धारा 3 से 5 अध्याय 2 न्यायालय फीस अधिनियम, 1870

Download Android App    Download iOS App
Note: 1. Use ORG Code: XLVPGR For IOS and Web APP. 2. To Download the PDF it is necessary to download the App. 3. You can Use Only Sigle Device to access the Courses on App

Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 2

उच्च न्यायालय में और प्रेसिडेंसी नगरों के लघुवाद न्यायालयों में फीसें

3. उच्च न्यायालयों की आरम्भिक शाखाओं में फीसों का उद्ग्रहण.-

वे फीसें जो केरल, मैसूर और राजस्थान के उच्च न्यायालयों के लिपिकों और (शैरिफों तथा अटर्नियों से भिन्न) अधिकारियों को तत्समय संदेय हैं;

या उन न्यायालयों में से हर एक में इस अधिनियम से उपाबद्ध प्रथम अनुसची के संख्यांक 11 और द्वितीय अनुसूची के संख्यांक 7, 12, 14, 20 और 21 के अधीन प्रभार्य हैं;

प्रेसिडेंसी लघुवाद न्यायालयों में फीस का उद्ग्रहण. -

और वे फीसें जो प्रेसिडेंसी के लघुवाद न्यायालयों तथा उनके विभिन्न कार्यालयों में तत्समय प्रभार्य हैं; इसमें इसके पश्चात् बताई गई रीति से संग्रहीत की जाएगी।

4. उन दस्तावेजों पर फीसें जो उच्च न्यायालयों में उनकी असाधारण अधिकारिता में फाइल आदि की गई हैं.-

इस अधिनियम से उपाबद्ध प्रथम या द्वितीय अनुसूची में फीसों से प्रभार्य के रूप में विनिर्दिष्ट किस्मों में से किसी किस्म की कोई भी दस्तावेज उक्त न्यायालयों में से किसी के समक्ष उसकी असाधारण आरम्भिक सिविल अधिकारिता के प्रयोग में;

या उसकी असाधारण आरम्भिक दाण्डिक अधिकारिता के प्रयोग में;

उनकी अपीली अधिकारिता में.-

या उक्त न्यायालय के एक या अधिक न्यायाधीशों के या खंड न्यायालय के उन निर्णयों से (जो न्यायालय की साधारण आरम्भिक अधिकारिता के प्रयोग में पारित निर्णयों से भिन्न हैं) अपीलों के बारे में उसकी अधिकारिता के प्रयोग में;

या उसके अधीक्षण के अधीन न्यायालयों में अपीलों के बारे में उसकी अधिकारिता के प्रयोग में;

निर्देश या पुनरीक्षण न्यायालय के रूप में.-

या निर्देश या पुनरीक्षण न्यायालय के रूप में उसकी अधिकारिता के प्रयोग में;

आने वाले किसी मामले में ऐसे न्यायालय में फाइल, प्रदर्शित या अभिलिखित या ऐसे न्यायालय द्वारा प्राप्त की या दी ने जायगी जब तक कि उस दस्तावेज के बारे में उक्त अनुसूचियों में से किसी में भी ऐसी दस्तावेज के लिए उचित फीस के रूप में उपदर्शित फीस से अन्यून फीस संदत्त न कर दी गई हो।

5. फीस की आवश्यकता या रकम की बाबत मतभेद होने की दशा में प्रक्रिया,-

जब उस अधिकारी के, जिसका कर्त्तव्य यह देखना है कि इस अध्याय के अधीन कोई फीस दी जाए, और किसी वादकर्ता या अटर्नी के बीच फीस के संदाय की आवश्यकता या उसकी रकम की बाबत कोई मदभेद पैदा होता है तब यदि मतभेद उक्त उच्च न्यायालयों में से किसी में पैदा होता है तो वह प्रश्न, विनिर्धारक अधिकारी को निर्देशित किया जायगा जिसका उस पर विनिश्चय तब के सिवाय अंतिम होगा, जब कि प्रश्न उसकी राय में सार्वजनिक महत्व का है, जिस दशा में वह उसे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति के या उस उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश के, जिसे मुख्य न्यायमूर्ति साधारणतः या विशेषतः इस निमित्त नियुक्त करेगा, अंतिम विनिश्चय के लिये निर्देशित करेगा।

यदि ऐसा कोई मतभेद उक्त लघुवाद न्यायालयों में से किसी में पैदा होता है तो वह प्रश्न न्यायालय-प्राधीक्षक को निर्देशित किया जायगा, जिसका उस पर विनिश्चय तब के सिवाय अंतिम होगा, जब कि वह प्रश्न उसकी राय में सार्वजनिक महत्व का है, जिस दशा में वह उसे ऐसे न्यायालय के प्रथम न्यायाधीश के अंतिम विनिश्चय के लिए निर्देशित करेगा।

मुख्य न्यायमूर्ति यह घोषित करेगा कि कौन इस धारा के पहले पैरा के अर्थान्तर्गत विनिर्धारक अधिकारी होगा।

 

My Legal Consultants
Free Judiciary Coaching
Free Judiciary Notes
Free Judiciary Mock Tests
Bare Acts