
(1) महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट या इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से सशक्त द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट, किसी ऐसे व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए, जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि उसने इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय कोई अपराध किया है या किसी ऐसे भवन, प्रवहण या स्थान की, जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वहाँ कोई ऐसी स्वापक ओषधि या मनःप्रभावी पदार्थ या नियंत्रित पदार्थ जिसकी बाबत इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय कोई अपराध किया गया है, या कोई ऐसी दस्तावेज या अन्य वस्तु जो ऐसे अपराध के किए जाने का साक्ष्य हो सकती है, या कोई ऐसी अवैध रूप से अर्जित संपत्ति या कोई ऐसी दस्तावेज या अन्य वस्तु, जो अवैध रूप से अर्जित ऐसी कोई सम्पत्ति धाराण करने का साक्ष्य हो सकती है जो इस अधिनियम के अध्याय 5क के अधीन अभिग्रहण या स्थिरीकरण या समपरहण के लिए दायी है, रखी या छिपाई गई है, दिन में या रात में, तलाशी के लिए वारण्ट जारी कर सकेगा। (1. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से प्रतिस्थापित।)
(2) केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, स्वापक, सीमाशुल्क, राजस्व आसूचना विभागों या केन्द्रीय सरकार के किसी अन्य विभाग का, जिसके अन्तर्गत पैरा सैन्य बल या सशस्त्र बल भी हैं, राजपत्रित पंक्ति का ऐसा कोई अधिकारी जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस निमित्त सशक्त किया जाता है, अथवा किसी राज्य सरकार के राजस्व, ओषधि नियंत्रण, उत्पाद शुल्क, पुलिस या किसी अन्य विभाग का कोई ऐसा अधिकारी, जिसे राज्य सरकार के, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस निमित्त सशक्त किया जाता है, यदि उसके पास व्यक्तिगत जानकारी या किसी व्यक्ति द्वारा दी गई और लिखी गई इत्तिला से यह विश्वास करने का कारण है कि किसी व्यक्ति ने इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय कोई अपराध किया है अथवा कोई ऐसी स्वापक ओषधि या मनः प्रभावी पदार्थ या नियंत्रित पदार्थ जिसकी बाबत इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय कोई अपराध किया गया है या कोई ऐसी दस्तावेज या अन्य वस्तु जो ऐसे अपराध के किए जाने के साक्ष्य हो सकती है या अवैध रूप से अर्जित कोई ऐसी संपत्ति या कोई दस्तावेज या अन्य वस्तु, जो अवैध रूप से अर्जित ऐसी कोई सम्पत्ति धारण करने का साक्ष्य हो सकती है जो इस अधिनियम के अध्याय 5क के अधीन अभिग्रहण या स्थिरीकरण या समपहरण के लिए दायी है किसी भवन, प्रवहण या स्थान में रखी या छिपाई गई है, अपने अधीनस्थ किन्तु किसी चपरासी, सिपाही, या कांस्टेबल की पंक्ति से वरिष्ठ किसी अधिकारी को ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए अथवा किसी भवन, प्रवहण या स्थान की, दिन में या रात में, तलाशी लेने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा अथवा स्वयं ऐसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा या ऐसे भवन, प्रवहण या स्थान की तलाशी ले सकेगा।
(3) ऐसे अधिकारी को, जिसको उपधारा (1) के अधीन कोई वारण्ट सम्बोधित किया जाता है और ऐसे अधिकारी को, जो गिरफ्तारी या तलाशी को प्राधिकृत करता है, या ऐसे अधिकारी को, जिसे उपधारा (2) के अधीन इस प्रकार प्राधिकृत किया जाता है, धारा 42 के अधीन कार्य करने वाले अधिकारी की सभी शक्तियाँ होंगी।]
(1) केन्द्रीय उत्पादक-शुल्क स्वापक, सीमाशुल्क, राजस्व आसूचना विभागों या केन्द्रीय सरकार के किसी अन्य विभाग का, जिसके अन्तर्गत पैरा सैन्य बल या सशस्त्र बल भी हैं, कोई ऐसा अधिकारी (जो किसी चपरासी, सिपाही या कांस्टेबल की पंक्ति से वरिष्ठ अधिकारी है), जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस निमित्त सशक्त किया जाता है, अथवा किसी राज्य सरकार के राजस्व, ओषधि नियंत्रण, उत्पाद शुल्क, पुलिस या किसी अन्य विभाग का कोई ऐसा अधिकारी (जो किसी चपरासी, सिपाही या कांस्टेबल की पंक्ति से वरिष्ट अधिकारी है), जिसे राज्य सरकार के साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त सशक्त किया जाता है, यदि उसके पास व्यक्तिगत जानकारी या किसी व्यक्ति द्वारा दी गई और लिखी गई इत्तिला से यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसी कोई स्वापक ओषधि या मनःप्रभावी पदार्थ या नियंत्रित पदार्थ जिसकी बाबत इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय कोई अपराध किया गया है, या कोई ऐसी दस्तावेज या अन्य वस्तु, जो ऐसे अपराध के किए जाने का साक्ष्य हो सकती है या अवैध रूप से अर्जित कोई ऐसी सम्पत्ति या कोई ऐसी दस्तावेज या अन्य वस्तु, जो अवैध रूप से अर्जित कोई ऐसी संपत्ति धारण करने का साक्ष्य हो सकती है जो इस अधिनियम के अध्याय 5क के अधीन अभिग्रहण या स्थिरीकरण या समपहरण के लिए दायी हैं, किसी भवन, प्रवहण या परिवेष्टित स्थान में रखी या छिपाई गई है, सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच, - (1. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से प्रतिस्थापित।)
(क) किसी ऐसे भवन, प्रवहण या स्थान में प्रवेश कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा ;
(ख) प्रतिरोध की दशा में, किसी द्वार को तोड़ सकेगा और ऐसे प्रवेश करने में किसी अन्य बाधा को हटा सकेगा।
(ग) ऐसी ओषधि या पदार्थ और उसके विनिर्माण में प्रयुक्त सभी सामग्री तथा किसी अन्य वस्तु और किसी जीवजन्तु या प्रवहण को, जिसकी बाबत उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह इस अधिनियम के अधीन अधिहरणीय है और किसी ऐसी दस्तावेज या अन्य वस्तु को, जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के किए जाने का साक्ष्य हो सकती है या अवैध रूप से अर्जित कोई ऐसी संपत्ति धारण करने का साक्ष्य हो सकती है जो इस अधिनियम के अध्याय 5क के अधीन अभिग्रहण या स्थिरीकरण या समपहरण के लिए दायी है, अभिगृहीत कर सकेगा; और
(घ) किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि उसने इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय कोई अपराध किया है, निरुद्ध कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा तथा यदि वह उचित समझे तो, उसे गिरफ्तार कर सकेगा :
1[ परंतु इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या किए गए आदेश के अधीन विनिर्मित ओषधियों या मनःप्रभावी पदार्थों या नियंत्रित पदार्थों के विनिर्माण के लिए दी गई, अनुज्ञप्ति के धारक के संबंध में ऐसी शक्ति का प्रयोग ऐसे किसी अधिकारी द्वारा किया जाएगा, जो उप निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो : (1. अधिनियम क्र० 16 सन् 2014, धारा 16 द्वारा "परंतुक" शब्द के स्थान पर दिनांक 1-5-2014 से प्रतिस्थापित।)
परंतु यह और कि] यदि ऐसे अधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण है कि तलाशी वारण्ट या प्राधिकारी, साक्ष्य छिपाने के लिए अवसर दिए बिना या किसी अपराधी को निकल भागने के लिए सुविधा दिए बिना प्राप्त नहीं किया जा सकता है तो वह सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच किसी भी समय ऐसे भवन, प्रवहण या परिवेष्टित स्थान में, अपने विश्वास के आधारों को लेखबद्ध करने के पश्चात् प्रवेश कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा।
(2) जहाँ कोई अधिकारी, किसी इत्तिला को उपधारा (1) के अधीन लिखता है या अपने विश्वास के आधारों को उसके परन्तुक के अधीन लेखबद्ध करता है, वहाँ वह उसकी प्रति अपने अव्यवहित वरिष्ठ पदधारी को बहत्तर घण्टे के भीतर भेजेगा।]
धारा 42 में उल्लिखित किसी विभाग का कोई अधिकारी-
(क) किसी लोक स्थान में या अभिवहन में, किसी ऐसी स्वापक ओषधि या मनःप्रभावी पदार्थ अथवा नियंत्रित पदार्थ को, जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि इस अधिनियम के अधीन दंडनीय कोई अपराध किया गया है और ऐसी औषधि या ऐसे पदार्थ के साथ किसी ऐसे जीव जन्तु या प्रवहण या वस्तु का जो इस अधिनियम के अधीन अधिहरणीय है और किसी ऐसी दस्तावेज या अन्य वस्तु को जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध के किए जाने का साक्ष्य हो सकती है या ऐसी किसी दस्तावेज या अन्य वस्तु को, जो अवैध रूप से अर्जित ऐसी किसी संपत्ति को धारण करने का साक्ष्य हो सकती है जो इस अधिनियम के अध्याय 5क के अधीन अभिग्रहण या स्थिरीकरण या समपहरण के लिए दायी है, अभिगृहीत कर सकेगा; (2. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से प्रतिस्थापित।)
(ख) ऐसे किसी व्यक्ति को, जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि उसने इस अधिनियम के अधीन दंडनीय कोई अपराध किया है, निरुद्ध कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा तथा यदि ऐसे व्यक्ति के कब्जे में कोई स्वापक औषधि या मनःप्रभावी पदार्थ अथवा नियंत्रित पदार्थ हैं और ऐसा कब्जा उसे विधिविरुद्ध प्रतीत होता है तो उसे और उसके साथ के किसी अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा।
स्पष्टीकरण -
इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "लोक स्थान" पद के अन्तर्गत कोई ऐसा लोक प्रवहण होटल, दुकान या अन्य स्थान है जो जनता द्वारा प्रयोग किए जाने के लिए आशयित है या जिस तक जनता की पहुंच हो सकती है।]
धारा 41, धारा 42 और धारा 43 के उपबंध जहां तक हो सके, अध्याय 4 के अधीन दंडनीय और कोका के पौधे, अफीम पोस्त या कैनेबिस के पौधे से संबंधित अपराधों के संबंध में लागू होंगे तथा इस प्रयोजन के लिए उन धाराओं में स्वापक ओषधि या मनःप्रभावी पदार्थों 1[अथवा नियंत्रित पदार्थों] के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उसके अन्तर्गत कोका के पौधे, अफीम पोस्त और कैनेबिस के पौधे के प्रति निर्देश हैं। (1. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से अंतःस्थापितः।)
45. जहां अधिहरण के लिए दायी माल का अभिग्रहण साध्य नहीं है वहां प्रक्रिया. -
जहां किसी ऐसे माल का (जिसके अन्तर्गत खड़ी फसल है) जो इस अधिनियम के अधीन अधिहरण के लिए दायी है, अभिग्रहण साध्य नहीं है वहां धारा 42 के अधीन सम्यक् रूप से प्राधिकृत कोई अधिकारी, माल के स्वामी पर या उस पर कब्जा रखने वाले व्यक्ति पर इस आदेश की तामील कर सकेगा कि वह ऐसे अधिकारी की पूर्व अनुज्ञा से ही ऐसे माल को हटाएगा, उसको विलग करेगा, उसके बारे में अन्यथा कार्रवाई करेगा, अन्यथा नहीं।
प्रत्येक भू-धारक किसी ऐसे अफीम पोस्त, कैनेबिस के पौधे या कोका के पौधे के बारे में, जिसकी खेती उसकी भूमि में अवैध रूप से की जाती है, इत्तिला तुरन्त किसी पुलिस अधिकारी या धारा 42 में उल्लिखित किसी विभाग के अधिकारी को देगा और प्रत्येक ऐसा भू-धारक जो जानते हुए ऐसी इत्तिला देने की उपेक्षा करेगा, दंड का भागी होगा।
सरकार का प्रत्येक अधिकारी और प्रत्येक पंच, सरपंच और किसी भी प्रकार का अन्य ग्राम अधिकारी, जैसे ही उसकी जानकारी में यह आए कि किसी भूमि पर अफीम पोस्त, कैनेबिस के पौधे या कोका के पौधे की अवैध खेती की गई है, उसकी इत्तिला तुरन्त किसी पुलिस अधिकारी को या धारा 42 में में उल्लिखित किसी विभाग के किसी अधिकारी को, देगा और सरकार का प्रत्येक ऐसा अधिकारी, पंच, सरपंच और अन्य ग्राम अधिकारी जो ऐसी इत्तिला देने की उपेक्षा करेगा दंड का भागी होगा।
कोई महानगर मजिस्ट्रेट, प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट या कोई ऐसा मजिस्ट्रेट, जिसे राज्य सरकार द्वारा 2[ धारा 42 के अधीन सशक्त राजपत्रित पंक्ति के किसी अधिकारी] इस निमित्त विशेष रूप से सशक्त किया जाए, किसी ऐसे अफीम पोस्त, कैनेबिस के पौधे, या कोका के पौधे को, जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है, कि उसकी अवैध रूप से खेती की गई है, कुर्क करने का आदेश दे सकेगा और ऐसा करते समय ऐसा आदेश (जिसके अन्तर्गत फसल को नष्ट करने का आदेश है) जो वह ठीक समझे, पारित कर सकेगा।(2. अधिनियम क्र० 2 सन् 1989 द्वारा दिनांक 29-5-89 से अंतःस्थापित।)
धारा 42 के अधीन प्राधिकृत कोई अधिकारी, यदि उसके पास यह संदेह करने का कारण है कि किसी जीवजंतु या प्रवहण का उपयोग किसी ऐसी स्वापक औषधि या मनः प्रभावी पदार्थों 3[ अथवा नियंत्रित पदार्थों] के परिवहन के लिए किया गया है या किया जाने वाला है जिसके बारे में उसे यह संदेह है कि इस अधिनियम के किसी उपबंध का उल्लंघन किया गया है या किया जा रहा है या किया जाने वाला है तो वह किसी भी समय ऐसे जीवजंतु या प्रवहण को रोक सकेगा अथवा वायुयान की दशा में, उसे भूमि पर उतरने के लिए विवश कर सकेगा और- (3. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से अंतःस्थापित)
(क) प्रवहण की या उसके किसी भाग की छानबीन कर सकेगा और तलाशी ले सकेगा।
(ख) ऐसे जीवजंतु पर के या ऐसे प्रवहण में के किसी माल की परीक्षा कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा;
(ग) यदि ऐसे जीवजंतु या प्रवहण को रोकना आवश्यक हो जाता है और उसे रोकने के लिए सभी विधिपूर्ण साधनों का उपयोग कर सकेगा और जहां ऐसे साधन असफल रहते है वहां ऐसे जीवजंतु या प्रवहण पर गोली चलाई जा सकेगी।
(1) जब धारा 42 के अधीन सम्यक् रूप से प्राधिकृत कोई अधिकारी, धारा 41, धारा 42 या धारा 43 के उपबंधों के अधीन किसी व्यक्ति की तलाशी लेने वाला है तब वह, ऐसे व्यक्ति को यदि ऐसा व्यक्ति ऐसी अपेक्षा करे तो, बिना अनावश्यक विलंब के धारा 42 में उल्लिखित किसी विभाग के निकटतम राजपत्रित अधिकारी या निकटतम मजिस्ट्रेट के पास ले जाएगा।
(2) यदि ऐसी अपेक्षा की जाती है तो ऐसा अधिकारी ऐसे व्यक्ति को तब तक निरुद्ध रख सकेगा जब तक वह उसे उपधारा (1) में निर्दिष्ट राजपत्रित अधिकारी या मजिस्ट्रेट के समक्ष नहीं ले जा सकता।
(3) यदि ऐसा राजपत्रित अधिकारी या मजिस्ट्रेट, जिसके समक्ष कोई ऐसा व्यक्ति लाया जाता है, तलाशी के लिए कोई उचित आधार नहीं पाता है तो वह ऐसे व्यक्ति को तत्काल उन्मोचित कर देगा किन्तु अन्यथा यह निदेश देगा कि तलाशी ली जाए।
(4) किसी स्त्री की तलाशी, स्त्री से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति द्वारा नहीं ली जाएगी।
1[(5) जब धारा 42 के अधीन सम्यक् रूप से प्राधिकृत किसी अधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण है कि उस व्यक्ति को जिसकी तलाशी ली जानी है, उसके कब्जे में की किसी स्वापक औषधि या मनःप्रभावी पदार्थ अथवा नियंत्रित पदार्थ या वस्तु या दस्तावेज को उस व्यक्ति से जिसकी तलाशी ली जानी है, अलग किए बिना निकटतम राजपत्रित अधिकारी या मजिस्ट्रेट के पास ले जाना संभव नहीं है, तो वह ऐसे व्यक्ति को निकटतम राजपत्रित अधिकारी या मजिस्ट्रेट के पास ले जाने की बजाय उस व्यक्ति की तलाशी ले सकेगा जैसा कि दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 100 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 103) में उपबंधित है। (1. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से अंतःस्थापित।)
(6) उपधारा (5) के अधीन तलाशी लिए जाने के पश्चात् उक्त अधिकारी ऐसे विश्वास के कारणों को लेखबद्ध करेगा, जिसकी वजह से ऐसी तलाशी की आवश्यकता पड़ी थी और उसकी एक प्रति अपने अव्यवहित वरिष्ठ पदधारी को बहत्तर घंटे के भीतर भेजेगा।]
धारा 4 की उपधारा (3) के अधीन गठित स्वापक नियंत्रण ब्यूरो का महानिदेशक या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, -
(क) भारत में किसी गंतव्य के लिए;
(ख) विदेश को, ऐसे विदेश के सक्षम प्राधिकारी के परामर्श से, जिसको ऐसा परेषण भेजा जाना है,
ऐसी रीति से जो विहित की जाए, किसी परेषण के नियंत्रित परिदान को अपने जिम्मे ले सकेगा।] (1. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से अंतःस्थापित।)
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) के उपबंध जहां तक वे इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं हैं, इस अधिनियम के अधीन जारी किए गए सभी वारंटों तथा की गई गिरफ्तारियों, तलाशियों और अभिग्रहणों को लागू होंगे।
(1) धारा 41, या धारा 42, धारा 43 या धारा 44 के अधीन किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने वाला कोई अधिकारी यथाशीघ्र, उसे ऐसी गिरफ्तारी के आधारों की इत्तिला देगा।
(2) धारा 41 की उपधारा (1) के अधीन जारी किए गए वारंट के अधीन गिरफ्तार किए गए प्रत्येक व्यक्ति और अभिगृहीत की गई प्रत्येक वस्तु को, अनावश्यक विलंब के बिना ऐसे मजिस्ट्रेट को भेजा जाएगा जिसने वारंट जारी किया हो।
(3) धारा 41 की उपधारा (2), धारा 42, धारा 43 या धारा 44 के अधीन गिरफ्तार किए गए प्रत्येक व्यक्ति और अभिगृहीत की गई वस्तु को, अनावश्यक विलंब के बिना -
(क) निकटतम पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को; या
(ख) धारा 53 के अधीन सशक्त अधिकारी को,
भेजा जाएगा।
(4) ऐसा प्राधिकारी या अधिकारी, जिसको कोई व्यक्ति या वस्तु उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन भेजी जाती है, सुविधानुसार शीघ्रता से ऐसे उपाय करेगा जो ऐसे व्यक्ति या वस्तु के विधि के अनुसार निपटारे के लिए आवश्यक हों।
2[ (1) केंद्रीय सरकार, किन्हीं स्वापक ओषधियों, मनःप्रभावी पदार्थों, नियंत्रित पदार्थों या हस्तांतरणों के संबंध में, परिसंकटमय प्रकृति, चोरी के लिए अतिसंवेदनशीलता, प्रतिस्थापन, समुचित भंडारण स्थान की विषमता या किसी अन्य सुसंगत महत्व को ध्यान में रखकर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसी स्वापक ओषधियों, मनः प्रभावी पदार्थों, नियंत्रित पदार्थों या हस्तांतरणों अथवा स्वापक ओषधियों का वर्ग, मनःप्रभावी पदार्थों का वर्ग, नियंत्रित पदार्थों का वर्ग या हस्तांतरणों का वर्ग विनिर्दिष्ट कर सकेगी, जिनका, उनके अभिग्रहण के पश्चात्, यथाशीघ्र, ऐसे अधिकारी द्वारा और ऐसी रीति में, जो सरकार, समय-समय पर, इसमें इसके पश्चात् विनिर्दिष्ट प्रक्रिया का पालन करने के पश्चात् अवधारित करे, व्ययन किया जाएगा।]
(2) जहां कोई 3[स्वापक ओषधियों या मनः प्रभावी पदार्थों या नियंत्रित पदार्थों या हस्तांतरणों] अभिगृहीत कर लिया गया है और निकटतम पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी या धारा 53 के अधीन सशक्त किसी अधिकारी को भेज दिया गया है, वहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी ऐसी 4[ स्वापक ओषधियों या मनःप्रभावी पदार्थों या नियंत्रित पदार्थों या हस्तांतरणों] की एक तालिका तैयार करेगा जिसमें उनके वर्णन, क्वालिटी, परिमाण, पैक करने के ढंग, चिन्हांकन, संख्यांक या
(1. अधिनियम क्र० 2 सन् 1989 द्वारा दिनांक 29-5-89 से अंतःस्थापित।
2. अधिनियम क्र० 16 सन् 2014, धारा 17 (क) द्वारा दिर्नाक 1-5-2014 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (1) निम्नवत थी :-
"(1) केन्द्रीय सरकार, किन्हीं स्वापक ओषधियों या मनःप्रभावी पदार्थों की परिसंकटमय प्रकृति, चोरी की उनकी भेद्यता प्रतिस्थापन, उचित भण्डारण स्थान की कमी या किन्हीं अन्य सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा, ऐसी स्वापक ओषधियों या मनः प्रभावी पदार्थों या ऐसी स्वापक ओषधियों के वर्ग या मनः प्रभावी पदार्थों के वर्ग विनिर्दिष्ट कर सकेगी जिनका व्ययन, उनके अभिग्रहण के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र ऐसे अधिकारी द्वारा इसमें इसके पश्चात् विनिर्दिष्ट प्रक्रिया का अनुसरण करने के पश्चात् ऐसी रीति से किया जाएगा जो वह सरकार, समय-समय पर, अवधारित करे।"।
3. अधिनियम क्र० 16 सन् 2014, धारा 17 (ख) (i) द्वारा "स्वापक ओषधि या मनः प्रभावी पदार्थ" शब्दों के स्थान पर दिनांक 1-5-2014 से प्रतिस्थापित।
4. अधिनियम क्र० 16 सन् 2014, धारा 17 (ख) (1) द्वारा "स्वापक ओषधियों या मनः प्रभावी पदार्थों" शब्दों के स्थान पर दिनांक 1-5-2014 से प्रतिस्थापित।)
ऐसी 1[ स्वापक ओषधियों या मनःप्रभावी पदार्थों या नियंत्रित पदार्थों या हस्तांतरणों] या पैकिंग की, जिनमें वे पैक किए गए हैं, पहचान कराने वाली अन्य विशिष्टियां, उद्भव का देश और अन्य विशिष्टियों से संबंधित ऐसे अन्य ब्यौरे दिए गए हों, जिन्हें उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी, इस अधिनियम के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों में ऐसी 2[स्वापक ओषधियों या मनःप्रभावी पदार्थों या नियंत्रित पदार्थों या हस्तांतरणों] को पहचान के लिए सुसंगत समझे और किसी मजिस्ट्रेट को निम्नलिखित प्रयोजन के लिए आवेदन करेगा, अर्थात् :- (1. अधिनियम क्र० 16 सन् 2014, धारा 17 (ख) (i) द्वारा "स्वापक ओषधियों या मनः प्रभावी पदार्थों" शब्दों के स्थान पर दिनांक 1-5-2014 से प्रतिस्थापित।
2. अधिनियम क्र० 16 सन् 2014, धारा 17 (ख) (i) द्वारा "स्वापक ओषधियों या मनःप्रभावो पदार्थों" शब्दों के स्थान पर दिनांक 1-5-2014 से प्रतिस्थापित। )
(क) ऐसे तैयार की गई तालिका का सही होना प्रमाणित करने के लिए; या
(ख) ऐसे मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में 3[ऐसी ओषधियों, पदार्थों, या हस्तांतरणों] के फोटोचित्र लेने और ऐसे फोटोचित्रों का सही होना प्रमाणित करने के लिए; या (3. अधिनियम क्र० 16 सन् 2014, धारा 17 (ख) (ii) द्वारा "ऐसी जोषधियों या पदार्थों" शब्दों के स्थान पर दिनांक 1-5-2014 से प्रतिस्थापित।)
(ग) ऐसे मजिस्ट्रेटों की उपस्थिति में ऐसी ओषधियों या पदार्थों के प्रतिनिधि नमूने लिए जाने की अनुज्ञा देने के लिए और ऐसे लिए गए नमूनों की किसी सूची का सही होना प्रमाणित करने के लिए।
(3) जहां उपधारा (2) के अधीन कोई आवेदन किया जाता है वहां ऐसा मजिस्ट्रेट यथाशक्य ऐसा आवेदन मंजूर करेगा।
(4) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) या दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) में किसी बात के होते हुए भी, भी, इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का विचारण करने वाला प्रत्येक न्यायालय, उपधारा (2) के अधीन तैयार की गई और मजिस्ट्रेट द्वारा प्रमाणित तालिका, 4[ स्वापक ओषधियों, मनःप्रभावी पदार्थों, नियंत्रित पदार्थों या हस्तांतरणों] के फोटोचित्रों और नमूनों की सूची को, ऐसे अपराध के संबंध में, प्राथमिक साक्ष्य मानेगा।] (4. अधिनियम क्र० 16 सन् 2014, धारा 17 (ग) द्वारा "स्वापक ओषधियों या मनः प्रभावी पदार्थों" शब्दों के स्थान पर दिनांक 1-5-2014 से प्रतिस्थापित।)
(1) केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार से परामर्श करने के पश्चात् राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन अपराधों के अन्वेषण के लिए पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी की शक्तियां, केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, स्वापक, सीमाशुल्क, राजस्व आसूचना 5[ या केन्द्रीय सरकार के किसी अन्य विभाग जिसके अंतर्गत पैरा सैन्य बल या सशस्त्र बल भी हैं,] के किसी अधिकारी अथवा ऐसे वर्ग के अधिकारियों में विनिहित कर सकेगी।(5. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से प्रातिस्थापित।)
(2) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन अपराधों के अन्वेषण के लिए किसी पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी की शक्तियां, ओषधि नियंत्रण, राजस्व या उत्पादशुल्क विभगों 6[या किसी अन्य विभाग के किसी अधिकारी अथवा ऐसे वर्ग के अधिकारियों में विनिहित कर सकेगी। (6. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से अंतःस्थापित।)
(1) अपराधों का अन्वेषण करने के लिए धारा 53 के अधीन सशक्त किसी अधिकारी के समक्ष, ऐसे अधिकारी द्वारा की गई किसी जांच या कार्यवाही के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा किया गया और हस्ताक्षरित कोई कथन, उसमें अंतर्विष्ट तथ्यों की सत्यता साबित करने के प्रयोजन के लिए, इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के लिए किसी अभियोजन में, संसुगत होगा, -
(क) जब ऐसा कथन करने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो गई है या वह मिल नहीं सकता है या साक्ष्य देने में असमर्थ है या प्रतिपक्ष द्वारा उसे पहुंच के बाहर कर दिया गया है या जिसकी उपस्थिति इतने विलंब या व्यय के बिना जितना कि मामले का परिस्थितियों में, न्यायालय अयुक्तियुक्त समझता है, अभिप्राप्त नहीं की जा सकती है; या
(ख) जब कथन करने वाले व्यक्ति की न्यायालय के समक्ष मामले में साक्षी के रूप में परीक्षा की जाती है और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय की राय है कि न्याय के हित में, कथन को साक्ष्य में ग्रहण कर लिया जाना चाहिए।
(2) उपधारा (1) के उपबंध, जहां तक हो सके, इस अधिनियम या उसके अधीन बताए गए नियमों या आदेशों के अधीन किसी कार्यवाही के संबंध में, जो किसी न्यायालय के समक्ष कार्यवाही से भिन्न हैं, उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे किसी न्यायालय के समक्ष किसी कार्यवाही के संबंध में लागू होते हैं।]
इस अधिनियम के अधीन विचारणों में, जब तक कि तत्प्रतिकूल साबित नहीं कर दिया जाता है, यह उपधारणा की जा सकेगी कि अपराधी ने-
(क) किसी ऐसी स्वापक औषधि या मनः प्रभावी पदार्थ अथवा नियंत्रित पदार्थ;
(ख) किसी ऐसी भूमि पर, जिस पर उसने खेती की है, उगे हुए किसी ऐसे अफीम पोस्त, कैनेबिस के पौधे या कोका के पौधे;
(ग) किसी स्वापक औषधि या मनः प्रभावी पदार्थ अथवा नियंत्रित पदार्थ के विनिर्माण के लिए विशेष रूप से परिकल्पित किसी साधिन्त्र या विशेष रूप से अनुकूलित बर्तनों के किसी ऐसे वर्ग; या
(घ) किसी ऐसी सामग्री, जिस पर किसी स्वापक औषधि या मनःप्रभावी पदार्थ अथवा नियंत्रित पदार्थ के विनिर्माण से संबंधित कोई प्रसंस्करण किया गया है या ऐसी सामग्री से बचे किसी ऐसे अवशिष्ट, जिससे किसी स्वापक ओषधि या मनः प्रभावी पदार्थ अथवा नियंत्रित पदार्थ का विनिर्माण किया गया है,
की बाबत, जिसके कब्जे के बारे में वह समाधानप्रद रूप में हिसाब देने में असफल रहता है, इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किया है।] (1. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से प्रतिस्थापित।)
किसी पुलिस थाने का कोई भारसाधक अधिकारी ऐसी सभी वस्तुओं का, जो उस पुलिस थाने के स्थानीय क्षेत्र के भीतर इस अधिनियम के अधीन अभिगृहीत की जाए और जो उसे परिदत्त की जाए, मजिस्ट्रेट के आदेशों के लम्बित रहने के दौरान, अपने भारसाधन में लेगा और उन्हें सुरक्षित अभिरक्षा में रखेगा तथा किसी ऐसे अधिकारी को जो ऐसी वस्तुओं के साथ पुलिस थाने तक जाए या जो उस प्रयोजन के लिए तैनात किया जाए, ऐसी वस्तुओं पर अपनी मुद्रा लगाने के लिए या उनके या उनमें से नमूना लेने के लिए अनुज्ञात करेगा तथा इस प्रकार लिए गए सभी नमूने भी पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी की मुद्रा से मुद्रांकित किए जाएंगे।
धारा 42 में उल्लिखित विभिन्न विभागों के सभी अधिकारी, सूचना दिए जाने या अनुरोध किए जाने पर, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने में एक दूसरे की सहायता करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होंगे।
जब कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन कोई गिरफ्तारी या अभिग्रहण करता है तब वह ऐसी गिरफ्तारी या अभिग्रहण के ठीक पश्चात् अड़तीस घंटों के भीतर, ऐसी गिरफ्तारी या अभिग्रहण की सभी विशिष्टियों की पूरी रिपोर्ट अपने अव्यवहित पदीय वरिष्ठ अधिकारी को देगा।
जब कभी धारा 53 के अधीन अधिसूचित कोई अधिकारी इस अधिनियम के अधीन कोई गिरफ्तारी या अभिग्रहण करता है और अध्याय 5क के उपबंध ऐसी गिरफ्तारी या अभिग्रहण के मामले में संलिप्त किसी व्यक्ति को लागू होते हैं तो अधिकारी, गिरफ्तारी या अभिग्रहण के नब्बे दिन के भीतर, अधिकारिता वाले सक्षम प्राधिकारी को उस व्यक्ति की अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों के बारे में एक रिपोर्ट देगा।] (1. अधिनियम क्र० 16 सन् 2014, धारा 18 द्वारा दिनांक 1-5-2014 से अंत: स्थापित।)
(1) धारा 42 या धारा 43 या धारा 44 के अधीन सशक्त कोई व्यक्ति जो-
(क) सन्देह के किसी युक्तियुक्त आधार के बिना किसी भवन, प्रवहण या स्थान में प्रवेश करेगा या उसकी तलाशी लेगा अथवा उसमें प्रवेश करवाएगा या उसकी तलाशी करवाएगा:
(ख) इस अधिनियम के अधीन अभिग्रहण के लिए दायी किसी स्वापक ओषधि या मन प्रभावी पदार्थ या अन्य वस्तु को अभिगृहीत करने या उसकी तलाशी लेने अथवा धारा 42, धारा 43 या धारा 44 के अधीन अभिग्रहणीय किसी दस्तावेज या अन्य वस्तु को अभिगृहीत करने के बहाने किसी व्यक्ति की संपत्ति को, तंग करने की दृष्टि से और अनावश्यक रूप से अभिगृहीत करेगा; या
(ग) किसी व्यक्ति को तंग करने की दृष्टि से या अनावश्यक रूप से निरुद्ध करेगा, उसकी तलाशी लेगा या उसे गिरफ्तार करेगा,
वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डनीय होगा।
(2) कोई व्यक्ति जो इस अधिनियम के अधीन जानबूझकर और दुर्भाव से मिथ्या इत्तिला देगा और उसके अधीन इस प्रकार कोई गिरफ्तारी या तलाशी करवाएगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा।
(1) कोई अधिकारी, जिस पर इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन कोई कर्तव्य अधिरोपित किया गया है, और जो अपने पद के कर्तव्यों का अनुपालन करने से प्रविरत रहेगा या इंकार करेगा या उससे अपने आपको प्रत्याहृत करेगा, वह जब तक कि उसने अपने पदीय वरिष्ठ की स्पष्ट लिखित अनुज्ञा प्राप्त नहीं कर ली हो या उसके पास ऐसा करने के लिए अन्य विधिपूर्ण हेतुक न हो, कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दंडनीय होगा।
2[ (2) कोई अधिकारी, जिस पर इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन कोई कर्तव्य अधिरोपित किया गया है या कोई व्यक्ति, जिसे, - (2. अधिनियम क्र० 2 सन् 1999 द्वारा दिनांक 29-5-89 से प्रतिस्थापित्त ।)
(क) किसी व्ययनी; या
(ख) किसी अन्य व्यक्ति, जिसे इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के लिए आरोपित किया गया है, की अभिरक्षा सौंपी गई है और जो इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी आदेश के किसी उपबंध के उल्लंघन में जानबूझकर सहायता करेगा या मौनानुकूल रहेगा, वह कठोर कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो बीस वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से भी, जो एक लाख रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो दो लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा।
स्पष्टीकरण. -
इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "अधिकारी" पद के अंतर्गत ऐसा कोई व्यक्ति है जो धारा 64क के अधीन सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा चलाए जा रहे या मान्यता प्राप्त किसी अस्पताल या संस्था में निराव्यसन उपचार करने के लिए नियोजित है।]
(3) कोई न्यायालय उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन किसी अपराध का संज्ञान, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की मंजूरी से किए गए लिखित परिवाद पर ही करेगा, अन्यथा नहीं।
1[(1) जब कभी इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय कोई अपराध किया गया है तब ऐसी स्वापक औषधि, मनःप्रभावी पदार्थ, नियंत्रित पदार्थ, अफीम पोस्त, कोका के पौधे, कैनेबिस के पौधे, सामग्री, साधित्र और बर्तन जिनकी बाबत या जिनके माध्यम से ऐसा अपराध किया गया है, अधिहरणीय होंगे।]
(2) कोई ऐसी स्वापक ओषधि या मनःप्रभावी पदार्थ 2[अथवा नियंत्रित पदार्थ], जिसका किसी ऐसी स्वापक ओषधि या मनःप्रभावी पदार्थ 2[ अथवा नियंत्रित पदार्थ] के या उसके अतिरिक्त जो उपधारा (1) के अधीन अधिहरणीय है, अवैध रूप से उत्पादन, अंतरराज्य आयात, अंतरराज्य निर्यात, भारत में आयात, परिवहन, विनिर्माण, कब्ज़ा उपयोग, क्रय या विक्रय किया जाता है और ऐसे पात्र, पैकेज और आवेष्टक जिनमें उपधारा (1) के अधीन अधिहरणीय कोई स्वापक ओषधि या मनःप्रभावी पदार्थ 2[ अथवा नियंत्रित पदार्थ], सामग्री, साधित्र या बर्तन पाया जाता है और ऐसे पात्र या पैकेज को कोई अन्य अंतर्वस्तु, यदि कोई हो, उसी प्रकार अधिहरणीय होंगी।
(3) किसी स्वापक ओषधि, या मनः प्रभावी पदार्थ 2[ अथवा नियंत्रित पदार्थ], या उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अधिहरणीय किसी वस्तु के वहन में उपयोग में लाया गया कोई जीवजंतु या प्रवहण अधिहरणीय होगा जब तक कि जीवजंतु या प्रवहण का स्वामी यह साबित नहीं कर देता है कि उसका इस प्रकार उपयोग स्वयं स्वामी, उसके अभिकर्ता, यदि कोई है, और उस जीवजंतु या प्रवहण के भारसाधक व्यक्ति के ज्ञान या मौनानुकूलता के बिना किया गया था और उनमें से प्रत्येक ने ऐसे उपयोग के विरुद्ध सभी समुचित पूर्वावधानियां बरती थीं। ( 2. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से अंतःस्थापित।
किसी स्वापक औषधि या मनःप्रभावी पदार्थ अथवा नियंत्रित पदार्थ] को, जो इस अधिनियम के अधीन अधिहरणीय है, छिपाने के लिए उपयोग में लाया गया कोई माल अधिहरणीय होगा।
स्पष्टीकरण -
इस धारा में, "माल" के अंतर्गत परिवहन के साधनों के रूप में प्रवहण नहीं है।
जहां किसी 1[ स्वापक औषधि या मनः प्रभावी पदार्थ अथवा नियंत्रित पदार्थ] का विक्रय किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जिसको यह ज्ञान या विश्वास करने का कारण है कि ऐसी ओषधि या पदार्थ इस अधिनियम के अधीन अधिहरणीय है वहां उसके विक्रय का आगम भी अधिहरणीय होगा। (1. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से प्रतिस्थापित।)
(1) इस अधिनियम के अधीन अपराधों के विचारण में, चाहे अभियुक्त को सिद्धदोष या दोषमुक्त या उन्मोचित किया जाता है, न्यायालय यह विनिश्चय करेगा कि क्या इस अधिनियम के अधीन अभिगृहीत कोई वस्तु या चीज धारा 60 या धारा 61 या धारा 62 के अधीन अधिहरण के लिए दायी है और यदि वह यह विनिश्चय करता है कि वस्तु इस प्रकार अधिहरण के लिए दायी है तो वह तद्नुसार अधिहरण का आदेश कर सकेगा।
(2) जहां इस अधिनियम के अधीन अभिगृहीत कोई वस्तु या चीज धारा 60 या धारा 61 या धारा 62 के अधीन अधिहरण के लिए दायी प्रतीत होती है किंतु वह व्यक्ति जिसने उसके संबंध में अपराध किया है. ज्ञात नहीं है या पाया नहीं जा सकता है वहां न्यायालय ऐसे दायित्व के बारे में जांच कर सकेगा तथा तदनुसार अधिहरण का आदेश कर सकेगा :
परन्तु किसी वस्तु या चीज के अधिहरण का कोई आदेश, अभिग्रहण की तारीख से एक मास की समाप्ति तक या ऐसे किसी व्यक्ति की, जो उसके प्रति किसी अधिकार का दावा करे, सुनवाई के और ऐसे साक्ष्य के, यदि कोई हो, बिना जो वह अपने दावे की बाबत पेश करता है, नहीं किया जाएगा :
परन्तु यह और कि यदि किसी स्वापक ओषधि, मनःप्रभावी पदार्थ, 1[ नियंत्रित पदार्थ], अफीम पोस्त, कोका के पौधे या कैनेबिस के पौधे से भिन्न कोई वस्तु या चीज शीघ्रतया और प्रकृत्या क्षयशील है या यदि न्यायालय की यह राय है कि उसका विक्रय उसके स्वामी के फायदे के लिए होगा तो वह उसके विक्रय के लिए किसी समय निदेश दे सकेगा और इस उपधारा के उपबंध विक्रय के शुद्ध आगमों को याथशक्य साध्य रूप में लागू होंगे।
(3) 2[***]
(1) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार, यदि उसकी यह राय है (ऐसी राय के लिए कारण लेखबद्ध किए जाएंगे) कि किसी ऐसे व्यक्ति का साक्ष्य अभिप्राप्त करने की दृष्टि से, जो इस अधिनियम के किन्हीं उपबंधों या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के उल्लंघन से प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षत संबद्ध या संसर्गिक प्रतीत होता है, ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है तो वह ऐसे व्यक्ति को, यथास्थिति, इस अधिनियम या भारतीय दंड संहिता (भारतीय न्याय संहिता) या तत्समय प्रवृत किसी अन्य केन्द्रीय अधिनियम या राज्य अधिनियम के अधीन किसी अपराध के लिए अभियोजन से इस शर्त पर उन्मुक्ति दे सकेगा कि वह ऐसे उल्लंघन से संबंधित संपूर्ण परिस्थितियों का पूर्ण और सही प्रकटीकरण करेगा।
(2) संबंधित व्यक्ति को दी गई और उसके द्वारा स्वीकार की गई उन्मुक्ति, उस सीमा तक जिस तक उन्मुक्ति का विस्तार है उसे किसी ऐसे अपराध के लिए जिसकी बाबत उन्मुक्ति दी गई थी, अभियोजन से उन्मुक्त कर देगी।
(3) यदि, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार को यह प्रतीत होता है कि उस व्यक्ति ने, जिसे इस धारा के अधीन उन्मुक्ति दी गई है, उन शर्तों का, जिनके अधीन उन्मुक्ति दी गई थी, पालन नहीं किया गया है या वह जानबूझकर कोई बात छिपा रहा है या मिथ्या साक्ष्य दे रहा है तो. यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार उस प्रभाव का निष्कर्ष लेखबद्ध कर सकेगी और तब उन्मुक्ति प्रत्याहृत की गई समझी जाएगी और ऐसे व्यक्ति का उस अपराध के लिए, जिसके लिए उन्मुक्ति दी गई थी या उसी विषय के संबंध में किसी अन्य अपराध के लिए, जिसका वह दोषी प्रतीत होता है, विचारण किया जा सकेगा।
कोई व्यसनी, जिस पर धारा 27 के अधीन दंडनीय अपराध या स्वापक औषधि या मनःप्रभावी पदार्थ की अल्प मात्रा से संबंधित अपराधों का आरोप है और जो सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा चलाए जा रहे या मान्यता प्राप्त किसी अस्पताल या किसी ऐसी संस्था से निराव्यसन के लिए स्वेच्छया चिकित्सीय उपचार लेना चाहता है और ऐसा उपचार लेता है, धारा 27 के अधीन या किसी अन्य धारा के अधीन स्वापक औषधि या मनःप्रभावी पदार्थ की अल्प मात्रा से संबंधित अपराधों के अभियोजन के लिए दायों नहीं होगा :
परन्तु यदि व्यसनी निराव्यसन के लिए पूर्ण उपचार नहीं लेता है तो अभियोजन से उक्त उन्मुक्ति को वापस लिया जा सकेगा।] (1. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से प्रतिस्थापित।)
जहां कोई दस्तावेज-
(1) इस अधिनियम या किसी अन्य विधि के अधीन किसी व्यक्ति द्वारा पेश की जाती है या दी जाती है अथवा किसी व्यक्ति की अभिरक्षा या नियंत्रण में से अभिगृहीत की जाती है, दोनों मामलों में ; या
(ii) इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के, जिसका किसी व्यक्ति द्वारा किया जाना अभिकधित है, अन्वेषण के अनुक्रम में भारत से बाहर किसी स्थान से (ऐसे प्राधिकरण या व्यक्ति द्वारा और ऐसी रीति से, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए, सम्यक् रूप से अधिप्रमाणित रूप में) प्राप्त की जानी है,
और ऐसी दस्तावेज इस अधिनियम के अधीन किसी अभियोजन में उसके विरुद्ध या उसके और ऐसे किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध जिसका उसके साथ संयुक्त रूप से विचारण किया जाता है, साक्ष्य में पेश की जाती है वहां न्यायालय-
(क) जब तक प्रतिकूल साबित नहीं कर दिया जाता है यह उपधारणा करेगी कि ऐसी दस्तावेज का, जिसका किसी विशिष्ट व्यक्ति के हस्तक्षेप में होना तात्पर्यित है या जिसके बारे में न्यायालय युक्तियुक्त रूप से यह धारणा करे कि वह किसी विशिष्ट व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित किया गया था, हस्ताक्षर और प्रत्येक अन्य भाग उस व्यक्ति के हस्तक्षेप में है तथा निष्पादित और अनुप्रमाणित दस्तावेज की दशा में यह कि वह उस व्यक्ति द्वारा निष्पादित या अनुप्रमाणित की गई थी जिसके द्वारा उसका इस प्रकार निष्पादित या अनुप्रमाणित किया जाना तात्पर्यित है;
(ख) किसी दस्तावेज को, यदि ऐसी दस्तावेज साक्ष्य में अन्यथा ग्राह्य है, इस बात के होते हुए भी कि वह सम्यक् रूप से स्टांपित नहीं है साक्ष्य में ग्रहण करेगा;
(ग) खंड (i) के अन्तर्गत आने वाले किसी मामले में, जब तक कि प्रतिकूल साबित नहीं कर दिया जाता है ऐसी दस्तावेज की अन्र्तवस्तु की सत्यता की भी उपधारणा करेगा।
धारा 42 में निर्दिष्ट कोई ऐसा अधिकारी, जो केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाता है, इस अधिनियम के किसी उपबंध के उल्लंघन के संबंध में किसी जांच के अनुक्रम में-
(क) अपना यह समाधान करने के प्रयोजन के लिए कि क्या इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के उपबंधों का उल्लंघन हुआ है, किसी, व्यक्ति से जानकारी मांग सकेगा;
(ख) किसी व्यक्ति से, जांच के लिए उपयोगी या सुसंगत किसी दस्तावेज या चीज को पेश करने या परिदत्त करने की अपेक्षा कर सकेगा;
(ग) मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित किसी व्यक्ति की परीक्षा कर सकेगा।
उस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या निकाले गए किसी आदेश के किसी उपबंध के अधीन उसमें निहित शक्तियों के प्रयोग में कार्य करने वाला कोई भी अधिकारी यह कहने के लिए विवश नहीं किया जाएगा कि ऐसे किसी अपराध के किए जाने के बारे में कोई इत्तिला उसे कब मिली।
(1) इस अध्याय के उपबंध उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट व्यक्तियों को ही लागू होंगे।
(2) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट व्यक्ति निम्नलिखित हैं, अर्थात् :-
(क) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जिसे इस अधिनियम के अधीन 3[दस] वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है; (3. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से प्रतिस्थापित।)
(ख) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जिसे भारत के बाहर दांडिक अधिकारिता वाले किसी सक्षम न्यायालय द्वारा समरूप अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है।
(ग) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जिसकी बाबत स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अवैध व्यापार निवारण अधिनियम, 1988 (1988 का 46) के अधीन या जम्मू कश्मीर स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अवैध व्यापार निवारण अधिनियम, 1988 (1988 का जम्मू कश्मीर अधिनियम 23) के अधीन निरोध आदेश किया गया है :
परन्तु यह तब जब ऐसा निरोध आदेश उक्त अधिनियमों के अधीन गठित सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट पर वापस न ले लिया गया हो या ऐसा निरोध आदेश सक्षम अधिकारिता वाले किसी न्यायालय द्वारा अपास्त न कर दिया गया हो;
4[(गग) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो इस अधिनियम के अधीन दस वर्ष या इससे अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय अपराध करने के लिए गिरफ्तार किया गया है या जिसके विरुद्ध गिरफ्तारी वांरट या प्राधिकार जारी किया गया है और ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो किसी अन्य देश की तत्समान किसी विधि के अधीन कोई ऐसा ही अपराध करने के लिए गिरफ्तार किया गया है या जिसके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट या प्राधिकार जारी किया गया है:]
(घ) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो खंड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) 4[या खंड (गग)] में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति का नातेदार है।
(ङ) खंड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) 4[या खंड (गग)] में निर्दिष्ट व्यक्ति का प्रत्येक सहयुक्त व्यक्ति ; (4. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से अंतःस्थापित।)
(च) किसी ऐसी सम्पत्ति का, जो पहले किसी समय खंड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) 1[या खंड (गग)] में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति के पास थी, कोई धारक (जिसे इस खंड में इसके पश्चात् "वर्तमान धारक" कहा गया है) तब तक जब तक कि, यथास्थिति, वर्तमान धारक या ऐसा कोई व्यक्ति, जिसके पास ऐसे व्यक्ति के पश्चात् और वर्तमान धारक के पूर्व ऐसी संपत्ति थी, पर्याप्त प्रतिफल के लिए सद्भाविक अंतरिती नहीं है या था। (1. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से अंतःस्थापि)
इस अध्याय में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) "अपील अधिकरण" से धारा 68ढ़ 2[ में निर्दिष्ट अपील अधिकरण] के अधीन गठित समपहृत संपत्ति अधिकरण अभिप्रेत है; (2. अधिनियम क्र० 28 सन् 2016 द्वारा दिनांक 1-6-2016 से "के अधीन गठित समपहृत संपत्ति अपील अधिकरण" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।)
(ख) किसी ऐसे व्यक्ति के संबंध में, जिसकी संपत्ति इस अध्याय के अधीन समपहृत की जा सकती है, "सहयुक्त" से अभिप्रेत है-
(i) ऐसा कोई व्यक्ति जो ऐसे व्यक्ति के आवासिक परिसर में (जिसके अंतर्गत उपगृह भी है) रह रहा था या रह रहा है;
(ii) ऐसा कोई व्यक्ति जो ऐसे व्यक्ति के कामकाज का प्रबंध करता था या कर रहा है अथवा लेखा रखता था या रख रहा है;
(iii) कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अर्थ में कोई ऐसा व्यक्ति संगम, व्यष्टिनिकाय, भागीदारी फर्म या प्राइवेट कंपनी, जिसका ऐसा व्यक्ति सदस्य, भागीदार या निदेशक रहा था या है;
(iv) ऐसा कोई व्यक्ति जो उपखंड (iii) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति संगम, व्यष्टि-निकाय, भागीदारी फर्म या प्राइवेट कंपनी का किसी भी समय तब सदस्य रहा था या है जब ऐसा व्यक्ति ऐसे संगम, निकाय, भागीदारी फर्म या प्राइवेट कंपनी का सदस्य, भागीदार या निदेशक रहा था या है;
(v) ऐसा कोई व्यक्ति, जो उपखंड (iii) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति संगम, व्यष्टि-निकाय, भागीदारी फर्म या प्राइवेट कंपनी के कामकाज का प्रबंध करता था या कर रहा है अथवा लेखा रखता था या रख रहा है:
(vi) किसी न्यास का न्यासी, जहां-
(1) न्यास ऐसे व्यक्ति द्वारा सृष्ट किया गया है; या
(2) न्यास में ऐसे व्यक्ति द्वारा अभिदाय की गई आस्तियों का उस तारीख को, जिसको आस्तियों का अभिदाय किया गया है, मूल्य (जिसके अंतर्गत उसके द्वारा पहले अभिदाय की गई आस्तियों का, यदि कोई है, मूल्य भी है) उस तारीख को न्यास की आस्तियों के मूल्य के बीस प्रतिशत से कम नहीं है;
(vii) जहां सक्षम प्राधिकारी का उन कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, यह विचार है कि ऐसे व्यक्ति की संपत्तियां किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उसकी ओस से धारित की जाती हैं, वहां ऐसा अन्य व्यक्ति ;
(ग) "सक्षम प्राधिकारी" से केन्द्रीय सरकार का कोई ऐसा अधिकारी अभिप्रेत है जो धारा 68घ के अधीन उसके द्वारा प्राधिकृत किया गया हो;
(घ) "छिपाया जाना" से संपत्ति की प्रकृति, स्रोत, व्ययन, संचलन या स्वामित्व का छिपाया जाना या प्रच्छन्न किया जाना अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत इलेक्ट्रानिक पारेषण द्वारा या किसी अन्य साधन द्वारा ऐसी संपत्ति का संचलन या संपरिवर्तन भी है;
(ङ) "रोक लगाना" से धारा 68च के अधीन जारी किए किसी आदेश द्वारा संपत्ति के अंतरण, संपरिवर्तन, व्ययन या संचलन का अस्थायी तौर पर प्रतिषेध करना अभिप्रेत है:
(च) "पहचान करना" के अंतर्गत यह सबूत स्थापित करना है कि संपत्ति अवैध व्यापार से प्राप्त हुई थी या उसमें उसका उपयोग किया गया था;
(छ) किसी ऐसे व्यक्ति के संबंध में जिसे यह अध्याय लागू होता है, "अवैध रूप से अर्जित संपत्ति" से अभिप्रेत है-
(i) ऐसे व्यक्ति द्वारा इस अध्याय के प्रारंभ के पूर्व या उसके पश्चात् अर्जित कोई संपत्ति, जो 1[इस अधिनियम के किन्हीं उपबंधों में] प्राप्त या अभिप्राप्त हुई है अथवा उससे हुई मानी जा सकने वाली किसी आय, उपार्जन या आस्तियों से या उनके द्वारा पूर्णतः या भागतः 2[ अर्जित की गई है या ऐसी संपत्ति का समतुल्य मूल्य; या ](1. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से प्रतिस्थापित।)
(2. अधिनियम क्र० 16 सन् 2014, धारा 20 (क) (1) द्वारा "अर्जित की गई है। या" शब्दों के स्थान पर दिनांक 1-5-2014 सप्रतिस्थापित।)
(ii) ऐसे व्यक्ति द्वारा इस अध्याय के प्रारंभ के पूर्व या उसके पश्चात् अर्जित कोई संपत्ति जो उपखंड (i) में निर्दिष्ट किसी संपत्ति या ऐसी संपत्ति से हुई आय या अपार्जन से पूर्णतः या भागतः हुए माने गए किसी प्रतिफल के लिए या किसी भी साधन से 3[ अर्जित की गई है या ऐसी संपत्ति का समतुल्य मूल्य; या] (3. अधिनियम क्र० 16 सन् 2014, धारा 20 (क) (ii) द्वारा "अर्जित की गई है।" शब्दों के स्थान पर दिनांक 1-5-2014 से प्रतिस्थापित।
4[ (iii) ऐसे व्यक्ति द्वारा, चाहे स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ (संशोधन) अधिनियम, 2014 के प्रारंभ से पूर्व या उसके पश्चात्, ऐसी किसी आय, उपार्जनों या आस्तियों से या द्वारा, जिसका स्रोत नहीं दिया जा सकता है, पूर्णतः या भागतः अर्जित कोई संपत्ति या ऐसी संपत्ति का समतुल्य मूल्य;] (4. अधिनियम क्र० 16 सन् 2014, धारा 20 (क) (iii) द्वारा दिनांक 1-5-2014 से अंतःस्थापित ।)
और इसके अन्तर्गत-
(अ) ऐसे व्यक्ति द्वारा धारित ऐसी कोई संपत्ति है जो, उसके किसी पूर्ववर्ती धारक के संबंध में, यदि ऐसा पूर्ववर्ती धारक उसे धारण करने से प्रविरत नहीं हो जाता तो, इस खंड के अधीन अवैध रूप से अर्जित संपत्ति होती, जब तक कि ऐसा व्यक्ति या कोई ऐसा अन्य व्यक्ति, जिसने ऐसे पूर्ववर्ती धारक के पश्चात् या जहां दो या अधिक ऐसे पूर्ववर्ती धारक हैं वहां ऐसे पूर्ववर्ती धारकों में से अंतिम धारक के पश्चात् किसी समय संपत्ति धारित की थी, पर्याप्त प्रतिफल के लिए सद्भाविक अंतरिती न हो या था।
(आ) ऐसे व्यक्ति द्वारा इस अध्याय के प्रारंभ के पूर्व या उसके पश्चात् अर्जित ऐसी कोई संपत्ति, जो मद (अ) के अन्तर्गत आने वाली किसी संपत्ति से या उससे हुई आय या उपार्जन से पूर्णतः या भागतः हुए माने गए किसी प्रतिफल के लिए या किसी भी साधन से अर्जित की गई है;
1[(ज) "संपत्ति" से प्रत्येक वर्णन की कोई संपत्ति या आस्तियां, चाहे शाश्वत् या अशाश्वत्, जंगम या स्थावर, मूर्त या अमूर्त हों या नहीं, चाहे कहीं भी अवस्थित हों, अभिप्रेत हैं और इसके अंतर्गत ऐसी संपत्ति या आस्तियों के हक या उसमें हित का साक्ष्य देने वाले विलेख और लिखत भी हैं;]
(झ) "नातेदार" से अभिप्रेत है-
(1) व्यक्ति का पति या पत्नी;
(2) व्यक्ति का भाई या बहन :
(3) व्यक्ति की पत्नी या पति का भाई या बहन :
(4) व्यक्ति का कोई पारंपरिक पूर्व पुरुष या वंशज ;
(5) व्यक्ति की पत्नी या पति का कोई पारंपरिक पूर्व या वंशज;
(6) उपखंड (2), उपखंड (3), उपखंड (4) या उपखंड (5) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति की पत्नी या पति;
(7) उपखंड (2) या उपखंड (3) में निर्दिष्ट व्यक्ति का कोई पारंपरिक वंशज;
(ञ) "पता लगाना" से संपत्ति की प्रकृति, स्स्रोत, व्ययन, संचलन, हक या स्वामित्व का अवधारण करना अभिप्रेत है;
(ट) न्यास के अन्तर्गत कोई अन्य विधिक बाध्यता भी है।
( 1. अधिनियम क्र० 16 सन् 2014, धारा 20 (ख) द्वारा दिनांक 1-5-2014 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व खण्ड (ज) निम्नवत था:-
'(ज) "संपत्ति" से अभिप्रेत है प्रत्येक विवरण की संपत्ति और आस्तियां चाहे वे जंगम या स्थावर हों, मूर्त या अमूर्त हों और ऐसे विलेख और लिखत जिनमें अवैध व्यापार से प्राप्त या उसमें उपयोग की गई ऐसी संपत्ति या आस्तियों के हक या हित के बारे में साध्य हो ; '।)
(1) इस अध्याय के प्रारंभ से, किसी ऐसे व्यक्ति के लिए, जिसे यह अध्याय लागू होता है, अवैध रूप से अर्जित किसी संपत्ति को स्वयं या अपनी ओर से किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से धारण करना विधिपूर्ण नहीं होगा।
(2) जहां कोई व्यक्ति अवैध रूप से अर्जित कोई सम्पत्ति उपधारा (1) के उपबंधों के उल्लंघन में धारित करता है, वहां ऐसी संपत्ति इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार केन्द्रीय सरकार को समपहृत हो जाएगी :
2[ परन्तु कोई भी संपत्ति इस अध्याय के अधीन उस दशा में समपहृत नहीं की जाएगी यदि ऐसी संपत्ति किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जिसको यह अधिनियम लागू होता है, यथास्थिति, उस तारीख से जिसको वह अधिनियम के अधीन दण्डनीय अपराध करने के लिए गिरफ्तार किया गया था या उसके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट या प्राधिकार जारी किया गया है अथवा उस तारीख से जिसको निरोध आदेश जारी किया गया था, छह वर्ष की अवधि के पूर्व अर्जित की गई थी।] (2. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से प्रतिस्थापित।)
(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, 3[ किसी सीमाशुल्क आयुक्त या केन्द्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त] या आय-कर आयुक्त या समतुल्य पंक्ति के केन्द्रीय सरकार के किसी अन्य अधिकारी व को इस अध्याय के अधीन सक्षम प्राधिकारी के कृत्यों का पालन करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगी।
(2) सक्षम प्राधिकारी ऐसे व्यक्तियों या व्यक्तियों के वर्गों की बाबत अपने कृत्यों का पा करेंगे जो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, निर्दिष्ट करे। (3. अधिनियम क्र० 16 सन् 2014, धारा 21 द्वारा "किसी सीमाशुल्क कलक्टर या केन्द्रीय उत्पाद शुल्क कलक्टर" शब्दों के स्थान पर दिनांक 1-5-2014 से प्रतिस्थापित।)
1[(1) धारा 53 के अर्थ सशक्त प्रत्येक अधिकारी और किसी पुलिस थाने का प्रत्येक भारसाधक अधिकारी, ऐसी इत्तिला व प्राप्ति पर यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि कोई ऐसा व्यक्ति जिसको यह अध्याय लागू होत है, अवैध रूप से अर्जित कोई संपत्ति धारित करता है तो ऐसा करने के कारण लेखबद्ध करने के पश्चात् उस संपत्ति का पता लगाने और उसकी पहचान करने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई करेगा।]
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट कार्रवाई के अंतर्गत किसी व्यक्ति, स्थान, संपत्ति, आस्ति, दस्तावेज, किसी बैंक या लोक वित्तीय संस्था में लेखा बहियों या किन्हीं अन्य सुसंगत विषयों की बाबत कोई जांच, अन्वेषण या सर्वेक्षण है।
(3) उपधारा (2) में निर्दिष्ट कोई जांच, अन्वेषण या सर्वेक्षण उपधारा (1) में उल्लिखित किसी अधिकारी द्वारा ऐसे निदेशों या मार्गदर्शन के अनुसार किया जाएगा जो सक्षम प्राधिकारी इस निमित्त दे या जारी करे। (1. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 में प्रतिस्थापित।)
(1) जहां धारा 68ङ के अधीन कोई जांच या अन्वेषण करने वाले किसी अधिकारी को यह विश्वास करने का कारण है कि कोई सम्पत्ति, जिसके संबंध में कोई ऐसी जांच या अन्वेषण किया जा रहा है, अवैध रूप से अर्जित संपत्ति है और ऐसी संपत्ति के छिपाए जाने, अंतरित किए जाने या उसके संबंध में किसी ऐसी रीति से संव्यवहार किए जाने की संभावना है जिसके परिणामस्वरूप इस अध्याय के अधीन ऐसी संपत्ति के समपहरण के संबंध में कोई कार्यवाही विफल हो जाएगी वहां वह ऐसी संपत्ति का अभिग्रहण करने के लिए आदेश कर सकेगा और जहां ऐसी सम्पत्ति का अभिग्रहण किया जाना साध्य नहीं है वहां वह यह आदेश कर सकेगा कि ऐसी संपत्ति ऐसा आदेश करने वाले अधिकारी या सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुज्ञा के बिना अंतरित नहीं की जाएगी या उसके संबंध में अन्यथा संव्यवहार नहीं किया जाएगा और ऐसे आदेश की प्रति की संबंधित व्यक्ति को तामील की जाएगी :
परन्तु सक्षम प्राधिकारी को इस उपधारा के अधीन किए गए किसी आदेश की सम्यक् रूप से जानकारी दी जाएगी और ऐसे आदेश की प्रति आदेश किए जाने के अड़तालीस घंटे के भीतर सक्षम प्राधिकारी को भेजी जाएगी।
(2) उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश का तब तक कोई प्रभाव नहीं होगा जब तक कि उक्त आदेश किए जाने के तीस दिन की अवधि के भीतर उसकी पुष्टि, सक्षम प्राधिकारी के किसी आदेश द्वारा नहीं कर दी जाती है।
स्पष्टीकरण-
इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "संपत्ति का अंतरण" से अभिप्रेत है संपत्ति का व्ययन, हस्तांतरण, समनुदेशन, व्यवस्थापन, परिदान, संदाय या कोई अन्यसंक्रामण और पूर्वगामी की व्यापकता को परिसीमित किए बिना, इसके अंतर्गत है-
(क) संपत्ति में किसी न्यास का सृजन ;
(ख) संपत्ति में किसी पट्टा, बंधक, भार, सुखाचार, अनुज्ञप्ति, शक्ति, भागीदारी या हित की मंजूरी या सृजन;
(ग) किसी ऐसे व्यक्ति में, जो संपत्ति का स्वामी नहीं है, निहित संपत्ति के नियतन की शक्ति का, शक्ति के आदाता से भिन्न किसी व्यक्ति के पक्ष में उसके व्ययन के अवधारण के लिए प्रयोग; और
(घ) किसी व्यक्ति द्वारा इस आशय से किया गया कोई संव्यवहार जिससे उसकी अपनी संपत्ति के मूल्य को प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः कम किया जा सके और किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति के मूल्य को बढ़ाया जा सके।
(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, किसी प्रशासक के कृत्यों का पालन करने के लिए अपने उतने अधिकारियों को (जो सरकार के संयुक्त सचिव की पंक्ति से नीचे के न हों) नियुक्त कर सकेगी जो वह ठीक समझे।
(2) उपधारा (1) के अधीन नियुक्त प्रशासक ऐसी संपत्ति को, जिसके संबंध में धारा 68च की उपधारा (1) या धारा 68झ के अधीन कोई आदेश किया गया है, ऐसी रीति से और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो विहित की जाए, प्राप्त करेगा और उसका प्रबंध करेगा।
(3) प्रशासक ऐसी संपत्ति का, जो केन्द्रीय सरकार को समपहृत हो गई है, व्ययन करने के लिए ऐसे उपाय भी करेगा जो केन्द्रीय सरकार निर्दिष्ट करे।
(1) यदि, सक्षम प्राधिकारी के पास किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा जिसको यह अध्याय लागू होता है, स्वयं अपने द्वारा या उसकी ओर से किसी अन्य व्यक्ति की मार्फत धारित संपत्तियों के मूल्य, उसकी आय, उपार्जन या आस्तियों के उसके ज्ञात स्रोत और धारा 68ङ के अधीन अन्वेषण करने वाले किसी अधिकारी की रिपोर्ट के परिणामस्वरूप या अन्यथा उसे उपलब्ध किसी अन्य जानकारी या सामग्री को ध्यान में रखते हुए, यह विश्वास करने का कारण है (ऐसे विश्वास के लिए जो कारण हैं वे लेखबद्ध किए जाएंगे) कि ऐसी सभी या कोई संपत्ति अवैध रूप से अर्जित संपत्ति है तो वह ऐसे व्यक्ति को (जिसे इसमें इसके पश्चात् प्रभावित व्यक्ति कहा गया है) सूचना की तामील यह अपेक्षा करते हुए कर सकेगा कि वह सूचना में विनिर्दिष्ट तीस दिन की अवधि के भीतर अपनी आय, उपार्जन या आस्तियों के ऐसे स्रोतों को, जिससे या जिनके द्वारा उसने ऐसी संपत्ति अर्जित की है, वह साध्य जिस पर वह निर्भर करता है तथा अन्य सुसंगत जानकारी और विशिष्टियां उपदर्शित करे और यह हेतुक दर्शित करे कि ऐसी सभी या कोई संपत्ति क्यों न अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्ति घोषित की जाए और इस अध्याय के अधीन केन्द्रीय सरकार को समपहृत की जाए।
(2) जहां किसी व्यक्ति को उपधारा (1) के अधीन दी गई सूचना में किसी संपत्ति के बारे में यह विनिर्दिष्ट किया जाता है कि वह किसी अन्य व्यक्ति द्वारा ऐसे व्यक्ति की ओर से धारित है वहां सूचना की प्रति ऐसे अन्य व्यक्ति को भी तामील की जाएगी :
1[ परन्तु समपहरण के लिए ऐसी कोई सूचना, धारा 68क की उपधारा (2) के खंड (गग) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति पर या उस खंड में निर्दिष्ट व्यक्ति के किसी नातेदार या उस खंड में निर्दिष्ट व्यक्ति के सहयुक्त अथवा ऐसी किसी संपत्ति के धारक पर जो कि पूर्व में किसी समय उस खंड में निर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा धारित थी, तामील नहीं की जाएगी।]
(1. अधिनियम क्रा० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से अंतःस्थापित।)
2[ स्पष्टीकरण. -
शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि ऐसे मामले में जहां धारा 68ञ के उपबंध लागू होते हैं, इस धारा के अधीन कोई सूचना मात्र इस आधार पर अविधिमान्य नहीं होगी कि वह उस साक्ष्य का उल्लेख करने में असफल रहती है, जिस पर निर्भर किया गया है या वह समपहृत किए जाने की वांछा की गई संपत्ति और इस अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन में किसी क्रियाकलाप के बीच सीधा संबंध सिद्ध करने में असफल रहती है।] (2. अधिनियम क्र० 16 सन् 2014, धारा 22 द्वारा दिनांक 1-5-2014 से अंतःस्थापित।)
(1) सक्षम प्राधिकारी, धारा 68ज के 47 अधीन हेतुक दर्शित करने के लिए जारी की गई सूचना के संबंध में दिए गए स्पष्टीकरण पर, यदि कोई हो, और अपने समक्ष उपलब्ध सामग्री पर, विचार करने के पश्चात् तथा प्रभावित व्यक्ति को (और किसी ऐसी दशा में जहां प्रभावित व्यक्ति सूचना में विनिर्दिष्ट कोई संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति की मार्फत धारण करता है वहां ऐसे अन्य व्यक्ति को भी) सुनवाई का उचित अवसर देने के आदेश द्वारा, यह निष्कर्ष अभिलिखित कर सकेगा कि क्या प्रश्नगत सभी या कोई सम्पत्ति अवैध रूप के पश्चात्, से अर्जित संपत्ति है:
परन्तु यदि प्रभावित व्यक्ति (और किसी ऐसी दशा में जहां प्रभावित व्यक्ति सूचना में विनिर्दिष्ट कोई संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति की मार्फत धारण करता है (वहां ऐसा अन्य व्यक्ति भी हेतुक दर्शित करने के लिए सूचना में विनिर्दिष्ट तीस दिन की अवधि के भीतर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष हाजिर नहीं होता है या उसके समक्ष अपना मामला व्यपदिष्ट नहीं करता है तो सक्षम प्राधिकारी, अपने समक्ष उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर, इस उपधारा के अधीन एकपक्षीय निष्कर्ष अभिलिखित कर सकेगा।
(2) जहां सक्षम प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि हेतुक दर्शित करने के लिए सूचना में निर्दिष्ट कुछ संपत्तियां अवैध रूप से अर्जित संपत्तियां है किन्तु वह ऐसी संपत्ति की विनिर्दिष्ट पहचान करने में में समर्थ नहीं है वहां सक्षम प्राधिकारी के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह ऐसी संपत्तियों को विनिर्दिष्ट करे जो उसकी सर्वोत्तम विवेक बुद्धि के अनुसार अवैध रूप से अर्जित संपत्तियां हैं और तदनुसार उपधारा (1) के अधीन निष्कर्ष अभिलिखित करे।
(3) जहां सक्षम प्राधिकारी, इस धारा के अधीन इस आशय का निष्कर्ष अभिलिखित करता है कि कोई संपत्ति अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्ति है, वहां वह घोषित करेगा कि ऐसी संपत्ति इस अध्याय के उपबंधों के अधीन रहते हुए, सभी विल्लंगमों से मुक्त, केन्द्रीय सरकार को समपहृत हो जाएगी :
1[ परन्तु ऐसे किसी व्यक्ति की, जो धारा 68क की उपधारा (2) के खंड (गग) में निर्दिष्ट है, या उस खंड में निर्दिष्ट व्यक्ति के नातेदार या उस खंड में निर्दिष्ट व्यक्ति के सहयुक्त या ऐसी संपत्ति के धारक की जो पूर्व में किसी समय उस खंड में निर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा धारित थी, अवैध रूप से अर्जित संपत्ति समपहृत नहीं होगी।](1. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से अंतःस्थापित।)
(4) जहां किसी कंपनी के शेयर, इस अध्याय के अधीन केन्द्रीय सरकार को समपहृत हो जाते हैं, वहां कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में या कम्पनी के संगम अनुच्छेदों में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार को ऐसे शेयरों के अंतरिती के रूप में तत्काल रजिस्टर करेगी।
इस अध्याय के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों में, यह साबित करने का भार कि धारा 68ज के अधीन तामील की गई सूचना में विनिर्दिष्ट कोई संपत्ति अवैध रूप से अर्जित संपत्ति नहीं है, प्रभावित व्यक्ति पर होगा।
(1) जहां सक्षम प्राधिकारी यह घोषणा करता है कि कोई संपत्ति धारा 68झ के अधीन केन्द्रीय सरकार को समपहृत हो गई है और वह ऐसा मामला है जिसमें अवैध रूप से अर्जित संपत्ति के केवल किसी भाग का स्रोत ही सक्षम प्राधिकारी के समाधानप्रद रूप में साबित नहीं किया गया है, वहां वह किसी प्रभावित व्यक्ति को समपहरण के बदले में ऐसे भाग के बाजार मूल्य के बराबर जुर्माने का संदाय करने का विकल्प देते हुए आदेश करेगा।
(2) उपधारा (1) के अधीन जुर्माना अधिरोपित करने का आदेश करने के पूर्व प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का उचित अवसर दिया जाएगा।
(3) जहां प्रभावित व्यक्ति, उपधारा (1) के अधीन देय जुर्माने का, ऐसे समय के भीतर जो उस निमित्त अनुज्ञात किया जाए, संदाय करता है, वहां सक्षम प्राधिकारी, आदेश द्वारा, धारा 68झ के अधीन समपहरण की घोषणा को प्रतिसंहृत कर सकेगा और तब ऐसी संपत्ति निर्मुक्त हो जाएगी।
धारा 68ख के खंड (ख) के उपखंड (vi) में विर्दिष्ट किसी व्यक्ति की दशा में, यदि सक्षम प्राधिकारी के पास, उसे उपलब्ध जानकारी और सामग्रियों के आधार पर यह विश्वास करने का कारण है (ऐसे विश्वास के लिए जो कारण हैं उन्हें लेखबद्ध किया जाएगा) कि न्यास के रूप में धारित कोई संपत्ति अवैध रूप से अर्जित संपत्ति है, तो वह, यथास्थिति, न्यासकर्ता को या ऐसी आस्तियों के ऐसे अभिदाता को जिनसे या जिनके द्वारा ऐसी संपत्ति का अर्जन न्यास और न्यासियों द्वारा किया गया था, सूचना की तामील यह अपेक्षा करते हुए कर सकेगा कि वह सूचना में विनिर्दिष्ट तीस दिन की अवधि के भीतर, धन या अन्य आस्तियों के ऐसे स्रोत जिनसे या जिनके द्वारा ऐसी संपत्ति अर्जित की गई थी या धन या अन्य आस्तियों के ऐसे स्रोत जिनका ऐसी संपत्ति को अर्जित करने के लिए न्यास को अभिदाय किया गया था, के बारे में स्पष्टीकरण दे और तब ऐसी सूचना के बारे में यह समझा जाएगा कि वह धारा 68ज के अधीन तामील की गई सूचना है और इस अध्याय के अन्य सभी उपबंध तदनुसार लागू होंगे।
स्पष्टीकरण. -
इस धारा के प्रयोजन के लिए, न्यास के रूप में धारित किसी संपत्ति के संबंध में, "अवैध रूप से अर्जित संपत्ति" के अंतर्गत निम्नलिखित हैं, अर्थात् :-
(i) कोई संपत्ति जो यदि वह न्यासकर्ता या न्यास को ऐसी संपत्ति के अभिदायकर्त्ता द्वारा न्यास के रूप में धारित रहती, तो वह ऐसे न्यासकर्ता या अभिदायकर्ता के संबंध में अवैध रूप से अर्जित संपत्ति होती;
(ii) किसी व्यक्ति द्वारा किए गए अभिदायों से न्यास द्वारा अर्जित कोई संपत्ति जो ऐसे व्यक्ति के संबंध में अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्ति होती, यदि ऐसे व्यक्ति ने ऐसी संपत्ति को ऐसे अभिदायों से अर्जित किया होता।
जहां धारा 68च की उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश करने या धारा 68ज या धारा 68ठ के अधीन सूचना जारी करने के पश्चात् उक्त आदेश या सूचना में निर्दिष्ट किसी संपत्ति का अंतरण किसी भी ढंग से किया गया है, वहां ऐसे अंतरण पर, इस अध्याय के अधीन कार्यवाहियों के प्रयोजनों के लिए ध्यान नहीं दिया जाएगा और यदि उसके बाद ऐसी संपत्ति धारा 68झ के अधीन केन्द्रीय सरकार को समपहत हो जाती है तो ऐसी संपत्ति का अंतरण अकृत और शून्य समझा जाएगा।
तस्कर और विदेशी मुद्रा छलसाधक (संपत्ति समपहरण) अधिनियम, 1976 (1976 का 13) की धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन गठित अपील अधिकरण, धारा 68च, धारा 68झ, धारा 682 की उपधारा (1) या धारा 68ठ के अधीन किए गए आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई के लिए अपील अधिकरण होगा।]
(1. अधिनियम क्र० 28 सन् 2016 द्वारा दिनांक 1-6-2016 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व धारा 68-ड निम्नवत थी:-
(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, धारा 68च, धारा 68श, धारा 68ट की उपधारा (1) या धारा 68ठ के अधीन किए गए आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई के लिए एक अपील अधिकरण गठित करेगी समपहृत संपत्ति अपील अधिकरण कहलाएगा। उसमें एक अध्यक्ष और उत्तने सदस्य (जो केन्द्रीय सरकार के ऐसे अधिकारी होंगे जो सरकार के संयुक्त सचिव की पंक्ति से नीचे के न हों), जो केन्द्रीय सरकार ठीक समझे, होंगे, जिनकी नियुक्ति उस सरकार द्वारा की जाएगी।
(2) अपील अधिकरण का अध्यक्ष ऐसा व्यक्ति होगा जो उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है या रहा है या उसके लिए अर्हित है।
(3) अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की सेवा के निबंधन और शर्तों ये होंगी जो विहित की जाएं।"। )
(1) 1[ धारा 68ङ की उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई अधिकारी या धारा 68च, धारा 68झ, धारा 68ट को उपधारा (1) या धारा 68ठ के अधीन सक्षम प्राधिकारी द्वारा किए गए किसी आदेश से व्यधित कोई व्यक्ति,] उस तारीख से जिसको आदेश उसे तामील की जाती है, पैंतालीस दिन के भीतर अपील अधिकरण को अपील कर सकेगा : (1. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से प्रतिस्थापित।)
परन्तु अपील अधिकरण, पूर्वोक्त तारीख से उक्त पैतालीस दिन की अवधि के पश्चात् किन्तु साठ दिन के अपश्चात्, अपील ग्रहण कर सकेगा यदि उसका समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी समय से अपील फाइल न किए जाने के लिए पर्याप्त हेतुक से निवारित हुआ था :
(2) उपधारा (1) के अधीन अपील की प्राप्ति पर, अपील अधिकरण, अपीलार्थी को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात्, यदि वह ऐसी इच्छा करता है, और ऐसी अतिरिक्त जांच करने के पश्चात् जो वह ठीक समझे, ऐसे आदेश को, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, पुष्ट, उपांतरित या अपास्त कर सकेगा।
(3) अपील अधिकरण की शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का निर्वहन अपील अधिकरण के अध्यक्ष द्वारा गठित और तीन सदस्यों वाले न्यायपीठों द्वारा किया जा सकेगा।
(4) उपधारा (3) में किसी बात के होते हुए भी, जहां अध्यक्ष इस धारा के अधीन अपोलों को शीघ्र निपटाने के लिए ऐसा करना आवश्यक समझता है वहां वह दो सदस्यों का न्यायपीठ गठित कर सकेगा और इस प्रकार गठित न्यायपीठ अपील अधिकरण की शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का निर्वहन कर सकेगा :
परन्तु यदि इस प्रकार गठित न्यायपीठ के सदस्यों में किसी मुद्दे या मुद्दों पर मतभेद है तो उस मुद्दे या उन मुद्दों का उल्लेख करेंगे जिन पर उनमें मतभेद है और उसे या उन्हें, ऐसे मुद्दे या मुद्दों की सुनवाई के लिए (अध्यक्ष द्वारा विनिर्दिष्ट) एक तीसरे सदस्य को निर्देशित करेंगे और ऐसा मुद्दा या ऐसे मुद्दे उस सदस्य की राय के अनुसार विनिश्चित किया जाएगा या किए जाएंगे :
2[ परन्तु यह और कि यदि अध्यक्ष की मृत्यु, त्यागपत्र के कारण या अन्यथा उसका पद रिक्त है या यदि अध्यक्ष अनुपस्थिति, बीमारी के कारण या किसी अन्य कारण से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ है तो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा किसी सदस्य को, नए अध्यक्ष की नियुक्ति किए जाने और, यथास्थिति, कार्यभार ग्रहण करने या अपने कर्तव्यों को ग्रहण करने तक, अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिए नामनिर्देशित कर सकेगी।] (2. अधिनियम क्र० 16 सन् 2014, धारा 23 द्वारा दिनांक 1-5-2014 से अंतःस्थापित।)
(5) अपील अधिकरण अपनी प्रक्रिया को स्वयं विनियमित कर सकेगा।
(6) अपील अधिकरण को आवेदन करने पर और विहित फीस का संदाय करने पर, अधिकरण किसी अपील के पक्षकार को या ऐसे पक्षकार द्वारा उसकी ओर से प्राधिकृत किसी व्यक्ति को कार्यालय के समय के दौरान किसी भी समय, अधिकरण के सुसंगत अभिलेखों और रजिस्टरों का निरीक्षण करने के लिए और उनके किसी भाग की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करने के लिए अनुज्ञात कर सकेगा।
इस अध्याय के अधीन जारी की गई या तामील की गई कोई सूचना, की गई कोई घोषणा और पारित कोई आदेश उसमें उल्लिखित संपत्ति या व्यक्ति के वर्णन में किसी गलती के कारण अविधिमान्य नहीं समझा जाएगा, यदि ऐसी संपत्ति या व्यक्ति इस प्रकार उल्लिखित वर्णन से पहचाना जा सकता है।
इस अध्याय के अधीन पारित कोई आदेश या की गई कोई घोषणा उसमें उपबंधित के सिवाय अपीलीय नहीं होगी और किसी भी सिविल न्यायालय को किसी ऐसे मामले के संबंध में, जिसे अपील अधिकरण या कोई सक्षम प्राधिकारी इस अध्याय द्वारा या उसके अधीन अवधारित करने के लिए सशक्त है, अधिकारिता नहीं होगी, और किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकारी द्वारा कोई व्यादेश इस अध्याय द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के अनुसरण में की गई या की जाने वाली किसी कार्रवाई के बारे में मंजूर नहीं किया जाएगा।
सक्षम प्राधिकारी और अपील अधिकरण को निम्नलिखित मामलों के बारे में, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी वाद का विचारण करते समय, सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां होंगी, अर्थात् :-
(क) किसी व्यक्ति को समन करना और उसको हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना;
(ख) दस्तावेजों के प्रकटीकरण तथा पेश किए जाने की अपेक्षा करना;
(ग) शपथ-पत्र पर साक्ष्य लेना :
(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रतिलिपि की अध्येक्षा करना;
(ङ) साक्षियों या दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना ;
(च) अन्य कोई विषय, जो विहित किया जाए।
(1) किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, सक्षम प्राधिकारी को केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकरण के किसी अधिकारी या प्राधिकारी से ऐसे व्यक्तियों, मुद्दों या विषयों के बारे में जो सक्षम प्राधिकारी की राय में इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए उपयोगी या सुसंगत होंगे, जानकारी देने की अपेक्षा करने की शक्ति होगी।
(2) धारा 68न में निदिष्ट प्रत्येक व्यक्ति, स्वप्रेरणा से, ऐसी कोई जानकारी जो उसके पास उपलब्ध हो, सक्षम प्राधिकारी को दे सकेगा यदि उस अधिकारी की राय में ऐसी जानकारी इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए उस सक्षम प्राधिकारी के लिए उपयोगी होगी।
इस, अध्याय के अधीन किसी कार्यवाही के प्रयोजनों के लिए निम्नलिखित अधिकारी धारा 68क के अधीन नियुक्त प्रशासक, सक्षम प्राधिकारी और अपील अधिकरण की सहायता करने के लिए सशक्त किए जाते हैं और उनसे अपेक्षा की जाती है, अर्थात् :-
(क) स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के अधिकारी;
(ख) सीमाशुल्क विभाग के अधिकारी;
(ग) केन्द्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के अधिकारी;
(घ) आय-कर विभाग के अधिकारी;
(ङ) विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) के अधीन नियुक्त प्रवर्तन अधिकारी ;
(च) पुलिस के अधिकारी;
(छ) स्वापक विभाग के अधिकारी;
(ज) केन्द्रीय आर्थिक आसूचना ब्यूरो के अधिकारी ;
(झ) राजस्व आसूचना निदेशालय के अधिकारी ;
(ञ) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के ऐसे अन्य अधिकारी जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिदिष्ट करें।
(1) जहां कोई संपत्ति इस अध्याय के अधीन केन्द्रीय सरकार को समपहृत घोषित कर दी गई है या जहां कोई प्रभावित व्यक्ति धारा 68ट की उपधारा (3) के अधीन उसके लिए अनुज्ञात समय के भीतर उस धारा की उपधारा (1) के अधीन देय जुर्माने का संदाय करने में असफल हो गया है, वहां सक्षम प्राधिकारी प्रभावित व्यक्ति को तथा ऐसे किसी अन्य व्यक्ति को, जिसके कब्जे में संपत्ति हो, धारा 68छ के अधीन नियुक्त प्रशासक को या उसके द्वारा इस निमित्त सम्यक्तः प्राधिकृत किसी व्यक्ति को आदेश की तामील के तीस दिन के भीतर, संपत्ति का अभ्यर्पण करने या कब्जा देने का आदेश कर सकेगा।
(2) यदि कोई व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन किए गए आदेश का पालन करने से इंकार करता है या पालन करने में असफल हो जाता है तो प्रशासक संपत्ति का कब्जा ले सकेगा और उस प्रयोजन के लिए ऐसे बल का, जो आवश्यक हो, प्रयोग कर सकेगा।
(3) उपधारा (2) में किसी बात के हुए भी, प्रशासक, उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी संपत्ति का कब्जा लेने के प्रयोजन के लिए, अपनी सहायता के लिए किसी पुलिस अधिकारी की सेवा की अध्यपेक्षा कर सकेगा और ऐसे अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि ऐसी अध्यपेक्षा का पालन करे।
अभिलेख से प्रकट किन्हीं भूलों की परिशुद्धि करने के लिए यथास्थिति, सक्षम प्राधिकारी या अपील अधिकरण उसके द्वारा किए गए किसी आदेश को उस आदेश की तारीख से एक वर्ष की अवधि के भीतर संशोधित कर सकेगा :
परन्तु यदि ऐसे किसी संशोधन से किसी व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है तो वह संशोधन ऐसे व्यक्ति को सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना नहीं किया जाएगा।
किसी अन्य विधि के अधीन किसी अधिकारी या प्राधिकारी का कोई निष्कर्ष इस अध्याय के अधीन किसी कार्यवाही के प्रयोजनों के लिए निश्चायक नहीं होगा।
इस अध्याय के अधीन जारी की गई किसी सूचना या किए गए किसी आदेश की तामील निम्नलिखित रूप में की जाएगी:-
(क) उस व्यक्ति को जिसके लिए सूचना या आदेश आशयित है या उसके अभिकर्ता को सूचना या आदेश निविदत्त करके या रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा भेजकर ;
(ख) यदि सूचना या आदेश की तामील खंड (क) में उपबंधित रीति से नहीं की जा सकती है तो उस संपत्ति के, जिसके संबंध में सूचना जारी की गई है या आदेश किया गया है, सहजदृश्य स्थान पर या उस परिसर के, जिसमें वह व्यक्ति, जिसके लिए वह आशयित है, जिसके बारे में ज्ञात है कि वह अंतिम रूप से रहा है या कारबार किया है या लाभ के लिए व्यक्तिगत रूप से काम किया है, किसी सहजदृश्य भाग पर चिपका कर।
ऐसा व्यक्ति जिसने किसी भी रीति से ऐसी कोई संपत्ति, जिसके बारे में इस अध्याय के अधीन कार्यवाहियां लंबित हैं, जानबूझकर अर्जित की है, कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा।]
(1) जहां निरुद्ध व्यक्ति का निरोध आदेश अपास्त कर दिया जाता है या वापस ले लिया जाता है वहां इस अध्याय के अधीन अभिगृहीत या स्थिर की गई संपत्तियां निर्मुक्त हो जाएंगी। (1. अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से अंतःस्थापित।)
(2) जहां धारा 68क की उपधारा (2) के खंड (क) या खंड (ख) या खंड (गग) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति को इस अधिनियम के अधीन या किसी अन्य देश की तत्समान किसी अन्य विधि के अधीन आरोपों से दोषमुक्त या आरोपमुक्त कर दिया गया है और उस दोषमुक्ति के विरुद्ध अपील नहीं की गई थी या जब अपील की गई थी तब उस अपील का निपटारा कर दिया गया था जिसके परिणामस्वरूप ऐसी संपत्ति समपहृत नहीं की जा सकी थी या ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध जारी किए गए गिरफ्तारी वारंट या गिरफ्तारी प्राधिकार को वापस ले लिया गया है तब इस अध्याय के अधीन अभिगृहीत या स्थिर की गई संपत्ति निर्मुक्त हो जाएगी।]