानमण्डल में केवल एक सदन सम्मिलित है, उस सदन के समक्ष रखा जायेगा।

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