धारा 21 से 23 अध्याय 5 वरिष्ठ नागरिकों के जीवन और सम्पत्ति का संरक्षण

Download Android App    Download iOS App
Note: 1. Use ORG Code: XLVPGR For IOS and Web APP. 2. To Download the PDF it is necessary to download the App. 3. You can Use Only Sigle Device to access the Courses on App

Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 5

वरिष्ठ नागरिकों के जीवन और सम्पत्ति का संरक्षण

21. वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए प्रचार, जानकारी इत्यादि के लिए उपाय -

राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए सभी उपाय करेगी कि-

(i) इस अधिनियम के प्रावधानों का नियमित अन्तराल पर दूरदर्शन, रेडियो और मुद्रण को शामिल करके जन संचार माध्यम के माध्यम से व्यापक प्रचार किया जाता है,

(ii) केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकार के अधिकारियों को, जिनमें पुलिस अधिकारी और न्यायिक सेवा के सदस्य शामिल हैं, इस अधिनियम से सम्बन्धित विवाद्यकों पर आवधिक संक्रियकरण और जानकारी प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है,

(iii) वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और उसके आवधिक पुनर्विलोकन से सम्बन्धित विवाद पर विचार करने के लिए संम्बद्ध मंत्रालयों या विधि, गृह मामलों, स्वास्थ्य और कल्याण से सम्बन्धित विभागों द्वारा प्रदत्त सेवाओं के बीच प्रभावी समन्वय किया जाता है।

22. प्राधिकारी, जो इस अधिनियम के प्रावधानों को क्रियान्वित करने के लिए विनिर्दिष्ट किये जा सकते हैं-

(1) राज्य सरकार जिला मजिस्ट्रेट को ऐसी शक्तियाँ और पर ऐसे कर्तव्य, जी आवश्यक हो, यह सुनिश्चित करने के लिए प्रदान कर सकेगी और अधिरोपित कर सकेगी इस अधिनियम के प्रावधानों का उचित रूप से क्रियान्वयन किया जाता है और जिला मजिस्ट्रेट उसके अधीनस्थ अधिकारी को, जो इस प्रकार अधिरोपित शक्तियों में से सभी या किसी का प्रयोग करेगा और इस प्रकार अधिरोपित कृत्यों में से सभी या किसी का पालन करेगा और स्थानीय सीमा को विनिर्दिष्ट कर सकेगा, जिसके अन्तर्गत ऐसी शक्तियों या कर्तव्यों का निर्वहन उस अधिकारी द्वारा किया जायेगा, जैसा कि विहित किया जाय।

(2) राज्य सरकार वरिष्ठ नागरिकों के जीवन और सम्पत्ति का संरक्षण प्रदान करने के लिए व्यापक कार्य योजना विहित करेगी।

23. कतिपय परिस्थितियों में सम्पत्ति का अन्तरण शून्य होगा -

(1) जहाँ किसी वरिष्ठ नौगरिक ने, जो इए अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात दान द्वारा या अन्यथा अपनी सम्पत्ति का अन्तरण इस शर्त के अध्यधीन किया है कि अन्तरिती अन्तरक को मूलभूत सुविधाओं और मूलभूत शारीरिक आवश्यकताओं को प्रदान करेगा और ऐसा अन्तरिती ऐसी सुविधाओं और शारीरिक आवश्यकताओं को प्रदान करने से इन्कार करता है या असफल रहता है, वहाँ सम्पत्ति का उक्त अन्तरण कपट या प्रपीड़न द्वारा या असम्यक असर के अधीन किया गया माना जायेगा और अन्तरक के विकल्प पर अधिकरण द्वारा शून्य घोषित किया जायेगा।

(2) जहाँ किसी वरिष्ठ नागरिक को सम्पदा में से भरण-पोषण प्राप्त करने का अधिकार है और ऐसी सम्पदा या उसका भाग अन्तरित किया जाता है, वहाँ भरण पोषण प्राप्त करने का अधिकार अन्तरिती के विरुद्ध प्रवर्तित किया जा सकेगा, यदि अन्तरिती को अधिकार का ज्ञान है या यदि अन्तरण आनुग्रहिक है किन्तु प्रतिफल के लिए अन्तरिती के विरुद्ध और अधिकार के ज्ञान के बिना प्रवर्तित नहीं किया जा सकेगा।'

(3) यदि कोई वरिष्ठ नागरिक उपधारा (1) और (2) के अधीन अधिकार को प्रवर्तित करने में अक्षम है, तो कार्यवाही धारा 5 की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण में निर्दिष्ट संगठन में से किसी के द्वारा उसकी ओर से की जा सकेगी।

 

My Legal Consultants
Free Judiciary Coaching
Free Judiciary Notes
Free Judiciary Mock Tests
Bare Acts