
"समाश्रित संविदा" वह संविदा है जो ऐसी संविदा से साम्पाश्विक किसी घटना के घटित होने या न होने पर ही किसी बात को करने या न करने के लिये हो।
ख से क संविदा करता है कि यदि ख का गृह जल जाए तो वह ख को 10,000 रुपये देगा। यह समाश्रित संविदा है।
उन समाश्रित संविदाओं का प्रवर्तन, जो किसी अनिश्चित भावी घटना के घटित होने पर किसी बात को करने या न करने के लिये हों, विधि द्वारा नहीं कराया जा सकता, यदि और जब तक वह घटना घटित न हो गई हो।
यदि वह घटना असम्भव हो जाये तो ऐसी संविदायें शून्य हो जाती हैं।
(क) ख से क संविदा करता है कि यदि ग के मरने के पश्चात् क जीवित रहा तो वह ख का घोड़ा खरीद लेगा। इस संविदा का प्रवर्तन विधि द्वारा नहीं कराया जा सकता यदि और जब तक क के जीवन-काल मेंग मर न जाये।
(ख) ख से क संविदा करता है कि यदि ग ने, जिससे घोड़ा बेचने की प्रस्थापना की गई है, उसे खरीदने से इन्कार कर दिया तो वह ख को वह घोड़ा विनिर्दिष्ट कीमत पर बेच देगा; इस संविदा का प्रवर्तन विधि द्वारा नहीं कराया जा सकता यदि और जब तक ग घोड़े को खरीदने से इन्कार न कर दे।
(ग) क यह संविदा करता है कि जब ग से ख विवाह कर लेगा तो ख को क एक नियत धनराशि देगा। ख से विवाह हुए बिना ग मर जाती है। संविदा शून्य हो जाती है।
उन समाश्रित संविदाओं का प्रवर्तन, जो किसी अनिश्चित भावी घटना के घटित न होने पर किसी बात को करने या न करने के लिये हों, तब कराया जा सकता है जब उस घटना का घटित होना असम्भव हो जाये उससे पूर्व नहीं ।
क करार करता है कि यदि अमुक पोत वापस न आए तो वह ख को एक धनराशि देगा। वह पोत डूब जाता है। संविदा का प्रवर्धन पोत के डूब जाने पर कराया जा सकता है।
यदि वह भावी घटना, जिस पर कोई संविदा समाश्रित है, इस प्रकार हो जिस प्रकार से कोई व्यक्ति किसी अविनिर्दिष्ट समय पर कार्य करेगा, तो वह घटना असम्भव हुई तब समझी जाएगी जब ऐसा व्यक्ति कोई ऐसी बात करे जो किसी भी परिमित समय के भीतर या उत्तरभावी आकस्मिकताओं के बिना उस व्यक्ति द्वारा वैसा किया जाना असम्भव कर दे।
क करार करता है कि यदि ग से ख विवाह करे तो वह ख को एक धनराशि देगा। घ से ग विवाह कर लेती है। अब ग से ख का विवाह असम्भव समझा जाना चाहिये यद्यपि यह सम्भव है कि घ की मृत्यु हो जाये और तत्पश्चात् ख से ग विवाह कर ले।
समाश्रित संविदाएँ जो किसी विनिर्दिष्ट अनिश्चित घटना के किसी नियत समय के भीतर घटित होने पर किसी बात को करने या न करने के लिए हो शून्य हो जाती हैं यदि उस नियत समय के अवसान पर ऐसी घटना न घटित हुई हो या यदि उस नियत समय से पूर्व ऐसी घटना असंभव हो जाए।
समाश्रित संविदाएँ जो किसी विनिर्दिष्ट अनिश्चित घटना के किसी नियत समय के भीतर घटित न होने पर किसी बात को करने या न करने के लिए हो विधि द्वारा तब प्रवर्तित कराई जा सकेंगी जब उस नियत समय का अवसान हो गया हो और ऐसी घटना घटित न हुई हो या उस नियत समय के अवसान से पूर्व यह निश्चित हो जाए कि ऐसी घटना घटित नहीं होगी।
(क) क वचन देता है कि यदि अमुक पोत एक वर्ष के भीतर वापस आ जाये तो वह ख को एक धनराशि देगा। यदि पोत उस वर्ष के भीतर वापस आ जाये तो संविदा का प्रवर्तन कराया जा सकेगा और यदि पोत उस वर्ष के भीतर जल जाये तो संविदा शून्य जायेगी।
(ख) क वचन देता है कि यदि अमुक पोत एक वर्ष के भीतर न लौटे तो वह ख को एक धनराशि देगा। यदि पोत उस वर्ष के भीतर न लौटे या उस वर्ष के भीतर जल जाए तो संविदा का प्रवर्तन कराया जा सकेगा।
समाश्रित करार, जो किसी असम्भव घटना के घटित होने पर ही कोई बात करने या न करने के लिये हों, शून्य हैं, चाहे घटना की असम्भवता करार के पक्षकारों को उस समय ज्ञात थी या नहीं जब करार किया गया था।
(क) क करार करता है कि यदि दो सरल रेखाएँ किसी स्थान को घेर लें तो वह ख को 1,000 रुपये देगा। करार शून्य है।
(ख) क करार करता है कि यदि क की पुत्री ग से ख विवाह कर ले तो वह ख को 1,000 रुपये देगा। करार के समय ग मर चुकी थी। करार शून्य है।