धारा 4 से 7-ख़  अध्याय 2 प्राधिकरण और अधिकारी

धारा 4 से 7-ख़ अध्याय 2 प्राधिकरण और अधिकारी

Free Online Judiciary Coaching Classes Free Online Judiciary Coaching Classes

अध्याय 2

प्राधिकरण और अधिकारी

4. स्वापक ओषधियों आदि के दुरुपयोग और अवैध व्यापार के निवारण और उसकी रोकथाम के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा अध्युपायों का किया जाना. -  

(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, केन्द्रीय सरकार स्वापक ओषधियों और मनः प्रभावी पदार्थों के दुरुपयोग तथा उनके अवैध व्यापार के निवारण और रोकथाम के प्रयोजनों के लिए 1[ और उनके चिकित्सीय और वैज्ञानिक उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए ] ऐसे सभी अध्युपाय करेगी जो वह आवश्यक और समीचीन समझे। (1.अधिनियम क्र० 16 सन् 2014, धारा 3 (क) द्वारा दिनांक 1-5-2014 से अंतःस्थापित।)

(2) विशिष्टतया और उपधारा (1) के उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे अध्युपायों के अन्तर्गत जो केन्द्रीय सरकार इस उपधारा के अधीन करे, निम्नलिखित सभी या किन्हों विषयों के संबंध में अध्युपाय हैं, अर्थात्:-

() विभिन्न अधिकारियों, राज्य सरकारों और अन्य प्राधिकारियों द्वारा-

(i) इस अधिनियम के अधीन, या

(ii) इस अधिनियम के उपबंधों के प्रवर्तन के संबंध में तत्सयम प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन, कार्रवाइयों का समन्वय ;

() अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशनों के अधीन बाध्यताएं ;

() स्वापक ओषधियों और मनः प्रभावी पदार्थों में अवैध व्यापार के निवारण और दमन के लिए समन्वय और सर्वव्यापी कार्रवाई को सुकर बनाने की दृष्टि से विदेशों में संबंधित प्राधिकरणों और संबंधित अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सहायता ;

() व्यसनियों की पहचान, उपचार, शिक्षा, पश्चात्वर्ती देख-रेख, पुनर्वास और समाज में पुनः मिलाना;

2[ (घक) चिकित्सीय और वैज्ञानिक उपयोग के लिए स्वापक ओषधियों और मनःप्रभावी पदार्थों की उपलब्धताः (2.अधिनियम क्र० 16 सन् 2014, धारा 3 () द्वारा दिनांक 1-5-2014 से अंतःस्थापित।)

() ऐसे अन्य विषय, जो केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों का प्रभावपूर्ण कार्यान्वयन सुनिश्चित करने तथा स्वापक ओषधियों और मनः प्रभावी पदार्थों के दुरुपयोग और उनके व्यापार के निवारण और रोकथाम के प्रयोजनों के लिए आवश्यक या समीचीन समझे।

(3) केन्द्रीय सरकार, यदि वह इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझे तो राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार की ऐसी शक्तियों और कृत्यों का उपयोग करने के प्रयोजन के लिए और उपधारा (2) में निर्दिष्ट ऐसे विषयों के संबंध में अध्युपाय करने के लिए जो आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं, तथा केन्द्रीय सरकार पर्यवेक्षण और नियंत्रण तथा ऐसे आदेश के उपबंधों के अधीन रहते हुए, ऐसे नाम या नामों से, ज आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं, कोई प्राधिकरण या प्राधिकरणों का अधिक्रम गठित कर सकेगी और ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है तो वह राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अनुसूची में विनिर्दिष्ट मनःप्रभावी पदार्थों की सूची में ऐसे पदार्थ या प्राकृतिक सामग्री अथवा ऐसे पदार्थ या सामग्री के लवण या निर्मित को, यथास्थिति, जोड़ सकेगी या उससे उसका लोप कर सकेगी।

ऐसा या ऐसे प्राधिकरण आदेश में इस प्रकार वर्णित शक्तियों का प्रयोग और अध्युपाय कर सकेगा. या करे सकेंगे मानो ऐसा या ऐसे प्राधिकरण उन शक्तियों का प्रयोग और ऐसे अध्युपाय करने के लिए इस अधिनियम द्वारा सशक्त किया गया या किए गए हों।

5. केन्द्रीय सरकार के अधिकारी.-

(1) धारा 4 की उपधारा (3) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केन्द्रीय सरकार, एक स्वापक आयुक्त नियुक्त करेगी और ऐसे अन्य अधिकारियों का भी, ऐसे पदाभिधानों से नियुक्त करेगी जो वह इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ठीक समझे।

(2) स्वापक आयुक्त या तो स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से अफीम पोस्त की खेती और अफीम के उत्पादन के अधीक्षण से संबंधित सभी शक्तियों का प्रयोग और सभी कृत्यों का पालन करेगा तथा ऐसी शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का पालन भी करेगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा उसे सौंपे जाएं।

(3) उपधारा (1) के अधीन नियुक्त अधिकारी, केन्द्रीय सरकार के, या यदि उस सरकार द्वारा ऐसा निदेश दिया जाए तो बोर्ड या किसी अन्य प्राधिकरण या अधिकारी के भी साधारण नियंत्रण और निदेशन के अधीन होंगे।

6. स्वापक ओषधि और मनः प्रभावी पदार्थ परामर्श समिति. -

(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, "स्वापक ओषधि और मनः प्रभावी पदार्थ परामर्श समिति" के नाम से  ज्ञात एक सलाहकार समिति (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् समिति कहा गया है) केन्द्रीय सरकार को, इस अधिनियम के प्रशासन से संबंधित ऐसे विषयों पर, जो उस सरकार द्वारा, समय-समय पर, उसे निर्देशित किए जाएं, सलाह देने के लिए गठित कर सकेगी।

(2) समिति, एक अध्यक्ष और बीस से अनधिक ऐसे अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगी जो केन्द्रीय सरकार नियुक्त करे।

(3) समिति की बैठक तब की जाएगी जब केन्द्रीय सरकार ऐसा करने की अपेक्षा करे और उसे अपनी प्रक्रिया को विनियमित करने की शक्ति होगी।

(4) समिति, यदि वह अपने किन्हीं कृत्यों के दक्ष पालन के लिए ऐसा करना समीचीन समझे तो, एक या अधिक उपसमितियां गठित कर सकेगी और ऐसी किन्हीं उप-समितियों में, ऐसे किसी व्यक्ति को (जिसके अन्तर्गत ऐसा व्यक्ति है जो पदधारी नहीं है), जो समिति का सदस्य नहीं है, साधारणतया या किसी विशिष्ट विषय पर विचार करने के लिए, नियुक्त कर सकेगी।

(5) अध्यक्ष और समिति के अन्य सदस्यों की पदावधि, उनके पदों में आकस्मिक रिक्तियां भरने की रीति और उन्हें संदेय भत्ते यदि कोई हों, तथा ऐसी शर्तें और निबंधन, जिनके अधीन रहते हुए समिति ऐसे किसी व्यक्ति को, जो समिति का सदस्य नहीं है, अपनी किसी उप-समिति में से किसी के सदस्य के रूप में नियुक्त कर सकेगी, ऐसे होंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा विहित किए जाएं।

7. राज्य सरकार के अधिकारी. -

(1) राज्य सरकार, ऐसे अधिकारियों का, ऐसे पदाभिधानों सहित, जो वह इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ठीक समझे, नियुक्त कर सकेगी।

(2) उपधारा (1) के अधीन नियुक्त अधिकारी, राज्य सरकार के, या यदि वह सरकार ऐसा निदेश दे तो किसी अन्य प्राधिकरण या अधिकारी के भी साधारण नियंत्रण और निदेशन के अधीन होंगे।

1[ अध्याय 2

ओषधि के दुरुपयोग के नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय निधि

 (1. अधिनियम क्र० 2 सन् 1989 द्वारा दिनांक 29-5-89 से अन्तःस्थापित।)

7-. ओषधि के दुरुपयोग के नियन्त्रण के लिए राष्ट्रीय निधि.-  

(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, एक निधि स्थापित कर सकेगी जो राष्ट्रीय ओषधि दुरुपयोग नियंत्रण निधि (जिसे इस अध्याय में इसके पश्चात् निधि कहा गया है कहलाएगी और उसमें निम्नलिखित जमा किया जाएगा-

() वह रकम जो केन्द्रीय सरकार, इस निमित्त संसद की विधि द्वारा विनियोग के पश्चात् उपलब्ध कराए;

() अध्याय 5क के अधीन समपहृत किसी सम्पत्ति के विक्रय आगम;

() ऐसे कोई अनुदान जो किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा दिए जाएं :

() पूर्वोक्त उपबंधों के अधीन निधि में जमा की गई रकम के विनिधान से कोई आय।

2[ (2) निधि का उपयोजन केन्द्रीय सरकार द्वारा निम्नलिखित के लिए किए गए अध्युपायों के संबंध में उपगत व्यय की पूर्ति के लिए किया जाएगा, - (2.अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा दिनांक 2-10-2001 से प्रतिस्थापित।)

() स्वापक ओषधियों, मनः प्रभावी पदार्थों या नियंत्रित पदार्थों के अवैध व्यापार की रोकथाम करना;

() स्वापक ओषधियों और मनः प्रभावी पदार्थों के दुरुपयोग का नियंत्रण करना;

() व्यसनियों की पहचान करना, उनका उपचार करना, पुनर्वास करना;

() ओषधि के दुरुपयोग का निवारण करना;

() ओषधि के दुरुपयोग के विरुद्ध जनता को शिक्षित करना; और

() व्यसनियों को ओषधि प्रदाय करना जहां ऐसा प्रदाय चिकित्सीय आवश्यकता है।

(3) केन्द्रीय सरकार, उस सरकार को सलाह देने के लिए और केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचित सीमा के अधीन रहते हुए उक्त निधि से धन निकालने की मंजूरी देने के लिए एक ऐसे शासी निकाय का, जैसा वह ठीक समझे, गठन कर सकेगी।]

(4) शासी निकाय में एक अध्यक्ष (जो केन्द्रीय सरकार के अपर सचिव की पंक्ति से नीचे का नहीं होगा) और छह से अनधिक ऐसे अन्य सदस्य होंगे जो केन्द्रीय सरकार नियुक्त करे।

(5) शासी निकाय को अपनी प्रक्रिया स्वयं विनियमित करने की शक्ति होगी |

7-. निधि के अधीन वित्तपोषित क्रियाकलापों की वार्षिक रिपोर्ट.-

 केन्द्रीय सरकार, प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंत के पश्चात्, यथाशक्य शीघ्र, राजपत्र में, एक रिपोर्ट प्रकाशित करवाएगी जिसमें लेखाओं के विवरण सहित, वित्तीय वर्ष के दौरान धारा 7 क के अधीन वित्तपोषित क्रियाकलापों का लेखा-जोखा दिया जाएगा।]

 

Free Judiciary Coaching
Free Judiciary Notes
Free Judiciary Mock Tests
Bare Acts