धारा 3 में निर्दिष्ट या इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य सब फीसें यथा विहित रीति में राज्य सरकार को भुगतान के इलेक्ट्रानिक अंतरण या स्टाम्पों द्वारा वसूल की जाएंगी।
इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य किसी फीस का द्योतन करने के लिये उपयोग में लाये जाने वाले स्टाम्प छापित या आसंजक अथवा भागतः छापित और भागतः आसंजक होंगे जैसा समुचित सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा समय-समय पर निर्देश दे।
समुचित सरकार निम्नलिखित के विनियमन के लिये समय-समय पर नियम बना सकेगी :-
(क) न्यायालय फीस एवं उसके प्रतिगाय के भुगतान के इलेक्ट्रॉनिक अंतरण की रीति;
(कक) इस अधिनियम के अधीन उपयोग में लाए जाने वाले स्टाम्पों का प्रदाय;
(ख) इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य फीस का द्योतन करने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले स्टाम्पों की संख्या;
(ग) नुकासानग्रस्त या खराब हुये स्टाम्पों का नवीकरण; तथा
(घ) इस अधिनियम के अधीन उपयोग में लाये गये सब स्टाम्पों का लेखा रखना :
परन्तु उच्च न्यायालय में धारा 3 के अधीन उपयोग में लाये गये स्टाम्पों की दशा में ऐसे नियम उस न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति की सहमति से बनाये जाएंगें।
ऐसे सब नियम शासकीय राजपत्र में प्रकाशित किए जाएंगे और तदुपरि उन्हें विधि का बल प्राप्त होगा।
कोई भी दस्तावेज जिस पर इस अधिनियम के अधीन स्टाम्प होना चाहिए विधिमान्य नहीं होगी यदि और जब तक वह उचित रूप से स्टाम्पित नहीं है।
किन्तु यदि ऐसी कोई दस्तावेज भूल या अनवधानता से किसी न्यायालय या कार्यालय में ले ली जाती है, फाइल कर ली जाती है या उपयोग में लाई जाती है तो, यथास्थिति, पीठासीन न्यायाधीश या कार्यालय का प्रधान या उच्च न्यायालय की दशा में ऐसे न्यायालय का कोई भी न्यायाधीश, यदि वह ठीक समझे तो, आदेश दे सकेगा कि ऐसी दस्तावेज उसके निदेशानुसार स्टांपित की जाए और ऐसी दस्तावेज के तद्नुसार स्टांपित हो जाने पर वह तथा उससे सम्बन्धित हर कार्यवाही वैसे ही विधिमान्य होगी मानो वह आरम्भ में ही उचित रूप से स्टांपित थी।
(1) यदि किसी सिविल, दाण्डिक या राजस्व मामले जिसका निपटारा किया जा चुका है, के अभिलेख की परीक्षा पर कोई लोक अधिकारी पाता है कि इस अधिनियम या तद्धीन बनाये गए नियमों के अधीन देय फीस, उसमें प्रदर्शित या अभिलिखित किसी दस्तावेज पर नहीं दी गई है या अपर्याप्त रूप से दी गई है तो वह न्यायालय के पीठासीन अधिकारी या संबद्ध राजस्व अधिकारी को इस तथ्य की रिपोर्ट करेगा।
(2) ऐसा पीठासीन अधिकारी या राजस्व अधिकारी ऐसी रिपोर्ट की शुद्धता का स्वतः का समाधान करने के पश्चात् अनन्तिम निष्कर्ष अभिलिखित करेगा कि उचित फीस नहीं चुकाई गई है और देय फीस की रकम का तथा उस व्यक्ति का, जिससे फीस या उसका अन्तर, यदि कोई हो वसूलीय होगी, का अवधारण करेगा।
(3) उपधारा (2) के अधीन निष्कर्ष अभिलिखित करने के पश्चात्, पीठासीन अधिकारी या राजस्व अधिकारी उस उपधारा में निर्दिष्ट व्यक्ति को कारण दिखाने को नोटिस जारी करेगा कि उसे तद्धीन अवधारित फीस को चुकाने का आदेश क्यों न दिया जाये, और यदि पर्याप्त कारण दर्शित नहीं किया जाता, पीठासीन अधिकारी या राजस्व अधिकारी निष्कर्ष की पुष्टि करेगा और ऐसे व्यक्ति से उस नोटिस में विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व उचित फीस चुकाने की अपेक्षा करने वाला आदेश देगा।
(4) यदि ऐसा व्यक्ति उपधारा (3) के अधीन जारी नोटिस के अनुसार फीस चुकाने में असफल रहता है, उसे ऐसे पीठासीन अधिकारी या राजस्व अधिकारी के प्रमाण-पत्र पर भू-राजस्व के बकाया की तरह वसूल किया जायेगा।
जहां ऐसी कोई दस्तावेज केवल भूल का सुधार करने और उसे पक्षकारों के मूल आशय के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से संशोधित की जाती है वहां उस पर नया स्टाम्प शुल्क अधिरोपित करना आवश्यक न होगा।
कोई भी दस्तावेज जिस पर इस अधिनियम के अधीन स्टाम्प अपेक्षित है किसी भी न्यायालय या कार्यालय में जब तक स्टाम्प रद्द नहीं कर दिया जाए तब तक न तो फाइल की जायेगी और न उस पर कार्रवाई की जायगी।
ऐसा अधिकारी जिसे न्यायालय या कार्यालय का प्रधान समय-समय पर नियुक्त करे ऐसी किसी दस्तावेज की प्राप्ति पर तुरन्त उसका रद्दकरण उसके चित्र शीर्ष को ऐसे पंच करके करेगा कि स्टाम्प पर अभिहित उसका मूल्य अछूता रहे और पंच करने से निकला भाग जला दिया जायगा या अन्यथा नष्ट कर दिया जायगा।
परन्तु यह कि जहां न्यायालय फीस, भुगतान के इलेक्ट्रॉनिक अंतरण द्वारा संदेय है, वहां स्टाम्प को निरस्त करने के लिये सक्षम प्राधिकारी, भुगतान की प्रमाणिकता का सत्यापन करेगा तथा स्वयं को संतुष्ट करने के पश्चात् कि न्यायालय फीस संदेय है, कम्प्यूटर में प्रविष्टि को लॉक करेगा तथा दस्तावेज पर अपने हस्ताक्षर के अधीन पृष्ठांकित करेगा कि न्यायालय फीस संदेय है तथा प्रविष्टि को लॉक किया गया है।