धारा 10 से 13 अध्याय 3 निष्कासन

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 3

निष्कासन

10. ऐसे व्यक्ति को हटाया जाना जिसके द्वारा अपराध किए जाने की संभावना है.-

(1) जहां विशेष न्यायालय का, परिवाद की पुलिस रिपोर्ट पर, यह समाधान हो जाता है कि संभाव्यता है कि कोई व्यक्ति संविधान के अनुच्छेद 244 1[या धारा 21 की उपधारा (2) के खंड (vii) के उपबंधों के अधीन पहचान किए गए किसी क्षेत्र] में यथानिर्दिष्ट 'अनुसूचित क्षेत्रों' या 'जनजाति क्षेत्रों' में सम्मिलित किसी क्षेत्र में इस अधिनियम के अध्याय 2 के अधीन कोई अपराध करेगा वहां वह, लिखित आदेश द्वारा, ऐसे व्यक्ति को यह निदेश दे सकेगा कि वह ऐसे क्षेत्र की सीमाओं से परे, ऐसे मार्ग से होकर और इतने समय के भीतर हट जाए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट किये जाएं, और 2[ तीन वर्ष] से अनधिक ऐसी अवधि के लिये जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, उस क्षेत्र में जिससे हट जाने का उसे निदेश दिया गया था, वापस न लौटे।

(1. अधिनियम क्रमांक सन् 2016 की धारा 7 () द्वारा दिनांक 26-1-2016 से अंतःस्थापित।

2. अधिनियम क्रमांक 1 सन् 2016 की धारा 7 () द्वारा दिनांक 26-1-2016 से "दो वर्ष" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।)

(2) विशेष न्यायालय उपधारा (1) के अधीन आदेश के साथ उस उपधारा के अधीन निर्दिष्ट व्यक्ति को वे आधार संसूचित करेगा जिन पर वह आदेश किया गया है।

(3) विशेष न्यायालय उस व्यक्ति द्वारा जिसके विरुद्ध ऐसा आदेश किया गया है, या उसकी ओर से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा आदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर किये गये अभ्यावेदन पर ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किये जाएंगे उपधारा (1) के अधीन किये गये आदेश को प्रतिसंहृत या उपान्तरित कर सकेगा।

11. किसी व्यक्ति द्वारा संबंधित क्षेत्र से हटने में असफल रहने और वहां से हटने के पश्चात् उसमें प्रवेश करने की दशा में प्रक्रिया. -

(1) यदि कोई व्यक्ति जिसको धारा 10 के अधीन किसी क्षेत्र से हट जाने के लिये कोई निदेश जारी किया गया है-

(क) निदेश किये गये रूप में हटने में असफल रहता है; या

(ख) इस प्रकार हटने के पश्चात् उपधारा (2) के अधीन विशेष न्यायालय की लिखित अनुज्ञा के बिना उस क्षेत्र में ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर प्रवेश करता है,

तो विशेष न्यायालय उसे गिरफ्तार करा सकेगा और उसे उस क्षेत्र के बाहर ऐसे स्थान पर, जो विशेष न्यायालय विनिर्दिष्ट करे, पुलिस अभिरक्षा में हटवा सकेगा।

(2) विशेष न्यायालय, लिखित आदेश द्वारा, किसी ऐसे व्यक्ति को जिसके विरुद्ध धारा 10 के अधीन आदेश किया गया है, अनुज्ञा दे सकेगा कि वह उस क्षेत्र में जहां से हट जाने का उसे निदेश दिया गया था ऐसी अस्थायी अवधि के लिए और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, लौट सकता है और अधिरोपित शर्तों के सम्यक् अनुपालन के लिये उससे अपेक्षा कर सकेगा कि वह प्रतिभू सहित या उसके बिना, बन्धपत्र निष्पादित करे।

(3) विशेष न्यायालय किसी भी समय ऐसी अनुज्ञा को प्रतिसंहृत कर सकेगा।

(4) ऐसा व्यक्ति, जो ऐसी अनुज्ञा से उस क्षेत्र में वापस आता है, जिससे उसे हटने के लिये निदेश दिया गया था, अधिरोपित शर्तों का अनुपालन करेगा और जिस अस्थायी अवधि के लिये लौटने की उसे अनुज्ञा दी गई थी उसके अवसान पर या ऐसी अवधि के अवसान के पूर्व ऐसी अनुज्ञा के प्रतिसंहृत किए जाने पर ऐसे क्षेत्र के बाहर हट जाएगा और धारा 10 के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि के अनवसित भाग के भीतर नई अनुज्ञा के बिना वहां नहीं लौटेगा।

(5) यदि कोई व्यक्ति अधिरोपित शर्तों में से किसी का पालन करने में या तदनुसार स्वयं को हटाने में असफल रहेगा या इस प्रकार हट जाने के पश्चात् ऐसे क्षेत्र में नई अनुज्ञा के बिना प्रवेश प करेगा या लौटेगा तो विशेष न्यायालय उसे गिरफ्तार करा सकेगा और उसे क्षेत्र के बाहर ऐसे स्थान को, जो विशेष न्यायालय विनिर्दिष्ट करे, पुलिस अभिरक्षा से हटवा सकेगा।

12. ऐसे व्यक्तियों के, जिसके विरुद्ध धारा 10 के अधीन आदेश किया गया है, माप और फोटो आदि लेना.-

(1) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जिसके विरुद्ध धारा 10 के अधीन आदेश किया गया है, विशेष न्यायालय द्वारा ऐसी अपेक्षा की जाने पर, किसी पुलिस अधिकारी को अपने माप और फोटो लेने देगा।

(2) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई व्यक्ति, जिससे यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने माप या फोटो लेने दे, इस प्रकार माप या फोटो लिए जाने का प्रतिरोध करता है या उससे इंकार करता है, तो यह विधिपूर्ण होगा कि माप या फोटो लिए जाने को सुनिश्चित करने के लिये सभी आवश्यक उपाय किए जाएं।

(3) उपधारा (2) के अधीन लिये जाने वाले माप या फोटो का प्रतिरोध या उससे इंकार करने को भारतीय दंण्ड संहिता (1860 का 45) / की धारा 186  भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023का 45) / की धारा 221 के अधीन अपराध समझा जाएगा।

(4) जहां धारा 10 के अधीन किया गया आदेश प्रतिसंहृत कर दिया जाता है वहां उपधारा (2) के अधीन लिये गये सभी माप और फोटो (जिसके अंतर्गत नेगेटिव भी हैं) नष्ट कर दिए जाएंगे या उस व्यक्ति को सौंप दिए जाएंगे जिसके विरुद्ध आदेश किया गया था।

13. धारा 10 के अधीन आदेश के अननुपालन के लिए शास्ति.-

वह व्यक्ति, जो धारा 10 के अधीन किये गये विशेष न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करेगा, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से, दंडनीय होगा।

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