धारा 20 से 24 अध्याय 12 बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद नियमावली, 2021

धारा 20 से 24 अध्याय 12 बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद नियमावली, 2021

अध्याय-12

अपील एवं पुनरीक्षण

20. अपील एवं पुनरीक्षण।-

(1) धारा-92 के अधीन प्रत्येक अपील उस प्राधिकारी को. जिसके पास अपील होगी, संबोधित संक्षिप्त एवं बोधगम्य भाषा में तैयार की गई अर्जी के रूप में की जाएगी जिसमें अपीलार्थी अथवा उसके द्वारा सम्यक रूप से प्राधिकृत अधिवक्ता का हस्ताक्षर या निशान होगा।

(2) अपील अर्जी में निम्नलिखित विशिष्टियों अंतर्विष्ट होगी :-

(क) अपीलार्थी का नाम, पिता का नाम, पेशा, तथा आवासीय अथवा व्यवसाय का पता;

(ख) जिस आदेश के विरूद्ध अपील किया गया हो उसकी तिथि:

(ग) एक संक्षिप्त तथ्य-विवरणः

(घ) जिस आदेश के विरूद्ध अपील की गई हो उसके संबंध में आपत्ति के आधार;

(3) अर्जी के साथ जिस आदेश के विरूद्ध अपील की गई हो 

      उस आदेश की मूल अभिप्रमाणित प्रति संलग्न की जाएगी।

21. अपील सुनवाई।-

(1) अपीलीय प्राधिकार नियमित सुनवाई के लिए एक तिथि नियत करेगा और उसके लिये नोटिस प्रेषित करेगा।

(2) यदि अपीलीय प्राधिकार के समक्ष अपीलार्थी स्वयं अथवा अपने अधिवक्ता के माध्यम से सुनवाई की नियम तिथि को उपस्थित नहीं होता है; प्राधिकारी अभिलेख के आधार पर अपील का एक पक्षीय निर्णय ले सकेगा।

(3) अपीलीय प्राधिकार प्रभावित पक्षकार की निर्धारित तिथि पर उपस्थिति की तिथि से 30 दिनों के अन्दर तार्किक आदेश पारित करेगा।

22. अपील की नामंजूरी।-

(1) यदि अपीलअर्जी नियम 20 की अपेक्षाओं को पूरा नहीं करती हो उसे नामंजूर किया जा सकता है;

परंतु कोई अपील इस नियम के अधीन तबतक नामंजूर नहीं की जाएगी जबतक अपीलकर्त्ता को सुनवाई का ऐसा अवसर न दिया गया हो, जिसे अपीलीय प्राधिकार उचित समझे जिससे उक्त नियम की अपेक्षाओं को पूरा करने हेतु वह समर्थ होता।

(2) कोई अपील, अन्य आधारों पर भी जिसे अपीलीय प्राधिकार द्वारा लिखित रूप में व्यक्त किया जाएगा, नामंजूर किया जा सकेगाः

परंतु इस उप नियम के अधीन अपील नामंजूर करने वाला आदेश दिया जाता है तो अपीलकर्ता को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा।

23. आदेश की प्रति का दिया जाना।- 

अपील में पारित आदेश की एक प्रति अपीलकर्ता को मुफ्त और अन्य प्रति उस अधिकारी को भेज दी जायगी जिसका आदेश प्रारूप अपील का विषय हो।

24. पुनरीक्षण दाखिल करने हेतु अपनाई जाने वाली प्रक्रिया।-

अपील के लिए विहित प्रक्रिया पुनरीक्षण के लिए भी लागू होगी।

(i) विभागीय सचिव पुनरीक्षण की शक्ति का प्रयोग करेगें।

(ii) नियमित सुनवाई के लिये तिथि नियत की जाएगी।

(iii) यदि पुनरीक्षण प्राधिकार के समक्ष पुनरीक्षण आवेदनकर्त्ता स्वयं अथवा अपने अधिवक्ता के माध्यम से सुनवाई की नियत तिथि को उपस्थित नहीं होता है; प्राधिकारी अभिलेख के आधार पर पुनरीक्षण का एक पक्षीय निर्णय ले सकेगा।

(iv) पुनरीक्षण प्राधिकार प्रभावित पक्षकार की निर्धारित तिथि पर उपस्थिति की तिथि से 30 दिनों के अन्दर तार्किक आदेश पारित करेगा।

 

 

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