धारा 1 से 2 अध्याय 1 प्रारंभिक

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 1    

 (भारत के राजपत्र, असाधारण, भाग II, खण्ड 1. दिनांक 28 दिसम्बर, 2016 को प्रकाशित।)

( 2016 का अधिनियम संख्यांक 49 )

दिव्यांगजनों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों को प्रभावी बनाने के लिए अधिनियम

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने, 13 दिसम्बर, 2006 को दिव्यांगजनों के अधिकारों पर उसके अभिसमय को अंगीकृत किया था;

और पूर्वोक्त अभिसमय दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए निम्नलिखित सिद्धांत अधिकथित करता है:—

(क) अंतर्निहित गरिमा, वैयक्तिक स्वायत्तता के लिए आदर, जिसके अंतर्गत किसी व्यक्ति की स्वयं की पसंद की स्वतंत्रता और व्यक्तियों की स्वतंत्रता भी है:

(ख) अविभेद;

(ग) समाज में पूर्ण और प्रभावी भागीदारी और सम्मिलित होना;

(घ) मानवीय भेदभाव और मानवता के भाग के रूप में दिव्यांगजनों की भिन्नता के लिए आदर और उनका ग्रहण;

(ङ) अवसर की समानता;

(च) पहुंच ;

(छ) पुरुषों और स्त्रियों के बीच समता;

(ज) दिव्यांग बालकों की बढ़ती हुई क्षमता के लिए आदर और दिव्यांग बालकों की पहचान परिरक्षित करने के उनके अधिकार के लिए आदर ;

और भारत उक्त अभिसमय का एक हस्ताक्षरकर्ता है;

और भारत ने 1 अक्तूबर, 2007 को उक्त अभिसमय का अनुसमर्थन किया था;

और पूर्वोक्त अभिसमय को कार्यान्वित करना आवश्यक समझा जाता है।

 भारत गणराज्य के सड़सठवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो : -

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. सक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ -

(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 है।

(2) यह उस तारीख2 को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।

(2. अधिसूचना सं. का.आ. 1215 (अ), दिनांक 19-4-2017 द्वारा 19-4-2017 से प्रवृत्त।)

2. परिभाषाएं —

इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो—

(क) “अपील प्राधिकारी" से, यथास्थिति, धारा 14 की उपधारा ( 3 ) या धारा 53 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित या धारा 59 की उपधारा (1) के अधीन अभिहित प्राधिकारी अभिप्रेत है;

(ख) “समुचित सरकार" से,—

(i) केन्द्रीय सरकार या उस सरकार द्वारा पूर्णतः या पर्याप्त रूप से वित्तपोषित किसी स्थापन या छावनी अधिनियम, 2006 (2006 का 41 ) के अधीन गठित किसी छावनी बोर्ड के संबंध में, केन्द्रीय सरकार;

(ii) कोई राज्य सरकार या उस सरकार द्वारा पूर्णतः या सारवान् रूप से वित्तपोषित किसी स्थापन या छावनी बोर्ड से भिन्न किसी स्थानीय प्राधिकारी के संबंध में, राज्य सरकार, अभिप्रेत है;

(ग) “रोध” से ऐसा कोई कारक अभिप्रेत है जिसमें संसूचनात्मक, सांस्कृतिक, आर्थिक, पर्यावरणीय, संस्थागत, राजनैतिक, सामाजिक, भाव संबंधी या अवसंरचनात्मक कारक सम्मिलित है जो समाज में दिव्यांगजनों की पूर्ण और प्रभावी भागीदारी को रोकते हैं;

(घ) “देख-रेख कर्ता” से माता-पिता और कुटुंब के अन्य सदस्यों सहित ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो संदाय करने पर या उसके बिना किसी दिव्यांगजन को देख-रेख, सहारा या सहायता देता है;

(ङ) “प्रमाणकर्ता प्राधिकारी" से धारा 57 की उपधारा (1) के अधीन अभिहित प्राधिकारी अभिप्रेत है;

(च) “संसूचना” में संसूचना के उपाय और रूप विधान, भाषाएं, पाठ का प्रदर्श, उत्कीर्ण लेख, स्पर्शनीय संसूचना, संकेत, बडा मुद्रण, पहुंच योग्य मल्टीमीडिया, लिखित, धव्य, विडियो, दृश्य, प्रदर्शन, संकेत भाषा सरल भाषा, ह्यूमन रीडर, संवर्धित तथा अनुकल्पी पद्धति और पहुंच योग्य जानकारी और संसूचना प्रौद्योगिकी सम्मिलित है;

(छ) “सक्षम प्राधिकारी” से धारा 49 के अधीन नियुक्त कोई प्राधिकारी अभिप्रेत है;

(ज) दिव्यांगता के संबंध में “विभेद" से दिव्यांगता के आधार पर कोई विभेद, अपवर्जन, निर्बंधन अभिप्रेत है जो राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, सिबिल या किसी अन्य क्षेत्र में सभी मानव अधिकारों और मूलभूत स्वतंत्रताओं के संबंध में अन्य व्यक्तियों के साथ किसी सामान्य आधार पर मान्यता, उपभोग या प्रयोग हासित करने या अकृत करने का प्रयोजन या प्रभाव है और जिसके अंतर्गत सभी प्रकार के विभेद और युक्तियुक्त सुविधाओं का प्रत्याख्यान भी है;

(झ) “स्थापन" के, अंतर्गत कोई सरकारी और प्राइवेट स्थापन भी है;

(ञ) "निधि” से धारा 86 के अधीन गठित राष्ट्रीय निधि अभिप्रेत है;

(ट) “सरकारी स्थापन" से केन्द्रीय अधिनियम या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित कोई निगम या सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी या कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 में यथा परिभाषित किसी सरकारी कंपनी के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन या सहायता प्राप्त कोई प्राधिकरण या निकाय अभिप्रेत है और जिसमें सरकार का कोई विभाग भी सम्मिलित है;

(ठ) “उच्च सहायता" से शारीरिक, मानसिक और अन्यथा ऐसी गहन सहायता अभिप्रेत है जो दैनिक क्रियाकलाप के लिए संदर्भित दिव्यांगजन द्वारा जीवन के सभी क्षेत्रों में जिसके अंतर्गत शिक्षा, नियोजन, कुटुंब और सामुदायिक जीवन और व्यवहार तथा रोगोपचार भी है, पहुंच संविधाएं और भागीदारी के लिए स्वतंत्र और बुद्धिमान विनिश्चय लेने के लिए अपेक्षित हो सकेगी;

(ड) “सम्मिलित शिक्षा" से ऐसी शिक्षा पद्धति अभिप्रेत है जिसमें दिव्यांगता और दिव्यांगता रहित छात्र एक साथ विद्या ग्रहण करते हैं और शिक्षण और विद्या की पद्धति, विभिन्न प्रकार के दिव्यांग छात्रों की विद्या की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उचित रूप से अनुकूलित की गई है;

(ढ) “सूचना और संचार प्रौद्योगिकी" के अंतर्गत सूचना और प्रौद्योगिकी से संबंधित सभी सेवा और नव परिवर्तन भी हैं जिनके अंतर्गत टेलीकाम सेवाएं, वेब आधारित सेवाएं, इलैक्ट्रानिक और मुद्रण सेवाएं, डिजिटल और परोक्ष सेवाएं भी है;

(ण) “संस्था” से दिव्यांगजनों के लिए प्रवेश, देखदेख, संरक्षण, शिक्षा, प्रशिक्षण, पुनर्वास और किसी अन्य क्रियाकलाप के लिए कोई संस्था अभिप्रेत है;

(त) “स्थानीय प्राधिकरण" से संविधान के अनुच्छेद 243त के खंड (ङ) और खंड (च) में यथापरिभाषित नगरपालिका या पंचायत छावनी अधिनियम, 2006 ( 2006 का 41 ) के अधीन गठित छावनी बोर्ड और नागरिक क्रियाकलापों का प्रशासन करने के लिए संसद् या किसी राज्य विधान मंडल के अधिनियम के अधीन स्थापित कोई अन्य प्राधिकरण अभिप्रेत है;

(थ) “अधिसूचना” से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है और "अधिसूचित करना" या "अधिसूचित" पद का अर्थ तद्नुसार लगाया जाएगा;

(द) “संदर्भित दिव्यांगजन” से प्रमाणकर्ता प्राधिकारी द्वारा यथाप्रमाणीकृत विनिर्दिष्ट दिव्यांगता के चालीस प्रतिशत से अन्यून का व्यक्ति अभिप्रेत है, जहां विनिर्दिष्ट दिव्यांगता अध्युपायी निबंधनों में परिभाषित नहीं की गई है और इसमें ऐसा दिब्यांगलजन भी सम्मिलित है जहां विनिर्दिष्ट दिव्यांगता प्रमाणकर्ता प्राधिकारी द्वारा यथाप्रमाणीकृत अध्युपायी निबंधनों में परिभाषित गई है;

(ध) “दिव्यांगजन” से ऐसी दीर्घकालिक शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक वा संवेदी हानि वाला व्यक्ति अभिप्रेत है। जिससे बाधाओं का सामना करने में अन्य व्यक्तियों के साथ समान रूप से समाज में पूर्ण और प्रभावी भागीदारी में रुकावट उत्पन्न होती है;

(न) "उच्च सहायता की आवश्यकताओं वाला दिव्यांगजन " से धारा 58 की उपधारा (2) के खंड (क) के अधीन प्रमाणित संदर्भित दिव्यांगजन अभिप्रेत है, जिसे उच्च सहायता की आवश्यकता है;

(प) “विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(फ) प्राइवेट स्थापन" से कोई कंपनी, फर्म, सहकारी या अन्य सोसाइटी, संगम, न्यास, अभिकरण, संस्था, संगठन, संघ, कारखाना या ऐसा कोई अन्य स्थापन अभिप्रेत जो समुचित सरकार अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे;

(ब) “सार्वजनिक भवन" से कोई सरकारी वा निजी भवन अभिप्रेत जो अत्यधिक जनता द्वारा उपयोग किया जाता है या उनकी पहुंच में है, जिसके अंतर्गत शैक्षिक या व्यावसायिक प्रयोजनों के कार्य स्थल, वाणिज्यिक क्रियाकलापों, सार्वजनिक सुविधाओं, धार्मिक, सांस्कृतिक, अवकाश या मनोरंजक क्रियाकलापों, चिकित्सीय या स्वास्थ्य सेवाओं, विधि प्रवर्तन अभिकरणों, सुधारात्मक या न्यायिक फोरम, रेलवे स्टेशनों या प्लेटफार्मों, सड़क परिवहन बस स्टेंडों या टर्मिनल, विमानपत्तनों या जलमार्गों के लिए उपयोग किए जाने वाले भवन भी है;

(भ) “सार्वजनिक सुविधाओं और सेवाओं" के अंतर्गत बृहत स्तर पर जनता को सेवाएं प्रदान करने के सभी रूप आते हैं जिनके अंतर्गत आवास, शिक्षा वा वृत्तिक प्रशिक्षण, नियोजन और वृत्तिक उन्नयन, विक्रय स्थल या विपणन केन्द्र, धार्मिक, सांस्कृतिक, अवकाश या मनोरंजक, चिकित्सा, स्वास्थ्य और पुनर्वास, बैंककारी वित्त और बीमा, संचार, डाक और सूचना, न्याय तक पहुंच, सार्वजनिक उपयोगिताएं, परिवहन भी हैं;

(म) “युक्तियुक्त आवासन" से दिव्यांगजनों के लिए अन्य व्यक्तियों के समान अधिकारों के उपभोग या उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए, किसी विशिष्ट दशा में, अननुपातिक या असम्यक् बोझ अधिरोपित किए बिना, आवश्यक और समुचित उपांतरण तथा समायोजन अभिप्रेत है;

(य) “रजिस्ट्रीकृत संगठन" से संसद् या किसी राज्य विधान मंडल के अधिनियम के अधीन सम्यक् रूप से रजिस्ट्रीकृत दिव्यांगजनों का कोई संगम या दिव्यांगजन संगठन, दिव्यांगजनों के माता-पिता का संगम, दिव्यांगजनों और कुटुंब के सदस्यों का संगम या स्वैच्छिक या गैर-सरकारी या पूर्त संगठन या न्यास, सोसाइटी या दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए कार्य करने वाली अलाभकारी कंपनी अभिप्रेत है;

(यक) “पुनर्बास” से दिव्यांगजनों को अनुकूलतम, शारीरिक, संवेदी, बौद्धिक, मनोवैज्ञानिक, पर्यावरणीय या सामाजिक कार्य के स्तरों को प्राप्त करने और उनको बनाए रखने में समर्थ बनाने के उद्देश्य से कोई प्रक्रिया निर्दिष्ट है;

(ख) "विशेष रोजगार कार्यालय" से

(i) ऐसे व्यक्तियों के संबंध में जो दिव्यांगजनों में से कर्मचारियों को लगाना चाहते हैं;

(ii) ऐसे संदर्भित दिव्यांगजन के संबंध में जो नियोजन चाहते हैं;

(iii) ऐसी रिक्तियों के संबंध में जिन पर संदर्भित दिव्यांगजन नियोजन चाहते हैं, नियुक्त किए जा सकेंगे, रजिस्टर रखते हुए या अन्यथा सूचना एकत्रित करने या सूचना देने के लिए सरकार द्वारा स्थापित या अनुरक्षित कोई कार्यालय या स्थान अभिप्रेत है;

(यग) “बिनिर्दिष्ट दिव्यांगता" से अनुसूची में यथा विनिर्दिष्ट दिव्यांगताएं अभिप्रेत हैं;

(यघ) “परिवहन प्रणाली” के अंतर्गत सड़क परिवहन, रेल परिवहन, बायु परिवहन, जल परिवहन, अंतिम मील तक संबद्धता के लिए सह-अभिवहन प्रणाली, सड़क और गली अवसंरचना आते हैं;

(यङ) “सर्वव्यापी डिजाइन" से सभी लोगों द्वारा अनुकूलन या विशिष्ट डिजाइन की आवश्यकता के बिना अधिकतम संभव सीमा तक उपयोग किए जाने वाले उत्पादों, वातावरणों, कार्यक्रमों की डिजाइन और सेवाएं अभिप्रेत है और जो दिव्यांगजनों के विशिष्ट समूह के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों सहित सहायक युक्तियों पर लागू होंगी।

 

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