धारा 270 से 297 अध्याय 15 भारतीय न्याय संहिता ,2023

धारा 270 से 297 अध्याय 15 भारतीय न्याय संहिता ,2023

अध्याय 15

लोक स्वास्थ्य, सुरक्षा, सुविधा, शिष्टता और सदाचार पर प्रभाव डालने वाले अपराधों के विषय में

270. लोक न्यूसेन्स -

वह व्यक्ति लोक न्यूसेन्स का दोषी है, जो कोई ऐसा कार्य करता है या किसी ऐसे अवैध लोप का दोषी है, जिससे लोक को या जनसाधारण को जो आस-पास में रहते हों या आस-पास की सम्पत्ति पर अधिभोग रखते हों, कोई सामान्य क्षति, संकट या क्षोभ कारित हो या जिससे उन व्यक्तियों का जिन्हें किसी लोक अधिकार को उपयोग में लाने का मौका पड़े, क्षति, बाधा, संकट या क्षोभ कारित होना अवश्यंभावी हो, किन्तु कोई सामान्य न्यूसेन्स इस आधार पर माफी योग्य नहीं है कि उससे कुछ सुविधा या भलाई कारित होती है।

271. उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना सम्भाव्य हो-

जो कोई, विधिविरुद्ध रूप से या उपेक्षा से ऐसा कोई कार्य करता है, जिससे कि और जिससे वह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता हो कि जीवन के लिए संकटपूर्ण किसी रोग का संक्रमण फैलना सम्भाव्य है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

272. परिद्वेषपूर्ण कार्य, जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना सम्भाव्य हो-

जो कोई, परिद्वेष से ऐसा कोई कार्य करता है जिससे कि, और जिससे वह जानता या विश्वास करने का कारण रखता है कि जीवन के लिए संकटपूर्ण किसी रोग का संक्रम फैलना सम्भाव्य है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

273. संगरोधन के नियम की अवज्ञा -

जो कोई, परिवहन के किसी ढंग को संगरोधन की स्थिति में रखे जाने के, या संगरोधन की स्थिति वाले किसी ऐसे परिवहन का समागम विनियमित करने के, या ऐसे स्थानों के, जहां कोई संक्रामक रोग फैल रहा हो और अन्य स्थानों के बीच समागम विनियमित करने के लिए सरकार द्वारा बनाए गए किसी नियम को जानते हुए अवज्ञा करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

274. विक्रय के लिए आशयित खाद्य या पेय का अपमिश्रण-

जो कोई, किसी खाने या पीने की वस्तु को इस आशय से कि वह ऐसी वस्तु के खाद्य या पेय के रूप में बेचे या यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह खाद्य या पेय के रूप में बेची जाएगी, ऐसे अपमिश्रित करता है कि ऐसी वस्तु खाद्य या पेय के रूप में हानिकर बन जाए वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

275. हानिकर खाद्य या पेय का विक्रय-

जो कोई किसी ऐसी वस्तु को, जो हानिकर बना दी गई हो, या हो गई हो, या खाने-पीने के लिए अनुपयुक्त दशा में हो, यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि वह खाद्य या पेय के रूप में हानिकर है, खाद्य या पेय के रूप में बेचता है, या बेचने की प्रस्थापना करता है या बेचने के लिए अभिदर्शित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

276. ओषधियों का अपमिश्रण-

जो कोई, किसी ओषधि या भेषजीय निर्मिति में अपमिश्रण इस आशय से कि या यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह किसी ओषधीय प्रयोजन के लिए ऐसे बेची जाएगी या उपयोग की जाएगी, मानो उसमें ऐसा अपमिश्रण हुआ हो, ऐसे प्रकार से करेगा कि उस ओषधि या भेषजीय निर्मिति की प्रभावकारिता कम हो जाए, क्रिया बदल जाए या वह हानिकर हो जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

277. अपमिश्रित ओषधियों का विक्रय-

जो कोई, यह जानते हुए कि किसी ओषधि या भेषजीय निर्मिति में इस प्रकार से अपमिश्रण किया गया है कि उसकी प्रभावकारिता कम हो गई या उसकी क्रिया बदल गई है, या वह हानिकर बन गई है, उसे बेचता है था बेचने की प्रस्थापना करता है या बेचने के लिए अभिदर्शित करता है, या किसी ओषधालय से ओषधीय प्रयोजनों के लिए उसे अनपमिश्रित के तौर पर देता है या उसका अपमिश्रित होना जानने वाले व्यक्ति द्वारा ओषधीय प्रयोजनों के लिए उसका उपयोग कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

278. ओषधि का भिन्न ओषधि या निर्मिति के तौर पर विक्रय-

जो कोई, किसी ओषधि या भेषजीय निर्मिति को, भिन्न ओषधि या भेषजोय निर्मिति के तौर पर जानते हुए बेचता है या बेचने को प्रस्थापना करता है या बेचने के लिए अभिदर्शित करता है या ओषधीय प्रयोजनों के लिए औषधालय से देता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसको अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

279. लोक जल-स्त्रोत या जलाशय का जल कलुषित करना-

जो कोई, किसी लोक जल-स्रोत या जलाशय के जल को स्वेच्छया इस प्रकार भ्रष्ट या गंदा करता है कि वह उस प्रयोजन के लिए, जिसके लिए वह साधारण तौर पर उपयोग में आता है, कम उपयोगी हो जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

280. वायुमण्डल को स्वास्थ्य के लिए हानिकर बनाना -

जो कोई, किसी स्थान के वायुमण्डल को स्वेच्छया इस प्रकार दूषित करता है कि वह जनसाधारण के स्वास्थ्य के लिए, जो पड़ोस में निवास या कारबार करते हों, या लोक मार्ग से आते-जाते हों, हानिकर बन जाए, वह जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा।

281. लोक मार्ग पर उतावलेपन से वाहन चलाना या हांकना-

जो कोई, किसी लोक मार्ग पर ऐसे उतावलेपन या उपेक्षा से कोई वाहन चलाता है या सवार होकर हांकता है जिससे मानव जीवन संकटापन्न हो जाए या किसी अन्य व्यक्ति को उपहति या क्षति कारित होना सम्भाव्य हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

282. जलयान का उतावलेपन से चलाना -

जो कोई, किसी जलयान को ऐसे उतावलेपन या उपेक्षा से चलाता है, जिससे मानव जीवन संकटापन्न हो जाए या किसी अन्य व्यक्ति को उपहति या क्षति कारित होना सम्भाव्य हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

283. भ्रामक प्रकाश, चिह्न या बोये का प्रदर्शन-

जो कोई, किसी भ्रामक प्रकाश, चिह्न या बोये का प्रदर्शन इस आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुए करता है, कि ऐसा प्रदर्शन किसी नौपरिवाहक को मार्ग भ्रष्ट कर देगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, और ऐसे जुर्माने से जो दस हजार रुपए से कम नहीं होगा दण्डित किया जाएगा।

284. असुरक्षित या अतिभारित जलयान से भाड़े के लिए जलमार्ग से किसी व्यक्ति को ले जाना-

जो कोई, किसी व्यक्ति को किसी जलयान में जलमार्ग से, जानते हुए या उपेक्षापूर्वक भाड़े पर तब ले जाता है, या ले जाने देता है, जब वह जलयान ऐसी दशा में हो या इतना लदा हुआ हो जिससे उस व्यक्ति का जीवन संकटापन्न हो सकता हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

285. लोक मार्ग या नौपरिवहन पथ में संकट या बाधा-

जो कोई, किसी कार्य को करके या अपने कब्जे में की, या अपने भारसाधन के अधीन किसी सम्पत्ति की व्यवस्था करने का लोप करने के द्वारा, किसी लोकमार्ग या नौपरिवहन के लोक पथ में किसी व्यक्ति को संकट, बाधा या क्षति कारित करता है वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा।

286. विषैले पदार्थ के सम्बन्ध में उपेक्षापूर्ण आचरण -

जो कोई, किसी विषैले पदार्थ से कोई कार्य ऐसे उतावलेपन या उपेक्षा से करता है, जिससे मानव जीवन संकटापन्न हो जाए, या जिससे किसी व्यक्ति को, उपहति या क्षति कारित होना सम्भाव्य हो या अपने कब्जे में के किसी विषैले पदार्थ की ऐसी व्यवस्था करने का, जो ऐसे विषैले पदार्थ से मानव जीवन को किसी अधिसम्भाव्य संकट से बचाने के लिए पर्याप्त हो, जानते हुए या उपेक्षापूर्वक लोप करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

287. अग्नि या ज्वलनशील पदार्थ के सम्बन्ध में उपेक्षापूर्ण आचरण -

जो कोई, अग्नि या किसी ज्वलनशील पदार्थ से कोई कार्य ऐसे उतावलेपन या उपेक्षा से करता है जिससे मानव जीवन संकटापन्न हो जाए या जिससे किसी अन्य व्यक्ति को उपहति या क्षति कारित होना सम्भाव्य हो या अपने कब्जे में की अग्नि या किसी ज्वलनशील पदार्थ की ऐसी व्यवस्था करने का, जो ऐसी अग्नि या ज्वलनशील पदार्थ से मानव जीवन को किसी अधिसम्भाव्य संकट से बचाने के लिए पर्याप्त हो, जानते हुए या उपेक्षापूर्वक लोप करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

288. विस्फोटक पदार्थ के बारे में उपेक्षापूर्ण आचरण -

जो कोई, किसी विस्फोटक पदार्थ से, कोई कार्य ऐसे उतावलेपन या उपेक्षा से करता है, जिससे मानव जीवन संकटापन्न हो जाए या जिससे किसी अन्य व्यक्ति को उपहति या क्षति कारित होना सम्भाव्य हो, या अपने कब्जे में की किसी विस्फोटक पदार्थ की ऐसी व्यवस्था करने का, जैसी ऐसे पदार्थ से मानव जीवन को अधिसम्भाव्य संकट से बचाने के लिए पर्याप्त हो, जानते हुए या उपेक्षापूर्वक लोप करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

289. मशीनरी के सम्बन्ध में उपेक्षापूर्ण आचरण-

जो कोई, किसी मशीनरी से, कोई कार्य ऐसे उतावलेपन या उपेक्षा से करता है, जिससे मानव जीवन संकटापन्न हो जाए या जिससे किसी अन्य व्यक्ति को उपहति या क्षति कारित होना सम्भाव्य हो, या अपने कब्जे में की या अपनी देख-रेख के अधीन की किसी मशीनरी की ऐसी व्यवस्था करने का जो, ऐसी मशीनरी से मानव जीवन को किसी अधिसम्भाव्य संकट से बचाने के लिए पर्याप्त हो, जानते हुए या उपेक्षापूर्वक लोप करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

290. किसी निर्माण को गिराने, उसकी मरम्मत करने या सन्निर्माण करने के सम्बन्ध में उपेक्षापूर्ण आचरण-

जो कोई, किसी निर्माण को गिराने, उसकी मरम्मत करने में या सन्निर्माण करने में उस निर्माण के ऐसे उपाय करने का, जो उस निर्माण के या उसके किसी भाग के गिरने से मानव जीवन को किसी अधिसम्भाव्य संकट से बचाने के लिए पर्याप्त हो, जानते हुए या उपेक्षापूर्वक लोप करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

291. जीव-जन्तु के सम्बन्ध में उपेक्षापूर्ण आचरण -

जो कोई, अपने कब्जे में के किसी जीव-जन्तु के सम्बन्ध में ऐसे उपाय करने का, जो ऐसे जीव-जन्तु से मानव जीवन को किसी अभिसम्भाव्य संकट या घोर उपहति के किसी अधिसम्भाव्य संकट से बचाने के लिए पर्याप्त हो, जानते हुए या उपेक्षापूर्वक लोप करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

292. अन्यथा अनुपबन्धित मामलों में लोक न्यूसेन्स के लिए दण्ड-

जो कोई, किसी ऐसे मामले में लोक न्यूसेन्स करता है जो इस संहिता द्वारा अन्यथा दण्डनीय नहीं है, वह जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा।

293. न्यूसेन्स बन्द करने के व्यादेश के पश्चात् उसका चालू रखना-

जो कोई, किसी लोक सेवक द्वारा, जिसको किसी न्यूसेन्स की पुनरावृत्ति करने या उसे चालू रखने के लिए व्यादेश प्रचालित करने का प्राधिकार हो, ऐसे व्यादिष्ट किए जाने पर, किसी लोक न्यूसेन्स की पुनरावृत्ति करता है, या उसे चालू रखता है, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

294. अश्लील पुस्तकों, आदि का विक्रय आदि-

1. उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए, किसी पुस्तक, पुस्तिका, कागज, लेख, रेखाचित्र, रंगचित्र, रूपण, आकृति या अन्य वस्तु जिसके अन्तर्गत इलैक्ट्रानिक प्ररूप में किसी अन्तर्वस्तु का प्रदर्शन भी है, को अश्लील समझा जाएगा यदि वह कामोद्दीपक है या कामुक व्यक्तियों के लिए रुचिकर है या उसका या (जहाँ उसमें दो या अधिक सुभिन्न मदें समाविष्ट हैं वहां) उसकी किसी मद का प्रभाव, समग्र रूप से विचार करने पर, ऐसा है जो उन व्यक्तियों को दुराचारी तथा भ्रष्ट बनाए जिसके द्वारा उसमें अन्तर्विष्ट या सन्निविष्ट विषय का पढ़ा जाना, देखा जाना या सुना जाना सभी सुसंगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सम्भाव्य है।

2. जो कोई-

() किसी अश्लील पुस्तक, पुस्तिका, कागज, रेखाचित्र, रंगचित्र, रूपण या आकृति या किसी भी अन्य अश्लील वस्तु को, चाहे वह किसी भी रीतियों में कुछ भी हो, बेचता है, भाड़े पर देता है, वितरित करता है, लोक प्रदर्शित करता है, या उसको किसी भी प्रकार परिचालित करता है, या उसे विक्रय, भाड़े, वितरण, लोक प्रदर्शन या परिचालन के प्रयोजनों के लिए रचता है, उत्पादित करता है, या अपने कब्जे में रखता है; या

() किसी अश्लील वस्तु का आयात या निर्यात या ले जाना पूर्वोक्त प्रयोजनों में से किसी प्रयोजन के लिए करता है या यह जानते हुए, या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए करता है कि ऐसी वस्तु बेची, भाड़े पर दी, वितरित या लोक प्रदर्शित या, किसी प्रकार से परिचालित की जाएगी; या

() किसी ऐसे कारबार में भाग लेता है या उससे लाभ प्राप्त करता है, जिस कारबार में वह यह जानता है या यह विश्वास करने का कारण रखता है कि कोई ऐसी अश्लील वस्तु पूर्वोक्त प्रयोजनों में से किसी प्रयोजन के लिए रची जाती, उत्पादित की जाती, क्रय की जाती, रखी जाती, आयात की जाती, निर्यात की जाती, प्रवहण की जाती, लोक प्रदर्शित की जाती या किसी भी प्रकार से परिचालित की जाती है; या

() यह विज्ञापित करता है या किन्हीं साधनों द्वारा वे चाहे कुछ भी हो यह ज्ञात कराता है कि कोई व्यक्ति किसी ऐसे कार्य में, जो इस धारा के अधीन अपराध है, लगा हुआ है, या लगने के लिए तैयार है, या यह कि कोई ऐसी अश्लील वस्तु किसी व्यक्ति से या किसी व्यक्ति के द्वारा प्राप्त की जा सकती है; या

() किसी ऐसे कार्य को, जो इस धारा के अधीन अपराध है, करने की प्रस्थापना करेगा या करने का प्रयत्न करता है,

प्रथम दोषसिद्धि पर दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि की दशा में दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा दण्डित किया जाएगा।

अपवाद

इस धारा का विस्तार निम्नलिखित पर नहीं होगा, -

() किसी ऐसी पुस्तक, पुस्तिका, कागज, लेख, रेखाचित्र, रंगचित्र, रूपण या आकृति-

i. जिसका प्रकाशन लोकहित में होने के कारण इस आधार पर न्यायोचित साबित हो गया है कि ऐसी पुस्तक, पुस्तिका, कागज, लेख, रेखाचित्र, रंगचित्र, रूपण या आकृति विज्ञान, साहित्य, कला या विद्या या सर्वजन सम्बन्धी अन्य उद्देश्यों के हित में है; या

ii. जो सद्भावपूर्वक धार्मिक प्रयोजनों के लिए रखी जाती है या उपयोग में लाई जाती है;

() किसी ऐसे रूपण जो, -

i. प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 (1958 का 24) के अर्थ में प्राचीन संस्मारक पर या उसमें; या

ii. किसी मंदिर पर या उसमें या मूर्तियों को ले जाने के उपयोग में लाए जाने वाले या किसी धार्मिक प्रयोजन के लिए रखे या उपयोग में लाए जाने वाले किसी रथ पर, तक्षित, उत्कीर्ण, रंगचित्रित या अन्यथा रूपित हो।

295. शिशु को अश्लील वस्तुओं का विक्रय, आदि-

जो कोई, किसी शिशु को कोई ऐसी अश्लील वस्तु, जो धारा 294 में निर्दिष्ट है, बेचेगा, भाड़े पर देता है, वितरण करता है, प्रदर्शित करता है या परिचालित करता है या ऐसा करने की प्रस्थापना या प्रयत्न करता है प्रथम दोषसिद्धि पर दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि की दशा में दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा।

296. अश्लील कार्य और गाने -

जो कोई, -

() किसी लोक स्थान में कोई अश्लील कार्य करता है; या

() किसी लोक स्थान में या उसके समीप कोई अश्लील गाने, पवांड़े या शब्द गाएगा, सुनाएगा या उच्चारित करेगा, जिससे दूसरों को क्षोभ होता है,

वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

297. लाटरी कार्यालय रखना-

1. जो कोई, ऐसी कोई लाटरी, जो तो राज्य लाटरी हो और तत्सम्बन्धित राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत लाटरी हो, निकालने के प्रयोजन के लिए कोई कार्यालय या स्थान रखता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

2. जो कोई, ऐसी लाटरी में किसी टिकट, लाट, संख्यांक या आकृति को निकालने से सम्बन्धित या लागू होने वाली किसी घटना या परिस्थिति पर किसी व्यक्ति के फायदे के लिए किसी राशि को देने की, या किसी माल के परिदान को, या किसी बात को करने की, या किसी बात से दूर रहने की कोई प्रस्थापना प्रकाशित करता है, वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा।

 

 

 

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