धारा 20 से 24 अध्याय 4 न्यायालय फीस अधिनियम, 1870

धारा 20 से 24 अध्याय 4 न्यायालय फीस अधिनियम, 1870

अध्याय 4

आदेशिका फीसें

20. आदेशिकाओं के खर्च के बारे में नियम.-

उच्च न्यायालय यथाशक्यशीघ्र निम्नलिखित बातों के लिए नियम बनाएगा:-

(i) उस न्यायालय द्वारा अपनी अपीली अधिकारिता में निकाली गई और ऐसी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर स्थापित अन्य सिविल या राजस्व न्यायालयों द्वारा निकाली गई आदेशिकाओं की तामील और निष्पादन के लिए प्रभार्य फीसें;

(ii) ऐसी सीमाओं के भीतर स्थापित दण्ड न्यायालयों द्वारा उन अपराधों के मामले में, जो उन अपराधों से भिन्न हैं जिनके लिये पुलिस अधिकारी वारन्ट के बिना गिरफ्तार कर सकते हैं, निकाली गई आदेशिकाओं की तामील और निष्पादन के लिये प्रभार्य फीसें; तथा

(iii) उन चपरासियों और अन्य सब व्यक्तियों का पारिश्रमिक जो न्यायालय इजाजत से आदेशिकाओं की तामील और निष्पादन में नियोजित हैं।

उच्च न्यायालय इस प्रकार बनाए गये नियमों में समय-समय पर परिवर्तन और परिवर्धन कर सकेगा।

नियमों का पुष्टीकरण और प्रकाशन.-

ऐसे सब नियम, परिवर्तन और परिवर्धन राज्य सरकार द्वारा पुष्ट किये जाने के पश्चात् शासकीय राजपत्र में प्रकाशित किये जाएंगे और तदुपरि उन्हें विधि का बल प्राप्त होगा।

जब तक ऐसे नियम इस प्रकार बनाए और प्रकाशित न किये जाएं तब तक आदेशिकाओं की तामील और निष्पादन के लिए इस समय उद्ग्रहणीय फीसें उद्ग्रहीत की जाती रहेंगी और इस अधिनियम के अधीन उद्ग्रहणीय फीसें समझी जाएंगी।

21. आदेशिका फीस की सारणियां -

ऐसी तामील और निष्पादन के लिए प्रभार्य फीसें दर्शित करने वाली एक सारणी अंग्रेजी भाषा में और देशी भाषाओं में हर एक न्यायालय के सहजदृश्य भाग में अभिदर्शित की जायगी।

22. जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में चपरासियों की संख्या.-

उच्च न्यायालय द्वारा बनाए गये और राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित नियमों के अधीन रहते हुये,

हर जिला न्यायाधीश और हर जिला मजिस्ट्रेट अपने न्यायालय से तथा अपने न्यायालय के अधीनस्थ न्यायालयों में से हर एक से निकाली गई आदेशिकाओं की तामील और निष्पादन के लिए नियोजित किये जाने के लिये आवश्यक चपरासियों की संख्या नियत करेगा और उसमें समय-समय पर परिवर्तन कर सकेगा;

मुफस्सिल लघुवाद न्यायालयों में चपरासियों की संख्या-

और 1865 के अधिनियम संख्यांक 11 (उच्च न्यायालयों को मामूली आरंभिक सिविल अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के बाहर के लघुवाद न्यायालय सम्बन्धी विधि का समेकन और संशोधन करने के लिये) के अधीन स्थापित हर लघुवाद न्यायालय इस धारा के प्रयोजनों के लिये जिला न्यायाधीश के न्यायालय के अधीनस्थ समझा जायगा।

23. राजस्व न्यायालयों मे चपरासियों की संख्या. -

मुख्य नियन्त्रक राजस्व प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित नियमों के अधीन रहते हुये, जिले के कलक्टर के कृत्यों का पालन करने वाला हर अधिकारी अपने न्यायालय से या अपने अधीनस्थ न्यायालयों से निकाली गई आदेशिकाओं की तामील और निष्पादन के लिये नियोजित किये जाने के लिए आवश्यक चपरासियों की संख्या नियत करेगा और उसमें समय-समय पर परिवर्तन कर सकेगा।

24.***

Free Judiciary Coaching
Free Judiciary Notes
Free Judiciary Mock Tests
Bare Acts