धारा 118 से 121 अध्याय 6 संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 6

विनिमयों के विषय में

118. 'विनिमय' की परिभाषा -

जब कि दो व्यक्ति एक चीज का स्वामित्व किसी अन्य चीज के स्वामित्व के लिए परस्पर अन्तरित करते हैं जिन दोनों चीजों में से कोई भी केवल धन नहीं है या दोनों चीजें केवल धन हैं, तब वह संव्यवहार 'विनिमय' कहा जाता है। 

विनिमय को पूर्ण करने के लिए सम्पत्ति का अन्तरण केवल ऐसे प्रकार से किया जा सकता है जैसा ऐसी सम्पत्ति के विक्रय द्वारा अन्तरण के लिए उपबन्धित है।

119. विनिमय में प्राप्त चीज से वंचित किए गए पक्षकार का अधिकार-

यदि विनिमय का कोई पक्षकार या ऐसे पक्षकार से व्युत्पन्न अधिकार के द्वारा या अधीन दावा करने वाला कोई व्यक्ति दूसरे पक्षकार के हक में किसी त्रुटि के कारण उस चीज या उस चीज के भाग से, जो विनिमय द्वारा उसने प्राप्त की है; वंचित हो जाता है तो जब तक कि विनिमय के निबंधनों से कोई तत्प्रतिकूल आशय प्रतीत नहीं होता हो तो ऐसा दूसरा पक्षकार, उसके प्रति या उससे व्युत्पन्न अधिकार के द्वारा या अधीन दावा करने वाले व्यक्ति के प्रति उस हानि के लिए, जो त‌द्वारा हुई है, दायी है अथवा इस प्रकार वंचित व्यक्ति के विकल्प पर उस अन्तरित चीज को लौटाने के लिए दायी है, यदि अन्तरित चीज तब तक ऐसे दूसरे पक्षकार या उसके विधिक प्रतिनिधि या उसके अप्रतिफल अन्तरिती के कब्जे में ही हो।

120. पक्षकारों के अधिकार और दायित्व-

इस अध्याय में अन्यथा उपबन्धित के सिवाय हर एक पक्षकार उस चीज के बारे में जो वह देता है, विक्रेता के अधिकार रखता है और विक्रेता के दायित्वों के अध्यधीन होता है और उस चीज के बारे में, जिसे वह लेता है, क्रेता के अधिकार रखता है और क्रेता के दायित्त्वों के अध्यधीन होता है।

121. धन का विनिमय-

धन के विनिमय पर हर एक पक्षकार अपने द्वारा दिए गए धन के असली होने की तद्द्वारा वारण्टी देता है।

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