
जबकि कोई संविदा भंग कर दी गयी है तब वह पक्षकार, जो ऐसें भंग से क्षति उठाता है, उस पक्षकार से, जिसने संविदा भंग की है, अपने को तद्वारा कारित किसी ऐसी हानि या नुकसान के लिये प्रतिकर पाने का हकदार है जो ऐसी घटनाओं के प्रायिक अनुक्रम में प्रकृत्या ऐसे भंग से उद्भूत हुआ हो, जिसका संविदा-भंग का संभाव्य परिणाम होना पक्षकार उस समय जानते थे जब उन्होंने संविदा की थी ।
ऐसा प्रतिकर उस भंग के कारण उठाई गई किसी दूरस्थ और परोक्ष हानि या नुकसान के लिए नहीं दिया जाना है।
जबकि कोई बाध्यता, जो संविदा द्वारा सर्जित बाध्यताओं के सदृश हो, उपगत कर ली गई है और उसका निर्वहन नहीं किया गया है तब कोई भी व्यक्ति, जिसे उसके निर्वहन में असफलता से क्षति हुई हो, व्यतिक्रम करने वाले पक्षकार से वही प्रतिकर पाने का हकदार है मानो ऐसे व्यक्ति ने उस बाध्यता का निर्वहन 'करने की संविदा की हो, और उसने अपनी उस संविदा का भंग किया हो।
किसी संविदा-भंग से उद्भूत हानि या नुकसान का प्राक्कलन करने में उन साधनों को दृष्टि में रखना होगा जो संविदा के अपालन से हुई असुविधा का उपचार करने के लिये वर्तमान थे।
दृष्टान्त
(क) क, संविदा करता है कि वह अमुक कीमत पर ख को 50 मन शोरा बेचेगा और परिदत्त करेगा, और कीमत उसके परिदान पर संदत्त की जायेगी। क अपने वचन को भंग कर देता है। ख प्रतिकर के रूप में कसे उतनी राशि, यदि कोई हो, पाने का हकदार है, जितनी से संविदा वाली कीमत उस कीमत से कम है जितनी पर ख वैसी क्वालिटी का 50 मन शोरा उस समय अभिप्राप्त कर सकता था जिस समय वह शोरा परिदत्त किया जाना चाहिये था।
(ख) ख के पोत को मुम्बई जाने और वहाँ पहली जनवरी को क द्वारा उपबन्धित किया जाने वाला स्थोरा भरने और कलकत्ता लाने के लिये क भाड़े पर लेता है। बुलाई उपार्जित होने पर दी जानी है। ख का पोत मुम्बई नहीं जाता, किन्तु वैसे ही फायदाप्रद निबन्धनों पर, जिन पर क ने वह पोत भाड़े पर लिया था, उस स्थोरा के लिये उपयुक्त प्रवहण यान उपाप्त करने के अवसर क को प्राप्त हैं। क उन अवसरों का उपयोग करता है किन्तु उसे वैसा करने में कष्ट और व्यय उठाना पड़ता है क ऐसे कष्ट और व्यय के लिये ख से प्रतिकर पाने का हकदार है।
(ग) ख से कथित कीमत पर 50 मन चावल खरीदने की संविदा क करता है। चावल के परिदान के लिये कोई समय नियत नहीं है। तत्पश्चात् ख को क यह जतला देता है कि यदि चावल निविदत्त किया गया तो वह उसे प्रतिगृहीत नहीं करेगा। क से ख प्रतिकर के रूप में उतनी रकम, यदि कोई हो, पाने का हकदार है जितनी से संविदा कीमत उस कीमत से अधिक है जो ख उस समय चावल के लिये अभिप्राप्त कर सकता हो जिसे समय ख को क जतलाता है कि वह चावल प्रतिगृहीत नहीं करेगा।
(घ) ख के पोत, को 60,000 रुपये पर खरीदने की संविदा क करता है, किन्तु अपना वचन भंग कर देता है। क प्रतिकर के रूप में ख को वह अधिकाई, यदि कोई हो, देगा जितनी से संविदा कीमत उस कीमत से अधिक हो, जो ख वचन भंग के समय पोत के लिये अभिप्राप्त कर सकता था।
(ङ) क, जो एक नौका का स्वामी है, विनिर्दिष्ट दिन प्रस्थान करके मिर्ज़ापुर को वहां विक्रय के लिये पटसन के स्थोरा को ले जाने की ख से संविदा करता है। किसी परिहार्य हेतुक से नौका नियत समय पर प्रस्थान नहीं करती जिससे वह स्थोरा मिर्जापुर में उस समय के पश्चात् पहुंचता है जिस समय वह पहुंचता यदि उस नौका ने संविदा के अनुसार प्रस्थान किया होता। उस तारीख के पश्चात् और स्थोरा के पहुंचने से पूर्व पटसन की कीमत गिर जाती है। क द्वारा ख को देय प्रतिकर का परिमाण वह अन्तर है जो उस कीमत का, जो स्थोरा के लिये ख मिर्जापुर में उस समय अभिप्राप्त कर सकता था जबकि वह पहुंचता यदि वह सम्यक् अनुक्रम में भेजा गया होता, उस कीमत से है, जो उस समय उस स्थोरा की बाजार में हो, जब वह वास्तव में पहुंचा।
(च) ख के गृह की मरम्मत अमुक प्रकार से करने के लिये संविदा के करता है और उसके लिये संदाय अग्रिम पाता है। क गृह की मरम्मत करता है किन्तु संविदा के अनुसार नहीं। ख वह खर्चा क से वसूल करने का हकदार है जो इसलिये करना हो कि मरम्मत संविदा के अनुरूप हो जाये।
(छ) के अपना पोत अमुक भाड़े पर ख को पहली जनवरी से एक वर्ष के लिये देने की संविदा करता है। ढुलाई की दरें चढ़ जाती हैं और पहली जनवरी को पोत के लिये अभिप्राप्त भाड़ा संविदा भाड़े से ऊंचा है। क अपना वचन भंग करता है। उसे संविदा-भाड़े और उस भाड़े के बीच के अन्तर के बराबर की राशि ख को प्रतिकर के रूप में देनी होगी जिस पर ख पहली जनवरी को एक वर्ष के लिए वैसे ही पोत को भाड़े पर ले सकता हो।
(ज) ख को लोहे की अमुक मात्रा ऐसी नियत कीमत पर प्रदाय करने की संविदा क करता है जो उस कीमत से ऊंची है जिस पर क उस लोहे का उपापन और परिदान कर सकता है। ख उस लोहे को लेने से सदोष इन्कार कर देता है। लोहे की संविदा कीमत और उस राशि के बीच का अन्तर, जिस पर क उस लोहे को अभिप्राप्त और परिदत्त कर सकता है, कके प्रति प्रतिकर के रूप में ख को देना होगा।
(झ) ख को, जो सामान्य वाहक है, क एक मशीन क की मिल तक अविलम्ब प्रवहित किये जाने के लिये यह जानकारी देकर परिदत्त करता है कि उस मशीन के अभाव में क की मिल रुकी पड़ी है। ख मशीन के परिदान में अयुक्तियुक्त विलम्ब करता है और सरकार के साथ होने वाली लाभदायक संविदा के के हाथ से -उसके परिणामस्वरूप निकल जाती है। क, प्रतिकर के रूप में ख से उस औसत लाभ की रकम पाने का हकदार है जो उस समय के दौरान में, जिसमें उसका परिदान विलम्बित हुआ, मिल के चालू रहने से हुआ होता; किन्तु सरकार के साथ होने वाली संविदा के हाथ से निकल जाने से हुई हानि के लिये प्रतिकर पाने का हकदार नहीं है।
(ञ) ख से क यह संविदा करता है कि वह 100 रुपये प्रति टन की दर से 1,000 टन लोहा जो कथित समय पर परिदत्त किया जायेगा, उसे प्रदाय करेगा। वह ग को यह बतलाकर कि मैं ख के साथ हुई अपनी संविदा का पालन करने के प्रयोजन से तुमसे संविदा कर रहा हूं उससे 80 रुपये प्रति टन की दर से 1,000 टन लोहा लेने की संविदा करता है। क के साथ अपनी संविदा का पालन करने में ग असफल होगा। क दूसरा लोहा उपास नहीं कर सकता और उसके परिणामस्वरूप ख संविदा का विखण्डन कर देता है। क के प्रति ग को 20,000 रुपये देने होंगे जो उस लाभ की रकम है जो ख से अपनी संविदा का पालन करने पर क प्राप्त करता ।
(ट) क अमुक मशीनरी को विनिर्दिष्ट कीमत पर नियत दिन तक बनाने और परिदत्त करने की ख से संविदा करता है। क उस मशीनरी को विनिर्दिष्ट समय पर परिदत्त नहीं करता और इसके परिणामस्वरूप ख उस कीमत से, जो वह क को देने वाला था, ऊंची कीमत पर कोई दूसरी मशीनरी उपाप्त करने के लिये विवश हो जाता है, और उस संविदा का पालन नहीं कर सकता जो कके साथ की गयी अपनी संविदा के समय ख ने एक पर व्यक्ति से की थी (किन्तु जिसकी सूचना उसने तब तक क को नहीं दी थी) और उस संविदा के भंग के लिये प्रतिकर देने को विवश किया जाता है। संविदा द्वारा नियत मशीनरी की कीमत और ख द्वारा किसी दूसरी मशीनरी के लिये दी गई राशि के बीच का अन्तर प्रतिकर के रूप में ख के प्रति क को देना होगा किन्तु वह राशि नहीं, जो ख द्वारा पर व्यक्ति को प्रतिकर के रूप में दी गई थी।
(ठ) एक निर्माता क पहली जनवरी तक एक गृह निर्मित और पूरा करने की संविदा करता है जिससे ग को, जिसे उस गृह को भाटकपर देने की ख ने संविदा की है, ख उसका कब्जा उस समय दे सके। ख और ग के बीच की संविदा की जानकारी क को दे दी जाती है। क गृह को इतनी बुरी तरह से निर्मित करता है कि पहली जनवरी से पूर्व वह गिर जाता है और ख को उसका पुनर्निर्माण करना पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप वह उस भाटक की, जो उसे ग से मिलता हानि उठाता है और ग को अपनी संविदा के भंग के लिये प्रतिकर देने को बाध्य हो जाता है। गृह के पुनर्निर्माण के खर्च के लिये, भाटक की हानि के लिये और ग को दिये गये प्रतिकर के लिये ख के प्रति क को प्रतिकर देना होगा।
(ड) ख को क कुछ वाणिज्या यह वारण्टी देते हुए बेचता है कि वह एक विशिष्ट क्वालिटी की है और इस वारण्टी के भरोसे ख वैसी ही वारण्टी पर उसे ग को बेच देता है। वह माल वारण्टी के अनुसार साबित नहीं होता और ग को ख एक धनराशि प्रतिकर के रूप में देने का दायी हो जाता है। ख इस राशि की क द्वारा प्रतिपूर्ति का हकदार है।
(ढ) क विनिर्दिष्ट दिन ख को एक धनराशि देने की संविदा करता है क वह धन उस दिन नहीं देता। उस दिन धन न पाने के परिणामस्वरूप ख अपने ऋण के संदाय में असमर्थ रहता है और पूर्णतया बर्बाद हो जाता है। ख को संदाय करने के दिन तक के ब्याज सहित उस मूल राशि के सिवाय, जिसके संदाय की उसने संविदा की थी, ख की अन्य कोई प्रतिपूर्ति करने के लिये क दायी नहीं है।
(ण) क अमुक कीमत पर पचास मन शोरा पहली जनवरी को ख को परिदत्त करने की संविदा करता है। तत्पश्चात् ख पहली जनवरी से पूर्व उस शोरे को पहली जनवरी की बाजार कीमत से ऊंची कीमत पर ग को बेचने की संविदा करता है क अपना वचन भंग करता है। क द्वारा ख को देय प्रतिकर का प्राक्कलन करने में पहली जनवरी की बाजार कीमत, न कि वह लाभ, जो ख को क के हाथ बेचने से मिलता, गणना में लिया जाना है।
(त) क रुई की 500 गांठें ख को बेचने और एक नियत दिन पर परिदत्त करने की संविदा करता है। ख के अपने कारबार के संचालन के ढंग के बारे में क कुछ नहीं जानता के अपना वचन भंग करता है और ख रुई न होने के कारण अपनी मिल बन्द करने के लिये विवश हो जाता है। मिल बन्द होने से ख को कारित हार्नि के लिये ख के प्रति क उत्तरदायी नहीं है।
(थ) अमुक कपड़ा, जिससे ख ऐसी विशिष्ट किस्म की टोपियां बनाने का आशय रखता है जिसके लिये उन दिनों के सिवाय और कभी कोई मांग नहीं होती, ख को बेचने और पहली जनवरी को परिदत्त करने की संविदा के करता है। वह कपड़ा नियत समय के पश्चात् तक परिदत्त नहीं किया जाता और टोपियां बनाने में, उस वर्ष उसे उपयोग में नहीं लाया जा सकता। कपड़े की संविदा कीमत और परिदान के समय उसके बाजार- दाम के अन्तर को प्रतिकर के रूप में के से ख पाने का हकदार है किन्तु वह न तो उन लाभों को पाने का हकदार है जिनको वह टोपियां बनाने से अभिप्राप्त करने की आशा करता था, और न उन व्ययों को, जो टोपियां बनाने के लिये की गई तैयारी में उसे करने पड़े हों।
(द) क, जो एक पोत का स्वामी है, ख से संविदा करता है कि वह उसे पहली जनवरी को यात्रारम्भ करने वाले पोत में कलकत्ते से सिडनी ले जायेगा और ख यात्रा भाड़े का आधा भाग निक्षेप के रूप में क को दे देता है। वह पोत पहली जनवरी को यात्रारम्भ नहीं करता और उसके परिणामस्वरूप कुछ समय के लिये कलकत्ते में रुके रहने और उस कारण कुछ व्यय उठाने के पश्चात् ख एक अन्य जलयान से सिडनी के लिये प्रस्थान करता है और परिणामस्वरूप सिडनी में देर से पहुंचने के कारण कुछ धनराशि की हानि उठाता है। ख को ब्याज सहित उसका निक्षेप, और वे व्यय जो उसे कलकत्ते में रुके रहने के कारण उठाने पड़े और पहले पोत के लिये करार पाये गये भाड़े से दूसरे पोत के लिये दिये गये यात्रा भाड़े की अधिकाई, यदि कुछ हो, प्रतिसंदत्त करने का क दायी है किन्तु वह उस धन के लिये दायी नहीं है जिसकी हानि ख ने सिडनी में देर से पहुँचने के कारण उठाई है।
जबकि कोई संविदा भंग कर दी गई है, तब यदि उस संविदा में ऐसी कोई राशि नामित हो जो ऐसे भंग की अवस्था में संदेय होगी या यदि शास्ति के तौर का कोई अन्य अनुबन्ध उस संविदा में अन्तर्विष्ट हो तो चाहे यह साबित किया गया हो या नहीं कि उस भंग से वस्तुत: नुकसान या हानि हुई है, भंग का परिवाद करने वाला पक्षकार उस पक्षकार से जिसने संविदा-भंग किया है, यथास्थिति ऐसी नामित रकम से या अनुबद्ध शास्ति से अनधिक युक्तियुक्त प्रतिकर पाने का हकदार होगा।
व्यतिक्रम की तारीख से वर्द्धित ब्याज के लिये अनुबन्ध शास्ति के तौर का अनुबन्ध हो सकता है।
जबकि कोई व्यक्ति कोई जमानतनामा, मुचलका या उसी प्रकृति की अन्य लिखत करता है, अथवा किसी विधि के उपबन्धों के अधीन, या केन्द्रीय सरकार के या किसी राज्य सरकार के आदेशों के अधीन कोई बन्धपत्र किसी लोक कर्तव्य के या ऐसे कार्य के, जिसमें जनता हितबद्ध हो, पालन के लिये देता है, तब वह किसी ऐसी लिखत की शर्त के भंग होने पर उसमें वर्णित सम्पूर्ण राशि देने के लिये दायी होगा ।
वह व्यक्ति जो सरकार से कोई संविदा करता है तद्द्द्वारा आवश्यकतया न तो किसी लोक- कर्तव्य का भार लेता है और न ऐसा कार्य करने का वचन देता है जिसमें जनता हितबद्ध हो।
(क) ख से क संविदा करता है कि यदि वह ख को एक निर्दिष्ट दिन 500 रुपये देने में असफल रहे तो वह ख को 1,000 रुपये देगा। क उस दिन ख को 500 रुपये देने में असफल रहता है। क से ख 1,000 रुपये से अनधिक ऐसा प्रतिकर, जो न्यायालय युक्तियुक्त समझे, वसूल करने का हकदार है।
(ख) ख से क संविदा करता है कि यदि क कलकत्ते के भीतर शल्य चिकित्सक के रूप में व्यवसाय करेगा तो वह ख को 5,000 रुपये देगा। क कलकत्ते में शल्य चिकित्सक के रूप में व्यवसाय करता है। ख 5,000 रुपये से अधिक उतना प्रतिकर पाने का हकदार है जितना न्यायालय युक्तियुक्त समझे।
(ग) क अमुक दिन न्यायालय में स्वयं उपसंजात होने के लिये मुचलका देता है जिससे ऐसा न करने पर वह 500 रुपये की शास्ति देने के लिये आबद्ध है। उसका मुचलक समपहृत हो जाता है। वह सम्पूर्ण शास्ति देने का दायी है।
(घ) ख को क छह माह के अन्त पर 1,000 रुपये 12 प्रतिशत ब्याज के सहित संदाय करने का बन्धपत्र इस अनुबन्ध के साथ लिख देता है कि व्यतिक्रम की दशा में ब्याज व्यतिक्रम की तारीख से 75 प्रतिशत की दर से देय होगा। यह शास्ति के तौर का अनुबन्ध है और क से ख केवल ऐसा प्रतिकर वसूल करने का हकदार है जो न्यायालय युक्तियुक्त समझे ।
(ङ) क, जो एक साहूकार ख को धन का देनदार है, यह वचनबन्ध करता है कि वह उसको अमुक दिन दस मन अनाज परिदत्त करने द्वारा प्रतिसंदाय करेगा और यह अनुबन्ध करता है कि यदि वह नियत परिमाण नियत तारीख तक परिदत्त न करे तो वह 20 मन परिदान करने का दायी होगा। यह शास्ति के तौर का अनुबन्ध है और भंग की दशा में ख केवल युक्तियुक्त प्रतिकर ही का हकदार है।
(च) ख को क, 1,000 रुपये के उधार को पांच मासिक समकिस्तों में प्रतिसंदत्त करने के लिये इस अनुबन्ध के साथ वचनबद्ध होता है कि किसी किस्त के संदाय में व्यतिक्रम होने पर सम्पूर्ण राशि शोध्य हो जायेगी। यह अनुबन्ध शास्ति के तौर का नहीं है और संविदा उसके निबन्धनों के अनुसार प्रवर्तित कराई जा सकेगी।
(छ) ख से क 100 रुपये उधार लेता है और 200 रुपये के लिये बन्धपत्र जो चालीस रुपये की पांच वार्षिक किस्तों में देय है, इस अनुबन्ध के साथ लिख देता है कि किसी भी किस्त के संदाय में व्यतिक्रम होने पर सम्पूर्ण राशि शोध्य हो जायेगी। यह शास्ति के तौर का अनुबन्ध है।
वह व्यक्ति, जो किसी संविदा को अधिकारपूर्वक विखंडित करता है, ऐसे नुकसान के लिये प्रतिकर पाने का हकदार है जो उसने उस संविदा का पालन न किये जाने से उठाया है।
दृष्टान्त
एक गायिका क एक नाट्यगृह के प्रबन्धक ख से अगले दो मास में प्रति सप्ताह में दो रात उसके नाट्यगृह में गाने की संविदा करती है और ख उसे हर रात के गाने के लिये एक सौ रुपये देने के लिये वचनबद्ध होता है। छठी रात को क उस नाट्यगृह से जानबूझकर अनुपस्थित रहती है और परिणामस्वरूप ख उस संविदा को विखण्डित कर देता है। ख उस नुकसान के लिये प्रतिकर का दावा करने का हकदार है जो उसने उस संविदा के पूरी न किये जाने से उठाया है।