
(1. अधिनियम क्रमांक । सन् 2016 की धारा 11 द्वारा दिनांक 26-1-2016 से अंतःस्थापित।)
(1) राज्य का, किसी प्रकार के अभित्रास, प्रपीड़न या उत्प्रेरणा या हिंसा या हिंसा की धमकियों के विरुद्ध पीड़ितों, उसके आश्रितों और साक्षियों के संरक्षण के लिए व्यवस्था करना, कर्तव्य और उत्तरदायित्व होगा।
(2) पीड़ित से निष्पक्षता, सम्मान और गरिमा के साथ तथा किसी ऐसी विशेष आवश्यकता के साथ, जो पीड़ित की आयु या लिंग या शैक्षणिक अलाभ या गरीबी के कारण उत्पन्न होती है, व्यवहार किया जाएगा।
(3) किसी पीड़ित या उसके आश्रित को, किसी न्यायालय की कार्यवाही की युक्तियुक्त, यथार्थ और समय से सूचना का अधिकार होगा, जिसमें जमानत प्रक्रिया सम्मिलित है और विशेष लोक अभियोजक या राज्य सरकार पीड़ित को इस अधिनियम के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के बारे में सूचित करेगी।
(4) किसी पीड़ित या उसके आश्रित को, यथास्थिति, विशेष न्यायालय या अनन्य विशेष न्यायालय को, किन्हीं दस्तावेजों या सारवान साक्षियों को प्रस्तुत करने के लिए पक्षकारों को समन करने या उपस्थित व्यक्तियों की परीक्षा करने के लिए आवेदन करने का अधिकार होगा।
(5) कोई पोड़ित या उसका आश्रित, इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही में अभियुक्त को जमानत, उन्मोचन, निर्मुक्ति, परिवीक्षा, सिद्धदोष या दंडादिष्ट या सिद्धदोष, दोषमुक्त या दंडादिष्ट पर या किसी संबद्ध कार्यवाहियों या बहसों और सिद्धदोष करने के संबंध में कोई संबद्ध कार्यवाहियां या बहसें और लिखित तर्क फाइल करने के संबंध में किन्हीं कार्यवाहियों में सुने जाने का हकदार होगा।
(6) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) / भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन किसी मामले का विचारण करने वाला विशेष न्यायालय या अनन्य विशेष न्यायालय, पीड़ित, उसके आश्रित, सूचनाकर्ता या साक्षियों को निम्नलिखित प्रदान करेगा, -
(क) न्याय प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए पूर्ण संरक्षण;
(ख) अन्वेषण, जांच और विचारण के दौरान यात्रा तथा भरण-पोषण व्यय, और
(ग) अन्वेषण, जांच और विचारण के दौरान सामाजिक-आर्थिक पुनर्वास;
(घ) पुनः अवस्थान ।
(7) राज्य, संबद्ध विशेष न्यायालय या अनन्य विशेष न्यायालय को किसी पीड़ित या उसके आश्रित, सूचनाकर्ता या साक्षियों को प्रदान किए गए संरक्षण के बारे में सूचित करेगा और ऐसा न्यायालय प्रस्थापित किए गए संरक्षण का आवधिक रूप में पुनर्विलोकन करेगा तथा समुचित आदेश पारित करेगा।
(8) उपधारा (6) के उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, संबद्ध विशेष न्यायालय या अनन्य विशेष न्यायालय उसके समक्ष किन्हीं कार्यवाहियों में किसी पीड़ित या उसके आश्रित, सूचनाकर्ता या साक्षी द्वारा या ऐसे पीड़ित, सूचनाकर्ता या साक्षी के संबंध में विशेष लोक अभियोजक द्वारा किए गए आवेदन पर या स्वेच्छा से ऐसे उपाय, जिनमें निम्नलिखित सम्मिलित हैं, कर सकेगा, -
(क) जनता की पहुंच योग्य मामले के उसके आदेशों या निर्णयों में या किन्हीं अभिलेखों में साक्षियों के नाम और पतों को छुपाना;
(ख) साक्षियों की पहचान और पत्तों का अप्रकटन करने के लिए निदेश जारी करना;
(ग) पीड़ित, सूचनाकर्ता या साक्षी के उत्पीड़न से संबंधित किसी शिकायत के संबंध में तुरंत कार्रवाई करना और उसी दिन, यदि आवश्यक हो, संरक्षण के लिए समुचित आदेश पारित करना :
परन्तु खंड (ग) के अधीन प्राप्त शिकायत में जांच या अन्वेषण ऐसे न्यायालय द्वारा मुख्य मामले से पृथक् रूप से विचारित किया जाएगा और शिकायत की प्राप्ति की तारीख से दो मास की अवधि के भीतर पूरा किया जाएगा:
परन्तु यह और कि जहां खंड (ग) के अधीन कोई शिकायत लोक सेवक के विरुद्ध है, वहां न्यायालय ऐसे लोक सेवक को न्यायालय की अनुज्ञा के सिवाय, लंबित मामले से संबंधित या असंबंधित किसी विषय में, यथास्थिति, पीड़ित सूचनाकर्ता या साक्षी के साथ हस्तक्षेप से अवरुद्ध करेगा।
(9) अन्वेषण अधिकारी और थाना अधिकारी का, पीड़ित, सूचनाकर्ता या साक्षियों केअभित्रास, प्रपीड़न या उत्प्रेरणा या हिंसा या हिंसा की धमकियों के विरुद्ध शिकायत को अभिलिखित करने का कर्तव्य होगा, चाहे वह मौखिक रूप से या लिखित में दी गई हो, और प्रथम सूचना रिपोर्ट की एक फोटो प्रति उनको तुरंत निःशुल्क दी जाएगी।
(10) इस अधिनियम के अधीन अपराधों से संबंधित सभी कार्यवाहियां वीडियो अभिलिखित होंगी।
(11) संबद्ध राज्य का, न्याय प्राप्त करने में पीड़ितों और साक्षियों के निम्नलिखित अधिकारों और हकों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एक समुचित स्कीम विनिर्दिष्ट करने का कर्तव्य होगा, जिससे, -
(क) अभिलिखित प्रथम सूचना रिपोर्ट की निःशुल्क प्रति प्रदान की जा सके;
(ख) अत्याचार से पीड़ितों या उनके आश्रितों को नकद या वस्तु में तुरंत राहत प्रदान की जा सके;
(ग) अत्याचार से पीड़ितों या उनके आश्रितों और साक्षियों को आवश्यक संरक्षण प्रदान किया जा सके;
(घ) मृत्यु या उपहति या संपत्ति को नुकसान के संबंध में राहत प्रदान की जा सके;
(ङ) पीड़ितों को खाद्य या जल या कपड़े या आश्रय या चिकित्सीय सहायता या परिवहन सुविधा या प्रति दिन भत्तों की व्यवस्था की जा सके;
(च) अत्याचार से पीड़ितों और उनके आश्रितों को भरण-पोषक व्यय प्रदान किया जा सके; और
(छ) शिकायत करने और प्रथम सूचना रिपोर्ट रजिस्टर करने के समय अत्याचार से पीड़ितों के अधिकारों के बारे में जानकारी प्रदान की जा सके;
(ज) अभित्रास तथा उत्पीड़न के अत्याचार से पीड़ितों या उनके आश्रितों और साक्षियों को संरक्षण प्रदान किया जा सके;
(झ) अन्वेषण और आरोपपत्र की प्राप्ति पर अत्याचार से पीड़ितों या उनके आश्रितों या सहयुक्त संगठनों को जानकारी प्रदान की जा सके तथा निःशुल्क आरोपपत्र की प्रति प्रदान की जा सके;
(ञ) चिकित्सीय परीक्षा के समय आवश्यक पूर्वावधानियां की जा सकें;
(ट) राहत रकम के संबंध में अत्याचार से पीड़ितों या उनके आश्रितों या सहयुक्त संगठनों को जानकारी प्रदान की जा सके;
(ठ) अन्वेषण और विचारण की तारीख और स्थान के बारे में अग्रिम रूप से अत्याचार से पीड़ितों या उनके आश्रितों या सहयुक्त संगठनों को जानकारी प्रदान की जा सके;
(ड) अत्याचार से पीड़ितों या उनके आश्रितों या सहयुक्त संगठनों या व्यष्टिकों के मामले पर और विचारण की तैयारी के लिए पर्याप्त टिप्पण दिया जा सके तथा उक्त प्रयोजन के लिए विधिक सहायता प्रदान की जा सके;
(ढ़) इस अधिनियम के अधीन कार्यवाहियों के प्रत्येक क्रम पर अत्यचार पीड़ितों या उनके आश्रितों या सहयुक्त संगठनों या व्यष्टिकों के अधिकारों का निष्पादन किया जा सके और अधिकारों के निष्पादन के लिए आवश्यक सहायता प्रदान की जा सके।
(12) अत्याचार से पीड़ितों या उनके आश्रितों का गैर-सरकारी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं या अधिवक्ताओं से सहायता लेने का अधिकार होगा।]