धारा 74 से 83 अध्याय 12 दिव्यांगजनों के लिए मुख्य आयुक्त और राज्य आयुक्त

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 12

दिव्यांगजनों के लिए मुख्य आयुक्त और राज्य आयुक्त

74. मुख्य आयुक्त और आयुक्तों की नियुक्ति -

(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अधिसूचना द्वारा दिव्यांगजनों के लिए मुख्य आयुक्त ( जिसे इसमें इसके पश्चात् “मुख्य आयुक्त" कहा गया है ) नियुक्त कर सकेगी । 

(2) केन्द्रीय सरकार मुख्य आयुक्त की सहायता करने के लिए अधिसूचना द्वारा दो आयुक्तों की नियुक्ति कर सकेगी, जिनमें से एक आयुक्त दिव्यांगजन होगा।

(3) कोई व्यक्ति मुख्य आयुक्त या आयुक्त के रूप में नियुक्त किए जाने के लिए तब तक अर्हित नहीं होगा जब तक कि उसे पुनर्वास से संबंधित विषयों के संबंध में विशेष जानकारी या व्यावहारिक अनुभव न हो ।

(4) मुख्य आयुक्त और आयुक्तों को संदेय वेतन और भत्ते तथा सेवा के अन्य निबंधन और शर्ते (जिसके अंतर्गत पेंशन, उपदान और अन्य सेवानिवृत्ति फायदे भी हैं) वे होंगे, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किए जाएं।

(5) केन्द्रीय सरकार मुख्य आयुक्त की उसके कृत्यों के निर्वहन में सहायता करने के लिए अपेक्षित अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की प्रकृति तथा प्रवर्गों का अवधारण करेगी आरै मुख्य आयुक्त को उतने ऐसे अधिकारी और अन्य कर्मचारी उपलब्ध कराएगी, जो वह ठीक समझे ।

(6) मुख्य आयुक्त को उपलब्ध कराए गए अधिकारी और कर्मचारी मुख्य आयुक्त के साधारण अधीक्षण और नियन्त्रण के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करेंगे।

(7) अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन और भत्ते तथा सेवा की अन्य शर्तें ये होंगी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाएं।

(8) मुख्य आयुक्त की एक सलाहकार समिति द्वारा सहायता की जाएगी, जो विभिन्न दिव्यांगताओं के क्षेत्र से ग्यारह से अन्यून सदस्यों से ऐसी रीति में, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए, मिलकर बनेगी ।

75. मुख्य आयुक्त के कृत्य  -

(1) मुख्य आयुक्त,

(क) स्वप्रेरणा से या अन्यथा किसी विधि के उपबंध या नीति, कार्यक्रम और प्रक्रियाओं की पहचान करेगा, जो इस अधिनियम से असंगत हैं और आवश्यक सुधारकारी उपायों की सिफारिश करेगा;

(ख) स्वप्रेरणा से या अन्यथा दिव्यांगजनों को अधिकारों से वंचित करने और उन विषयों के संबंध में उन्हें उपलब्ध सुरक्षापायों की जांच करेगा जिनके लिए केन्द्रीय सरकार समुचित सरकार है और सुधारकारी कार्रवाई के लिए समुचित प्राधिकारियों के पास मामले को उठाएगा;

(ग) इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा दिव्यांगजनों के अधिकारों के संरक्षण के लिए उपलब्ध सुरक्षापायों का पुनर्विलोकन करेगा और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उपायों की सिफारिश करेगा;

(घ) उन कारकों का पुनर्विलोकन करेगा, जो दिव्यांगजनों के अधिकारों का उपभोग करने में बाधा उत्पन्न करते हैं। तथा समुचित सुधारकारी उपायों की सिफारिश करेगा;

(ङ) दिव्यांगजनों के अधिकारों पर संधियों और अन्य अंतर्राष्ट्रीय लिखतों का अध्ययन करेगा और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सिफारिशें करेगा;

(च) दिव्यांगजनों के अधिकारों के क्षेत्र में अनुसंधान करेगा और उसका संवर्धन करेगा;

(छ) दिव्यांगजनों के अधिकारों और उनके संरक्षण के लिए उपलब्ध सुरक्षापायों पर जागरुकता का संवर्धन करेगा;

(ज) दिव्यांगजनों के लिए आशयित इस अधिनियम के उपबंधों, स्कीमों और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की मानीटरी करेगा;

(झ) दिव्यांगजनों के फायदे के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा संवितरित निधियों के उपयोजन की मानीटरी करेगा; और

(ञ) ऐसे अन्य कृत्यों को करेगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा सौंपे जाएं।

(2) मुख्य आयुक्त, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करते हुए किसी भी विषय पर आयुक्तों से परामर्श करेगा।

76. मुख्य आयुक्त की सिफारिश पर समुचित प्राधिकारियों द्वारा कार्रवाई -

जब भी मुख्य आयुक्त धारा 75 1[की उपधारा (1)]का खंड (ख) के अनुसरण में किसी प्राधिकारी को सिफारिश करता है तो वह प्राधिकारी उस पर आवश्यक कार्रवाई करेगा और सिफारिश प्राप्त होने की तारीख से तीन मास के भीतर की गई कार्रवाई से मुख्य आयुक्त को सूचित करेगा:

परन्तु जहां कोई प्राधिकारी किसी सिफारिश को स्वीकार नहीं करता है तो वह उसके स्वीकार न करने के कारणों को तीन मास की कालावधि के भीतर मुख्य आयुक्त को बताएगा और व्यथित व्यक्तियों को भी सूचित करेगा । (1. 2018 के अधिनियम सं० 4 की धारा 3 की दूसरी अनुसूची द्वारा अंतःस्थापित ।)

77. मुख्य आयुक्त की शक्तियां -

(1) मुख्य आयुक्त को, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करने के प्रयोजन के लिए वही शक्तियां होंगी, जो निम्नलिखित मामलों के संबंध में किसी बाद का विचारण करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन सिविल न्यायालय में निहित हैं, अर्थात्ः–

(क) किसी व्यक्ति को समन करना और उसे हाजिर कराना;

(ख) किन्हीं दस्तावेजों का प्रकटीकरण और पेश किए जाने की अपेक्षा करना;

(ग) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रतियों की अध्यपेक्षा करना;

(घ) शपथपत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना; और

(ङ) किसी साक्षी या दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना ।

(2) मुख्य आयुक्त के समक्ष प्रत्येक कार्यवाही भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 193 और धारा 228/ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 229 और धारा 267 के अर्थों में न्यायिक कार्यवाही होगी तथा मुख्य आयुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता (1974 का 2) 1973 की धारा 195 और अध्याय 26 /भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 215 अध्याय 28 के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा।

78. मुख्य आयुक्त द्वारा वार्षिक और विशेष रिपोर्ट -

(1) मुख्य आयुक्त केन्द्रीय सरकार को एक वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा और किसी भी समय किसी विषय पर विशेष रिपोर्टें प्रस्तुत कर सकेगा जो उसकी राय में ऐसी अत्यावश्यकता या महत्ता का है कि उसे वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने तक आस्थगित नहीं किया जा सकता है।

(2) केन्द्रीय सरकार, मुख्य आयुक्त की वार्षिक और विशेष रिपोर्टों को संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष उसकी सिफारिशों पर की गई कार्रवाई या किए जाने के प्रस्तावित कार्रवाई और सिफारिशों को स्वीकार न करने के कारण, यदि कोई हों, पद एक ज्ञापन के साथ रखवाएगी।

(3) वार्षिक और विशेष रिपोर्टों को ऐसे प्ररूप और रीति में तैयार किया जाएगा तथा उनमें ऐसे ब्यौरे अंतर्विष्ट होंगे, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किए जाएं।

79. राज्यों में राज्य आयुक्त की नियुक्ति -

(1) राज्य सरकार अधिसूचा द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए दिव्यांगजनों के लिए एक राज्य आयुक्त (जिसे इसमें इसके पश्चात् “ राज्य आयुक्त " कहा गया है ) नियुक्त करेगी।

(2) कोई व्यक्ति राज्य आयुक्त के रूप में नियुक्त किए जाने के लिए तब तक अर्हित नहीं होगा जब तक कि उसे पुनर्वास से संबंधित विषयों के संबंध में विशेष जानकारी या व्यावहारिक अनुभव न हो।

(3) राज्य आयुक्त को संदेय वेतन और भत्ते तथा सेवा के अन्य निबंधन और शर्ते (जिसके अंतर्गत पेंशन, उपदान और अन्य सेवानिवृत्ति फायदे भी हैं ) वे होंगे, जो राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं ।

(4) राज्य सरकार, राज्य आयुक्त की उसके कृत्यों के निर्वहन में सहायता करने के लिए अपेक्षित अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की प्रकृति तथा प्रवर्गों का अवधारण करेगी और राज्य आयुक्त को उतने ऐसे अधिकारी और अन्य कर्मचारी उपलब्ध कराएगी, जो वह ठीक समझे ।

(5) राज्य आयुक्त को उपलब्ध कराए गए अधिकारी और कर्मचारी राज्य आयुक्त के साधारण अधीक्षण और नियन्त्रण के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करेंगे।

(6) अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन और भत्ते तथा सेवा की अन्य शर्तें वे होंगी, जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाएं।

(7) राज्य आयुक्त की एक सलाहकार समिति द्वारा सहायता की जाएगी, जो विभिन्न दिव्यांगताओं के क्षेत्र से पांच से अन्यून सदस्यों से ऐसी रीति में, जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए, मिलकर बनेगी।

80. राज्य आयुक्त के कृत्य —

राज्य आयुक्त –

(क) स्वप्रेरणा से या अन्यथा किसी विधि के उपबंधों या नीति, कार्यक्रम और प्रक्रियाओं की पहचान करेगा, जो इस अधिनियम से असंगत हैं और आवश्यक सुधारकारी उपायों की सिफारिश करेगा;

(ख) स्वप्रेरणा से या अन्यथा दिव्यांगजनों को अधिकारों से वंचित करने और उन विषयों के संबंध में उन्हें उपलब्ध सुरक्षापायों की जांच करेगा जिनके लिए राज्य सरकार समुचित सरकार है और सुधारकारी कार्रवाई के लिए समुचित प्राधिकारियों के पास मामले को उठाएगा;

(ग) इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा दिव्यांगजनों के अधिकारों के संरक्षण के लिए उपलब्ध सुरक्षापायों का पुनर्विलोकन करेगा और उसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उपायों की सिफारिश करेगा;

(घ) उन कारकों का पुनर्विलोकन करेगा जो दिव्यांगजनों के अधिकारों का उपभोग करने में बाधा उत्पन्न करते हैं। तथा समुचित सुधारकारी उपायों की सिफारिश करेगा;

(ङ) दिव्यांगजनों के अधिकारों के क्षेत्र में अनुसंधान करेगा और उसका संवर्धन करेगा;

(च) दिव्यांगजनों के अधिकारों और उनके संरक्षण के लिए उपलब्ध सुरक्षापायों पर जागरुकता का संवर्धन करेगा;

(छ) दिव्यांगजनों के लिए आशयित इस अधिनियम के उपबंधों और स्कीमों, कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की मानीटरी करेगा;

(ज) दिव्यांगजनों के फायदे के लिए राज्य सरकार द्वारा संवितरित निधियों के उपयोजन की मानीटरी करेगा; और

 (झ) ऐसे अन्य कृत्यों को करेगा, जो राज्य सरकार द्वारा सौंपे जाएं।

81. राज्य आयुक्त की सिफारिश पर समुचित प्राधिकारियों द्वारा कार्रवाई -

जब भी राज्य आयुक्त धारा 80 के खंड (ख) के अनुसरण में किसी प्राधिकारी को सिफारिश करता है तो वह प्राधिकारी उस पर आवश्यक कार्रवाई करेगा और सिफारिश प्राप्त होने की तारीख से तीन मास के भीतर की गई कार्रवाई से राज्य आयुक्त को सूचित करेगा:

परंतु जहां कोई प्राधिकारी किसी सिफारिश को स्वीकार नहीं करता है तो वह उसके स्वीकार न करने के कारणों को तीन मास की कालावधि के भीतर दिव्यांगजन राज्य आयुक्त को बताएगा और व्यथित व्यक्ति को भी सूचित करेगा ।

82. राज्य आयुक्त की शक्तियां -

(1) राज्य आयुक्त को, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करने के प्रयोजन के लिए वही शक्तियां होंगी, जो निम्नलिखित मामलों के संबंध में किसी वाद का विचारण करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन सिविल न्यायालय में निहित हैं, अर्थात्:-

(क) किसी व्यक्ति को समन करना और उसे हाजिर कराना;

(ख) किन्हीं दस्तावेजों का प्रकटीकरण और पेश किया जाना;

(ग) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रतियों की अध्यपेक्षा करना;

(घ) शपथपत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना; और

(ङ) किसी साक्षी या दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना ।

(2) राज्य आयुक्त के समक्ष प्रत्येक कार्यवाही भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 193/ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 229 और धारा 267 के अर्थों में न्यायिक कार्यवाही होगी तथा मुख्य आयुक्त को और दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय 26 / भारतीय  नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 215 अध्याय 28 के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा।

83. (1) राज्य आयुक्त द्वारा वार्षिक और विशेष रिपोर्ट -

राज्य आयुक्त, राज्य सरकार को एक वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा और किसी भी समय किसी विषय पर विशेष रिपोर्टें प्रस्तुत कर सकेगा, जो उसकी राय में ऐसी अत्यावश्यकता या महत्ता की है कि उसे वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने तक आस्थगित नहीं किया जा सकता है।

(2) राज्य सरकार राज्य आयुक्त की वार्षिक और विशेष रिपोर्टों को राज्य विधान-मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष जहां दो सदन है, वह प्रत्येक सदन के समक्ष और जहा राज्य विधान मंडल का एक सदन है, उस सदन के समक्ष उसकी सिफारिशों पर की गई कार्रवाई या किए जाने के लिए प्रस्तावित कार्रवाई और सिफारिशों को स्वीकार न करने के कारण, यदि कोई हों, पर एक ज्ञापन के साथ रखवाएगी

(3) वार्षिक और विशेष रिपोर्टों को ऐसे प्ररूप और रीति में तैयार किया जाएगा तथा उनमें ऐसे ब्यौरे अंतर्विष्ट होंगे, जो राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं।

 

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