
(1) शीघ्र विचारण का उपबंध करने के प्रयोजन के लिए, राज्य सरकार, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति की सहमति से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, एक या अधिक जिलों के लिए एक अनन्य विशेष न्यायालय स्थापित करेगी :
(1. अधिनियम क्रमांक 1 सन् 2016 की धारा 8 द्वारा दिनांक 26-1-2016 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व धारा 14 निम्नवत थी :-
"14. विशेष न्यायालय.-- राज्य सरकार, शीघ्र विचारण का उपबंध करने के प्रयोजन के लिये, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति की सहमति से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन अपराधों का विचारण करने के लिये प्रत्येक जिले के लिये एक सेशन न्यायालय को विशेष न्यायालय के रूप में विनिर्दिष्ट करेगी।")
परंतु ऐसे जिलों में जहां अधिनियम के अधीन कम मामले अभिलिखित किए गए हैं, वहां राज्य सरकार, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति की सहमति से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे जिलों के लिए सेशन न्यायालयों को, इस अधिनियम के अधीन अपराधों का विचारण करने के लिए विशेष न्यायालय होना विनिर्दिष्ट करेगी :
परंतु यह और कि इस प्रकार स्थापित या विनिर्दिष्ट न्यायालयों को इस अधिनियम के अधीन अपराधों का सीधे संज्ञान लेने की शक्ति होगी।
(2) राज्य सरकार का, यह सुनिश्चित करने के लिए, पर्याप्त संख्या में न्यायालयों की स्थापना करने का कर्तव्य होगा कि इस अधिनियम के अधीन मामले, यथासंभव, दो मास की अवधि के भीतर निपटाए गए हैं।
(3) विशेष न्यायालय या अनन्य विशेष न्यायालय में प्रत्येक विचारण में कार्यवाहियां, दिन-प्रतिदिन के लिए जारी रहेंगी, जब तक कि उपस्थित सभी साक्षियों की अभिलिखित होने वाले कारणों से उसको आगामी दिन से परे स्थगन करना आवश्यक नहीं पाता हो :
परंतु जब विचारण, इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध से संबंधित है, तब विचारण, यथासंभव, आरोप पत्र को फाइल करने की तारीख से दो मास की अवधि के भीतर पूरा किया जाएगा।]
(1) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) / भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (2023 का 46) में किसी बात के होते हुए भी, किसी विशेष न्यायालय या किसी अनन्य विशेष न्यायालय के किसी निर्णय, दंडादेश या आदेश, जो अंतर्वर्ती आदेश नहीं है, के विरुद्ध अपील तथ्यों और विधि दोनों के संबंध में, उच्च न्यायालय में होगी। (1. अधिनियम क्रमांक 1 सन् 2016 की धारा 9 द्वारा दिनांक 26-1-2016 से अंतःस्थापित।)
(2) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 378 की उपधारा (3) / भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (2023 का 46) धारा 419 की उपधारा (3) में किसी बात के होते हुए भी, विशेष न्यायालय या अनन्य विशेष न्यायालय के जमानत मंजूर करने या नामंजूर करने के किसी आदेश के विरुद्ध अपील उच्च न्यायालय में होगी।
(3) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के अधीन प्रत्येक अपील, ऐसे निर्णय, दंडादेश या आदेश से, जिससे अपील की गई है, नब्बे दिन के भीतर की जाएगी :
परंतु उच्च न्यायालय, नब्बे दिन की उक्त अवधि की समाप्ति के पश्चात् ऐसी अपील को ग्रहण कर सकेगा यदि उसका समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी के पास नब्बे दिन के भीतर अपील नहीं करने का पर्याप्त कारण था :
परंतु यह और कि कोई अपील, एक सौ अस्सी दिन की अवधि की समाप्ति के पश्चात् ग्रहण नहीं की जाएगी।
(4) उपधारा (1) में की गई प्रत्येक अपील का निपटारा, यथासंभव, अपील ग्रहण करने की तारीख से तीन मास की अवधि के भीतर होगा।]
(1) राज्य सरकार, प्रत्येक विशेष न्यायालय के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा एक लोक अभियोजक विनिर्दिष्ट करेगी या किसी ऐसे अधिवक्ता को, जिसने कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में विधि - व्यवसाय किया हो, उस न्यायालय में मामलों के संचालन के प्रयोजन के लिए विशेष लोक अभियोजक के रूप में नियुक्ति करेगी।
(2) राज्य सरकार, प्रत्येक अनन्य विशेष न्यायालय के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अनन्य विशेष लोक अभियोजक को विनिर्दिष्ट करेगी या किसी ऐसे अधिवक्ता को, जिसने कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में विधि-व्यवसाय किया हो, उस न्यायालय में मामलों के संचालन के प्रयोजन के लिए अनन्य विशेष लोक अभियोजक के रूप में नियुक्त करेगी।]
(2. अधिनियम क्रमांक 1 सन् 2016 की धारा 10 द्वारा दिनांक 26-1-2016 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व धारा 15 निम्नवत थी:-
"15. विशेष लोक अभियोजक. -- राज्य सरकार, प्रत्येक विशेष न्यायालय के लिये, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, एक लोक अभियोजक विनिर्दिष्ट करेगी या किसी ऐसे अधिवक्ता को, जिसने कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में विधि-व्यवसाय किया हो, उस न्यायालय में मामलों के संचालन के प्रयोजन के लिये विशेष लोक अभियोजक के रूप में नियुक्त करेगी।"। )