धारा 3 से 9 अध्याय 2 अत्याचार के अपराध

धारा 3 से 9 अध्याय 2 अत्याचार के अपराध

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अध्याय 2

अत्याचार के अपराध

3. अत्याचार के अपराधों के लिए दंड. -

2[(1) कोई भी व्यक्ति, जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है, है,- 

(क) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के मुख में कोई अखाद्य या घृणाजनक पदार्थ रखता है या ऐसे सदस्य को ऐसे अखाद्य या घृणाजनक पदार्थ पीने या खाने के लिए मजबूर करेगा;

() अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य द्वारा दखलकृत परिसरों में या परिसरों के प्रवेश-द्वारा पर मल-मूत्र, मल, पशु-शव या कोई अन्य घृणाजनक पदार्थ इकट्ठा करेगा:

() अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को क्षति करने, अपमानित करने या क्षुब्ध करने के आशय से उसके पड़ोस में मल-मूत्र, कूड़ा, पशु-शव या कोई अन्य घृणाजनक पदार्थ इकट्ठा करेगा;

() अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को जूतों की माला पहनाएगा या नग्न या अर्ध-नग्न घुमाएगा;

() अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य पर बलपूर्वक ऐसा कोई कार्य करेगा जैसे व्यक्ति के कपड़े उतारना, बलपूर्वक सिर का मुण्डन करना, मूंछे हटाना, चेहरे या शरीर को पोतना या ऐसा कोई अन्य कार्य करना, जो मानव गरिमा के विरुद्ध है;

() अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के स्वामित्वाधीन या उसके कब्जे में या उसको आबंटित या किसी सक्षम अधिकारी द्वारा उसको आबंटित किए जाने के लिए अधिसूचित किसी भूमि को सदोष अधिभोग में लेगा या उस पर खेती करेगा या ऐसी भूमि को अंतरित करा लेगा;

() अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य को उसकी भूमि या परिसरों से सदोष बेकब्जा करेगा या किसी भूमि या परिसरों या जल या सिंचाई सुविधाओं पर वन अधिकारों सहित उसके अधिकारों के उपभोग में हस्तक्षेप करेगा या उसकी फसल को नष्ट करेगा या उसके उत्पाद को ले जाएगा;

स्पष्टीकरण. -

खंड () और इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "सदोष" पद में निम्नलिखित सम्मिलित हैं, -

() व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध;

() व्यक्ति की सहमति के बिना;

() व्यक्ति की सहमति से, जहां ऐसी सहमति, व्यक्ति या किसी ऐसे अन्य व्यक्ति को, जिसके व्यक्ति हितबद्ध है, मृत्यु या उपहति का भय दिखाकर, अभिप्राप्त की गई है; या

() ऐसी भूमि के अभिलेखों को बनानाः

() अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को 'बेगार' करने के लिए या सरकार द्वारा लोक प्रयोजनों के लिए अधिरोपित किसी अनिवार्य सेवा से भिन्न अन्य प्रकार के बलात्श्रम या बंधुआ श्रम करने के लिए तैयार करेगा;

() अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को मानव या पशु-शवों की अंत्येष्टि या ले जाने या कब्रों को खोदने के लिए विवश करेगा;

() अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य को हाथ से सफाई करने के लिए तैयार करेगा या ऐसे प्रयोजन के लिए ऐसे सदस्य का नियोजन करेगा या नियोजन को अनुज्ञात करेगा;

() अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की स्त्री को, किसी देवदासी के रूप में पूजा, मंदिर या किसी अन्य धार्मिक संस्थान की देवी, मूर्ति या पात्र के समर्पण को या वैसी ही किसी अन्य प्रथा को निष्पादित या संवर्धन करेगा या पूर्वोक्त कार्यों को अनुज्ञात करेगा;

() अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य को, निम्नलिखित के लिए मजबूर या अभित्रस्त या निवारित करेगा-

() मतदान न करने या किसी विशिष्ट अभ्यर्थी के लिए मतदान करने या विधि द्वारा उपबंधित से भिन्न रीति से मतदान करने

() किसी अभ्यर्थी के रूप में नामनिर्देशन फाइल न करने या ऐसे नामनिर्देशन को प्रत्याहृत करने; या

() किसी निर्वाचन में अभ्यर्थी के रूप में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य के नामनिर्देशन का प्रस्ताव या समर्थन नहीं करेंगे;

() अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी ऐसे सदस्य को, जो संविधान के भाग 9 के अधीन पंचायत या संविधान के भाग 9क के अधीन नगरपालिका का सदस्य या अध्यक्ष या किसी अन्य पद का धारक है, उसके सामान्य कर्तव्यों या कृत्यों के पालन में मजबूर या अभित्रस्त या बाधित करेगा;

() मतदान के पश्चात्, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को उपहति या घोर उपहति या हमला करेगा या सामाजिक या आर्थिक बहिष्कार अधिरोपित करेगा या अधिरोपित करने की धमकी देगा या किसी ऐसी लोक सेवा के उपलब्ध फायदों से, निवारित करेगा, जो उसको प्राप्य हैं;

() किसी विशिष्ट अभ्यर्थी के लिए मतदान करने या उसको मतदान नहीं करने या विधि द्वारा उपबंधित रीति से मतदान करने के लिए अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के विरुद्ध इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध करेगा;

() अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के विरुद्ध मिथ्या, द्वेषपूर्ण या तंग करने वाला वाद या दांडिक या अन्य विधिक कार्यवाहियां संस्थित करेगा:

() किसी लोक सेवक को कोई मिथ्या या तुच्छ सूचना देगा जिससे ऐसा लोक सेवक अपनी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को क्षति करने या क्षुब्ध करने के लिए करेगा;

() अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को अवमानित करने के आशय से लोक दृष्टि में आने वाले किसी स्थान पर अपमानित या अभित्रस्त करेगा;

() लोक दृष्टि में आने वाले किसी स्थान पर जाति के नाम से अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को गाली गलौज करेगा;

() अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों द्वारा सामान्यतया धार्मिक मानी जाने वाली या अति श्रद्धा से ज्ञात किसी वस्तु को नष्ट करेगा, हानि पहुंचाएगा या अपवित्र करेगा;

स्पष्टीकरण. -

इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "वस्तु" पद से अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत मूर्ति, फोटो और रंगचित्र है;

() अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों के विरुद्ध शत्रुता, घृणा या वैमनस्य की भावनाओं की या तो लिखित या मौखिक शब्दों द्वारा या चिहनों द्वारा या दृश्य रूपण द्वारा या अन्यथा, अभिवृद्धि करेगा या अभिवृद्धि करने का प्रयत्न करेगा;

() अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों द्वारा अति श्रद्धा से माने जाने वाले किसी दिवंगत व्यक्ति का या तो लिखित या मौखिक शब्दों द्वारा या किसी अन्य साधन से अनादर करेगा;

() (i) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की किसी स्त्री को साशय, यह जानते हुए स्पर्श करेगा कि वह अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित है, जबकि स्पर्श करने का ऐसा कार्य, लैंगिक प्रकृति का है और प्राप्तिकर्ता की सहमति के बिना है;

(ii) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की किसी स्त्री के बारे में, यह जानते हुए कि वह अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित है, लैंगिक प्रकृति के शब्दों, कार्यों या अंगविक्षेपों का उपयोग करेगा;

स्पष्टीकरण. -

उपखंड (i) के प्रयोजनों के लिए, "सहमति" पद से कोई सुस्पष्ट स्वैच्छिक करार अभिप्रेत है, जब कोई व्यक्ति शब्दों, अंगविक्षेपों या अमौखिक संसूचना के किसी रूप में विनिर्दिष्ट कार्य में भागीदारी की रजामंदी को संसूचित करता है :

परंतु अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की कोई स्त्री, जो लैंगिक प्रकृति के किसी कार्य में शारीरिक अवरोध नहीं करती है, केवल इस तथ्य के कारण लैंगिक क्रियाकलाप में सहमति के रूप में नहीं माना जाएगा :

परंतु यह और कि स्त्री का, अपराधी के साथ सहित, लैंगिक इतिहास, सहमति विवक्षित नहीं करता है या अपराध को कम नहीं करता है;

() अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य द्वारा सामान्यतः उपयोग किए जाने वाले किसी स्रोत, जलाशय या किसी अन्य स्रोत के जल को दूषित या गंदा करेगा जिससे वह ऐसे प्रयोजन के लिए कम उपयुक्त हो जाए जिसके लिए वह साधारणतया उपयोग किया जाता है;

() अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को लोक समागम के किसी स्थान से गुजरने के किसी रूढ़िजन्य अधिकार से इंकार करेगा या ऐसे सदस्य को लोक समागम के ऐसे स्थान का उपयोग करने या उस पर पहुंच रखने से निवारित करने के लिए बाधा पहुंचाएगा जिसमें जनता या उसके किसी अन्य वर्ग के सदस्यों को उपयोग करने और पहुंच रखने का अधिकार है;

() अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को उसका गृह, ग्राम या निवास का अन्य स्थान छोड़ने के लिए मजबूर करेगा या मजबूर करवाएगा:

परंतु इस खंड की कोई बात किसी लोक कर्तव्य के निर्वहन में की गई किसी कार्रवाई को लागू नहीं होगी;

(यक) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य को निम्नलिखित के संबंध में किसी रीति से बाधित या निवारित करेगा, -

() किसी क्षेत्र के सम्मिलित संपत्ति संसाधनों का या अन्य व्यक्तियों के साथ समान रूप से कब्रिस्तान या श्मशान भूमि का उपयोग करना या किसी नदी, सरिता, झरना, कुंआ, तालाब, कुंड, नल या अन्य जलीय स्थान या कोई स्नान घाट, कोई सार्वजनिक परिवहन, कोई सड़क या मार्ग का उपयोग करना;

() साइकिल या मोटर साइकिल आरोहण या सवारी करना या सार्वजनिक स्थानों में जूते या नए कपड़े पहनना या विवाह की शोभा यात्रा निकालना या विवाह को शोभा यात्रा के दौरान घोड़े या किसी अन्य यान पर आरोहण करना;

() जनता या समान धर्म के अन्य व्यक्तियों के लिए खुले किसी पूजा स्थल में प्रविष्ट करना या जाटरस सहित किसी धार्मिक, सामाजिक या सांस्कृतिक शोभा यात्रा में भाग लेना या उसको निकालना;

() किसी शैक्षणिक संस्था, अस्पताल, औषधालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, दुकान या लोक मनोरंजन या किसी अन्य लोक स्थान में प्रविष्ट होने या जनता के लिए खुले किसी स्थान में सार्वजनिक उपयोग के लिए अभिप्रेत कोई उपकरण या वस्तुएं; या

() किसी वृत्तिक में व्यवसाय करना या किसी ऐसी उपजीविका, व्यापार, कारबार या किसी नौकरी में नियोजन करना, जिसमें जनता या उसके किसी वर्ग के अन्य लोगों को उपयोग करने या उस तक पहुंच का अधिकार है;

(यख) जादू-टोना करने या डाइन होने के अभिकथन पर अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य को शारीरिक हानि पहुंचाएगा या मानसिक यंत्रणा देगा; या

(यग) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी व्यक्ति या कुटुंब या उसके किसी समूह का सामाजिक या आर्थिक बहिष्कार करेगा या उसकी धमकी देगा,

वह, कारावास से, जिसको अवधि छह मास से कम की नहीं होगी, किंतु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से, दंडनीय होगा।]

(2) कोई भी व्यक्ति, जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है-

(i) मिथ्या साक्ष्य देगा या गढ़ेगा जिससे उसका आशय अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को ऐसे अपराध के लिए जो तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा मृत्यु दंड से दंडनीय है, दोषसिद्ध कराना है या वह यह जानता है कि उससे उसका दोषसिद्ध होना संभाव्य है, वह आजीवन कारावास से और जुर्माने से दंडनीय होगा; और यदि अनसुचित जाति या अनुसूचित जनजाति से किसी निर्दोष सदस्य को ऐसे मिध्या या गढ़े हुए साक्ष्य के फलस्वरूप दोषसिद्ध किया जाता है और फांसी दी जाती है तो वह व्यक्ति, जो ऐसा मिथ्या साक्ष्य देता है या गढ़ता है, मृत्यु दंड से दंडनीय होगा,

(ii) मिथ्या साक्ष्य देगा और गढ़ेगा जिससे उसका आशय अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को ऐसे अपराध के लिए जो मृत्यु दंड से दंडनीय नहीं है किन्तु सात वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय है, दोषसिद्ध कराना है या वह यह जानता है कि उससे उसका दोषसिद्ध होना संभाव्य है, वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो सात वर्ष या उससे अधिक की हो सकेगी और जुर्माने से, दंडनीय होगा;

(iii) अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि करेगा जिससे उसका आशय अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य की किसी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाना है या वह यह जानता है कि उससे ऐसा होना संभाव्य है वह कारावास से, जिसको अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से, दंडनीय है;

(iv) अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि करेगा जिससे उसका आशय किसी ऐसे भवन को जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य द्वारा साधारणतः पूजा के स्थान के रूप में या मानव आवास के स्थान के रूप में या सम्पत्ति की अभिरक्षा के लिए किसी स्थान के रूप में उपयोग किया जाता है, नष्ट करता है या वह यह जानता है कि उससे ऐसा होना संभाव्य है, वह आजीवन कारावास से और जुमनि से दंडनीय होगा;

(v) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) / भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45)  के अधीन दस वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय कोई अपराध । 1[किसी व्यक्ति या संपत्ति के विरुद्ध यह जानते हुए करेगा कि ऐसा व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य है या ऐसी संपत्ति ऐसे सदस्य की है], वह आजीवन कारावास से, और जुमनि से, दंडनीय होगा; (1-अधिनियम क्रमांक 1 सन् 2016 की धारा 4 (i) () द्वारा दिनांक 26-1-2016 से "किसी व्यक्ति या संपत्ति के विरुद्ध इस आधार पर करेगा कि ऐसा व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य है या ऐसी संपत्ति ऐसे सदस्य की है." शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।)

2[(v) अनुसूची में विनिर्दिष्ट कोई अपराध किसी व्यक्ति या संपत्ति के विरुद्ध, यह जानते हुए करेगा कि ऐसा व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य है या वह संपत्ति ऐसे सदस्य की है, वह ऐसे अपराधों के लिए भारतीय दंड संहिता / भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अधीन यथा विनिर्दिष्ट दंड से दंडनीय होगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।] (2. अधिनियम क्रमांक 1 सन् 2016 की धारा 4(ii) () द्वारा दिनांक 26-1-2016 से अंतःस्थापित।)

(vi) यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि इस अध्याय के अधीन कोई अपराध किया गया है, वह अपराध किये जाने के किसी साक्ष्य को, अपराधी को विधिक दंड से बचाने के आशय से गायब करेगा या उस आशय से अपराध के बारे में कोई जानकारी देगा जो वह जानता है या विश्वास करता है कि वह मिथ्या है, वह उस अपराध के लिए उपबन्धित दंड से दंडनीय होगा; या

(vii) लोक सेवक होते हुए इस धारा के अधीन कोई अपराध करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो उस अपराध के लिए उपबन्धित दंड तक हो सकेगी, दंडनीय होगा।

                                                                           

(2. अधिनियम क्रमांक 1 सन् 2016 की धारा 4(i) द्वारा दिनांक 26-1-2016 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (1) निम्नवत थी: -

" (1) कोई भी व्यक्ति, जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है, -

(i) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को अखाद्य या घृणाजनक पदार्थ पीने या खाने के लिए मजबूर करेगा;

(ii) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के परिसर या पड़ोस में मल-मूत्र, कूड़ा, पशु-शव या कोई अन्य घृणाजनक पदार्थ इकट्ठा करके उसे क्षति पहुंचाने, अपमानित करने या क्षुब्ध करने के आशय से कार्य करेगा;

(iii) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के शरीर से बलपूर्वक कपड़े उतारेगा या उसे नंगा या उसके चेहरे या शरीर को पोतकर घुमाएगा या इसी प्रकार का कोई अन्य ऐसा कार्य करेगा जो मानव के सम्मान के विरुद्ध है;

(iv) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के स्वामित्वाधीन या उसे आबंटित या किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसे आबंटित किये जाने के लिए अधिसूचित किसी भूमि को सदोष अधिभोग में लेगा या उस पर खेती करेगा या उसे आबंटित भूमि को अंतरित करा लेगा;

(v) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को उसकी भूमि या परिसर से सदोष बेकब्जा करेगा या किसी भूमि, परिसर या जल पर उसके अधिकारों के उपभोग में हस्तक्षेप करेगा:

(vi) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को 'बेगार' करने के लिये या सरकार द्वारा लोक प्रयोजनों के लिये अधिरोपित किसी अनिवार्य सेवा से भिन्न अन्य समरूप प्रकार के बलात्श्रम या बंधुआ मजबूरी के लिये विवश करेगा या फुसलाएगा;

(vii) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को मतदान न करने के लिये या किसी विशिष्ट अभ्यर्थी के लिये मतदान करने के लिये या विधि द्वारा उपबन्धित से भिन्न रीति से मतदान करने के लिये मजदूरी या अभित्रस्त करेगा;

(viii) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के विरुद्ध मिथ्या, द्वेषपूर्ण या तंग करने वाला वाद या दाण्डिक या अन्य विधिक कार्यवाही संस्थित करेगा;

(ix) किसी लोक सेवक को कोई मिथ्या या तुच्छ जानकारी देगा और उसके द्वारा अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को क्षति पहुंचाने या क्षुब्ध करने के लिये ऐसे लोक सेवक से उसकी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग कराएगा;

(x) जनता को दृष्टिगोचर किसी स्थान में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य का अपमान करने के आशय से साशय उसको अपमानित या अभित्रस्त करेगा;

(xi) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की किसी महिला का अनादर करने या उसकी लज्जा भंग करने के आशय से हमला या बल प्रयोग करेगा;

(xii) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की किसी महिला की इच्छा को अधिशासित करने की स्थिति में होने पर उस स्थिति का प्रयोग उसका लैंगिक शोषण करने के लिये, जिसके लिये वह अन्यथा सहमत नहीं होती, करेगा;

(xiii) किसी सोस्न, जलाशय या किसी अन्य उद्गम के जल को जो आम तौर पर अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्यों द्वारा उपयोग में लाया जाता है, दूषित या या गंदा करेगा जिससे कि वह उस प्रयोजन के लिये कम उपयुक्त हो जाए जिसके लिये उसका आमतौर पर प्रयोग किया जाता है;

(xiv) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को सार्वजनिक अभिगम के स्थान के मार्ग के किसी रुढ़िजन्य अधिकार से वंचित करेगा या ऐसे सदस्य को बाधा पहुंचाएगा जिससे कि वह ऐसे सार्वजनिक अभिगम के स्थान का उपयोग करने या वहां पहुंचने से निवारित हो जाए जहां जनता के अन्य सदस्यों या उसके किसी भाग को उपयोग करने का या पहुंचने का अधिकार है;

(xv) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को अपना मकान, गांव या अन्य निवास-स्थान छोड़ने के लिए मजबूर करेगा या कराएगा,

वह, कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किंतु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से, दंडनीय होगा।"

1[4. कर्तव्य उपेक्षा के लिए दंड. -

(1) कोई भी लोक सेवक, जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है, इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन उसके द्वारा पालन किए जाने के लिए अपेक्षित अपने कर्तव्यों को जानबूझकर उपेक्षा करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी, किंतु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा।

(1. अधिनियम क्रमांक 1 सन् 2016 को धारा 5 द्वारा दिनांक 26 2016 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व धारा 4 निम्नवत थी:-

"4. कर्तव्यों की उपेक्षा के लिए दंड. -  

कोई भी लोक सेवक, जो अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है. इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा पालन किए जाने के लिए अपेक्षित अपने कर्तव्यों को जानबूझकर उपेक्षा करेगा, यह कारावास से जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किंतु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा।"।)

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट लोक सेवक के कर्तव्यों में निम्नलिखित सम्मिलित होगा, -

() पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी द्वारा सूचनाकर्ता के हस्ताक्षर लेने से पहले मौखिक रूप से दी गई सूचना को, सूचनाकर्ता को पढ़कर सुनाना और उसको लेखबद्ध करना;

() इस अधिनियम और अन्य सुसंगत उपबंधों के अधीन शिकायत या प्रथम सूचना रिपोर्ट को रजिस्टर करना और अधिनियम की उपयुक्त धाराओं के अधीन उसको रजिस्टर करना;

() इस प्रकार अभिलिखित की गई सूचना की एक प्रति सूचनाकर्ता को तुरंत प्रदान करना:

() पीड़ितों या साक्षियों के कथन को अभिलिखित करना;

() अन्वेषण करना और विशेष न्यायालय या अनन्य विशेष न्यायालय में साठ दिन की अवधि के भीतर आरोपपत्र फाइल करना तथा विलंब, यदि कोई हो, लिखित में स्पष्ट करना,

() किसी दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख को सही रूप से तैयार, विरचित करना तथा उसका अनुवाद करना;

() इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों में विनिर्दिष्ट किसी अन्य कर्तव्य का पालन करना:

परंतु लोक सेवक के विरुद्ध इस संबंध में आरोप, प्रशासनिक जांच की सिफारिश पर अभिलिखित किए जाएंगे।

(3) लोक सेवक द्वारा उपधारा (2) में निर्दिष्ट कर्तव्य की अवहेलना के संबंध में संज्ञान विशेष न्यायालय या अनन्य विशेष न्यायालय द्वारा लिया जाएगा और लोक सेवक के विरुद्ध दांडिक कार्रवाइयों के लिए निदेश दिया जाएगा।]

5. पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि के लिए वर्धित दंड. -

कोई व्यक्ति, जो इस अध्याय के अधीन किसी अपराध के लिए पहले ही दोषसिद्ध हो चुका है, दूसरे अपराध या उसके पश्चात्वर्ती किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जाता है, वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो उस अपराध के लिए उपबंधित दंड तक हो सकेगी, दंडनीय होगा।

6. भारतीय दंड संहिता (भारतीय न्याय संहिता) के कतिपय उपबंधों का लागू होना. -

इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) / को धारा 34, अध्याय 3, अध्याय 4, अध्याय 5, अध्याय 5, धारा 149 और अध्याय 23 / भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023का 45) धारा 3(5),  अध्याय 2, अध्याय 3, अध्याय 4, धारा 190  के उपबन्ध, जहां तक हो सकें, इस अधिनियम के लिए उसी प्रकार लागू होंगे जिस प्रकार वे भारतीय दंड संहिता के प्रयोजनों के लिए लागू होते हैं।

7. कतिपय व्यक्तियों की संपत्ति का समपहरण. -

(1) जहां कोई व्यक्ति इस अध्याय के अधीन दंडनीय किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है वहां विशेष न्यायालय, कोई दंड देने  के अतिरिक्त, लिखित रूप में आदेश द्वारा, यह घोषित कर सकेगा कि उस व्यक्ति की कोई सम्पत्ति, स्थावर या जंगम, या दोनों जिनका उस अपराध को करने में प्रयोग किया गया है, सरकार को समपहृत हो जाएगी।

(2) जहां कोई व्यक्ति इस अध्याय के अधीन किसी अपराध का अभियुक्त है, वहां उसका विचारण करने वाला विशेष न्यायालय ऐसा आदेश करने के लिए स्वतंत्र होगा कि उसकी सभी या कोई संपत्ति, स्थावर या जंगम या दोनों, ऐसे विचारण की अवधि के दौरान, कुर्क की जाएंगी और जहां ऐसे विचारण का परिणाम दोषसिद्धि है वहां इस प्रकार कुर्क की गई संपत्ति उस सीमा तक समपहरण के दायित्वाधीन होगी जहां तक वह इस अध्याय के अधीन अधिरोपित किसी जुर्माने की वसूली के प्रयोजन के लिए अपेक्षित है।

8. अपराधों के बारे में उपधारणा. -

इस अध्याय के अधीन किसी अपराध के लिए अभियोजन में, यदि यह साबित हो जाता है कि, -

() अभियुक्त ने इस अध्याय के अधीन अपराध करने के 1[ अभियुक्त व्यक्ति द्वारा या युक्तियुक्त रूप से संदेहास्पद व्यक्ति द्वारा किए गए अपराधों के संबंध में कोई वित्तीय सहायता की है] तो विशेष न्यायालय, जब तक कि तत्प्रतिकूल साबित न किया जाए, यह उपधारणा करेगा कि ऐसे व्यक्ति ने उस अपराध का दुष्प्रेरण किया है; (1.अधिनियम क्रमांक 1 सन् 2016 की धारा 6 (i) द्वारा दिनांक 26-1-2016 से "अभियुक्त व्यक्ति की युक्तियुक्त रूप से संदेहास्पद व्यक्ति की वित्तीय सहायता की है" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।)

() व्यक्तियों के किसी समूह ने इस अध्याय के अधीन अपराध किया है, और यदि यह साबित हो जाता है कि किया गया अपराध भूमि या किसी अन्य विषय के बारे में किसी विद्यमान विवाद का फल है तो यह उपधारणा की जाएगी कि यह अपराध सामान्य आशय या सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने के लिए किया गया था।

2[ () अभियुक्त, पीड़ित या उसके कुटुंब का व्यक्तिगत ज्ञान रखता था, न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि जब तक अन्यथा साबित न हो, अभियुक्त को पीड़ित की जाति या जनजातीय पहचान का ज्ञान था।] (2. अधिनियम क्रमांक 1 सन् 2016 की धारा 6 (ii) द्वारा दिनांक 26-1-2016 से अंतःस्थापित।)

9. शक्तियों का प्रदान किया जाना. -

(1) संहिता में या इस अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध में किसी बात के होते हुए भी, यदि राज्य सरकार ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझती है, तो वह-

() इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के निवारण के लिए, उससे निपटने के लिए, या

() इस अधिनियम के अधीन किसी मामले या मामलों के वर्ग या समूह के लिए,

किसी जिले या उसके किसी भाग में, राज्य सरकार के किसी अधिकारी को राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे जिले या उसके भाग में संहिता के अधीन पुलिस अधिकारी द्वारा प्रयोक्तव्य शक्तियां या यथास्थिति, ऐसे मामले या मामलों के वर्ग या समूह के लिए, और विशिष्टतया किसी विशेष न्यायालय के समक्ष व्यक्तियों की गिरफ्तारी, अन्वेषण पर अभियोजन की शक्तियां प्रदान कर सकेगी।

(2) पुलिस के सभी अधिकारी और सरकार के अन्य सभी अधिकारी इस अधिनियम के उसके अधीन बनाये गए किसी नियम, स्कीम या आदेश के उपबंधों के निष्पादन में उपधारा (1) निर्दिष्ट अधिकारी की सहायता करेंगे।

(3) संहिता के उपबंध, जहां तक हो सके, उपधारा (1) के अधीन किसी अधिकारी द्वारा शक्तियों के प्रयोग के संबंध में लागू होंगे।

 

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