धारा 303 से 334 अध्याय 17 भारतीय न्याय संहिता ,2023

धारा 303 से 334 अध्याय 17 भारतीय न्याय संहिता ,2023

अध्याय 17

सम्पत्ति के विरुद्ध अपराधों के विषय में

चोरी के विषय में

303. चोरी-

1. जो कोई, किसी व्यक्ति के कब्जे में से, उस व्यक्ति की सम्मति के बिना कोई चल सम्पत्ति बेईमानी से ले लेने का आशय रखते हुए वह सम्पत्ति ऐसे लेने के लिए हटाता है, वह चोरी करता है, यह कहा जाता है।

स्पष्टीकरण 1-

जब तक कोई वस्तु भूबद्ध रहती है, चल सम्पत्ति होने से चोरी का विषय नहीं होती; किन्तु ज्यों ही वह भूमि से पृथक् की जाती है वह चोरी का विषय होने योग्य हो जाती है।

स्पष्टीकरण 2-

हटाना, जो उसी कार्य द्वारा किया गया है जिससे पृथक्करण किया गया है, चोरी हो सकेगा।

स्पष्टीकरण 3-

कोई व्यक्ति किसी चीज का हटाना कारित करता है, यह कहा जाता है जब वह उस बाधा को हटाता है जो उस चीज को हटाने से रोके हुए हो या जब वह उस चीज को किसी दूसरी चीज से पृथक् करता है तथा जब वह वास्तव में उसे हटाता है।

स्पष्टीकरण 4-

वह व्यक्ति जो किसी साधन द्वारा किसी जीव-जन्तु का हटाना कारित करता है, उस जीव-जन्तु को हटाता है, यह कहा जाता है; और यह कहा जाता है कि वह ऐसी प्रत्येक चीज को हटाता है जो इस प्रकार उत्पन्न की गई गति के परिणामस्वरूप उस जीव-जन्तु द्वारा हटाई जाती है।

स्पष्टीकरण 5-

इस धारा में वर्णित सम्पत्ति अभिव्यक्त या विवक्षित हो सकती है, और वह या तो कब्जा रखने वाले व्यक्ति द्वारा, या किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो उस प्रयोजन के लिए अभिव्यक्त या विवक्षित प्राधिकार रखता है, दी जा सकती है।

दृष्टांत

क.  की सम्मति के बिना के कब्जे में से एक वृक्ष बेईमानी से लेने के आशय से की भूमि पर लगे हुए उस वृक्ष को काट डालता है। यहां, जैसे ही ने इस प्रकार लेने के लिए उस वृक्ष को पृथक् किया, उसने चोरी की।

ख.  अपनी जेब में कुत्तों के लिए ललचाने वाली वस्तु रखता है, और इस प्रकार के कुत्तों को अपने पीछे चलने के लिए उत्प्रेरित करता है। यहां, यदि का आशय की सम्मति के बिना के कब्जे में से उस कुत्ते को बेईमानी से लेना हो, तो जैसे ही के कुत्ते ने के पीछे चलना आरम्भ किया, ने चोरी की।

ग. मूल्यवान वस्तु की पेटी ले जाते हुए एक बैल को मिलता है। वह उस बैल को इसलिए एक खास दिशा में हांकता है कि वे मूल्यवान वस्तुएं बेईमानी से ले सके। जैसे ही उस बैल ने गतिमान होना प्रारम्भ किया, ने मूल्यवान वस्तुएं चोरी की।

घ. , जो का सेवक है और जिसे ने अपनी प्लेट की देख-रेख न्यस्त कर दी है, की सम्मति के बिना प्लेट को लेकर बेईमानी से भाग गया। ने चोरी की।

ङ.  यात्रा को जाते समय अपनी प्लेट लौटकर आने तक, को, जो एक भाण्डागारिक है, न्यस्त कर देता है। उस प्लेट को एक सुनार के पास ले जाता है और वह प्लेट बेच देता है। यहाँ वह प्लेट के कब्जे में नहीं थी, इसलिए वह के कब्जे में से नहीं ली जा सकती थी और ने चोरी नहीं की है, चाहे उसने आपराधिक न्यासभंग किया हो।

च. जिस घर पर का अधिभोग है उसके मेज पर की अंगूठी को मिलती है। यहां, वह अंगूठी के कब्जे में है, और यदि उसको बेईमानी से हटाता है, तो वह चोरी करता है।

छ.  को राजमार्ग पर पड़ी हुई अंगूठी मिलती है, जो किसी व्यक्ति के कब्जे में नहीं है। ने उसके ले लेने से चोरी नहीं की है, भले ही उसने सम्पत्ति का आपराधिक दुर्विनियोग किया हो।

ज.  के घर में मेज पर पड़ी हुई की अंगूठी देखता है। तलाशी और पता लगने के भय से उस अंगूठी का तुरन्त दुर्विनियोग करने का साहस करते हुए उस अंगूठी को ऐसे स्थान पर, जहां से उसका को कभी भी मिलना अति अनधिसम्भाव्य है, इस आशय से छिपा देता है कि छिपाने के स्थान से उसे उस समय ले ले और बेच दे जबकि उसका खोया जाना याद रहे। यहां, ने उस अंगूठी को प्रथम बार हटाते समय चोरी की है।

झ.  को, जो एक जौहरी है, अपनी घड़ी समय ठीक करने के लिए परिदत्त करता है। उसको अपनी दुकान पर ले जाता है। , जिस पर उस जौहरी का, कोई ऐसा ऋण नहीं है, जिसके लिए कि वह जौहरी उस घड़ी को प्रतिभूति के रूप में विधिपूर्वक रोक सके, खुले तौर पर उस दुकान में घुसता है, के हाथ से अपनी घड़ी बलपूर्वक ले लेता है, और उसको ले जाता है। यहाँ ने भले ही आपराधिक अतिचार और हमला किया हो, उसने चोरी नहीं की है, क्योंकि जो कुछ भी उसने किया, बेईमानी से नहीं किया।

ञ. यदि उस घड़ी की मरम्मत के सम्बन्ध में को से धन देय है, और यदि उस घड़ी को उस ऋण की प्रतिभूति के रूप में विधिपूर्वक रखे रखता है और उस घड़ी को के कब्जे में से इस आशय से ले लेता है कि को उसके ऋण की प्रतिभूति रूप उस सम्पत्ति से वंचित कर दे तो उसने चोरी की है क्योंकि जो कुछ वह लेता है, उसे बेईमानी से लेता है।

ट. और यदि अपनी घड़ी के पास गिरवी रखने के बाद घड़ी के बदले लिए गए ऋण को चुकाए बिना उसे के कब्जे में से की सम्मति के बिना ले लेता है, तो उसने चोरी की है, यद्यपि वह घड़ी उसकी अपनी ही सम्पत्ति है, क्योंकि जो कुछ वह लेता है, उसे बेईमानी से लेता है।

ठ. क एक वस्तु को उस समय तक रख लेने के आशय से जब तक कि उसके प्रत्यावर्तन के लिए पुरस्कार के रूप में उसे य से धन अभिप्राप्त न हो जाए, य की सम्मति के बिना य के कब्जे में से लेता है। यहां क बेईमानी से लेता है, इसलिए, क ने चोरी की।

ड., जो का मित्र है, की अनुपस्थिति में के पुस्तकालय में जाता है, और की अभिव्यक्त सम्मति के बिना एक पुस्तक केवल पढ़ने के लिए और वापस करने के आशय से ले जाता है। यहां यह अधिसम्भाव्य है कि ने यह विचार किया हो कि पुस्तक उपयोग में लाने के लिए उसको की विवक्षित सम्मति प्राप्त है, यदि का यह विचार था, तो ने चोरी नहीं की है।

ढ.  की पत्नी से भिक्षादान मांगता है। वह को धन, भोजन और कपड़े देती है जिनको जानता है कि वे उसके पति के हैं। यहां, यह अधिसम्भाव्य है कि का यह विचार हो कि की पत्नी को भिक्षा देने का प्राधिकार है। यदि का यह विचार था, तो ने चोरी नहीं की है।

ण. , की पत्नी का जार है। वह को एक मूल्यवान सम्पत्ति देती है जिसके सम्बन्ध में यह जानता है कि वह उसके पति की है, और वह ऐसी सम्पत्ति है, जिसको देने का प्राधिकार उसे से प्राप्त नहीं है। यदि उस सम्पत्ति को बेईमानी से लेता है, तो वह चोरी करता है।

त.  की सम्पत्ति को अपनी स्वयं की सम्पत्ति होने का सद्भावपूर्वक विश्वास करते हुए के कब्जे में से उस सम्पत्ति को ले लेता है। यहां बेईमानी से नहीं लेता, इसलिए वह चोरी नहीं करता।

2. जो कोई चोरी करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा और इस धारा के अधीन किसी व्यक्ति के दूसरे या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि के मामले में, उसे ऐसे कठिन कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु पांच वर्ष तक हो सकेगी और जुर्माने से दण्डित किया जाएगा:

परन्तु चोरी के उन मामलों में जहाँ चोरी की गई सम्पत्ति का मूल्य पांच हजार रुपए से कम है और कोई व्यक्ति पहली बार के लिए दोषसिद्ध किया गया है, चोरी की गई सम्पत्ति के वापस करने पर या सम्पत्ति को प्रत्यावर्तित करने पर उसे सामुदायिक सेवा से दण्डित किया जाएगा।

304. झपटमारी-

1. चोरी "झपटमारी" है, यदि चोरी करने के लिए अपराधी अचानक या शीघ्रता से या बलपूर्वक किसी व्यक्ति से या उसके कब्जे में से किसी चल सम्पत्ति को अभिग्रहण कर लेता है या प्राप्त कर लेता है या छीन लेता है या ले लेता है।

2. जो कोई झपटमारी करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी दायी होगा

305. निवास-गृह, या यातायात के साधन या पूजा स्थल, आदि में चोरी- 

जो कोई, —

क. ऐसे किसी भवन, तम्बू या जलयान में चोरी करता है, जो मानव निवास के रूप में, या सम्पत्ति की अभिरक्षा के लिए उपयोग में आता है; या

ख. ऐसे किसी यातायात के साधन में चोरी करता है, जो माल या यात्रियों के यातायात के लिए उपयोग किया जाता है; या

ग. ऐसे किसी यातायात के साधन से किसी वस्तु या माल की चोरी करता है, जो माल या यात्रियों के यातायात के लिए उपयोग किया जाता है; या

घ. किसी पूजा स्थल की मूर्ति या प्रतीक की चोरी करता है; या

ङ. सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण की किसी सम्पत्ति की चोरी करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने का भी दायी होगा।

306. लिपिक या सेवक द्वारा स्वामी के कब्जे में संपति की चोरी-

जो कोई, लिपिक या सेवक होते हुए, या लिपिक या सेवक की हैसियत में नियोजित होते हुए, अपने मालिक या नियोक्ता के कब्जे की किसी सम्पत्ति की चोरी करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

307. चोरी करने के लिए मृत्यु, उपहति या अवरोध कारित करने की तैयारी के पश्चात् चोरी-

जो कोई, चोरी करने के लिए, या चोरी करने के पश्चात् निकल भागने के लिए, या चोरी द्वारा ली गई सम्पत्ति को रखे रखने के लिए, किसी व्यक्ति की मृत्यु, या उसे उपहति या उसका अवरोध कारित करने की, या मृत्यु का, उपहति का या अवरोध का भय कारित करने की तैयारी करके चोरी करता है, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

दृष्टांत

क.  के कब्जे में की सम्पत्ति पर चोरी करता है और यह चोरी करते समय अपने पास अपने वस्त्रों के भीतर एक भरी हुई पिस्तौल रखता है, जिसे उसने द्वारा प्रतिरोध किए जाने की दशा में को उपहति करने के लिए अपने पास रखा था। ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

ख. , की जेब काटता है, और ऐसा करने के लिए अपने कई साथियों को अपने पास इसलिए नियुक्त करता है कि यदि यह समझ जाए कि क्या हो रहा है और प्रतिरोध करे, या को पकड़ने का प्रयत्न करे, तो वे का अवरोध करें। ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

उद्दापन के विषय में

308. उद्दापन-

1. जो कोई, किसी व्यक्ति को स्वयं उस व्यक्ति को या किसी अन्य व्यक्ति को कोई क्षति करने के भय में साशय डालता है, और उसके द्वारा इस प्रकार भय में डाले गए व्यक्ति को, कोई सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति या हस्ताक्षरित या मुद्रांकित कोई चीज, जिसे मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित किया जा सके, किसी व्यक्ति को परिदत्त करने के लिए बेईमानी से उत्प्रेरित करता है, वह उद्दापन करता है।

दृष्टांत

 क.  यह धमकी देता है कि यदि ने उसको धन नहीं दिया, तो वह के बारे में मानहानिकारक अपमानलेख प्रकाशित करेगा। अपने को धन देने के लिए वह इस प्रकार को उत्प्रेरित करता है। ने उद्दापन किया है।

ख. , को यह धमकी देता है कि यदि वह को कुछ धन देने के सम्बन्ध में अपने आपको आबद्ध करने वाला एक वचनपत्र हस्ताक्षरित करके को परिदत्त नहीं कर देता, तो वह के शिशु को सदोष परिरोध में रखेगा। वचनपत्र हस्ताक्षरित करके परिदत्त कर देता है। ने उद्दापन किया है।

ग.  यह धमकी देता है कि यदि , को कुछ उपज परिदत्त कराने के लिए शास्तियुक्त बन्धपत्र हस्ताक्षरित नहीं करेगा और को देगा, तो वह के खेत को जोत डालने के लिए लठैत भेज देगा और उसके द्वारा को वह बन्धपत्र हस्ताक्षरित करने के लिए और परिदत्त करने के लिए उत्प्रेरित करता है। ने उद्दापन किया है।

घ. , को घोर उपहति करने के भय में डालकर बेईमानी से को उत्प्रेरित करता है कि वह कोरे कागज पर हस्ताक्षर कर दे या अपनी मुद्रा लगा दे और उसे को परिदत्त कर दे। उस कागज पर हस्ताक्षर करके उसे को परिदत्त कर देता है यहां, इस प्रकार हस्ताक्षरित कागज मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित किया जा सकता है, इसलिए ने उद्दापन किया है।

ङ. , को किसी इलैक्ट्रानिक डिवाइस के माध्यम से यह संदेश भेजकर धमकी देता है कि "तुम्हारा बच्चा मेरे कब्जे में है और उसे मार दिया जाएगा यदि तुम मुझे एक लाख रुपए नहीं देते हो" इस प्रकार को उसे पैसे देने के लिए उत्प्रेरित करता है। ने "उद्दापन" किया है।

2. जो कोई, उद्दापन करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

3. जो कोई, उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को किसी क्षति के पहुंचाने के भय में डालता है या भय में डालने का प्रयत्न करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

4. जो कोई, उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को स्वयं उसकी या किसी अन्य व्यक्ति की मृत्यु या घोर उपहति के भय में डालता है या भय में डालने का प्रयत्न करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

5. जो कोई, किसी व्यक्ति को स्वयं उसकी या किसी अन्य व्यक्ति की मृत्यु या घोर उपहति के भय में डालकर उद्दापन करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

6. जो कोई, उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को, स्वयं उसके विरुद्ध या किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध यह अभियोग लगाने का भय दिखलाता है या यह भय दिखलाने का प्रयत्न करता है कि उसने ऐसा अपराध किया है, या करने का प्रयत्न किया है, जो मृत्यु से या आजीवन कारावास से, या दस वर्ष तक के कारावास से दण्डनीय है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

7. जो कोई, किसी व्यक्ति को स्वयं उसके विरुद्ध या किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध यह अभियोग लगाने के भय में डालकर कि उसने कोई ऐसा अपराध किया है, या करने का प्रयत्न किया है, जो मृत्यु से या आजीवन कारावास से या ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डनीय है, या यह कि उसने किसी अन्य व्यक्ति को ऐसा अपराध करने के लिए उत्प्रेरित करने का प्रयत्न किया है, उद्दापन करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

लूट और डकैती के विषय में

309. लूट-

1. सब प्रकार की लूट में या तो चोरी या उद्दापन होता है।

2. चोरी "लूट" है, यदि उस चोरी को करने के लिए, या उस चोरी के करने में या उस चोरी द्वारा अभिप्राप्त सम्पत्ति को ले जाने या ले जाने का प्रयत्न करने में, अपराधी उस उद्देश्य से स्वेच्छया किसी व्यक्ति की मृत्यु, या उपहति या उसका सदोष अवरोध या तत्काल मृत्यु का, या तत्काल उपहति का, या तत्काल सदोष अवरोध का भय कारित करता या कारित करने का प्रयत्न करता है।

3. उद्दापन "लूट" है, यदि अपराधी वह उद्दापन करते समय भय में डाले गए व्यक्ति की उपस्थिति में है, और उस व्यक्ति को स्वयं उसकी या किसी अन्य व्यक्ति की तत्काल मृत्यु या तत्काल उपहति या तत्काल सदोष अवरोध के भय में डालकर वह उद्दापन करता है और इस प्रकार भय में डालकर इस प्रकार भय में डाले गए व्यक्ति को उ‌द्दापन की जाने वाली चीज उसी समय और वहां ही परिदत्त करने के लिए उत्प्रेरित करता है।

स्पष्टीकरण-

अपराधी का उपस्थित होना कहा जाता है, यदि वह उस अन्य व्यक्ति को तत्काल मृत्यु के, तत्काल उपहति के, या तत्काल सदोष अवरोध के भय में डालने के लिए पर्याप्त रूप से निकट हो

दृष्टांत

क. , को दबोच लेता है, और के कपड़े में से का धन और आभूषण की सम्मति के बिना कपटपूर्वक निकाल लेता है। यहाँ, ने चोरी की है और वह चोरी करने के लिए स्वेच्छया का सदोष अवरोध कारित करता है। इसलिए ने लूट की है। 

ख. , को राजमार्ग पर मिलता है, एक पिस्तौल दिखलाता है और की थैली मांगता है। परिणामस्वरूप अपनी थैली दे देता है। यहां ने को तत्काल उपहति का भय दिखलाकर थैलो उद्दापित की है और उद्दापन करते समय वह उसकी उपस्थिति में है। अतः ने लूट की है।

ग. राजमार्ग पर और के शिशु से मिलता है। उस शिशु को पकड़ लेता है और यह धमकी देता है कि यदि उसको अपनी थैली नहीं परिदत्त कर देता, तो वह उस शिशु को कगार से नीचे फेंक देगा। परिणामस्वरूप अपनी थैली परिदत्त कर देता है। यहां ने को यह भय कारित करके कि वह उस शिशु को, जो वहाँ उपस्थित है, तत्काल उपहति करेगा, से उसकी थैली उद्दापित की है। इसलिए ने य को लूटा है।

घ. , से यह कह कर, सम्पत्ति अभिप्राप्त करता है कि "तुम्हारा बालक मेरी टोली के हाथों में है, यदि तुम हमारे पास दस हजार रुपया नहीं भेज दोगे, तो वह मार डाला जाएगा " यह उद्दापन है, और इसी रूप में दण्डनीय है; किन्तु यह लूट नहीं है, जब तक कि को उसके शिशु की तत्काल मृत्यु के भय में डाला जाए।

4. जो कोई, लूट करता है, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा, और यदि लूट राजमार्ग पर सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय के पूर्व की जाए, तो कारावास चौदह वर्ष तक का हो सकेगा।

5. जो कोई, लूट करने का प्रयत्न करता है, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

6. यदि कोई व्यक्ति लूट करने में या लूट का प्रयत्न करने में स्वेच्छया उपहति कारित करता है, तो ऐसा व्यक्ति और कोई अन्य व्यक्ति ऐसी लूट करने में, या लूट का प्रयत्न करने में संयुक्त तौर पर संबंधित होगा, वह आजीवन कारावास से या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

310. डकैती-

1. जब पांच या अधिक व्यक्ति संयुक्त होकर लूट करते हैं या करने का प्रयत्न करते हैं या जहां कि वे व्यक्ति, जो संयुक्त होकर लूट करते हैं या करने का प्रयत्न करते हैं और वे व्यक्ति जो उपस्थित हैं और ऐसे लूट के किए जाने या ऐसे प्रयत्न में मदद करते हैं, कुल मिलाकर पांच या अधिक हैं, तब प्रत्येक व्यक्ति जो इस प्रकार लूट करता है, या उसका प्रयत्न करता है या उसमें मदद करता है, कहा जाता है कि वह "डकैती" करता है।

2. जो कोई डकैती करता है, वह आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

3. यदि ऐसे पांच या अधिक व्यक्तियों में से, जो संयुक्त होकर डकैती कर रहे हों, कोई एक व्यक्ति इस प्रकार डकैती करने में हत्या कर देता है, तो उन व्यक्तियों में से प्रत्येक व्यक्ति मृत्यु से, या आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

4. जो कोई, डकैती करने के लिए कोई तैयारी करता है, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने का भी दायी होगा।

5. जो कोई डकैती करने के प्रयोजन से एकत्रित पांच या अधिक व्यक्तियों में से एक है, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

6. जो कोई, ऐसे व्यक्तियों की टोली का है, जो अभ्यासतः डकैती करने के प्रयोजन से सहयुक्त हों, वह आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

311. मृत्यु या घोर उपहति कारित करने के प्रयत्न के साथ लूट या डकैती-

यदि लूट या डकैती करते समय अपराधी किसी घातक आयुध का उपयोग करता है, या किसी व्यक्ति को घोर उपहति कारित करता है, या किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करने या उसे घोर उपहति कारित करने का प्रयत्न करता है, तो वह कारावास, जिससे ऐसा अपराधी दण्डित किया जाएगा, सात वर्ष से कम का नहीं होगा।

312. घातक आयुध सज्जित होकर लूट या डकैती करने प्रयत्न-

यदि लूट या डकैती करने का प्रयत्न करते समय, अपराधी किसी घातक से सज्जित होगा, तो वह कारावास, जिससे ऐसा अपराधी दण्डित किया जाएगा, सात वर्ष से कम का नहीं होगा

313. लुटेरों, आदि की टोली का होने के लिए दण्ड-

जो कोई ऐसे व्यक्तियों की टोली का है, जो अभ्यासत: चोरी या लूट करने से सहयुक्त हों और वह टोली डाकुओं की टोली नहीं है, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

सम्पत्ति के आपराधिक दुर्विनियोग के विषय में

314. सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग-

जो कोई, बेईमानी से किसी चल सम्पत्ति का दुर्विनियोग करता है या उसको अपने उपयोग के लिए सम्परिवर्तित कर लेता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम नहीं होगी किन्तु जो दो वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, दण्डित किया जाएगा।

दृष्टांत

क. , की सम्पत्ति को उस समय जब कि उस सम्पत्ति को लेता है, यह विश्वास रखते हुए कि वह सम्पत्ति उसी की है, के कब्जे में से स‌द्भावपूर्वक लेता है। , चोरी का दोषी नहीं है। किन्तु यदि अपनी भूल मालूम होने के पश्चात् उस सम्पत्ति का बेईमानी से अपने लिए विनियोग कर लेता है, तो वह इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है।

ख. , जो का मित्र है, की अनुपस्थिति में के पुस्तकालय में जाता है और की अभिव्यक्त सम्मति के बिना एक पुस्तक ले जाता है। यहां यदि, का यह विचार था कि पढ़ने के प्रयोजन के लिए पुस्तक लेने की उसको की विवक्षित सम्मति प्राप्त है, तो ने चोरी नहीं की है। किन्तु यदि बाद में उस पुस्तक को अपने फायदे के लिए बेच देता है, तो वह इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है।

ग.  और एक घोड़े के संयुक्त स्वामी हैं। उस घोड़े को उपयोग में लाने के आशय से के कब्जे में से उसे ले जाता है। यहां, को उस घोड़े को उपयोग में लाने का अधिकार है, इसलिए वह उसका बेईमानी से दुर्विनियोग नहीं है। किन्तु यदि उस घोड़े को बेच देता है, और सम्पूर्ण आगम का अपने लिए विनियोग कर लेता है तो वह इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है।

स्पष्टीकरण 1-

केवल कुछ समय के लिए बेईमानी से दुर्विनियोग करना इस धारा के अर्थ के अंतर्गत दुर्विनियोग है।

दृष्टांत

को का एक सरकारी वचनपत्र मिलता है, जिस पर कोरा पृष्ठांकन है। , यह जानते हुए कि वह वचनपत्र का है, उसे ऋण के लिए प्रतिभूति के रूप में बैंककार के पास इस आशय से गिरवी रख देता है कि वह भविष्य में उसे को प्रत्यावर्तित कर देगा। ने इस धारा के अधीन अपराध किया है।

स्पष्टीकरण 2-

जिस व्यक्ति को ऐसी सम्पत्ति पड़ी मिल जाती है, जो किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे में नहीं है और वह उसके स्वामी के लिए उसको संरक्षित रखने या उसके स्वामी को उसे प्रत्यावर्तित करने के प्रयोजन से ऐसी सम्पत्ति को लेता है, वह तो बेईमानी से उसे लेता है और बेईमानी से उसका दुर्विनियोग करता है, और किसी अपराध का दोषी नहीं है, किन्तु वह ऊपर परिभाषित अपराध का दोषी है, यदि वह उसके स्वामी को जानते हुए या खोज निकालने के साधन रखते हुए या उसके स्वामी को खोज निकालने और सूचना देने के युक्तियुक्त साधन उपयोग में लाने और उसके स्वामी को उसकी मांग करने को समर्थ करने के लिए उस सम्पत्ति की युक्तियुक्त समय तक रखे रखने के पूर्व उसको अपने लिए विनियोजित कर लेता है।

ऐसी दशा में युक्तियुक्त साधन क्या हैं, या युक्तियुक्त समय क्या है, यह तथ्य का प्रश्न है।

यह आवश्यक नहीं है कि पाने वाला यह जानता हो कि सम्पत्ति का स्वामी कौन है या यह कि कोई विशिष्ट व्यक्ति उसका स्वामी है। यह पर्याप्त है कि उसको विनियोजित करते समय उसे यह विश्वास नहीं है कि वह उसकी अपनी सम्पत्ति है, या स‌द्भावपूर्वक यह विश्वास है कि उसका असली स्वामी नहीं मिल सकता

दृष्टांत

क.  को राजमार्ग पर एक रुपया पड़ा मिलता है। यह जानते हुए कि वह रुपया किसका है, उस रुपए को उठा लेता है। यहां ने इस धारा में परिभाषित अपराध नहीं किया है।

ख.  को सड़क पर एक चिट्ठी पड़ी मिलती है, जिसमें एक बैंक नोट है। उस चिट्ठी में दिए हुए निदेश और विषय-वस्तु से उसे ज्ञात हो जाता है कि वह नोट किसका है। वह उस नोट का विनियोग कर लेता है। वह इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है।

ग. वाहक-देय एक चेक को पड़ा मिलता है। वह उस व्यक्ति के सम्बन्ध में जिसका चेक खोया है, कोई अनुमान नहीं लगा सकता, किन्तु उस चेक पर उस व्यक्ति का नाम लिखा है, जिसने वह चेक लिखा है। यह जानता है कि वह व्यक्ति को उस व्यक्ति का पता बता सकता है जिसके पक्ष में वह चेक लिखा गया था, उसके स्वामी को खोजने का प्रयत्न किए बिना उस चेक का विनियोग कर लेता है। वह इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है।

घ.  देखता है कि की थैली, जिसमें धन है, से गिर गई है। वह थैली को प्रत्यावर्तित करने के आशय से उठा लेता है। किन्तु तत्पश्चात् उसे अपने उपयोग के लिए विनियोजित कर लेता है। ने इस धारा के अधीन अपराध किया है।

ङ.  को एक थैली, जिसमें धन है, पड़ी मिलती है। वह नहीं जानता है कि वह किसकी है। उसके पश्चात् उसे यह पता चल जाता है कि वह की है, और वह उसे अपने उपयोग के लिए विनियोजित कर लेता है। इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है।

च.  को एक मूल्यवान अंगूठी पड़ी मिलती है। वह नहीं जानता है कि वह किसकी है। उसके स्वामी को खोज निकालने का प्रयत्न किए बिना उसे तुरन्त बेच देता है। इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है।

315. ऐसी सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग, जो मृत व्यक्ति की मृत्यु के समय उसके कब्जे में थी-

जो कोई, किसी सम्पत्ति को, यह जानते हुए कि ऐसी सम्पत्ति किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय उस मृत व्यक्ति के कब्जे में थी, और तब से किसी व्यक्ति के कब्जे में नहीं रही है, जो ऐसे कब्जे का वैध रूप से हकदार है, बेईमानी से दुर्विनियोजित करता है या अपने उपयोग में संपरिवर्तित कर लेता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा, और यदि वह अपराधी, ऐसे व्यक्ति की मृत्यु के समय लिपिक या सेवक के रूप में उसके द्वारा नियोजित था, तो कारावास सात वर्ष तक का हो सकेगा।

दृष्टांत

के कब्जे में फर्नीचर और धन था वह मर जाता है उसका सेवक , उस धन के किसी ऐसे व्यक्ति के कब्जे में आने से पूर्व, जो ऐसे कब्जे का हकदार है बेईमानी से उसका दुर्विनियोग करता है ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

आपराधिक न्यासभंग के विषय में

316. आपराधिक न्यासभंग-

1. जो कोई, सम्पत्ति या सम्पत्ति पर कोई भी आधिपत्य किसी प्रकार से अपने को न्यस्त किए जाने पर उस सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग कर लेता है या उसे अपने उपयोग में संपरिवर्तित कर लेता है या जिस प्रकार ऐसा न्यास निर्वहन किया जाना है, उसको विहित करने वाली विधि के किसी निदेश का, या ऐसे न्यास के निर्वहन के बारे में उसके द्वारा की गई किसी अभिव्यक्त या विवक्षित वैध संविदा का अतिक्रमण करके बेईमानी से उस सम्पत्ति का उपयोग या व्ययन करता है, या जानबूझकर किसी अन्य व्यक्ति का ऐसा करना सहन करता है, वह आपराधिक न्यास भंग करता है।

स्पष्टीकरण 1-

जो व्यक्ति, किसी स्थापन का नियोजक होते हुए, चाहे वह स्थापन कर्मचारी भविष्य-निधि और प्रकीर्ण उपबन्ध अधिनियम, 1952 (1952 का 19) की धारा 17 के अधीन छूट प्राप्त है या नहीं, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा स्थापित भविष्य निधि या कुटुम्ब पेंशन निधि में जमा करने के लिए कर्मचारी-अभिदाय की कटौती कर्मचारी को संदेय मजदूरी में से करता है उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसके द्वारा इस प्रकार कटौती किए गए अभिदाय की रकम उसे न्यस्त कर दी गई है और यदि वह उबवत निधि में ऐसे अभिदाय का संदाय करने में, उक्त विधि का अतिक्रमण करके व्यतिक्रम करेगा तो उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने यथापूर्वोक्त विधि के किसी निदेश का अतिक्रमण करके उक्त अभिदाय की रकम का बेईमानी से उपयोग किया है।

स्पष्टीकरण 2-

जो व्यक्ति, नियोजक होते हुए, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 (1948 का 34) के अधीन स्थापित कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा धारित और शासित कर्मचारी राज्य बीमा निगम निधि में जमा करने के लिए कर्मचारी को संदेय मजदूरी में से कर्मचारी-अभिदाय की कटौती करता है, उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसे अभिदाय की वह रकम न्यस्त कर दी गई है, जिसकी उसने इस प्रकार कटौती की है और यदि वह उक्त निधि में ऐसे अभिदाय के संदाय करने में, उक्त अधिनियम का अतिक्रमण करके, व्यतिक्रम करता है, तो उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने यथापूर्वोक्त विधि के किसी निदेश का अतिक्रमण करके उक्त अभिदाय की रकम का बेईमानी से उपयोग किया है।

दृष्टांत

क.  एक मृत व्यक्ति की वसीयत का निष्पादक होते हुए उस विधि की, जो सामान को वसीयत के अनुसार विभाजित करने के लिए उसको निदेश देती है, बेईमानी से अवज्ञा करता है, और उस सामान को अपने उपयोग के लिए विनियोजित कर लेता है। ने आपराधिक न्यासभंग किया है।

ख.  भाण्डागारिक है। यात्रा को जाते हुए अपना फर्नीचर के पास उस संविदा के अधीन न्यस्त कर जाता है कि वह भाण्डागार के कमरे के लिए ठहराई गई राशि के दे दिए जाने पर लौटा दिया जाएगा। उस माल को बेईमानी से बेच देता है। ने आपराधिक न्यासभंग किया है।

ग. , जो कलकत्ता में निवास करता है, का, जो दिल्ली में निवास करता है अभिकर्ता है। और के बीच यह अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा है कि द्वारा को प्रेषित सब राशियां द्वारा के निदेश के अनुसार विनिहित की जाएंगी। , को इन निदेशों के साथ एक लाख रुपए भेजता है कि उसको कम्पनी पत्रों में विनिहित किया जाए। उन निदेशों की बेईमानी से अवज्ञा करता है और उस धन को अपने कारबार के उपयोग में ले आता है। ने आपराधिक न्यासभंग किया है।

घ. किन्तु यदि दृष्टान्त () में बेईमानी से नहीं बल्कि स‌द्भावपूर्वक यह विश्वास करते हुए कि बैंक ऑफ बंगाल में अंश धारण करना के लिए अधिक फायदाप्रद होगा, के निदेशों की अवज्ञा करता है, और कम्पनी पत्र खरीदने के बजाय के लिए बैंक ऑफ बंगाल के अंश खरीदता है, तो यद्यपि को हानि हो जाए और उस हानि के कारण, वह के विरुद्ध सिविल कार्यवाही करने का हकदार हो, तथापि, यतः ने, बेईमानी से कार्य नहीं किया है, उसने आपराधिक न्यासभंग नहीं किया है।

ङ. एक राजस्व अधिकारी, के पास लोक धन न्यस्त किया गया है और वह उस सब धन को, जो उसके पास न्यस्त किया गया है, एक निश्चित खजाने में जमा कर देने के लिए या तो विधि द्वारा निर्देशित है या सरकार के साथ अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा द्वारा आबद्ध है। उस धन को बेईमानी से विनियोजित कर लेता है। ने आपराधिक न्यासभंग किया है।

च. भूमि से या जल से ले जाने के लिए ने के पास, जो एक वाहक है, सम्पत्ति न्यस्त की है। उस सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग कर लेता है। ने आपराधिक न्यासभंग किया है।

2. जो कोई, आपराधिक न्यासभंग करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

3. जो कोई, वाहक, घाटवाल या भाण्डागारिक के रूप में अपने पास सम्पत्ति न्यस्त किए जाने पर ऐसी सम्पत्ति के विषय में आपराधिक न्यासभंग करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

4. जो कोई, लिपिक या सेवक होते हुए, या लिपिक या सेवक के रूप में नियोजित होते हुए, और इस नाते किसी प्रकार सम्पत्ति, या सम्पत्ति पर कोई भी आधिपत्य अपने में न्यस्त होते हुए, उस सम्पत्ति के विषय में आपराधिक न्यासभंग करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

5. जो कोई, लोक सेवक के नाते या बैंकर, व्यापारी, फैक्टर, दलाल, अटर्नी या अभिकर्ता के रूप में अपने कारबार के अनुक्रम में किसी प्रकार सम्पत्ति या सम्पत्ति पर कोई भी आधिपत्य अपने को न्यस्त होते हुए उस सम्पत्ति के विषय में आपराधिक न्यासभंग करता है, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

चुराई हुई संपत्ति प्राप्त करने के विषय में

317. चुराई हुई संपत्ति-

1. वह सम्पत्ति, जिसका कब्जा चोरी द्वारा, या उद्दापन द्वारा या लूट द्वारा या छल द्वारा अन्तरित किया गया है, और वह सम्पत्ति, जिसका आपराधिक दुर्विनियोग किया गया है, या जिसके विषय में आपराधिक न्यासभंग किया गया है, चुराई हुई "सम्पत्ति" कहलाती है, चाहे वह अन्तरण या वह दुर्विनियोग या न्यासभंग भारत के भीतर किया गया हो या बाहर, किन्तु यदि ऐसी सम्पत्ति तत्पश्चात् ऐसे व्यक्ति के कब्जे में पहुँच जाती है, जो उसके कब्जे के लिए वैध रूप से हकदार है, तो वह चुराई हुई सम्पत्ति नहीं रह जाती।

2. जो कोई, किसी चुराई हुई सम्पत्ति को, यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि वह चुराई हुई सम्पत्ति है, बेईमानी से प्राप्त करता है या रखता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

3. जो कोई, ऐसी चुराई गई सम्पत्ति को बेईमानी से प्राप्त करता है या रखे रखता है, जिसके कब्जे के विषय में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह डकैती द्वारा अन्तरित की गई है, या किसी ऐसे व्यक्ति से, जिसके सम्बन्ध में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह डाकुओं की टोली का है या रहा है, ऐसी सम्पत्ति, जिसके विषय में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई है, बेईमानी से प्राप्त करता है, वह आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने का भी दायी होगा।

4. जो कोई, ऐसी सम्पत्ति, जिसके सम्बन्ध में वह यह जानता है, या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई सम्पत्ति है, अभ्यासतः प्राप्त करता है, या अभ्यासतः उसमें व्यवहार करता है, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

5. जो कोई, ऐसी सम्पत्ति को छिपाने में, या व्ययनित करने में, या इधर-उधर करने में स्वेच्छया सहायता करता है, जिसके विषय में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई सम्पत्ति है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

छल के विषय में

318. छल-

1. जो कोई, किसी व्यक्ति से प्रवंचना कर उस व्यक्ति को, जिसे इस प्रकार प्रवंचित किया गया है, कपटपूर्वक या बेईमानी से उत्प्रेरित करता है कि वह कोई सम्पत्ति किसी व्यक्ति को परिदत्त कर दे, या यह सम्मति दे दे कि कोई व्यक्ति किसी सम्पत्ति को रख रखे या साशय उस व्यक्ति को, जिसे इस प्रकार प्रवंचित किया गया है, उत्प्रेरित करता है कि वह ऐसा कोई कार्य करे, या करने का लोप करे, जिसे वह यदि उसे प्रत्येक प्रकार प्रवंचित किया गया होता तो, करता, या करने का लोप करता, और जिस कार्य या लोप से उस व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक, ख्याति सम्बन्धी या साम्पत्तिक नुकसान या अपहानि कारित होती है, या कारित होनी सम्भाव्य है, वह छल करता है, यह कहा जाता है।

स्पष्टीकरण-

तथ्यों का बेईमानी से छिपाना इस धारा के अर्थ के अंतर्गत प्रवंचना है।

दृष्टांत

क.  सिविल सेवा में होने का मिथ्या अपदेश करके साशय से प्रवंचना करता है, और इस प्रकार बेईमानी से को उत्प्रेरित करता है कि वह उसे उधार पर माल ले लेने दे, जिसका मूल्य चुकाने का उसका इरादा नहीं है। छल करता है।

ख.  एक वस्तु पर कूटकृत चिह्न बनाकर से साशय प्रवंचना करके उसे यह विश्वास कराता है कि वह वस्तु किसी प्रसिद्ध विनिर्माता द्वारा बनाई गई है, और इस प्रकार उस वस्तु का क्रय करने और उसका मूल्य चुकाने के लिए को बेईमानी से उत्प्रेरित करता है। छल करता है।

ग. , को किसी वस्तु का, नकली सैंपल दिखलाकर से साशय प्रवंचना करके उसे यह विश्वास कराता है कि वह वस्तु उस सैंपल के अनुरूप है, और उसके द्वारा उस वस्तु को खरीदने और उसका मूल्य चुकाने के लिए को बेईमानी से उत्प्रेरित करता है। छल करता है।

घ.  किसी वस्तु का मूल्य देने में ऐसी कोठी पर हुण्डी करके, जहां का कोई धन जमा नहीं है, और जिसके द्वारा को हुण्डी का अनादर किए जाने की प्रत्याशा है, आशय से की प्रवंचना करता है, और उसके द्वारा बेईमानी से को उत्प्रेरित करता है कि वह वस्तु परिदत्त कर दे जिसका मूल्य चुकाने का उसका आशय नहीं है। छल करता है।

ङ.  ऐसे नगों को, जिनको वह जानता है कि वे हीरे नहीं हैं, हीरों के रूप में गिरवी रखकर से साशय प्रवंचना करता है, और उसके द्वारा धन उधार देने के लिए को बेईमानी से उत्प्रेरित करता है। छल करता है।

च.  साशय प्रवंचना करके को यह विश्वास कराता है कि को जो धन उधार देगा उसे वह चुका देगा, और उसके द्वारा बेईमानी से को उत्प्रेरित करता है कि वह उसे धन उधार दे दे, जबकि का आशय उस धन को चुकाने का नहीं है। छल करता है।

छ. , से साशय प्रवंचना करके यह विश्वास दिलाता है कि का इरादा को नील के पौधों का एक निश्चित परिमाण परिदत्त करने का है, जिसको परिदत्त करने का उसका आशय नहीं है, और उसके द्वारा ऐसे परिदान के विश्वास पर अग्रिम धन देने के लिए को बेईमानी से उत्प्रेरित करता है। छल करता है। यदि धन अभिप्राप्त करते समय नील परिदत्त करने का आशय रखता हो, और उसके पश्चात् अपनी संविदा भंग कर दे और वह उसे परिदत्त करे, तो वह छल नहीं करता है, किन्तु संविदा भंग करने के लिए केवल सिविल कार्यवाही के दायित्व के अधीन है।

ज.  साशय प्रवंचना करके को यह विश्वास दिलाता है कि ने के साथ की गई संविदा के अपने भाग का पालन कर दिया है, जबकि उसका पालन उसने नहीं किया है, और उसके द्वारा को बेईमानी से उत्प्रेरित करता है कि वह धन दे। छल करता है।

झ. , को एक सम्पदा बेचता है और हस्तान्तरित करता है। यह जानते हुए कि ऐसे विक्रय के परिणामस्वरूप उस सम्पत्ति पर उसका कोई अधिकार नहीं है, को किए गए पूर्व विक्रय और हस्तान्तरण के तथ्य को प्रकट करते हुए उसे के हाथ बेच देता है या बन्धक रख देता है, और से विक्रय या बन्धक धन प्राप्त कर लेता है। छल करता है।

2. जो कोई, छल करता है, दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

3. जो कोई, इस ज्ञान के साथ छल करता है कि यह सम्भाव्य है कि वह उसके द्वारा उस व्यक्ति को सदोष हानि पहुँचाए, जिसका हित उस संव्यवहार में जिससे वह छल सम्बन्धित है, संरक्षित रखने के लिए वह या तो विधि द्वारा, या वैध संविदा द्वारा, आबद्ध था, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

4. जो कोई, छल करता है और उसके द्वारा उस व्यक्ति को, जिसे प्रवंचित किया गया है, बेईमानी से उत्प्रेरित करता है कि वह कोई सम्पत्ति किसी व्यक्ति को परिदत्त कर दे, या किसी भी मूल्यवान प्रतिभूति को, या किसी चीज को, जो हस्ताक्षरित या मुद्रांकित है, और जो मूल्यवान प्रतिभूति में संपरिवर्तित किए जाने योग्य है, पूर्णतः या अंशतः रच दे, परिवर्तित कर दे, या नष्ट कर दे, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

319. प्रतिरूपण द्वारा छल-

1. कोई व्यक्ति प्रतिरूपण द्वारा छल करता है, यह तब कहा जाता है, जब वह यह अपदेश करके कि वह कोई अन्य व्यक्ति है, या एक व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति के रूप में जानते हुए प्रतिस्थापित करके, या यह निरूपित करने कि वह या कोई अन्य व्यक्ति, कोई ऐसा व्यक्ति है, जो वस्तुतः उससे या अन्य व्यक्ति से भिन्न है, छल करता है।

स्पष्टीकरण-

यह अपराध हो जाता है, चाहे वह व्यक्ति, जिसका प्रतिरूपण किया गया है, वास्तविक व्यक्ति हो या काल्पनिक।

दृष्टांत

क.  उसी नाम का अमुक धनवान बैंकर है इस अपदेश द्वारा छल करता है। प्रतिरूपण द्वारा छल करता है।

ख. , जिसकी मृत्यु हो चुकी है, होने का अपदेश करने द्वारा छल करता है। प्रतिरूपण द्वारा छल करता है।

2. जो कोई, प्रतिरूपण द्वारा छल करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

कपटपूर्ण विलेखों और संपत्ति व्ययनों के विषय में

320. लेनदारों में वितरण निवारित करने के लिए संपति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाना -

जो कोई, किसी सम्पत्ति का अपने लेनदारों या किसी अन्य व्यक्ति के लेनदारों के बीच विधि के अनुसार वितरित किया जाना उसके द्वारा निवारित करने के आशय से, या उसके द्वारा सम्भाव्यतः निवारित करता है यह जानते हुए उस सम्पत्ति को बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारित करता है या छिपाता है या किसी व्यक्ति को परिदत्त करता है या पर्याप्त प्रतिफल के बिना किसी व्यक्ति को अन्तरित करता है या करवाता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम नहीं होगी किन्तु जो दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

321. ऋण को लेनदारों के लिए उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक निवारित करना-

जो कोई, किसी ऋण का था मांग का, जो स्वयं उसको या किसी अन्य व्यक्ति को देय हो, अपने या ऐसे अन्य व्यक्ति के ऋणों को चुकाने के लिए विधि के अनुसार उपलभ्य होना कपटपूर्वक या बेईमानी से निवारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

322. अन्तरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के सम्बन्ध में मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, बेईमानी से या कपटपूर्वक निष्पादन-

जो कोई, बेईमानी से या कपटपूर्वक किसी ऐसे विलेख या लिखत को हस्ताक्षरित करता है, निष्पादित करता है, या उसका पक्षकार बनता है, जिससे किसी सम्पत्ति का, या उसमें के किसी हित का, अन्तरित किया जाना, या किसी भार के अधीन किया जाना, तात्पर्थित है, और जिसमें ऐसे अन्तरण या भार के प्रतिफल से सम्बन्धित, या उस व्यक्ति या उन व्यक्तियों से सम्बन्धित, जिसके या जिनके उपयोग या फायदे के लिए उसका प्रवर्तित होना वास्तव में आशयित है, कोई मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

323. सम्पत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाया जाना -

जो कोई, बेईमानी से या कपटपूर्वक अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की किसी सम्पत्ति को छिपाता है या अपसारित करता है, या उसके छिपाए जाने में या अपसारित किए जाने में बेईमानी से या कपटपूर्वक सहायता करता है, या बेईमानी से किसी ऐसी मांग या दावे को, जिसका वह हकदार है, छोड़ देता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

रिष्टि के विषय में

324. रिष्टि-

1. जो कोई, इस आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि, वह लोक को या किसी व्यक्ति को सदोष हानि या नुकसान कारित करे, किसी सम्पत्ति का नाश या किसी सम्पत्ति में या उसकी स्थिति में ऐसी तब्दीली कारित करता है, जिससे उसका मूल्य या उपयोगिता नष्ट या कम हो जाती है, या उस पर क्षतिकारक प्रभाव पड़ता है, वह रिष्टि करता है।

स्पष्टीकरण 1-

रिष्टि के अपराध के लिए यह आवश्यक नहीं है कि अपराधी क्षतिग्रस्त या नष्ट सम्पति के स्वामी को हानि या नुकसान कारित करने का आशय रखे। यह पर्याप्त है कि उसका यह आशय है या वह यह सम्भाव्य जानता है कि वह किसी सम्पत्ति को क्षति करके किसी व्यक्ति को, चाहे वह सम्पत्ति उस व्यक्ति की हो या नहीं, सदोष हानि या नुकसान कारित करे।

स्पष्टीकरण 2-

ऐसी सम्पत्ति पर प्रभाव डालने वाले कार्य द्वारा, जो उस कार्य को करने वाले व्यक्ति को हो, या संयुक्त रूप से उस व्यक्ति की और अन्य व्यक्तियों की हो, रिष्टि की जा सकेगी।

दृष्टांत

क. की सदोष हानि कारित करने के आशय से की मूल्यवान प्रतिभूति को स्वेच्छ्या जला देता है। ने रिष्टि की है।

ख.  की सदोष हानि करने के आशय से, उसके बर्फ घर में पानी छोड़ देता है, और इस प्रकार बर्फ को गला देता है। ने रिष्टि की है।

ग.  इस आशय से की अंगूठी नदी में स्वेच्छया फेंक देता है कि को उसके द्वारा सदोष हानि कारित हो। ने रिष्टि की है।

घ.  यह जानते हुए कि उसका सामान उस ऋण की तुष्टि के लिए जो को उसके द्वारा देय है, निष्पादन में ली जाने वाली है, उस सामान को इस आशय से नष्ट कर देता है कि ऐसा करके ऋण की तुष्टि अभिप्राप्त करने में को निवारित कर दे और इस प्रकार को नुकसान कारित करे। ने रिष्टि की है।

ङ.  एक पोत का बीमा कराने के पश्चात् उसे इस आशय से कि बीमा करने वालों को नुकसान कारित करे, उसको स्वेच्छया संत्यक्त करा देता है। ने रिष्टि की है।

च.  को, जिसने बाटमरी पर धन उधार दिया है, नुकसान कारित करने के आशय से उस पोत को संत्यक्त करा देता है। ने रिष्टि की है।

छ.  के साथ एक घोड़े में संयुक्त सम्पत्ति रखते हुए को सदोष हानि कारित करने के आशय से उस घोड़े को गोली मार देता है। ने रिष्टि की है।

ज.  इस आशय से और यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह की फसल को नुकसान कारित करे, के खेत में पशुओं का प्रवेश कारित कर देता है, ने रिष्टि की है।

2. जो कोई रिष्टि करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

3. जो कोई, रिष्टि करता है और उसके द्वारा सरकारी या स्थानीय प्राधिकरण की सम्पत्ति सहित किसी सम्पत्ति की हानि या क्षति कारित करता है वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

4. जो कोई, रिष्टि करता है और उसके द्वारा बीस हजार रुपए से अधिक किन्तु एक लाख रुपए के अनधिक रकम, की हानि या नुकसान कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

5. जो कोई, रिष्टि करता है और उसके द्वारा एक लाख रुपए या उससे अधिक रकम की हानि या नुकसान कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

6. जो कोई, किसी व्यक्ति को मृत्यु या उसे उपहति या उसका सदोष अवरोध कारित करने की या मृत्यु का, या उपहति का, या सदोष अवरोध का भय कारित करने की, तैयारी करके रिष्टि करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

325. जीव-जन्तु को वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टि -

जो कोई, किसी जीव-जन्तु का वध करने, विष देने, विकलांग करने या निरुपयोगी बनाने द्वारा रिष्टि करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

326. क्षति, जलप्लावन, अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि -

जो कोई, किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करता है, -

क. जिससे कृषिक प्रयोजनों के लिए, या मानव प्राणियों के या उन जीव-जन्तुओं के, जो सम्पत्ति है, खाने या पीने के, या सफ़ाई के या किसी विनिर्माण को चलाने के जलप्रदाय में कमी कारित होती हो या कमी कारित होना वह संभाव्य जानता हो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा;

ख. जिससे किसी लोक सड़क, पुल, नाव्य, नदी या प्राकृतिक या कृत्रिम नाव्य जलसरणी को यात्रा या सम्पत्ति प्रवहण के लिए अगम्य या कम निरापद बना दिया जाए या बना दिया जाना यह सम्भाव्य जानता हो, वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा;

ग. जिससे किसी लोक जलनिकास में क्षतिप्रद या नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित हो जाए, या होना वह सम्भाव्य जानता हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा;

घ. जिससे रेल, वायुयान या पोत या अन्य चीज के, जो नौ-चालकों के लिए मार्ग प्रदर्शन के लिए रखी गई हो, नष्ट करने या हटाने या कोई ऐसा कार्य करने द्वारा, जिससे कोई ऐसा चिह्न या सिग्नल जो नौ-चालकों के लिए मार्ग प्रदर्शक के रूप में कम उपयोगी बन जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा;

ङ. जिससे किसी लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा लगाए गए किसी भूमि चिह्न के नष्ट करने या हटाने द्वारा या कोई ऐसा कार्य करने द्वारा, जिससे ऐसा भूमि चिह्न ऐसे भूमि चिह्न के रूप में कम उपयोगी बन जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा;

च. जिससे कृषि उपज सहित किसी सम्पत्ति का नुकसान कारित करने के आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह उसके द्वारा ऐसा नुकसान अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा कारित हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा;

छ. जिससे किसी ऐसे निर्माण का, जो साधारण तौर पर उपासना स्थान के रूप में या मानव-आवास के रूप में या सम्पत्ति की अभिरक्षा के स्थान के रूप में उपयोग में आता हो, नाश कारित करने के आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह उसके द्वारा उसका नाश अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा कारित हो, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने का भी दायी होगा।

327. रेल, वायुयान, तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के आशय से रिष्टि-

1. जो कोई, किसी रेल, वायुयान, तल्लायुक्त जलयान या बीस टन या उससे अधिक बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या असुरक्षित बना देने के आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह उसके द्वारा उसे नष्ट करेगा, या असुरक्षित बना देता है, उस रेल, वायुयान, या जलयान की रिष्टि करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

2. जो कोई, अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा ऐसी रिष्टि करता है, या करने का प्रयत्न करता है, जैसी उपधारा (1) में वर्णित है, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

328. चोरी, आदि करने के आशय से जलयान को साशय भूमि या किनारे पर चढ़ा देने के लिए दण्ड-

जो कोई, किसी जलयान को यह आशय रखते हुए कि वह उसमें अन्तर्विष्ट किसी सम्पत्ति की चोरी करे या बेईमानी से ऐसी किसी सम्पत्ति का दुर्विनियोग करे, या इस आशय से कि ऐसी चोरी या सम्पत्ति का दुर्विनियोग किया जाए साशय भूमि पर चढ़ा देता है या किनारे से लगा देता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

आपराधिक अतिचार के विषय में

329.आपराधिक अतिचार और गृह-अतिचार-

1. जो कोई, ऐसी सम्पत्ति में या ऐसी सम्पत्ति पर, जो किसी दूसरे के कब्जे में है, इस आशय से प्रवेश करता है कि वह कोई अपराध करे या किसी व्यक्ति को, जिसके कब्जे में ऐसी सम्पत्ति है अभित्रस्त, अपमानित या क्षुब्ध करे, या ऐसी सम्पत्ति में या ऐसी सम्पत्ति पर विधिपूर्वक प्रवेश करके वहां विधिविरुद्ध रूप में इस आशय से बना रहता है कि उसके द्वारा वह किसी ऐसे व्यक्ति को अभित्रस्त, अपमानित या क्षुब्ध करे या इस आशय से बना रहता है कि वह कोई अपराध करे, वह "आपराधिक अतिचार" करता है, यह कहा जाता है।

2. जो कोई, किसी निर्माण, तम्बू या जलयान में, जो मानव-आवास के रूप में उपयोग में आता है, या किसी निर्माण में, जो उपासना-स्थान के रूप में, या किसी सम्पत्ति की अभिरक्षा के स्थान के रूप में उपयोग में आता है, प्रवेश करके या उसमें बना रह कर, आपराधिक अतिचार करता है, वह "गृह-अतिचार" करता है, यह कहा जाता है।

स्पष्टीकरण-

आपराधिक अतिचार करने वाले व्यक्ति के शरीर के किसी भाग का प्रवेश गृह-अतिचार गठित करने के लिए पर्याप्त प्रवेश है।

3. जो कोई, आपराधिक अतिचार करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

4. जो कोई, गृह-अतिचार करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

330. गृह-अतिचार और गृह-भेदन-

1. जो कोई, यह पूर्वावधानी बरतने के पश्चात् गृह-अतिचार करता है कि ऐसे गृह-अतिचार को किसी ऐसे व्यक्ति से छिपाया जाए जिसे उस निर्माण, तम्बू या जलयान में से, जो अतिचार का विषय है, अतिचारी को अपवर्जित करने या बाहर कर देने का अधिकार है, वह "प्रच्छन्न गृह-अतिचार" करता है, यह कहा जाता है।

2. जो व्यक्ति गृह-अतिचार करता है, वह "गृह-भेदन" करता है, यह कहा जाता है, यदि वह उस घर में या उसके किसी भाग में इसमें इसके पश्चात् वर्णित छह तरीकों में से किसी तरीके से प्रवेश करता है या यदि वह उस घर में या उसके किसी भाग में अपराध करने के प्रयोजन से होते हुए, या वहां अपराध कर चुकने पर, उस घर से या उसके किसी भाग से ऐसे निम्नलिखित तरीकों में से किसी तरीके से बाहर निकलता है, अर्थात् :-

क. यदि वह ऐसे रास्ते से प्रवेश करता है या बाहर निकलता है, जो स्वयं उसने या उस गृह-अतिचार के किसी दुष्प्रेरक ने वह गृह- अतिचार करने के लिए बनाया है ;

ख. यदि वह किसी ऐसे रास्ते से, जो उससे या उस अपराध के दुष्प्रेरक से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा मानव प्रवेश के लिए आशयित नहीं है, या किसी ऐसे रास्ते से, जिस तक कि वह किसी दीवार या निर्माण पर सीढ़ी द्वारा या अन्यथा चढ़कर पहुंचा है, प्रवेश करता है या बाहर निकलता है ;

ग. यदि वह किसी ऐसे रास्ते से प्रवेश करता है या बाहर निकलता है जिसको उसने या उस गृह-अतिचार के किसी दुष्प्रेरक ने वह गृह-अतिचार करने के लिए किसी ऐसे साधन द्वारा खोला है, जिसके द्वारा उस रास्ते का खोला जाना उस घर के अधिभोगी द्वारा आशयित नहीं था;

घ. यदि उस गृह-अतिचार को करने के लिए, या गृह-अतिचार के पश्चात् उस गृह से निकल जाने के लिए वह किसी ताले को खोलकर प्रवेश करता या बाहर निकलता है;

ङ. यदि वह आपराधिक बल के प्रयोग या हमले या किसी व्यक्ति पर हमला करने की धमकी द्वारा अपना प्रवेश करता है या प्रस्थान करता है;

च. यदि वह किसी ऐसे रास्ते से प्रवेश करता है या बाहर निकलता है जिसके बारे में वह जानता है कि वह ऐसे प्रवेश या प्रस्थान को रोकने के लिए बंद किया हुआ है और अपने द्वारा या उस गृह-अतिचार के दुष्प्रेरक द्वारा खोला गया है।

स्पष्टीकरण-

कोई उपघर या निर्माण जो किसी घर के साथ-साथ अधिभोग में है, और जिसके और ऐसे घर के बीच आने जाने का अव्यवहित भीतरी रास्ता है, इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत उस घर का भाग है।

दृष्टांत

क.  के घर की दीवार में छेद करके और उस छेद में से अपना हाथ डालकर गृह-अतिचार करता है। यह गृह-भेदन है।

ख.  तल्लों के बीच की बारी में से रेंग कर एक पोत में प्रवेश करने द्वारा गृह-अतिचार करता है। यह गृह-भेदन है।

ग.  के घर में एक खिड़की से प्रवेश करने द्वारा गृह-अतिचार करता है। यह गृह-भेदन है।

घ. एक बन्द द्वार को खोलकर के घर में उस द्वार से प्रवेश करने द्वारा गृह-अतिचार करता है। यह गृह-भेदन है।

ङ.  के घर में द्वार के छेद में से तार डालकर सिटकनी को ऊपर उठाकर उस द्वार में प्रवेश करने द्वारा गृह-अतिचार करता है। यह गृह-भेदन है।

च.  को के घर के द्वार की चाबी मिल जाती है, जो से खो गई थी, और वह उस चाबी से द्वार खोल कर के घर में प्रवेश करने द्वारा गृह-अतिचार करता है। यह गृह-भेदन है।

छ.  अपनी ड्योढ़ी में खड़ा है। को धक्के से गिराकर उस घर में बलात् प्रवेश करने द्वारा गृह-अतिचार करता है। यह गृह-भेदन है।

ज. , जो का दरबान है, की ड्योढ़ी में खड़ा है। को मारने की धमकी देकर उसको विरोध करने से भयोपरत करके उस घर में प्रवेश करने द्वारा गृह-अतिचार करता है। यह गृह-भेदन है।

331. गृह-अतिचार या गृह-भेदन के लिए दण्ड-

1. जो कोई, प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

2. जो कोई, सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय से पूर्व गृह-अतिचार या गृह-भेदन करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

3. जो कोई, कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिए प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा, तथा यदि वह अपराध, जिसका किया जाना आशयित हो, चोरी हो, तो कारावास की अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी।

4. जो कोई, कारावास से दण्डनीय कोई अपराध करने के लिए सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय से पूर्व प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसको अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा, तथा यदि वह अपराध जिसका किया जाना आशयित हो, चोरी हो, तो कारावास की अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी।

5. जो कोई, किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की या किसी व्यक्ति पर हमला करने की या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध करने की या किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के भय में डालने की तैयारी करके, प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

6. जो कोई, किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की या किसी व्यक्ति पर हमला करने की या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध या सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय से पूर्व गृह-भेदन करने की या किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के, भय में डालने की तैयारी करके, प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

7. जो कोई, प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करते समय किसी व्यक्ति को घोर उपहति कारित करता है या किसी व्यक्ति की मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का प्रयत्न करेगा, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

8. यदि प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय से पूर्व करते समय ऐसे अपराध का दोषी कोई व्यक्ति स्वेच्छया किसी व्यक्ति की मृत्यु या घोर उपहति कारित करता है या मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का प्रयत्न करता है, तो ऐसे प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय से पूर्व करने में संयुक्ततः संबंधित प्रत्येक व्यक्ति, आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

332. अपराध कारित करने के लिए गृह-अतिचार- 

जो कोई, ऐसा अपराध करने के लिए गृह-अतिचार करता है-

क. जो मृत्यु से दण्डनीय है, वह आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से अधिक नहीं होगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा;

ख. जो आजीवन कारावास से दण्डनीय है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से अधिक नहीं होगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा;

ग. जो कारावास से दण्डनीय है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा:

परन्तु यदि वह अपराध, जिसका किया जाना आशयित हो, चोरी हो, तो कारावास की अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी।

333. उपहति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् गृह-अतिचार-

जो कोई, किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की, या किसी व्यक्ति पर हमला करने की, या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध करने की या किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के भय में डालने की तैयारी करके गृह-अतिचार करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

334. ऐसे पात्र को, जिसमें सम्पत्ति है, बेईमानी से तोड़कर खोलना-

1. जो कोई, किसी ऐसे बन्द पात्र को, जिसमें सम्पत्ति हो या जिसमें सम्पत्ति होने का उसे विश्वास हो, बेईमानी से या रिष्टि करने के आशय से तोड़कर खोलता है या अबंधित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

2. जो कोई, ऐसा बन्द पात्र, जिसमें सम्पत्ति हो, या जिसमें सम्पत्ति होने का उसे विश्वास हो, अपने पास न्यस्त किए जाने पर उसको खोलने का प्राधिकार रखते हुए, बेईमानी से या रिष्टि करने के आशय से, उस पात्र को तोड़कर खोलता है या अबंधित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा।

 

 

  

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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