धारा 39 से 48 अध्याय 8 समुचित सरकारों के कर्तव्य और उत्तरदायित्व

धारा 39 से 48 अध्याय 8 समुचित सरकारों के कर्तव्य और उत्तरदायित्व

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अध्याय 8

समुचित सरकारों के कर्तव्य और उत्तरदायित्व

39. जागरुकता अभियान -

(1) समुचित सरकार, यथास्थिति, मुख्य आयुक्त या राज्य आयुक्त से परामर्श करके इस अधिनियम के अधीन दिव्यांगजनों को दिए गए अधिकारों के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए जागरुकता अभियानों और सुग्राह्यता कार्यक्रमों का संचालन, प्रोत्साहन, उसमें सहायता या संवर्धन करेगी।

(2) उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट ऐसे कार्यक्रमों और अभियानों में निम्नलिखित भी किया जाएगा,

(क) समावेशन, सहनशीलता, समानुभूति के मूल्यों का संवर्धन और विविधता के लिए आदर;

(ख) दिव्यांगजनों के कौशल, गुणों और योग्यताओं की अग्रिम पहचान और कार्यबल, श्रम बाजार में उनका योगदान और वृत्तिक फीस

(ग) पारिवारिक जीवन, नातेदारियों, बालकों के वहन और पालन पोषण से संबंधित सभी विषयों पर दिव्यांगजनों द्वारा किए गए विनिश्चयों के लिए आदर का पोषण;

(घ) दिव्यांगता की मानवीय दशा पर विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय और वृत्तिक प्रशिक्षण स्तर तथा दिव्यांगजनों के अधिकारों पर अभिसंस्करण करना और सुग्राही बनाना;

(ङ) दिव्यांगता की दशाओं और नियोजकों, प्रशासकों और सहकर्मियों के प्रति दिव्यांगजनों के अधिकारों पर अभिसंस्करण और सुग्राह्यता प्रदान करना;

(च) यह सुनिश्चित करना कि विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और स्कूलों के पाठ्यक्रमों में दिव्यांगजनों के अधिकार सम्मिलित हैं।

40. पहुंच -

केन्द्रीय सरकार, मुख्य आयुक्त के परामर्श से समुचित प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों तथा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जनता को प्रदान की गई सुविधाओं और सेवाओं सहित भौतिक वातावरण, परिवहन, जानकारी और संसूचना के लिए पहुंच के मानकों को अधिकथित करते हुए दिव्यांगजनों के लिए विनियम विरचित करेगा ।

41. परिवहन तक पहुंच -

(1) समुचित सरकार, निम्नलिखित का उपबंध करने के लिए उपयुक्त उपाय करेगी, –

(क) बस अड्डे और रेलवे स्टेशनों तथा हवाई अड्डों पर दिव्यांगजनों के लिए ऐसी सुविधाएं प्रदान करना जो पार्किंग स्थलों, प्रसाधनों, टिकट खिड़कियों और टिकट मशीनों से संबंधित पहुंच मानकों के अनुरूप हों;

(ख) परिवहन के सभी ढंगों तक पहुंच प्रदान करना जो परिवहन के पश्च फिटिंग पुराने ढंगों सहित डिजाइन मानकों के अनुरूप हों, जहां कभी वे दिव्यांगजनों के लिए प्रौद्योगिक रूप से संभाव्य और सुरक्षित हों, आर्थिक रूप में व्यवहार्य हों और डिजाइन में मुख्य संरचना के परिवर्तन में भार डाले बिना हों;

(ग) दिव्यांगजनों के लिए आवश्यक गतिशीलता के समाधान के लिए पहुंच योग्य सड़कें ।

(2) समुचित सरकार, निम्नलिखित के लिए उपबंध करने के लिए वहन करने योग्य लागत पर दिव्यांगजनों की वैयक्तिक गतिशीलता के संवर्धन के लिए स्कीमों, कार्यक्रमों को विकसित करेगी,—

(क) प्रोत्साहन और रियायतें;

(ख) वाहनों की पश्च फिटिंग, और

(ग) वैयक्तिक गतिशीलता सहायता ।

42. सूचना और संचार प्रौद्योगिकी तक पहुंच -

समुचित सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय करेगी कि,

(i) श्रव्य, प्रिंट और इलैक्ट्रानिक मीडिया में उपलब्ध सभी अंतर्वस्तुएं पहुंच योग्य फोर्मेट में हैं;

(ii) श्रव्य वर्णन, संकेत भाषा निर्वचन और क्लोज्ड केपशनिंग, उपलब्ध कराके दिव्यांगजन की इलैक्ट्रानिक मीडिया तक पहुंच है;

(iii) इलैक्ट्रानिक माल और उपस्कर जो प्रतिदिन उपयोग के लिए सर्वव्यापी डिजाइन में उपलब्ध कराए जाने के लिए आशयित हैं ।

43. उपभोक्ता माल –

समुचित सरकार दिव्यांगजनों के साधारण उपयोग के लिए सर्वव्यापी रूप से डिजाइन किए गए उपभोक्ता उत्पादों और उपसाधनों के विकास, उत्पादन और वितरण के संवर्धन के लिए उपाय करेगी।

44. पहुंच सन्नियमों का आज्ञापक रूप से अनुपालन -

(1) किसी स्थापन को किसी संरचना के निर्माण की मंजूरी नहीं दी जाएगी यदि भवन योजना में धारा 40 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए विनियमों का पालन नहीं किया जाता है।

(2) किसी स्थापन को तब तक पूर्णता प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाएगा या भवन का अधिभोग करने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जाएगा जब तक वह केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए विनियमों का पालन नहीं करता है।

45. विद्यमान अवसरंचना और सुगम्य परिसर बनाने के लिए समय-सीमा तथा उस प्रयोजन के लिए कार्रवाई –

(1) ऐसे विनियमों की अधिसूचना की तारीख से पांच वर्ष से अनधिक के भीतर केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए विनियमों के अनुसार सभी विद्यमान सार्वजनिक भवन सुगम्य बनाए जाएंगे:

परन्तु केन्द्रीय सरकार राज्यों को इस उपबंध के पालन के लिए मामला दर मामला आधार पर उनकी तैयारी की अवस्था और अन्य संबंधित पैमानों पर निर्भर रहते हुए समय का विस्तार मंजूर कर सकेगी।

(2) समुचित सरकार और स्थानीय प्राधिकारी उनके सभी भवनों और स्थानों में आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वाले जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सिविल / जिला अस्पताल, विद्यालय, रेलवे स्टेशन और बस अड्डा जैसी सभी तक पहुंच प्रदान करने के लिए पूर्विकता पर आधारित कार्ययोजना बनाएंगे और प्रकाशित करेंगे।

46. सेवा प्रदाताओं द्वारा पहुंच के लिए समय-सीमा -

सेवा प्रदाता चाहे सरकारी हो या प्राइवेट, केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 40 के अधीन पहुंच पर बनाए गए नियमों के अनुसार ऐसे नियमों की अधिसूचना की तारीख से दो वर्ष की कालावधि के भीतर सेवाएं प्रदान करेगा:

परंतु केन्द्रीय सरकार मुख्य आयुक्त के परामर्श से उक्त नियमों के अनुसार कतिपय प्रवर्ग की सेवाएं प्रदान करने के लिए समय का विस्तार मंजूर कर सकेगी।

47. मानव संसाधन विकास -

(1) भारतीय पुनर्वास परिषद् अधिनियम, 1992 (1992 का 34 ) के अधीन गठित भारतीय पुनर्वास परिषद् के किसी कृत्य और शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, समुचित सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मानव संसाधन का विकास करने के लिए प्रयास करेगी और उस ध्येय के लिए निम्नलिखित करेगी—

(क) पंचायती राज सदस्यों, विधायकों, प्रशासकों, पुलिस पदधारियों, न्यायाधीशों, वकीलों के प्रशिक्षण के लिए सभी पाठ्यक्रमों में दिव्यांगता के अधिकारों पर आज्ञापक प्रशिक्षण;

(ख) विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के अध्यापकों, चिकित्सकों, नर्सों, अर्धचिकित्सा कार्मिकों, सामाजिक कल्याण अधिकारियों, ग्रामीण विकास अधिकारियों, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाडी कार्यकर्ताओं, इंजीनियरों, वास्तुविदों, अन्य वृत्तिकों और सामुदायिक कार्यकर्ताओं के लिए सभी शैक्षिक पाठ्यक्रमों के लिए दिव्यांगता का घटक के रूप में समावेश कराना;

(ग) स्वावलम्बी जीवन में प्रशिक्षण और परिवारों के लिए सामुदायिक संबंधों, समुदाय के सदस्यों और अन्य पणधारियों और देख-रेख करने और सहायता करने पर देख-रेख प्रदाता सहित क्षमता निर्माण कार्यक्रम आरंभ करना;

(घ) पारस्परिक योगदान और आदर पर समुदाय संबंधों का निर्माण करने के लिए दिव्यांगजनों के लिए स्वतंत्र प्रशिक्षण सुनिश्चित करना;

(ङ) क्रीड़ा, खेलकूद, रोमांचकारी गतिविधियों पर ध्यान देने के साथ क्रीड़ा अध्यापकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करना;

(च) कोई अन्य क्षमता विकास के उपाय, जो आवश्यक हों ।

(2) सभी विश्वविद्यालय ऐसे अध्ययनों के लिए अध्ययन केंन्द्रों की स्थापना सहित दिव्यांगता संबंधी अध्ययनों में शिक्षण और अनुसंधान का संवर्धन करेंगे।

(3) उपधारा (1) में कथित बाध्यता को पूरा करने के लिए, समुचित सरकार, प्रत्येक पांच वर्ष में आवश्यकता आधारित विश्लेषण करेगी और भर्ती, प्रवेश, सुग्राह्यता अभिसंस्करण और इस अधिनियम में विभिन्न उत्तरदायित्वों के निर्वाह के लिए उपयुक्त कार्मिकों के प्रशिक्षण के लिए योजनाएं बनाएगी ।

48. सामाजिक लेखा परीक्षा -

समुचित सरकार दिव्यांगजनों वाली सभी साधारण स्कीमों और कार्यक्रमों की सामाजिक लेखापरीक्षा यह सुनिश्चित करने के लिए करेगी कि स्कीम और कार्यक्रम दिव्यांगजनों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालते हैं और दिव्यांगजनों की अपेक्षाओं और चिंताओं के लिए आवश्यक हैं।

 

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